Dec 31, 2011

व्हाई दिस कोलावरी डी... यह किस भाषा का "सॉन्ग" है!

यह इस वर्ष की अंतिम पोस्ट है। अपनी भाषाओं की चिंता करते हुए काफी घबराहट के साथ मैं भी कोलावरी डी' का आनंद ले रहा हूँ। लगातार यही विचार मन में आता है कि इस गाने में तमिल अथवा हिंदी के कितने शब्द हैं? वर्ष 1991 तथा 2001 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार हमारे देश में तमिल बोलने वालों का प्रतिशत 6.32 से घटकर 5.91 पर आ गया। वर्ष 2011 की जनगणना के पूरे आँकड़े अभी नहीं मिल पाए हैं। प्रश्न यही है कि हम कहाँ जा रहे हैं और क्यों जा रहे हैं? तमिल फिल्मों के सितारे और पूरा देश एक ऐसे गाने को तमिल का गाना मानकर वह-वाह कर रहे हैं जिसमें तमिल का शायद ही कोई शब्द है। तमिल का लहजा ज़रूर मौजूद कहा जा सकता है। इस गीत की धुन में नयापन है, पकड़ है, माधुर्य है मगर अपनी कोई भी भाषा या उसका कोई शब्द ... शायद नहीं है। आने वाले नए वर्ष 2012 में इस बारे में चिंतन जरूर किया जाना चाहिए कि क्या ऐसे गानों से हम जाने-अंजाने अपनी भाषाओं को तो  भुलाने के दुष्चक्र में नहीं फँसते जा रहे हैं। मुझे ऐसी एक भी आवाज़ सुनाई नहीं पड़ी, जिसमें इस गाने की भाषा पर चिंता व्यक्त की गई हो। हो सकता है कुछ लोग सहमत न हों परंतु यह मेरा व्यक्तिगत विचार है कि तमिल भाषा का  विकास, हिंदी के विकास के लिए सर्वाधिक जरूरी है। तमिल को मजबूत बनाने से हिंदी भी स्वत: मजबूत होती है क्योंकि इससे अंग्रेज़ी की गति में ठहराव आता है। 
नव वर्ष 2012 की शुभकामनाओं के साथ, मैं एक हिंदी भाषी भारतीय, अपनी सभी भाषाओं के उत्तरोत्तर विकास की कामना करते हुए आग्रह करना चाहता हूँ कि कोलावरी डी' पर आप भी सोचिए... संगीत को सहज स्वीकारिये मगर अपनी भाषाओं के सुर, लय, ताल को ताक पर मत रखिए।  

नववर्ष 2012 हमारी सभी भाषाओं के लिए भी शुभ हो।

-अजय मलिक

नए साल की शुभकामनाएँ

हिंदी/इंडिक सक्रिय करने के लिए अजय मलिक की एक वीडियो फिल्म

video

इस फिल्म को पावर पॉइंट से बनाया गया है। मूल फिल्म का आकार (साइज़) लगभग 746 एम बी था, जिसे ब्लॉग पर दे पाना संभव नहीं था। इसे ब्लॉग पर लाने के लिए लगभग 10 गुणा छोटा करना पड़ा जिसके कारण इसकी गुणवत्ता भी उतनी ही घट गई। एक वरिष्ठ की सलाह पर बस प्रयोग के तौर पर यह फिल्म यहाँ दी जा रही है।
-प्रतिभा मलिक

Dec 24, 2011

पाँच मिनटों में सीखें हिंदी इंस्क्रिप्ट कुंजी पटल लेआउट - लीना महेंडले

[यह आलेख साभार राजभाषा गूगल ग्रुप से लिया गया है। सुश्री लीना महेंडले के इस आलेख में इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल लेआउट सीखने का बेहद सरल और आकर्षक तरीका बताया गया है। इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे हिंदी सहित किसी भी भारतीय भाषा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कुंजीपटल सभी भारतीय भाषाओं के लिए लिनक्स तथा मैक ऑपरेटिंग सिस्टम्स में भी उपलब्ध है। यदि इस आलेख को ध्यान से पढ़ा जाए तो इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल लेआउट को आत्मसात करने में बहुत कम समय लगता है। फिर बस कुछ घंटों के अभ्यास की जरूरत ही भारतीय भाषाओं में टाइप करने के लिए शेष रह जाती है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और न्यायाधीश द्वारा विशेषकर स्कूली बच्चों के लिए तैयार इस आलेख से यह भी प्रमाणित होता है कि यदि मन से शुरुआत भर हो जाए तो भारतीय भाषाओं और संघ की राजभाषा हिंदी में कामकाज करने में किसी को कोई कठिनाई नहीं हो सकती। ]   
बच्चों, अब तो स्कूलों में भी संगणक (कम्प्यूटर) सिखाया जाने लगा है और तुममें से कईयों के घर में भी यह जरूर होगा... तो क्या तुम जानते हो कि संगणक पर हिंदी सीखने के लिये एक  युक्ति है जिसमें केवल आधा घंटा पर्याप्त है और वह भी अंग्रेजी टंकण-ज्ञान पर निर्भरता के बिना। और अगर पूरी बात कहूँ तो हरेक भारतीय भाषा सीखने की यही युक्ति है।

Dec 22, 2011

फिर एक लंबा अंतराल...शायद अब तक का सबसे लंबा

फिल्म समारोहों में मैं कभी अधूरे मन से नहीं गया था मगर इस बार यह भी हो गया। हर साल 15 दिन मैं फिल्म समारोह ले लिए रखा करता था...इस बार सिर्फ एक दिन रह गया। पूर्णता उस एक दिन में भी पाने की कोशिश की। संयोग से एक के बाद एक तीन मलयालम फिल्में देखने का मौंका मिला।
विम वेंडर्स निर्देशित जर्मनी की प्रस्तुति "पिना" देखकर मन गदगद हो गया। इस थ्री डी फिल्म पर बहुत कुछ लिखने की इच्छा हुई परंतु एक शब्द भी नहीं लिखा जा सका। ईरानी फिल्मों का दबदबा आज भी कायम है। सिराज की सिफारिश पर असगर फरहीदी निर्देशित "नाड़ेर एंड सिमीन अ' सेपरेशन" देखी और सिराज को धन्यवाद दिया। यकीन मानिए लाजवाब फिल्म थी।   "विनर" देखने से कैसे वंचित रह गया, यह अपने आप में बड़ी घटना रही। इज़राइल की जोसेफ मड्मोंय निर्देशित "रेस्टोरेशन" ने भी निराश नहीं किया। समीर ताहिर निर्देशित मलयालम फिल्म "चप्पा कुरिषु" पूरी नहीं देख पाया मगर वी के प्रकाश की "कर्मयोगी और राजेश पिल्लै की "ट्रैफिक" (दोनों मलयालम) पूरी देखने का मौका मिला। कर्मयोगी तो कमाल की फिल्म रही मगर ट्रैफिक की लम्बाई ने थोड़ा बेचैन किया। लेकिन मजेदार रही रेवती की 17 मिनट की अंग्रेज़ी/तमिल फिल्म "रेड बिल्डिंग इज़ वेयर द' सन सेट्स"। 
इन सब फिल्मों की चर्चा तभी अच्छे से कर पाता जब फिल्म समारोह में मन से जाना होता। इस बार गोवा गया तो सिर्फ डॉक्टर साहब और भाभी जी से मिलने था। किसी भी फिल्म समारोह से ज्यादा जरूरी था उनसे मिलना।  
मगर इस बार इतना लंबा अंतराल हो गया कि खुद हैरान हूँ... व्यस्तता और जिम्मेदारी के अहसास ने वक्त ही नहीं दिया। पिछले बीस दिनों में दो बार दिल्ली, गोवा, मद्रास ने इतना उलझाकर रखा कि 4-6 घंटों से ज्यादा सोना भी नसीब नहीं हुआ। फिर भी जिंदगी में व्यस्तता स्वयं में एक बड़ा सहारा है सुकून से जीने का। इतने पर भी मन तो यही कहता है-इतना बड़ा अंतराल तो अच्छी बात नहीं है, इसे नहीं ही होना चाहिए था...   

