Oct 30, 2013

भारत के 44वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव 2013 :: गोवा :: भारतीय पेनोरमा खंड

 
भारत के 44वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव, 2013 के भारतीय पेनोरमा खंड के लिए 26 कथा फिल्में तथा 16 गैर फीचर फिल्मों का चयन किया गया है। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और संपादक श्री बी लेनिन के नेतृत्व में 210 योग्य प्रविष्टियों में से नौ सदस्यीय जूरी ने 21 दिन में अंतिम 25 फिल्मों का चयन किया। निर्देशक श्री तिगमांशु धूलिया की हिंदी कथा फिल्म “पान सिंह तोमर” का चुनाव 60वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्काररों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीतने के कारण सीधे किया गया। इसे मिलाकर कुल 26 कथाफ़िल्मों का प्रदर्शन 20 से 30 नवंबर, 2013 तक गोवा में सम्पन्न होने वाले अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में किया जाएगा। कथा फिल्मों में मलयालम की सर्वाधिक 6, हिन्दी और बांग्ला की 5-5, मराठी की 3, तमिल, कोंकणी, कन्नड, ओड़िया, मीसिंग की की 1-1 तथा 2 द्विभाषी फिल्में क्रमश: अँग्रेजी/ हिन्दी एवं अँग्रेजी/ कोंकणी की हैं। हिन्दी कथाफ़िल्मों में पानसिंह तोमर के अलावा, ओह माई गॉड, भाग मिल्खा भाग, लिस्टेन अमाया, और जल हैं।  
श्री राजा सेन की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जूरी ने 130 गैर कथा फिल्मों में से 15 फिल्मों को चुना तथा 60 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ गैर कथा फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली राजा शब्बीर खान निर्देशित “शैपार्ड्स ऑफ पैराडाइज़” को 16वीं फिल्म के रूप में सीधे प्रवेश मिला। इस वर्ग में चयनित फिल्मों में सर्वाधिक 5 फिल्में हिन्दी की हैं। शेष में मलयालम और अँग्रेजी की 3-3, मराठी और कश्मीरी भाषा की 2-2 और कुदुख की 1 फिल्म हैं।
-अजय मलिक

Oct 25, 2013

विंडोज़ 8 के लिए आईएमई / इंडिक इनपुट 3

अभी तक विंडोज़ 8 में हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए अलग से केवल माइक्रोसॉफ़्ट इंडिक लैड्ग्वेज इनपुट टूल का प्रयोग किया जा रहा था। पुराने विंडोज़ के लिए भाषाइंडिया पर उपलब्ध आईएमई/ इंडिक इनपुट 1 या 2 की तरह कोई अन्य उपकरण उपलब्ध नहीं था। अब भाषाइंडिया डॉट कॉम पर विंडोज़ 8 के लिए आईएमई / इंडिक इनपुट 3 उपलब्ध करा दिया गया है। विंडोज़ विस्ता तथा विंडोज़ 7 के 32 बिट व 64 बिट संस्करणों के लिए अलग-अलग उपलब्ध आईएमई की तरह विंडोज़ 8 के लिए आईएमई/इंडिक इनपुट 3 के भी दो संस्करण हैं जो क्रमश: विंडोज़ 8, 32 बिट व विंडोज़ 8, 64 बिट के लिए हैं। इंडिक इनपुट  3 या आईएमई 3 में हिंदी ट्रांस्लिटिरेशन तथा हिंदी  रेमिंग्टन केवल 2 ही कुंजीपटल/ की-बोर्ड हैं। 


Sep 30, 2013

इनसे शिकायत करूँ भी तो कैसे ?


