आपका मनचाहा कुंजीपटल आलेख एक बार फिर से संशोधित और अद्यतन करने का प्रयास किया गया है। लिंक नीचे दिया जा रहा है-
Nov 6, 2014
आपका मनचाहा कुंजीपटल आलेख पुन: अद्यतन करने का प्रयास किया गया है।
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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11/06/2014 02:02:00 PM
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Sep 23, 2014
:: भारत का पैंतालीसवाँ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा में :: :: 20 से 30 नवंबर 2014 तक ::
आप भी आइए, आपकी नुमाइंदगी का इंतज़ार है
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पंजीकरण का लिंक नीचे दिया जा रहा है-
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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9/23/2014 07:38:00 AM
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Sep 12, 2014
हिन्दी दिवस पर माननीय गृह मंत्री जी के संदेश का आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से सीधा प्रसारण होगा : राजभाषा विभाग
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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9/12/2014 08:12:00 PM
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Sep 5, 2014
जाइए आप कहाँ जाएंगे, हिन्दी फिर लौट के छा जाएगी :: गूगल का ऑनलाइन हिन्दी श्रुतलेखन और वह भी बिलकुल मुफ्त :: अब तो दिल से हिन्दी दिवस मनाइए और हो सके तो सच्चे मन से मुस्कुराइए
कॉन कहता हे कि आसमान मेँ सुराख नहीँ हो सकता कॉन कहता हे कि आसमान मेँ सुराख नहीँ हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो दोस्तो यह आश्चर्य जनक बात हे की जो काम हम करने के बारे मेँ सिर्फ सोचते रहे उसे गूगल ने कर डाला हे हिंदी मेँ बोलिए सिर्फ मेरे लिए हिंदी मे सिर्फ बोलते चले जाइए एक माइक्रो फोन लगाइए गूगल ट्रांसलेट न जाइए स्रोत भाषा हिंदी ० एक माइक्रोफोन एकॉन आपको दिखाई देगा उस माइक्रोफोन एकॉन को क्लिक कीजिए ओर गूगल ट्रांसलेट को माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की अनुमति दीजिए ओर बस डिक्टेशन शुरु कीजिए आपको जो भी बोलना हे बोलते चले जाइए गूगल ट्रांसलेट का यह लेख खान सॉफ्टवेयर यह गूगल ट्रांसलेट की हसरत लेकर सुविधा आपके द्वारा बोली गई हिंदी को दनादन टाइप करती चली जाती हे ये सुविधा निशुल्क हे आपको सिर्फ ब्लड बंक कनेक्शन चाहिए broadband कनेक्शन इंटरनेट का ब्रांड बेंड कनेक्शन चाहिए अगर आपके पास गार्डन कनेक्शन हे तो फिर आप हिंदी टाइपिस्ट या हिंदी आशुलिपिक के बारे मेँ सोचना छोड़ दीजिए मुझे नहीँ लगता हे की कोई भी हिंदी टाइपिस्ट या हिंदी आशुलिपिक इतना अच्छा डिक्टेशन हिंदी का ले सकता हे ये सब मेँ आपके सामने १ नाईट लगाकर बोल रहा हूँ नई एकमत लगाकर यह सब बोल रहा हूँ ओर पहली बार बलराम आप देख सकते हेँ कि पहली बार बोलने पर भी सॉफ्टवेयर कितने कमाल का लिखते सुन रहा हे ओर मेरी गति भी बहुत धीमी नहीँ हे मेँ काफी तेजी से बोल रहा हूँ ओर प्रतिमिनट मुझे लगता हे कि इससे ज्यादा शब्द मेँ बोल रहा हूँ ओरिया सॉफ्टवेयर लगातार बिना किसी संकोच के दनादन टाइपकर्ता जा रहा हे इससे ज्यादा ओर आपको क्या चाहिए स्क्रीनशॉट्स आप देख सकते हेँ ओर इस सुविधा का लाभ उठाकर हिंदी के महीने मेँ हिंदी दिवस हिंदी सप्ताह ऑफ हिंदी पखवारा मनाने की सिर्फ ओपचारिकता से बाहर आकर कुछ नया करने की कोशिश करेँ मित्रोँ जब हमारे पास तकनीकी बाधाएँ नाम की चीज ही नहीँ बची हे तो फिर मन को थोडा बदल लिए मन को हिंदी मेँ क्या कीजिए हिंदी मे माँ को आना चाहिए हिंदी में अपने मन को डुबो डालिए एक बार आपके मन हिंदी से जुड़ गया तो फिर सारी चीजेँ सत्ता होती चली जाए मुझे उम्मीद हे कि आप सॉफ्टवेयर का सही से प्रयोग करेंगे मेँ बिना किसी संशोधनके यह टेक्स यह पाठ आपके सामने रख रहा हूँ आपको केसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरुर दीजिए बहुत बहुत धंयवाद
आपका
अजय मलिक
आपका
अजय मलिक
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9/05/2014 09:23:00 PM
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Sep 3, 2014
हिन्दी दिवस पर माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह का संदेश
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9/03/2014 09:13:00 PM
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Aug 31, 2014
आखिर क्या लिखूँ !!