- अजय मलिक

Nov 26, 2011

कुछ झलकियाँ गोवा से 42वें फिल्म समारोह की








-अजय मलिक

हिन्दी होम पेज़ और कुछ और लाजवाब लिंक्स

इन लिंक्स के बारे कुछ भी कहना कम ही पड़ेगा। इसलिए बस आपके परखने के लिए इन्हें दिया जा रहा है। जरूर आज़माइगा-


http://www.hindi2tech.com/


https://sites.google.com/site/hindifontconverters/files  


http://www.youtube.com/user/hindiuniversity#g/c/3544B2DE2CA53E5D  

http://www.hindihomepage.com/index.php  



http://groups.google.com/group/technical-hindi/browse_thread/thread/c26508dc3f75e150  


http://www.sanskritweb.net/itrans/#SANS2003  


क्या-क्या नहीं किया है लोगों ने हिन्दी के लिए ... मुझे तो कभी-कभी लगता है कि सिखाना तो दूर अपनी तो अभी सीखने की भी शुरुआत नहीं हो पाई है। 
  
-अजय मलिक

Nov 23, 2011

गोवा में भारत के बयालीसवें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह-2011 का आगाज़ आज

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी आज गोवा में बयालीसवें भारतीय अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह-2011 के शुभारंभ के अवसर पर सुप्रसिद्ध फ्रेंच फिल्‍म निर्माता बर्ट्रेंड टैवरनियर को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्‍मान से नवाजेंगी। इस सम्‍मान के तहत 10 लाख रुपए की राशि, स्‍क्रॉल और प्रमाण पत्र दिया जाएगा।


भारतीय अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के निदेशक श्री शंकर मोहन ने आई.एफ.एफ.आई.-11 का पोस्‍टर को जारी करते हुए बताया कि आज (23 नवम्बर) शाम 5 बजे 42वें भारतीय अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म के उद्घाटन समारोह के अवसर पर रा.वन के जी.वन यानी शाहरुख खान भी शिरकत करेंगे।   23 नवम्बर से 3 दिसम्‍बर 2011 तक चलने वाले इस समारोह थीम है -'वसुधैव कुटुम्‍बकम' अर्थात 'समूचा विश्‍व एक परिवार'। आई.एफ.एफ.आई. के विज्ञापन का डिजाइन श्री थोटा थरानी ने तैयार किया है।

इस समारोह का आयोजन भारत सरकार द्वारा गोवा राज्‍य सरकार और आई.एफ.एफ.आई. के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍मों को प्रदर्शित किया जाएगा।
 

समापन समारोह में दक्षिणी सिनेमा की प्रसिद्ध हस्‍ती सुरैया शिरकत करेंगी। उद्घाटन समारोह में 'उरूमी' फिल्‍म प्रदर्शित की जाएगी और इसमें भारतीय फिल्‍में जैसे 'रंजना अमी अर अस्‍बो ना', 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' जैसी फिल्‍मों के अलावा  कान, लोकार्नो और मॉण्ट्रियल फिल्‍म समारोहों में चर्चित हो चुकीं विश्‍व के 65 देशों की 100 से अधिक फिल्‍में प्रदर्शित की जाएँगी।
-अजय मलिक

Nov 20, 2011

केंद्रीय सरकार के सिविलियन कर्मचारियों की जनगणना

“सेन्सस ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉईस” यानी केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की जनगणना, एक रिपोर्ट हैजिसे भारत सरकार, श्रम मंत्रालय, रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय, जामनगर हाउस, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2003 में प्रकाशित किया गया। इसमें केंद्रीय सरकार के सिविलियन कर्मचारियों के 31 मार्च 2001 तक के आँकड़े दिए गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 में पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्रीय सरकार के नियमित कर्मचारियों की संख्या कुछ इस प्रकार थी-

असम -76,500; मणिपुर-4,800; मेघालय-16,600; नागालेंड-6,700; सिक्किम-400; त्रिपुरा-7,200; अरुणाचल प्रदेश-2000; मिजोरम-800 यानी कुल 1,15,000 केंद्रीय सरकार के नियमित कर्मचारी/ अधिकारी थे। इन आँकड़ों का अगर थोड़ा और विश्लेषण किया जाए तो असम और मेघालय को छोड़कर शेष संपूर्ण पूर्वोत्तर राज्यों में कुल 21,900 केंद्रीय सरकार के नियमित कर्मचारी/ अधिकारी थे। ये किसी एक राज्य विशेष के रहने वाले न होकर सभी राज्यों के विभिन्न भाषा-भाषी समुदाय के होने चाहिए।

उपर्युक्त रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2001 में पॉण्डिचेरी में 5,200 नियमित केंद्रीय सरकार के कर्मचारी थे। गोवा, दामन दीव में 5,900; दादरा नगर हवेली में 2,600; जम्मू-काश्मीर में 28,000 केंद्रीय सरकार के कर्मचारी थे।

वर्ष 2001 में बिहार में 1,80,200; छत्तीसगढ़ में 45,500; हरियाणा में 31,000; हिमाचल प्रदेश में 16,500; मध्यप्रदेश में 1,61,700; पंजाब में 79,000; राजस्थान में 1,64,700; उत्तर प्रदेश में 3,95,600; उत्तरांचल में 27,500; चंडीगढ़ में 16,900; अंडमान-निकोबार में 4,800 केंद्रीय सरकार के नियमित कर्मचारी थे।

यदि पिछले वर्षों में विभिन्न पदों में हुई कटौती पर विचार किया जाए तो वर्ष 2011 तक इस संख्या में कुछ प्रतिशत कमी आनी चाहिए?

मेरी जिज्ञासा का विषय यह है कि उपर्युक्त कर्मचारियों तथा अधिकारियों में कितने हिंदीभाषी अथवा हिन्दी जानने वाले रहे होंगे?