इनसे शिकायत

करूँ भी तो कैसे

ये मेरे नहीं हैं

न हैं मेरे जैसे

इनसे शिकायत

करूँ भी तो कैसे

- अजय मलिक

देखो वो दुनिया बदलने चले हैं


बहुत इतराते हैं

अपनी चतुराई पर

बहुत खुश होते हैं

हर इक बुराई पर

वो बदचलनी से  

दुनिया बदलने चले हैं

देखो वो दुनिया

बदलने चले हैं

-अजय मलिक

आओ जमकर झूठ बोलें


आओ

जमकर

झूठ बोलें

और जब तक

वह सच न लगे

तब तक

बोलते रहें

जब ये शरीर

नश्वर ही है

तो फिर

मरने तक

जितना हो सके

आओ

जमकर झूठ बोलें

-अजय मलिक


 

यहाँ हर सुबह रात आई है...


यहाँ हर सुबह

रात आई है

कालिख भरे

उजाले ने

अँधेरे की

इज्जत बचाई है

न हाथों में

राखी बंधवाई है

न माथे पर

बिंदी लगवाई है 

फिर भी

बस नाम के

उजाले ने

अपने भाई की

खातिर

आठों पहर

अंधेरे की

सलामती की

कसम खाई है

खुद पर

खुद ही कितनी 

कालिख लगाई है 

- अजय मलिक (c)

Sep 18, 2013

उनकी कोई जाति नहीं है

दरिंदगी का शिकार
कौन है?
जो भी दलित है

दलित कौन है?
जो भी है
दरिंदगी का शिकार

शिकार और शिकारी कौन हैं ?
जो भी हैं
आदमी हैं
उनकी कोई जाति नहीं है

जो जाति की बात करता है

दरिंदा है ।  

-अजय मलिक (c)

Sep 14, 2013

मैं हिंदी हूँ


आओ हिंदी दिवस मनाएँ

आओ हिंदी दिवस मनाएँ
आओ हिंदी को अपनाएं
हिंदी से दफ्तर चमकाएँ
आओ हिंदी दिवस मनाएँ

 
भेजें चिट्ठी या अनुमान
हिंदी में हों सारे काम
जग भर में हिंदी फैलाएँ
आओ हिंदी दिवस मनाएँ

 
आज्ञा, टिप्पण या आलेख
हिंदी में हों सब अभिलेख
हिंदी का परचम लहराएँ
आओ हिंदी दिवस मनाएँ


हिंदी में ईमेल करें  हम
सारे जग से मेल करें हम
हिंदी को अभिमान बनाएँ  
आओ हिंदी दिवस मनाएँ

 
हिंदी में पैगाम लिखेंगे
हिंदी में ही नाम लिखेंगे
आओ इसकी कसम उठाएँ
आओ हिंदी दिवस मनाएँ


 - अजय मलिक (c)
 

Sep 10, 2013

हिंदी दिवस पर माननीय गृह मंत्री जी का संदेश


Sep 9, 2013

हिन्दी सीखने के लिए एक और लिंक

कृपया इसे भी परखें-


सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ ... इस अवसर पर प्रस्तुत हैं गिरधर की कुंडलियाँ (भारत कोश के सौजन्य से)

दौलत पाइ न कीजिए सपने में अभिमान...

दौलत पाइ न कीजिए सपने में अभिमान
चंचल जल दिन चार को ठांव न रहत निदान
ठांव न रहत निदान जियत जग में जस लीजै
मीठ वचन सुनाय विनय सब ही की कीजै
कह गिरधर कविराय अरे यह सब घट तौलत
पाहुन निसि दिन चारि, रहत सबही के दौलत।

Sep 5, 2013

. . हिन्दी साहित्य- सीमांचल. . शिक्षक दिवस पर एक शिक्षक को शुभकामनाएँ

यूंही कुछ तलाश रहा था और यह अच्छी साइट मिल  गई । बहुत सामग्री है इस पर,  जरूर लाभान्वित हों ।