अगस्त 2014 का अंतिम दिन है और मैं चुप हूँ। अगस्त में एक भी पोस्ट नहीं ! कुछ भी नहीं ...एक अजीब सी बोरियत...सभी कुछ से विरक्ति...यह कोई अच्छा लक्षण तो नहीं है। अजीब सा दौर है ये। लगता है कि सांस लेने पर भी पाबंदी है। तीन दिन की छुट्टियों में बहुत सारा काम करना था मगर कुछ भी नहीं हुआ। अब जिंदगी शायद यूं ही निकल जाएगी।
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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8/31/2014 09:07:00 PM
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Jul 18, 2014
एण्ड्रोयड फोन पर कुछ और हिंदी-हिन्दी हो जाए -
आइए मुफ्त में हिंदी-हिंदी हो जाए
अपना फोन निकालिए और शुरू हो जाइए
अरे बाबा हिन्दी ही तो है
लिंक क्लिक तो कीजिए
डाउनलोड़िए, इंस्टालिए
और बस
शुरू हो जाइए -
अपना फोन निकालिए और शुरू हो जाइए
अरे बाबा हिन्दी ही तो है
लिंक क्लिक तो कीजिए
डाउनलोड़िए, इंस्टालिए
और बस
शुरू हो जाइए -
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7/18/2014 08:00:00 AM
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एण्ड्रोयड फोन पर हिन्दी की पढ़ाई, हिंदी व्याकरण और हिन्दी के लिए और भी बहुत कुछ
कृपया नीचे दी गई कड़ियों को आजमाइए तो सही -
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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7/18/2014 07:39:00 AM
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थक गया हूँ
थक गया हूँ
मन में अब
कोई ललक
बाकी नहीं है
आदमी को
जानने की
कोशिशों से
छक गया हूँ
तन में अब
कोई कसक
बाकी नहीं है
- अजय मलिक (c)
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7/18/2014 07:29:00 AM
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::::: राजभाषा विभाग की वेबसाइट का नए युग में प्रवेश :::::: हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा है
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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7/18/2014 07:25:00 AM
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Jul 12, 2014
एक उम्मीदवार का साक्षात्कार -
एक उम्मीदवार का साक्षात्कार -
प्रश्न : आपने ज़िन्दगी में कोई बड़ा काम किया है?
उम्मीदवार : अजी बड़े काम तो इतने किए हैं कि आप पूछिए मत। मैंने तो सारे ही काम बड़े किए है।
प्रश्न : कोई एक काम बताइए ?
उम्मीदवार: वैसे तो साब मैंने सारे ही काम बड़े किए हैं पर आप सिर्फ़ एक पूछ रहे हैं तो एक ही बता देता हूँ - छठी क्लास में मैं लगातार तीन साल तक माॅनीटर रहा था।
प्रश्न: आपको हिंदी आती है?
उम्मीदवार: साब हिन्दी तो ऐसी आती है कि बस पूछिए मत।
प्रश्न : अच्छा यह बताइए कि "चलती चाखी देख के दिया कबीरा रोय" का मतलब क्या है।
उम्मीदवार: साब ये तो कोई भी बता देगा। चाखी चल रही थी और कबीर का हाथ चाखी में आ गया और वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। जब उसका हाथ चाखी से निकाला तो वो लुहुलुहान था। कबीर रोते हुए बोला-देखो इन दो पाटो के बीच कुछ भी बाक़ी नहीं बचता।
प्रश्न : आपको उर्दू आती है?