जिस रिपोर्ट के आधार पर यह आलेख तैयार किया गया है, उसका लिंक नीचे दिया जा रहा है-


- अजय मलिक

 

भारतीय पैनोरमा खंड :: iffi11:: 24 में से 7 मलयालम फिल्मों के साथ - केरल सबसे आगे

     23 नवम्बर से गोवा में शुरू हो रहे भारत के 42वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के भारतीय पैनोरमा खंड में कुल 24 कथा फिल्में तथा 21 गैर-कथा फिल्में दिखाई जाएँगी। मशहूर फिल्मकार सई परांजपे की अध्यक्षता में गठित जूरी के 10 सदस्यों  ने 21 दिन की मशक्कत के बाद 118 फिल्मों में से कुल 23 फिल्मों का चयन भारतीय पैनोरमा खंड के लिए किया। इसी के साथ इस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कथा फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजी गई निर्देशक सलीम अहमद की मलयालम प्रस्तुति 'आदामिन्टे मकन अबु' को परंपरानुसार सीधे प्रवेश मिला। कुल चौबीस  कथा फिल्मों में से सर्वाधिक 7 मलयालम फिल्में हैं।

     इस खंड में जहाँ हिन्दी, बांग्ला तथा मराठी की तीन-तीन फिल्में  हैं वहीं असमिया, कन्नड़, भोजपुरी,  कोंकणी, मणिपुरी, अंग्रेज़ी, तमिल तथा तेलुगु की मात्र एक-एक फिल्में ही  स्थान बना सकीं। इस खंड की हिन्दी फिल्मों में हैं- निर्देशक प्रवीण डबास की "सही धंधे गलत बंदे";तिगमांशु धूलिया निर्देशित "शागिर्द" और  जोया अख्तर निर्देशित " ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा"।

     गैर कथा फिल्मों के लिए लेखक-निर्देशक अशोक राणे की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय जूरी ने 135 फिल्मों में से जिन 21 फिल्मों का चयन किया है उनमें  सर्वाधिक 6 फिल्में हिन्दी भाषा की  हैं। इसके अलावा  अंग्रेज़ी की 4, बांग्ला, मणिपुरी, गुजराती तथा मराठी भाषा की एक-एक तथा शेष मिश्रित भाषा में बनी फिल्में हैं। 
                                                    
 -अजय मलिक

Nov 12, 2011

भारत का 42वाँ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 23 से गोवा में



भारत का बयालीसवाँ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, गोवा में 23 नवम्बर 2011 से 03 दिसंबर 2011 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान देश-विदेश की अनेक फिल्मों का प्रदर्शन विभिन्न खंडों में किया जारगा। फिल्म समीक्षकों/ मीडिया के सदस्यों के लिए पंजीकरण की ऑनलाइन सुविधा नीचे दिए लिंक पर 15 नवम्बर 2011 तक उपलब्ध है-


-अजय मलिक

Oct 30, 2011

खाली मन के कई सवाल और मन-मन भर के कई उत्तर मनके

आदमी सोचता कुछ है, करता कुछ है और होता कुछ है। गाँव, घर, बूढ़े बाबा (दादा) और बड़े मामा की जब याद आती है तो अतीत के ढेर सारे पन्ने फड़फड़ाते पंखों की तरह खुलते चले जाते हैं। चौमासे के हफ्तों तक चले झड़ (लगातार झर-झर झरती बूदों ) के बाद नीले खुले आसमान तले, पानी के तेज प्रवाह से बहकर आई मिट्टी से बनी गोल मसनद सी पर कूदना और घुटनों तक मिट्टी में धँस जाना। ढेंचे के वे बड़े-बड़े हरे पौधे, ज्वार के आठ-दस फुट लंबे हरे पेड़ या पोधे, सुबह-सुबह न्यार (चारा) लेने सिद्धों या लालावाले  खेतों पर जाना। वो बड़ी-बड़ी गड्डियाँ सिर पर लादे, गर्दन ताने दौड़ने के मानिद चलना... फिर स्कूल के लिए जैसे-तैसे भागना। स्कूल से आने पर बड़े बाबा (ताऊ) का हुक्का ताजा करने, चिलम भरने का आदेश। शाम को भैंस का दूध दूहने  के लिए घंटों बैठे रहना... मच्छर ही नहीं डांस तक के डंक झेलना... सुबह-शाम कुएँ पर बाल्टी से पानी खींचकर नहाना। बरसात में कुआँ ऊपर तक भर जाता था, गज भर की रस्सी पानी खिचने के लिए काफी होती थी। काफी लोग एक साथ अलग-अलग बाल्टी लिए कुएँ पर नहाया कराते थे... वह कुआँ, उसके सामने की खुली जगह सब न जाने किस-किसने कब्जा ली है... अब वह रौनक कहीं भी नज़र नहीं आती। गाँव के लोग आज स्नेह भरी नज़रों से देखते नहीं, बल्कि संदेह भरी निगाहों से घूरते हैं। पिछले दिनों कृष्णबीर से बात हुई ... दशकों पहले वह मध्यप्रदेश पुलिस में भर्ती हो गया था... उसने बताया इस बार भी गाँव के चारों और रौह आ गई थी, खूब बरसा मेह इस बार... मगर वे छप्पर, वे ओसारे, वह छान अब गाँव में कहीं नहीं जो गाँव को गाँव होने का गौरव देते थे... 
कल मोटी-मोटी नमकीन रोटियाँ बनवाईं और प्याज की गंठी के साथ खाईं...इसे आप सनक कह सकते हैं... मुँह और गला प्याज से अभी तक जला हुआ है, मगर जो आनंद मिला उसे बयान नहीं किया जा सकता। आज शहरी हो जाने के बाद सब कुछ बनावटी सा हो गया है... मिट्टी से जीवन भर आदमी भागता फिरता है और अंत में उसी मिट्टी में शरण पाता है... चांदी-सोना कितना ललचाता है, मगर अंतत: सब मिट्टी हो जाता है।          

लिनक्स और भारतीय भाषाओं के लिए यूनिकोड

        लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम्स वाले कंप्यूटरों पर भी भारतीय भाषाओं में यूनिकोड में काम करने में कोई कठिनाई नहीं है, यहाँ कुछ लिंक्स देकर आपको सीधे लिनक्स की दुनिया तक पहुँचाया जा रहा है -
http://www.cdacmumbai.in/projects/indix/n_download.shtml