हिन्दी साहित्य- सीमांचल


अपने सभी गुरुजनों को प्रणाम के साथ लैपटॉप चार्जर पर कुछ

पिछले सप्ताह बड़ी ही अप्रिय स्थिति में एक 'कंप्यूटर पर हिन्दी और भारतीय भाषाएँ' विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में इरोड जाना पड़ा। जाते समय एसी शयनयान में सामने की सीट पर विराजमान बंधु दारू के नशे में धुत ओर उल्टियाँ करने में मस्त ने खूब अस्त-व्यस्त-त्रस्त किया। रात को 50 रुपए वाले बिना चालू एसी के अतिथिगृह में मच्छरों के साथ चली लंबी लड़ाई के बाद आखिर सुबह हुई। कार्यक्रम 10 से 1 बजे तक था मगर आयोजकों के आग्रह पर 4 बजे तक बढ़ा दिया गया। यह जानकर अच्छा लगा कि लोग जानना चाहते हैं। शाम सवा पाँच बजे रेलगाड़ी पकड़नी थी तो अपने लैपटॉप के बैग को कंधे पर लादे गाड़ी में सवार हो गया। सोचा एसी डिब्बे के अनेक फ़ायदों (?) में से कुछ का आनंद मुझे भी उठाना चाहिए। लैपटॉप का चार्जर प्लग में लगा दिया। थोड़ी देर बाद चार्जर आहिस्ता से चरम निंद्रा में चला गया। लैपटॉप बंद कर दिया। रात लगभग सवा ग्यारह बजे चेन्नई सेंट्रल पर उतरा। बाहर निकला तो तेज़ बारिश शुरू हो गई। अच्छी तरह भीग-भाग कर घर पहुंचा।

Aug 25, 2013

हिंदी बोलने वाले साढ़े छह लाख के साथ अमरीका

इसे अवश्य पढ़ें।
दक्षिण भारत के सबसे चर्चित दैनिक " दा हिन्दू"  के 'संडे मैगज़ीन' पर छपे आलेख 'अमेरिका' का लिंक नीचे दिया जा रहा है-

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-sundaymagazine/america/article5056712.ece 

Aug 24, 2013

हाथ से लिखिए हिंदी : एंड्रायड फोन पर गूगल में


   अब एंड्रायड फोन पर भी गूगल में 'हिंदी' का मजा : दैनिक जागरण की इस खबर के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-


http://www.jagran.com/news/business-now-google-enables-to-find-hindi-handwriting-on-androids-10663466.html

Aug 15, 2013

स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाएँ और प्रभु से प्रार्थना.... वह शक्ति हमें दो दयानिधे

स्वतन्त्रता दिवस पर मुझे अपने इंटर कालेज की प्रार्थना याद आ रही है...


वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें।
पर सेवा पर उपकार में हम, निज जीवन सफल बना जावें॥

हम दीन- दुःखी निबलों- विकलों, के सेवक बन सन्ताप हरें।
जो हों भूले, भटके, बिछुड़े, उनको तारें खुद तर जावें॥
वह शक्ति हमें दो दयानिधे....॥

छल, द्वेष, दम्भ, पाखण्ड, झूठ, अन्याय से निशिदिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध, सरल अपना, शुचि प्रेम सुधारस बरसावें॥
वह शक्ति हमें दो दयानिधे....॥

निज आन- मान, मर्यादा का, प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
जिस देश, जाति में जन्म लिया, बलिदान उसी पर हो जावें॥
वह शक्ति हमें दो दयानिधे....॥

Aug 12, 2013

सवाल सिर्फ़ हिंदी का नहीं :: उमेश उपाध्याय

सवाल सिर्फ़ हिंदी का नहीं

बहस हिंदी और अंग्रेज़ी की कतई नहीं है सवाल सारी गैर अंग्रेज़ी भाषाओँ का हैं. अंग्रेजी अब एक खास तरीके से समाज में असमानता को और ज्यादा गहराने वाली भाषा बन गई है. ज्यों ज्यों इन्टरनेट का फैलाव हो रहा है कार्य व्यापार से भारतीय भाषाएँ सिमटती जा रहीं हैं.आज से पचास साल बाद क्या होगा अत्यंत समृद्ध और संपन्न भारतीय भाषाओँ का? क्या वे पुस्तकालयों तक सीमित नहीं रह जायेंगी?
 