उम्मीदवार: अजी साब उर्दू तो ऐसी आवे है कि ग़ालिब को भी न आवे।
प्रश्न : अच्छा "नीम- हकीम ख़तरा-ए-जान" का मतलब बताइए!
उम्मीदवार: अरे साब इसका मतलब है कि ओ मूर्ख हकीम, तू नीम के नीचे मत बैठ, तेरी जान को ख़तरा है।
प्रश्न : आपको अंग्रेज़ी आती है?
उम्मीदवार: साब, इंग्लिश तो ऐसी आवे है कि सारे अंग्रेज़ भाग जाए। आप सवाल पूछो..
प्रश्न ः अच्छा "फोर्टीफिकेशन" का मतलब बताओ?
उम्मीदवार: साब आप चालाक बन रहे हो। इंग्लिश और मैथ मिक्स करके पूछ रहे हो! कोई बात नहीं साब, मैं भी कोई कम चालाक नहीं हू।
फोर्टीफिकेशन वो होता है जिसमें ट्वेंटीफिकेशन में ट्वेंटीफिकेशन को जोड़ देते हैं।
प्रश्न ः आप कब से ड्यूटी पर आना चाहते हैं?
उम्मीदवार: साब, देखो जी आप मेरी बाट मत देखियो, मैं तो बस आपको आज़माने चला आया था नौकरी मेरे बस की बात नहीं है।
- अजय (c) शर्मा जी से हुई वार्ता पर आधारित
प्रश्न : आपने ज़िन्दगी में कोई बड़ा काम किया है?
उम्मीदवार : अजी बड़े काम तो इतने किए हैं कि आप पूछिए मत। मैंने तो सारे ही काम बड़े किए है।
प्रश्न : कोई एक काम बताइए ?
उम्मीदवार: वैसे तो साब मैंने सारे ही काम बड़े किए हैं पर आप सिर्फ़ एक पूछ रहे हैं तो एक ही बता देता हूँ - छठी क्लास में मैं लगातार तीन साल तक माॅनीटर रहा था।
प्रश्न: आपको हिंदी आती है?
उम्मीदवार: साब हिन्दी तो ऐसी आती है कि बस पूछिए मत।
प्रश्न : अच्छा यह बताइए कि "चलती चाखी देख के दिया कबीरा रोय" का मतलब क्या है।
उम्मीदवार: साब ये तो कोई भी बता देगा। चाखी चल रही थी और कबीर का हाथ चाखी में आ गया और वो ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। जब उसका हाथ चाखी से निकाला तो वो लुहुलुहान था। कबीर रोते हुए बोला-देखो इन दो पाटो के बीच कुछ भी बाक़ी नहीं बचता।
प्रश्न : आपको उर्दू आती है?
उम्मीदवार: अजी साब उर्दू तो ऐसी आवे है कि ग़ालिब को भी न आवे।
प्रश्न : अच्छा "नीम- हकीम ख़तरा-ए-जान" का मतलब बताइए!
उम्मीदवार: अरे साब इसका मतलब है कि ओ मूर्ख हकीम, तू नीम के नीचे मत बैठ, तेरी जान को ख़तरा है।
प्रश्न : आपको अंग्रेज़ी आती है?
उम्मीदवार: साब, इंग्लिश तो ऐसी आवे है कि सारे अंग्रेज़ भाग जाए। आप सवाल पूछो..
प्रश्न ः अच्छा "फोर्टीफिकेशन" का मतलब बताओ?
उम्मीदवार: साब आप चालाक बन रहे हो। इंग्लिश और मैथ मिक्स करके पूछ रहे हो! कोई बात नहीं साब, मैं भी कोई कम चालाक नहीं हू।
फोर्टीफिकेशन वो होता है जिसमें ट्वेंटीफिकेशन में ट्वेंटीफिकेशन को जोड़ देते हैं।
प्रश्न ः आप कब से ड्यूटी पर आना चाहते हैं?