        "इंडिक्स" प्रस्तावना से साभार एक पैरा यहाँ दिया जा रहा- "टीडीआईएल कार्यक्रम के अंतर्गत संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा निधिक इंडिक्स परियोजना का मुख्य उद्देश्य है, नि:शुल्क सॉफ्टवेयर तथा खुले प्लैटफार्म और प्रणालियों के द्वारा भारतीय भाषाओं के कम्प्यूटिंग अनुप्रयोगों का बड़े पैमाने पर उपयोग उपलब्ध करना। इस परियोजना का विशिष्ट एवं तात्कालिक लक्ष्य है, यूनीकोड (UNICODE) तथा इस्की (ISCII) कूटों का प्रयोग करते हुए लिनक्स ऑपरेटिंग प्रणाली के योग्य अंगभूतों का स्थानीकरण, ताकि 12 मुख्य भारतीय भाषाओं के विषय विस्तु का सृजन, सम्पादन, अवलोकन तथा मुद्रण किया जा सके। ये 12 भाषाएं है- असमिया, बंगला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल और तेलुगु। इंडिक्स परियोजना के पहले चरण में भारतीय लिपियों, विशेषकर हिंदी भाषा, की विशेषताओं को उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया गया"
        नीचे कुछ लिंक्स दिए जा रहे हैं, उनके लिए, जो लिनक्स जैसे मुद्दों पर आगे पढ़ना और बढ़ना चाहते हैं । इनके माध्यम से कई व्यावहारिक समस्याओं के समाधान पाए जा सकते हैं। निशुल्क उपलब्ध यह सामग्री कितनी उपयोगी है, यह आप स्वयं आजमाइए-


http://epandit.shrish.in/labs/Indic-IME-Lite

       इसके अलावा नीचे दिए गए लिंक से यदि चाहें तो तीन चीजें डाउन लोड करें-

1. remington-installer

2. Linux pocket guide in Hindi

3. Converter-Training
और लिंक है-
http://cid-60eace63e15a752a.office.live.com/self.aspx/.Public/remingt...


-अजय मलिक



Oct 26, 2011

कुछ दीप जलाओ तुम भी, कुछ दीप जलाएँ हम भी

हर घर में उजियारा भरने
कुछ दीप जलाओ तुम भी
जग भर को उजियारा करने

Oct 19, 2011

यदि विंडोज XP में लैंग्वेज़ बार गायब हो जाए...

टास्क बार से यदि लैंग्वेज़ बार गायब हो जाए तो क्या हो...

आज विंडोज XP में लैंग्वेज़   की बात करेंगे। यदि टास्क बार से EN गायब हो गया है तो पहले स्क्रीन पर लैंग्वेज़  बार तलाशें। हो सकता है आपने लैंग्वेज़ बार रेस्टोर बटन क्लिक कर दिया हो। यदि स्क्रीन पर लैंग्वेज़ बार नहीं है तो आपने लैंग्वेज़  बार को छुपा (hide) दिया है। इसे पुन: पाने के लिए कंट्रोल पैनल में रीज़नल  एवं लैंग्वेज़  विकल्प में जाएँ और Languages क्लिक करने के बाद नीचे दिए

Oct 18, 2011

यदि लैड्ग्वेज बार गायब हो जाए तो क्या हो...

कुछ मित्रों ने पूछा है-
टास्क बार से यदि लैड्ग्वेज बार गायब हो जाए तो क्या हो...
आज विंडोज विस्ता और 7 की बात करेंगे। यदि टास्क बार से EN गायब हो गया है तो पहले स्क्रीन पर लैड्ग्वेज बार तलाशें। हो सकता है आपने लैड्ग्वेज बार रेस्टोर बटन क्लिक कर दिया हो। यदि स्क्रीन पर लैड्ग्वेज बार नहीं है तो आपने लैड्ग्वेज बार को छुपा (hide) दिया है। इसे पुन: पाने के

Oct 17, 2011

विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम्स में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं की यनिकोड सक्रियता हेतु सहायता

ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ हों या मैक या लिनक्स, भारतीय भाषा हिंदी हो या तमिल, बांग्ला हो या मलयालम, यूनिकोड सक्रियता हेतु निशुल्क सहायता उपलब्ध है- विकीपीडिया पर। एक ही आलेख में लगभग सारी बातों पर चर्चा और संभावित समाधान और...और भी बहुत कुछ, बस नीचे दिए लिंक को क्लिक करें... हो जाएगी बल्ले-बल्ले    


(wikipedia.org के सौजन्य से)

Oct 15, 2011

भाषायी कंप्यूटरीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान

                 राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट http://www.rajbhasha.gov.in/  पर सामूहिक चर्चा-परिचर्चा का एक मंच हाल ही में शुरू किया गया है जिसे नाम दिया गया है- "भाषायी कंप्यूटरीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान।"  देश-विदेश का कोई भी व्यक्ति जिसके पास गूगल ई मेल का पता है, इस समूह का सदस्य बन सकता है। समूह के  सदस्य हिन्दी/इंडिक कम्प्यूटिंग से संबंधित अपनी समस्याएँ पोस्ट कर सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान भी समूह के सदस्यों द्वारा सुझाए जाएँगे। हिन्दी/इंडिक  कम्प्यूटिंग पर राष्ट्रीय सूचना केंद्र के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक श्री केवल कृष्ण जी की विशेष अभ्युक्तियाँ भी इस मंच पर उपलब्ध होंगी। इस समूह के बारे और अधिक जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें- 

भाषायी कंप्यूटरीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान


Oct 7, 2011

चाणक्य फॉन्ट को निशुल्क यूनिकोड में बदलें

शुषा, कृतिदेव, चाणक्य, शिवाजी और श्रीलिपि फोंट्स को निशुल्क यूनिकोड फोंट्स में बदलने की सुविधा कविता कोश (www.kavitakosh.org/) पर उपलब्ध है। कवितकोष के मुखपृष्ठ  पर फॉन्ट परिवर्तक बटन दबाने पर आप उपर्युक्त फॉन्ट कन्वर्टर पृष्ठ पर पहुँच जाएंगे। उपर्युक्त जिस भी फॉन्ट में आपका दस्तावेज़ है उसे चुनिए और बाक्स में पेस्ट कर दीजिए, बस आपका काम हो जाएगा। यदि आप यूनिकोड फोंट्स में तैयार दस्तावेज़ को उपर्युक्त नॉन यूनिकोड फोंट्स में बदलना चाहते हैं तो उसका विकल्प भी मौजूद है। मुफ्त आजमाने में आपका क्या जाता है?

बस एक बात का ध्यान जरूर रखें कि कविताकोश फ़ायरफ़ॉक्स तथा गूगल क्रोम में ही सर्वोत्तम दिखाई देता है।

-अजय मलिक

Oct 6, 2011

विश्व जन की विजय हो, नव सृजन की विजय हो...... असत्य परे सत्य हो और सत्य की ही विजय हो......




                                                                                                           सभी छवियाँ गूगल छवि से साभार

Oct 1, 2011

थोड़ा मनोरंजन, फ़ेसबुक से विशाल अग्रवाल का संकलन-3

थोड़ा मनोरंजन, फ़ेसबुक से विशाल अग्रवाल का संकलन-2

थोड़ा मनोरंजन, फ़ेसबुक से विशाल अग्रवाल का संकलन-1

राजभाषा विभाग के नए सचिव
















व्हिसपर्स इन दा कोरिडोर्स की खबर के अनुसार वर्तमान पॅंचायती राज सचिव श्री ए एन पी सिन्हा राजभाषा विभाग के नए सचिव बनाए गए हैं। वे बिहार कैडर के 1974 बैच के वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी हैं।  

Sep 30, 2011

एक प्रश्नपत्र राजभाषा से संबंधित


राजभाषा प्रतियोगिता : 2011

नोट : प्रश्न - 1 से 25 तक अनिवार्य हैं तथा प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है। प्रश्न - 26 में हिंदी में अनुवाद हेतु 5 अँग्रेजी टिप्पणियाँ दी गई हैं। प्रत्येक टिप्पणी के लिए 2 अंक हैं तथा यह प्रश्न 10 अंक का है। प्रश्न - 27 में पाँच विषय दिए गए हैं जिनमें से किसी एक विषय पर हिंदी में निबंध लिखिए। यह प्रश्न 15 अंक का है।

समय 1 घंटा
पूर्णांक – 50

1- राजभाषा किसे कहते हैं ? (1X25=25)

राजकाज की भाषा को / उत्तर भारतीय जनता की भाषा को / निजी पत्राचार की भाषा को / संस्कृत को

2- तारामणि, चेन्नई में किसकी नींव स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री ने रखी थी ?