सीमा फोन पर जोर जोर से रो रही थी. मैं तुरंत हॉस्टल पहुंचा. उसे चुप कराया. खाना खिलाया. वार्डन से बात करके मैं वापस आकर सोचने लगा कि थोड़े दिन पहले ही तो उसने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था. कितने उत्साह से अपने माँ बाप के साथ वो मेरे दफ्तर आई थी. छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी इलाके से आई सीमा ने बारहवीं कक्षा में 65 प्रतिशत अंक हासिल किये थे. फीस के पैसे के लिए परिवार ने पुश्तेनी ज़मीन का एक टुकड़ा बेचा था. पर इसका उन्हें कोई मलाल नहीं था वे तो बस बेटी का इंजीनियर बनने का सपना पूरा करने के लिए सबसे अच्छे कॉलेज मे एडमिशन चाहते थे. फीस का सारा पैसा नगद लाये थे. गांव के कोई दस बारह लोग उसे दाखिले के बाद रायपुर छोड़ने आये थे. चटक ज़रीदार गुलाबी कुर्ते और हरी पजामी में सीमा बहुत खुश लग रही थी. एक अजीब से स्नेह का नाता बन गया था उसका और मेरा.
मगर धीरे धीरे वह उदास रहने लगी. कक्षाओं से जी चुराने लगी. कभी बीमारी का बहाना तो कभी मन खराब रहने का. एक दिन फुर्सत में उसके साथ बैठा. पता पडा कि उसे क्लास में कुछ समझ नहीं आता. सहपाठियों के सामने उसकी हेठी होती है. उसकी दिक्कत थी कि वो स्कूल में हिंदी मीडियम से पढ़ी थी और इन्जीनियरिंग की पढाई अंग्रेज़ी में होती है. साल पूरा होते होते सीमा पीछे होती गई और फिर उसने कॉलेज छोड़ दिया ....
सीमा अकेली नहीं हैं जो सिर्फ़ भाषाज्ञान के कारण आगे की पढाई छोड़ने पर मजबूर हुई. जांच करने पर मालूम हुआ कि इन्जीनियरिंग जैसे प्रोफेसनल कोर्स बीच में छोड़ने और उनमें पिछड़ने वाले बच्चे विषयज्ञान से ज्यादा अंग्रेजी से घबराते हैं. अंग्रेजी की मार वो झेल नहीं पाते. स्कूली पढाई बीच में छोड़ने के कारण कई हैं पर कॉलेज छोड़ने के पीछे सबसे बड़े कारणों में भाषा की दिक्कत है. जहाँ विद्यालयों में पढाई मातृभाषा में वहीं उच्च शिक्षा ज़्यादातर अंग्रेजी मैं हैं.
देशभर के आंकडे देखे जाएँ तो स्कूलों में दाखिला लेने वाले कोई एक करोड ७० लाख बच्चे पढाई बीच में छोड़ देते हैं. कॉलेज पढाई बीच में छोड़ने वालों की संख्या भी लाखों में है. इसमें भी समाज के वंचित तबकों जैसे पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजातियों के विद्यार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा है. अंग्रेजी अब एक खास तरीके से समाज में असमानता को और ज्यादा गहराने वाली भाषा बन गई है.
ये बहस हिंदी और अंग्रेज़ी की कतई नहीं है सवाल सारी गैर अंग्रेज़ी भाषाओँ का हैं. भूमंडलीकरण की आंधी में देश में ही नहीं पूरे विश्व में अंग्रेज़ी का वर्चस्व और फैलाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि कम्प्युटर की कोडिंग इसी भाषा में हो रही है. अंग्रेजी का वर्चस्व भयावह है. ज्यों ज्यों इन्टरनेट का फैलाव हो रहा है कार्य व्यापार से भारतीय भाषाएँ सिमटती जा रहीं हैं. ई मेल और एस एम एस पर जैसे जैसे लोग निर्भर होते जा रहे हैं अंग्रेजी सीखना ज़रूरी होता जा रहा है. आज मजबूरी है कि हिंदी टाइप करने के लिए भी रोमन स्क्रिप्ट की ज़रूरत पड़ रही है. ये बाज़ार की भाषा है और बाजार और रोज़गार इसी पर केंद्रित हो गया है. पर क्या आदमी की ज़िंदगी सिर्फ़ पेट भरने तक ही सीमित है? हर भाषा से जुडी होती है संस्कृति, सभ्यता, साहित्य, संस्कार और जीवन की एक शैली. आज अंग्रेजी का समर्थन करने वालों से पूछना चाहिए कि सब कुछ इस भाषा में होने के उपरांत हमारी इस समृद्ध धरोहर का क्या होगा ?
कल्पना कीजिये आज से पचास साल बाद की. क्या होगा अत्यंत समृद्ध और संपन्न भारतीय भाषाओँ का? जब सारा कार्य व्यापार और शिक्षा अंग्रेज़ी में होगी तो हमारी अपनी भाषाएँ – हिंदी, तमिल, बंगला, गुजराती, असमिया, मराठी, तेलुगु, कन्नड़ आदि का क्या होगा? क्या वे पुस्तकालयों तक सीमित नहीं रह जायेंगी.
हिंदी पर चल रही आज की बहस को इसलिए इसे सिर्फ़ आउटसोर्सिंग और कालसेंटर से होने वाली आय से ही जोड़कर मत देखिये. इसे इस व्यापक सन्दर्भ में देखना ज़रूरी है अन्यथा ये मुद्दा भी रोज की चकल्लस वाली राजनीति में फंस कर रह जाएगा. इसीलिये इस बहस से राजनेताओं को बहुत दूर रखने की ज़रूरत है. क्योंकि पहले भी नेताओं ने वोट की राजनीति से जोड़कर हिंदी का बड़ा नुक्सान किया है. उनका ध्यान सदा से वोटों पर रहा है लोंगों पर नहीं. और भाषा का सवाल जुड़ा है लोंगों के वजूद से, उनकी भावनाओं से और उनकी अस्मिता से.
 