उम्मीदवार: साब, देखो जी आप मेरी बाट मत देखियो, मैं तो बस आपको आज़माने चला आया था नौकरी मेरे बस की बात नहीं है।
- अजय (c) शर्मा जी से हुई वार्ता पर आधारित
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7/12/2014 11:15:00 PM
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सोम के जन्मदिन पर मेरी 70 अधूरी कविताएं
(1)
जब तन मन
से
बरसी बदली
बिजली चमकी
गरजी कड़की
कुछ पल को धरा
अचम्भित सी
पुलकित परवश
किंचित काँपी
थिरकी थमकर
थककर ठहरी
फिर सँभल गई
- अजय (c)
बरसी बदली
बिजली चमकी
गरजी कड़की
कुछ पल को धरा
अचम्भित सी
पुलकित परवश
किंचित काँपी
थिरकी थमकर
थककर ठहरी
फिर सँभल गई
- अजय (c)
(2)
हाँ, टूटना
अंतिम क्रिया है
पर टूटने तक पहुँचना
टूटने के योग्य बनना
टूटने तक ख़ूब हँसना
बस यही
जीवन हमारा
खेलना और
खिलखिलाना
दिलों की
दीवानगी का
राज बनना
लपलपाती
कौंधती कोई
आग बनना
अंतिम क्रिया है
पर टूटने तक पहुँचना
टूटने के योग्य बनना
टूटने तक ख़ूब हँसना
बस यही
जीवन हमारा
खेलना और
खिलखिलाना
दिलों की
दीवानगी का
राज बनना
लपलपाती
कौंधती कोई
आग बनना
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7/12/2014 11:13:00 PM
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Jul 7, 2014
हिंदी के नाम पर खड़खड़ाती दीवारों के परे
इस ब्लॉग को बड़ी उम्मीदों के साथ सृजित करने की कोशिश की थी। पहले यही विचार था कि रोज कम से कम एक चिट्ठा इस पर चश्पा किया जाएगा और यह क्रम कभी नहीं टूटेगा। पर ऐसा क्रम बनने से पहले ही बिखरने लगा। फिर भी कोशिश जारी रखी कि रोज न सही तीन दिन में या फिर सप्ताह में एक चिट्ठा जरूर पोस्ट करेंगे मगर अब अंतराल लगभग तीन माह का हो गया। अगर खानापूर्ति के लिए डाली गई पोस्ट को छोड़ दिया जाए तो शायद पिछले छह माह में कोई गंभीर चर्चा हिंदी सबके लिए पर नहीं की जा सकी। कारण बहुत सारे गिनाए जा सकते हैं मगर सबसे प्रमुख है उस विश्वास का पूरी तरह टूट जाना जो देश की भाग्य विधाता बड़ी-बड़ी सस्थाओं पर था। मार्च 2014 में हुई एक घटना ने सब कुछ इतना अविश्वसनीय बना दिया कि फिर किसी भी संस्था पर विश्वास करने का मन नहीं हुआ। अपनी पुरानी प्रकृति के अनुरूप चुनौती देने का मन भी हुआ मगर फिर निष्कर्ष यही निकाला कि मुर्दे को चुनौती का कोई प्रतिफल नहीं हो सकता । ज़िंदों से लड़ा जा सकता है, सुधारा जा सकता है मगर मुर्दों को कुछ नहीं किया जा सकता।
हिंदी के नाम पर जिसे भी देखा - दंतहीन, पोपले मुंह वाला पाया। ऐसे मुँह से सिर्फ पतला-पतला सा हलुआ ही खाया जा सकता है। हिंदी और हलुआ ... बस मन भर गया। हिंदी के लिए हरेक निर्णय हिंदी न जानने वाला करता है, हिंदी जानने वाला सिर्फ हलुआ बना सकता है। हिंदी न जानने वाला हिंदी के शोध प्रबंध तक बिना पढे ही समझ लेता है और हलुआ खाकर मस्त हो जाता है। हिंदी के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें कर हिंदी को लघु से लघुतर तक पहुंचाने के लिए दिन रात अँग्रेजी की ताल पर गाल बजाए जाते हैं, गोलबंदी की जाती है। हिन्दी के नाम पर जो दीवारें दिखाई देती हैं वे टीन की जंग लगी चादरें हैं जो अँग्रेजी के महल में चल रहे नए-नए शयन कक्षों के निर्माण कार्य से उठने वाली धूल और आवाजों को बेपरदा होने से रोकने के लिए अस्थायी रूप से लगाई गईं हैं। अंदर चल रहा पुख्ता और गगन चुंबी निर्माण कार्य नई-नई तकनीकों से लैस है और जब थोड़ी सी भी हवा चलती है तो टीन की पुरानी चादरें हिलने लगती हैं और उनसे खड़खड़ाहट उठने लगती है।