Sep 29, 2011

कराहटों सी करवटें


कराहटों सी करवटें
जख्मों के जश्न से
बदल रही हैं बार-बार

आर-पार, वार-पार
धूम मची द्वार-द्वार
तार-तार दामन में
दिल भी हुए तार-तार

यह धरा भी धरी धरी
धड़कती है धार-धार
जीत रहा जुल्म जहां
हार रहे वीर वार

ये फिरंगी आग आज
फ़ैल गई बाज-बाज़
हिंद में ही सिंध धसी
सभी फंसे द्वार पार


रूठ गया कंठ सुन
जालिमों की अंट संट
डंठल से दंश डसें
स्याम से न सधे कंस

रावण का राग सुन
सुर भी जपें सरगम

रोज इस झन झन से
झेंप रहें सद जन


काठ के कुम्हार
अवे, ढूढ़ रहे कुल्हड़
कराहटों सी करवटें...

-अजय मलिक

Sep 23, 2011

हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग

पेश हैं चार गज़ले कविताकोश के सौजन्य से।

शायर हैं दुष्यंत कुमार, मुनव्वर राना और सर्वत एम जमाल


एक:

खँडहर बचे हुए हैं, इमारत नहीं रही
अच्छा हुआ कि सर पे कोई छत नहीं रही

हिन्दी व्याकरण से संबंधित दो बहुपयोगी लिंक

भारतकोश पर उपलब्ध है ज्ञान का भंडार। हिन्दी भाषा एवं अन्य भारतीय भाषाओं के संबंध में इतने सरल और गंभीर रूप में जानकारी मिलना बहुत कठिन है। हिन्दी व्याकरण से संबंधित दो बहुपयोगी लिंक यहाँ भारतकोश से जुडने के लिए दिए जा रहे हैं-

हिन्दी व्याकरण



(सौजन्य : भारतकोश)

Sep 22, 2011

अजी भाई साहब जी, सुनो तो जी...

अंधेरा ... इस घनघोर अंधेरे में खड़ा हुआ मैं, उजाले में चलते-फिरते, गुलाटियाँ लगाते, गिलोरियाँ खेलते, गोटियाँ बिठाते कई तरह के चेहरों को, बड़ी आसानी से देख पाता हूँ। मुझे अंधेरे में गुम हो गया मान लिया गया है। मैं शायद ब्रह्मांड का हिस्सा बन गया हूँ... ब्लैक होल में समाकर सब ऊर्जाएँ सबसे बड़ी ऊर्जा का हिस्सा बन जाती हैं। अंधेरा जो सबसे बड़ी ऊर्जा है। अंधेरे से सब उजाले में जाना चाहते हैं ... उजाले से कोई भी अंधेरे में नहीं आना चाहता, मगर आना तो पड़ता है। ऐसा कोई नहीं जो अंधेरे में समाने से बच सके। घर का अंधेरा सब मिटाना चाहते हैं; बाकी किसी जगह बिखरे अंधेरे को कोई देखना तक नहीं चाहता। इस अंधेरे में छुपे रहस्यों को क्यों कोई जानना-समझना-छूना-पहचानना नहीं चाहता।

Sep 20, 2011

दो नंबरी तीन हों तो क्या हो...

लगभग 18 वर्ष पूर्व एक लेख लिखा था और शायद राष्ट्रीय सहारा में छपा था। लेख का शीर्षक था- "अधिकांश सुपर स्टारों का खास रिश्ता है दो के अंक से।" पाँच-छह साल पहले एक टी वी चैनल पर इसी विषय पर एक कार्यक्रम भी आया था।
संजय मासूम ने आज भट्ट साहब को जन्मदिन की बधाई दी है फेसबुक के माध्यम से। भट्ट साहब को मेरी ओर से भी बधाई। मैं उनसे कभी मिला तो नहीं मगर बंबई के मुंबई में बदलने के दौर में जब शक्ति सामंत सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हुआ करते थे तब एक बार फोन पर उनसे जरूर बातचीत हुई थी। 

Sep 18, 2011

रचना जो प्रस्तावना में ही खो गई

कल किसने देखा है? न आने वाला कल आता है न जाने वाला ही कभी लौटता है। आने वाले की आशा तो की जा सकती है मगर चले जाने वाले की तो बस कल्पना ही की जा सकती है। बीते कल में आने वाले कल की जो उम्मीदें थीं वे एक और बीते हुए कल में समा गईं। एक मुस्कराते हुए सौम्य चेहरे से खिलखिलाहट और किलकारियों की आशा में चमकते दो गौरवान्वित चेहरों पर अचानक ढेर सारी झुर्रियां छा गईं और रचना प्रस्तावना में ही खो गई।
एक रचना जो सैंकड़ों, हजारों और शायद लाखों ज़िंदगियों की उम्मीद और मुस्कान बनने को आतुर थी, वह अचानक उपसंहार तक पहुँचते-पहुंचते स्वत: मिट गई। कल शाम से मैं उसी रचना के बारे में सोच रहा हूँ... वह रचना जो अब नहीं है, वह रचना जिसे हम बहुत दूर तक असीमित संभावनाओं के साथ आगे जाता देख रहे थे...जिसके उपचार के भरोसे बुढ़ापे के दस सालों को बारह-पंद्रह तक बढ़ा लेने के सपने हम बहुत सारे लोग देख रहे थे। वह रचना अचानक न जाने कैसे मिट गई। सिर्फ साढ़े तीन महीने पहले जिस रचना के साथ हम लोग बहुत लंबी चौड़ी हांक रहे थे। जो हमें हाँकता देख हँस रही थी, हमारे साथ अपनी संपूर्णता के साथ थी, जिसे सुबह जल्दबाज़ी में हम उठाए बिना ही चले आए थे, वह हमारी रचना, कल से भी पहले कल न जाने क्यों हम सब से रूठकर कहीं खो गई। 
ऐसा भी कभी हो सकता है क्या? विश्वास नहीं हो रहा... मगर करना तो पड़ेगा क्योंकि बीता हुआ कल कभी भी नहीं आता। उस दिव्य आत्मा को जो दिवंगत हो गई, प्रणाम और ईश्वर से प्रार्थना है कि उसे शांति दे... और संबल, साहस और शक्ति दे उन रचनाकारों को जिनकी रचना अब नहीं रही।                 