- उमेश उपाध्याय
(फेसबुक से साभार )

Aug 9, 2013

सभी भारतीयों को तीज और ईद मुबारक



(दोनों चित्र फेसबुक से साभार )

Aug 8, 2013

पीले फूलों का सफर और बेचारा दद्दू सिंह

पता चला कि फूल तो अपनी सही जगह पहुँच गए मगर तीसरी बार भी बेचारे दद्दू सिंह की लाटरी का टिकट नकली ही निकला।
यह कलकत्ता में घटित सच्ची घटना है। दद्दू सिंह एक सरकारी दफ्तर में चपरासी था। बीड़ी पीने का शौकीन दद्दू सिगरेट को तोबा बोलता था। एक दिन सुबह वह पूरी टीम-टाम के साथ आया और साहब के सामने वाली कुर्सी पर तनकर बैठ गया। साहब ने उसके चमचमाते कपड़ों से आ रही तीखे सेंट की ख़ुशबू को बख़ूबी महसूस करते हुए तनिक हैरानी से देखा तो दद्दू सिंह बोला- " पंद्रह लाख की लॉटरी निकाल आई है इसलिए इस्तीफा देना चाहता हूँ।" 
 
(शेष भाग फिर कभी)

नई तस्वीर के साथ एक पुरानी कविता

फोटो - भुवन  (सर्वाधिकार सुरक्षित)

माँ ने कहा-
देख ले बेटा  
भाव यही
मेरे कहने का !

मैंने देखा-
बारिश में चुप
भीग रहा था
पंछी नीड़विहीन अकेला !


- अजय मलिक (c)