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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7/07/2014 01:55:00 PM
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Apr 30, 2014
मेरी सात अधूरी कविताएं - अजय मलिक
(1)
जब तुम
आ ही गए
तो ठहरो
जरा विश्राम करो
जाने की
इतनी भी
जल्दी क्या है
(2)
तू ज़िद के साथ जी
मैं जज़्बात में बहता हूँ
तू जीत का सुख ले
जुल्मी हार मैं सहता हूँ
(3)
रूठे हुए सब
खेत और खलिहान अपने
चल लौटता हूँ गाँव अपने
(4)
आसमां के आगे और
आसमां कोई नहीं
ज़िंदगी से मौत आगे
दास्ताँ कोई नहीं
(5)
बीत गईं रातें कई
बीत गए दिन
जीत गईं यादें कई
प्रीत-पल-छिन
(6)
नहीं होगा मुझसे प्यार
यार मुझको छोड़ दे
दिल पर नहीं है एतबार
यार मुझको छोड़ दे
(7)
तू अगर ख़ुश है तो
ख़ुशी का इज़हार कर
हो सके तो बेवफ़ा
तू भी किसी से प्यार कर
अरे आदमी है
आदमी की तरह व्यवहार कर
जब तुम
आ ही गए
तो ठहरो
जरा विश्राम करो
जाने की
इतनी भी
जल्दी क्या है
(2)
तू ज़िद के साथ जी
मैं जज़्बात में बहता हूँ
तू जीत का सुख ले
जुल्मी हार मैं सहता हूँ
(3)
रूठे हुए सब
खेत और खलिहान अपने
चल लौटता हूँ गाँव अपने
(4)
आसमां के आगे और
आसमां कोई नहीं
ज़िंदगी से मौत आगे
दास्ताँ कोई नहीं
(5)
बीत गईं रातें कई
बीत गए दिन
जीत गईं यादें कई
प्रीत-पल-छिन
(6)
नहीं होगा मुझसे प्यार
यार मुझको छोड़ दे
दिल पर नहीं है एतबार
यार मुझको छोड़ दे
(7)
तू अगर ख़ुश है तो
ख़ुशी का इज़हार कर
हो सके तो बेवफ़ा
तू भी किसी से प्यार कर
अरे आदमी है
आदमी की तरह व्यवहार कर
- अजय मलिक
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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4/30/2014 09:25:00 AM
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हसीब सोज़ की एक ग़ज़ल
इतनी सी बात थी जो समंदर को खल गई
का़ग़ज़ की नाव कैसे भंवर से निकल गई
पहले ये पीलापन तो नहीं था गुलाब में
लगता है अबके गमले की मिट्टी बदल गई
फिर पूरे तीस दिन की रियासत मिली उसे
फिर मेरी बात अगले महीने पे टल गई
इतना बचा हूँ जितना तेरे *हाफ़ज़े में हूँ
वर्ना मेरी कहानी मेरे साथ जल गई
दिल ने मुझे मुआफ़ अभी तक नहीं किया
दुनिया की राये दूसरे दिन ही बदल गई
- हसीब सोज़
* हाफ़ज़े=यादाश्त
का़ग़ज़ की नाव कैसे भंवर से निकल गई
पहले ये पीलापन तो नहीं था गुलाब में
लगता है अबके गमले की मिट्टी बदल गई
फिर पूरे तीस दिन की रियासत मिली उसे
फिर मेरी बात अगले महीने पे टल गई
इतना बचा हूँ जितना तेरे *हाफ़ज़े में हूँ
वर्ना मेरी कहानी मेरे साथ जल गई
दिल ने मुझे मुआफ़ अभी तक नहीं किया
दुनिया की राये दूसरे दिन ही बदल गई
- हसीब सोज़
* हाफ़ज़े=यादाश्त
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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4/30/2014 09:12:00 AM
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