Sep 15, 2011

पुरस्कृत होकर एक साल तक अपना नाम सिर्फ हिंदी में लिखेंगे

कितने सारे पुरस्कार!
       हिंदी में श्रेष्ठ या उत्कृष्ट काम करने के लिए या सिर्फ हिंदी में काम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर से लेकर छोटे-छोटे कार्यालयों के स्तर पर पुरस्कार ग्रहण करने वाले हिंदी सेवियों को हार्दिक बधाई। उनके सत्प्रयत्नों से राजभाषा हिंदी को जो मान-सम्मान मिला है उसके लिए सचमुच वे बधाई के पात्र हैं, अनुकरणीय हैं। उनसे तथा हिंदी से जुड़े पुरस्कारों से प्रेरित होकर अनेक लोग हिंदी से जुड़ेंगे, हिंदी में कामकाज करेंगे, हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। प्रेरणा, प्रोत्साहन और सद्भावना ये ही तो मूल मंत्र हैं सरकार की राजभाषा नीति के।

Sep 14, 2011

हिंदी दिवस समारोह का सीधा प्रसारण (लाइव वैबकास्ट) राजभाषा विभाग की वेबसाइट के माध्यम से

आज प्रात: 11.30 बजे से विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित हिंदी दिवस समारोह का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के साथ-साथ राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र भवन, नई दिल्ली से लाइव वैबकास्ट के जरिए देखा जा सकेगा। इसके लिए राजभाषा विभाग की वेबसाइट http://www.rajbhaasha.gov.in/  पर भी लिंक उपलब्ध है-


http://webcast.gov.in/hindi-diwas/


हिंदी दिवस मनाएँ, हिंदी को हर दिल की मंजिल बनाएँ 

हम हिन्दुस्तानी हैं, हिंदी हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है  

भारत का कोई भी नागरिक हिंदी से अपरिचित नहीं है



  

Sep 11, 2011

हिंदी सबके लिए की ओर से हिंदी दिवस 14 सितंबर 2011 के अवसर पर शुभकामनाएँ

अद्भुत है हिंदी दिवस का ऐसा कलात्मक स्वागत

राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर इस बार अद्भुत कलात्मक ढंग से हिंदी दिवस का स्वागत किया गया है। एक बार जरूर लॉग इन करें- http://www.rajbhasha.gov.in/ पर


राजभाषा विभाग की वेबसाइट से साभार

Sep 8, 2011

हिंदी दिवस पर माननीय गृह मंत्री जी का संदेश


राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय की वेबसाइट http://www.rajbhasha.nic.in/ के सौजन्य से

Sep 4, 2011

मेरे गुरु...और गुरुजनों को प्रणाम

मन की उदासी या उदास मन, आवारा फिल्म का वह संवाद “दिल और कानून... कानून और दिल; कानून किसी दिल को नहीं मानता... और दिल भी किसी कानून को नहीं मानता...”  स्वर्गीय डॉ0 के पी अग्रवाल की बहुत याद आती है... विशेषकर सितंबर का महीना शुरू होने पर... ऐसे गुरु, शुभचिंतक और जिगरी दोस्त के बिना उदास मन की उदासी और अधिक बढ़ जाती है।

Sep 1, 2011

यूँ तुझे नमन है गजानन






Aug 18, 2011

कुछ नए लिंक्स हिंदीटैक के सौजन्य से

कल मेल से हिंदीटैक का एक लिंक मिला और उसपर कुछ बेहद उपयोगी लिंक्स मिले। इन लिंक्स को यहाँ बिना किसी अभ्युक्ति के दिया जा रहा है। कृपालु पाठक ही इनपर अपनी प्रतिक्रिया दें... 






Aug 16, 2011

किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है...

      राहत इन्दौरी की 2 ग़ज़लें
          (वेब दुनिया के सौजन्य से)
            (1)

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे


तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे

लहूलोहान पड़ा था ज़मीं पे इक सूरज
परिन्दे अपने परों से हवाएँ करने लगे


ज़मीं पे आ गए आँखों से टूट कर आँसू
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे

झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले
वो धूप है कि शजर इलतिजाएँ करने लगे

अजीब रंग था मजलिस का, ख़ूब महफ़िल थी
सफ़ेद पोश उठे काएँ-काएँ करने लगे

           (2)

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
 

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है


मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
 
हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है


जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है


सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

                                                               (वेब दुनिया के सौजन्य से)

Aug 15, 2011

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा










Aug 10, 2011

क्या आप जानते हैं ??



यह अजीब सी बात है मगर शर्तिया आप इस सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं कि...

अंग्रेज़ी के a, b, c, और d अक्षर 1 से 99 तक की अंगेजी गिनतियों में प्रयोग नहीं होते,


अक्षर पहली बार 100 (Hundred) में प्रयोग होता है...

a, b और c अक्षर 1 से 999 तक की अंगेजी गिनतियों में प्रयोग नहीं होते,

a अक्षर पहली बार 1000 (Thousand) में प्रयोग होता है...

b और c अक्षर 1 से 999,999,999 तक की अंगेजी गिनतियों में प्रयोग नहीं होते,

b अक्षर पहली बार अरब (Billion) में प्रयोग होता है...

और

c अक्षर का प्रयोग अंगेजी गिनतियों में कहीं भी नहीं होता।

(हिंदी शिक्षक बंधु से प्राप्त ई मेल पर आधारित)

Jul 31, 2011

विन्डोज़-7 तथा एम एस ऑफिस 2010 में तैयार पॉवर पॉइंट...

यदि आपने कोई पॉवर पॉइंट  प्रस्तुति विन्डोज़-7  तथा एम एस ऑफिस 2010 में तैयार की है और काफी कुछ एनीमेशन आदि का प्रयोग किया है तो जहा भी प्रस्तुति  के लिए जाएं अपना लैपटॉप साथ ले जाएं, क्योंकि उपर्युक्त प्रस्तुति विन्डोज़-7 तथा माक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2010 के बिना सही से काम नहीं   करेगी.  

राजभाषा मंत्र को विन्डोज़-7 में आजमाइए

राजभाषा विभाग द्वारा सीडेक से तैयार कराए जा रहे अंग्रेजी  हिंदी अनुवाद सॉफ्टवेयर मंत्र को   विंडोज एक्स-पी तथा विडोज़ विस्ता ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटर्स में इंस्टाल करने में एमएसक्यूएल सर्वर की आवश्यकता के कारण कठिनाई होती थी। प्रशासनिक कामकाज के लिए विकसित कराए जा रहे राजभाषा मंत्र  सॉफ्टवेयर को यूंही आजमाने के उद्देश्य से जब मैंने  विंडोज-7 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ इंस्टाल करने की कोशिश की तो यह बिना एमएसक्यूएल सर्वर के न सिर्फ इंस्टाल हो गया बल्कि अनुवाद भी इससे कहीं अधिक सरलता से हुआ। संभवत:  विंडोज-7 में मंत्र के लिए अलग से  एमएसक्यूएल सर्वर की आवश्यकता  नहीं होती और यह तुलनात्मक रूप से काफी अच्छी तरह  काम करता है। मंत्र से हालाँकि गूगल अनुवाद जैसी तेज गति से तो अनुवाद नहीं होता किन्तु डोमेन आधारित होने के कारण शुद्धता की दृष्टि से संभवत: मंत्र उपयोगी हो सकता है। मंत्र के लिए गूगल अनुवाद की तरह इंटरनेट की आवश्यकता नहीं है। आप भी इसे आजमाकर देखिए।

-अजय मलिक

Jul 26, 2011

हिंदी सबके लिए का दो वर्ष का सफर...

आज हिंदी सबके लिए ने दो वर्ष का सफर पूरा कर लिया। मूलत: राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित इस छोटे से प्रयास से बेशक बहुत कुछ तो नहीं पाया जा सका, फिर भी कुछ थके-हारे से कदम बढ़ाने की हिम्मत तो जुटाई ही गई। पाठकों का जितना स्नेह पाने के मोह के साथ हमने शुरुआत की थी उससे तो ज्यादा ही पाया सा लगता है। हाँ, हमारे प्रयासों में जरूर कुछ शिथिलता आई है जिसका कारण व्यस्तता भी है। यदि ईश्वर कृपा रही तो इस तीसरे वर्ष में कुछ स्फूर्ति दिखा सकने का प्रयास हम जरूर करेंगे।

-हिंदी सबके लिए परिवार

Jul 15, 2011

केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उपसंस्थान, राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नै में केनरा बैंक, सर्किल कार्यालय, चेन्नई के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए "हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड एवं ई-लर्निंग" विषय पर एक दिवसीय विशेष हिंदी कार्यशाला

केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उपसंस्थान, राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नै के लीला हिंदी भाषा कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र में दिनांक:12-07-2011 को केनरा बैंक , सर्किल कार्यालय, चेन्नई के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए "हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड एवं ई-लर्निंग" विषय पर एक दिवसीय विशेष हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने निम्नलिखित विषयों पर विभिन्न व्याख्याताओं से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया-
1. हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड परिचय एवं विभिन्न विंडोज में सक्रियता (विंडोज 2000/ विंडोज एक्सपी/ विंडोज विस्ता/ विंडोज 7 में हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड सक्रिय करने की विधियों पर पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं परिचर्चा )
– श्री अजय मलिक , सहायक निदेशक द्वारा
2. हिंदी ई-लर्निंग एवं एवं भारतीय भाषाओं में ई-मेल, ऑनलाइन डैमो/ प्रदर्शन
- श्रीमती प्रतिभा मलिक, हिंदी प्राध्यापक, हिंदी शिक्षण योजना, चेन्नै
3. कंप्यूटर हार्डवेयर-सॉफ्टवेर एवं इंडिक के साथ विंडोज इन्स्टालेशन, पावर पॉइंट प्रस्तुति
– श्री गुरु प्रसाद, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, सीएलआरआई
4. एम एस ऑफिस वर्ड, एक्सेल एवं पावर पाइंट में हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड का प्रयोग; विभिन्न यूनिकोड फोंट एवं लिपि परिवर्तक सुविधा / टिबिल फोंट परिवर्तकों का प्रदर्शन
-श्री अजय मलिक, सहायक निदेशक
कुल 21 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला का उद्घाटन केनरा बैंक , सर्किल कार्यालय, चेन्नई  के सहायक महाप्रबंधक श्री वी सुंदरम ने किया। कार्यशाला का समन्वय एवं संचालन श्री अजय मलिक, सहायक निदेशक, केंद्रीय हिन्दी प्रशिक्षण उपसंस्थान, चेन्नई ने किया। उदघाटन अवसर पर चेन्नई नराकास (बैंक एवं वित्तीय संस्थाएं) के सदस्य सचिव श्री सुरेश कुलकर्णी तथा केनरा बैंक क्षेत्रीय कर्मचारी प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्रभारी श्री श्रीनिवासन तथा वरिष्ठ प्रबंधक राजभाषा श्री रामकुमार भी उपस्थित थे।






Jul 9, 2011

केरल विश्वविद्यालय एम. ए. हिंदी का एक पुराना प्रश्न-पत्र :: क्या प्राज्ञ के परीक्षार्थी इसे हल कर पाएँगे?




 

(केरल विश्वविद्यालय की वेबसाइट से साभार)

Jun 25, 2011

कंप्यूटर से हिन्दी में हल्ला बोल

-इस काम के लिए निम्नलिखित सॉफ्टवेर बहुत उपयोगी है -


i386 = इसमें विंडोज एक्स पी की वे फ़ाइलें हैं जो हिन्दी सक्रिय करने के लिए काम आती हैं .

MySQL = यह मंत्र आदि स्थापित करने के काम आता है.

Paragon partition magic आपके कंप्यूटर में हार्ड डिस्क में एक ड्राइव से दूसरे ड्राइव में स्पेस घटाने - बढ़ाने के काम आता है.

winRAR = कम्प्रेस्ड फाईल्स को खोलने के काम आता है . सभी IME जिप फ़ाइल हैं जिन्हें OPEN करने के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी .

Suvidha, Saaraansh, TBIL यूनिकोड फ़ॉन्ट परिवर्तक हैं. TBIL से किसी भी भारतीय भाषा का फ़ॉन्ट किसी भी अन्य भारतीय भाषा के यूनिकोड अथवा नॉन यूनिकोड फ़ॉन्ट में परिवर्तित किया जा सकता है तथा इसके विपरीत भी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.

Hindi.exe विंडोज vista तथा WIN 7 में हिन्दी में अग्रेजी /रोमन लिपि के माध्यम से हिन्दी में काम करने की सुविधा प्रदान करता है. अत्यंत उपयोगी है . विंडोज एक्सपी में इसे स्थापित करने से पहले dotnetfx3 तथा win xp dotnetfx3setup को स्थापित करने की जरूरत है. अन्य भाषाओं में काम करने के लिए भी Tamil Indic Input/ Malayalam Indic Input/ Bangla Indic Input/ Hindi Indic Input आदि दिए गए हैं.

यूनिकोड समर्थित ओपन टाइप फॉन्ट & यूनिकोड समर्थित की-बोर्ड ड्राइवर्स : यह हिन्दी कुंजी पटल तथा 160 से अधिक हिन्दी यूनिकोड फ़ॉन्ट्स स्थापित करता है.

इन उपयोगी सॉफ्टवेयर के साथ आप बड़े-बड़ों की छुट्टी कर सकते हैं.

-अजय मलिक

राजभाषा की अवधारणा, हमारे कर्तव्य और मनमानी व्याख्याएँ

- अजय मलिक
[इस आलेख में व्यक्त विचार लेखक के एक भारतीय नागरिक के रूप में पूरी तरह निजी विचार हैं]

हमारा संविधान कब, कैसे और क्यों बना ? हमारे संविधान के किसी भाग के किसी अनुच्छेद में कोई प्रावधान विशेष क्यों किया गया ? हमारे संविधान में की गई व्यवस्थाएँ अच्छी हैं या बुरी, सही हैं या सही नहीं हैं ? ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिन्हें जाने-अनजाने हर बहस का मुद्दा बनाया जाता है ।

एक आम भारतीय नागरिक के नाते इन प्रश्नों के उत्तरों की खोज में उलझने से कहीं बेहतर यह स्वीकारना क्या सही नहीं है कि हमने, हमारे पूर्वजों ने, हमारी व्यवस्था ने जो विधान हमें दिया है वह सर्वोपरि है उसका प्रत्येक अनुच्छेद, प्रत्येक पंक्ति और प्रत्येक शब्द 'विधि' अर्थात कानून है और कानून का पालन करना हर नागरिक का प्रथम कर्तव्य है? -एक ऐसा कर्तव्य जो अगर थोपा हुआ प्रतीत होता है तब भी विधि द्वारा अन्य कोई व्यवस्था किए जाने तक उसका पालन करने से बचा नहीं जा सकता?

संविधान में समसामयिक आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधन आदि के लिए हमारे लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च सभा यानी हमारी संसद है।

हमारे लिए, हमारे द्वारा दिए गए विधान में किसी बात, तथ्य या कथ्य का क्या मतलब है अर्थात संवैधानिक प्रावधानों का वास्तविक अभिप्राय क्या है इसकी व्याख्या करने के लिए हमारा सर्वोच्च न्यायालय है।

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -2

1. सुंदर लिखावट में लिखिए-

वैज्ञानिकों ने पहली बार ब्रहंमाण्ड में एक ऐसे ग्रह को चिन्हित किया है जो देखने में हूबहू पृथ्वी जैसा है। यह ग्रह हमारे सौर मंडल से बाहर देखा गया है। इस पर जीवन के आसार हमारी धरती जैसे ही है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का दावा है कि इस ग्रह को सौर मंडल से बाहर ऐसे इलाके में देखा गया है जिसमें जीवन की संभावनाएं पहले से ही जताई जा रही हैं। इसे "गोल्डीलॉक्स जोन" कहा जाता है।

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र-1


1. सुंदर लिखावट में लिखिए-

भारत में पहले दस विशिष्ट पहचान नंबर महाराष्ट्र के आदिवासियों को दिए गए हैं। पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह नंबर देते हुए कहा कि इससे गरीबों को कल्याणकारी योजनाओं का फायदा लेने में मदद होगी। भारत में सभी नागरिकों को खास पहचान पत्र जारी करने की दिशा में काम हो रहा है। इसी के तहत प्रधानमंत्री सिंह और श्रीमती सोनिया गांधी ने दस टेंभली आदिवासियों को "आधार कार्ड" दिए हैं।

2. नीचे दिए गए पैरा के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

जाने क्यों अच्छे लगते हैं घनानंद के ये छंद

परकाजहि देह को धारि फिरौ, परजन्य जथारथ ह्वै दरसौ।
निधि-नीर सुधा के समान करौ, सबही बिधि सज्जनता सरसौ।
घनआनँद जीवन दायक हौ, कछू मेरियौ पीर हियें परसौ।
कबहूँ वा बिसासी सुजान के आँगन, मो अँसुवानहिं लै बरसौ॥

’घनाआनँद’ जीवन मूल सुजान की, कौंधनि हू न कहूँ दरसैं ।
सु न जानिये धौं कित छाय रहे, दृग चातक प्रान तपै तरसैं ॥
बिन पावस तो इन्हें थ्यावस हो न, सु क्यों करि ये अब सो परसैं।
बदरा बरसै रितु में घिरि कै, नितहीं अँखियाँ उघरी बरसैं ॥

अति सूधो सनेह को मारग है, जेहुं नेकु सयानप बाँक नहीं।
तहाँ साँचे चलैं तजि आपनपौ झिझकैं कपटी जे निसाँक नहीं॥
घनआनंद प्यारे सुजान सुनौ इहैं एक ते दूसरो आँक नहीं।
तुम कौन सी पाटी पढ़े हौ लला, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं॥

कितने शहरों तक गाँव चले

किसी गीत की छांव तले
कितने शहरों तक गाँव चले

सब छूट गए पीपल पीछे
जब हाँफे-हारे पाँव चले

पनघट पनचक्की पतनाले
सब खेत गए लालावाले

न पछुवा चली न पुरवाई
झूले से रूठी अंगड़ाई

ओसारे का छप्पर छूटा
घर लुटा द्वार टूटा फूटा

बाबा की वह टूटी खटिया
जाने किसने लूटी बछिया

जिसने जो देखा छीन लिया
टूटा-फूटा तक बीन लिया

सब बदल गए इंसान भले
कितने शहरों तक गाँव चले

-अजय मलिक (c)

Jun 22, 2011

गूगल ने दी हिन्दी के अतिरिक्त अन्य पाँच भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा

गूगल ने भारत में अपनी अनुवाद सेवाओं का विस्तार किया है। अब गूगल अनुवाद की सुविधा हिन्दी के साथ-साथ  बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में भी उपलब्ध है।

यहाँ हम गूगल अनुवाद के माध्यम से प्रवीण पाठ्यक्रम के प्रथम पाठ का तमिल अनुवाद दे रहे हैं। तमिल भाषी हिन्दी के विद्यार्थी कृपया बताएं कि इसमें कितनी शुद्धता है और कितने सुधार की आवश्यकता है?

நாங்கள் இந்தியாவின் கிழக்கு ஒரிசா பயணம் சலுகை விட்டு இந்த திட்டம் உருவாக்கப்பட்டது.

ஒரிசா எப்போதும் எங்களை கவர்ந்து வருகிறது. கடவுள் என் மனைவியும் சத்தியம் செய்ய பூரி ஜெகன்னாத் என்னை வணங்க தேவைப்பட்டது.நாங்கள் இரயில் ஒரிசா தலைநகர் புவனேஸ்வர் முடிவு வந்தோம்.

Jun 16, 2011

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित यहाँ दिए जा रहे प्रश्नोत्तर बड़े ही परिश्रम से हमारे मित्र श्री विश्वजीत मजूमदार, हिन्दी प्राध्यापक, हिन्दी शिक्षण योजना, दुर्गापुर ने तैयार किए हैं। 
  
पाठ -1

उड़ीसा की सैर


1.  लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर कहाँ जाने का कार्यक्रम बनाया ?

उत्तर- लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर उड़ीसा जाने का कार्यक्रम बनाया ।

2.  भगवान जगन्नाथ की नगरी किसे कहा जाता है ?

उत्तर- पुरी को भगवान जगन्नाथ की नगरी कहा जाता है ।

3.  जगन्नानथ मंदिर में किसकी मूर्तियां स्थापित हैं ?

उत्तर- जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं ।

4.  पुरी के समुद्र तट पर किस नदी का संगम होता है ?

उत्तर- पुरी के समुद्र तट पर चंद्रभागा नदी का संगम होता है ।

5.  कोणार्क का सूर्य मंदिर किस लिए विश्व प्रसिद्ध है ?

उत्तर- कोणार्क का सूर्यमंदिर अपने भव्य शिल्पकला केलिए विश्व प्रसिद्ध है ।

6.  लिंगराज मंदिर कितने मंदिरों का परिसर है ?

उत्तर- लिंगराज मंदिर 108 मंदिरों का परिसर है ।

Jun 12, 2011

ये फूल काश्मीर के