Jun 22, 2011

गूगल ने दी हिन्दी के अतिरिक्त अन्य पाँच भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा

गूगल ने भारत में अपनी अनुवाद सेवाओं का विस्तार किया है। अब गूगल अनुवाद की सुविधा हिन्दी के साथ-साथ  बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में भी उपलब्ध है।

यहाँ हम गूगल अनुवाद के माध्यम से प्रवीण पाठ्यक्रम के प्रथम पाठ का तमिल अनुवाद दे रहे हैं। तमिल भाषी हिन्दी के विद्यार्थी कृपया बताएं कि इसमें कितनी शुद्धता है और कितने सुधार की आवश्यकता है?

நாங்கள் இந்தியாவின் கிழக்கு ஒரிசா பயணம் சலுகை விட்டு இந்த திட்டம் உருவாக்கப்பட்டது.

ஒரிசா எப்போதும் எங்களை கவர்ந்து வருகிறது. கடவுள் என் மனைவியும் சத்தியம் செய்ய பூரி ஜெகன்னாத் என்னை வணங்க தேவைப்பட்டது.நாங்கள் இரயில் ஒரிசா தலைநகர் புவனேஸ்வர் முடிவு வந்தோம்.

Jun 16, 2011

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित यहाँ दिए जा रहे प्रश्नोत्तर बड़े ही परिश्रम से हमारे मित्र श्री विश्वजीत मजूमदार, हिन्दी प्राध्यापक, हिन्दी शिक्षण योजना, दुर्गापुर ने तैयार किए हैं। 
  
पाठ -1

उड़ीसा की सैर


1.  लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर कहाँ जाने का कार्यक्रम बनाया ?

उत्तर- लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर उड़ीसा जाने का कार्यक्रम बनाया ।

2.  भगवान जगन्नाथ की नगरी किसे कहा जाता है ?

उत्तर- पुरी को भगवान जगन्नाथ की नगरी कहा जाता है ।

3.  जगन्नानथ मंदिर में किसकी मूर्तियां स्थापित हैं ?

उत्तर- जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं ।

4.  पुरी के समुद्र तट पर किस नदी का संगम होता है ?

उत्तर- पुरी के समुद्र तट पर चंद्रभागा नदी का संगम होता है ।

5.  कोणार्क का सूर्य मंदिर किस लिए विश्व प्रसिद्ध है ?

उत्तर- कोणार्क का सूर्यमंदिर अपने भव्य शिल्पकला केलिए विश्व प्रसिद्ध है ।

6.  लिंगराज मंदिर कितने मंदिरों का परिसर है ?

उत्तर- लिंगराज मंदिर 108 मंदिरों का परिसर है ।

Jun 12, 2011

ये फूल काश्मीर के

ये गुलिस्ताँ हमारा

गुलमार्ग

चश्मे-शाही और चार चिनार



फोटो: (c) अजय मलिक
             ऋचा मलिक

हुक्का, हारा, चूल्हा, चक्की

Jun 8, 2011

प्रवीण पाठमाला पाठ 1 तमिल लिप्यांतरण

(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सीडैक )

இஸ பார ஹமநே சுட்டீ யாத்ரா ரியாயத லேகர பாரத கே பூர்வ மேஂ ஸ்தித உட஼ீஸா ஜாநே கா கார்யக்ரம பநாயா .


உட஼ீஸா ஹமேஂ ஹமேஷா ஹீ ஆகர்ஷித கரதா ரஹா ஹை . ஈஷ்வர மேஂ அகாத ஷ்ரத்தா கே காரண ஜகந்நாத புரீ கே தர்ஷந கரநா மேரீ வ மேரீ பத்நீ கீ இச்சா தீ . இஸகே ஸாத ஹீ ஸம்ராட அஷோக கீ கலிஂக விஜய கா யுத்த க்ஷேத்ர வ அந்ய ஐதிஹாஸிக ஸ்தல பீ மைஂ தேகநா சாஹதா தா . ஹம ரேல ஸே உட஼ீஸா கீ ராஜதாநீ புவநேஷ்வர பஹு஁சே .

Jun 4, 2011

कुछ फूल कश्मीर से


                              फोटो:  (C) अजय मलिक

May 14, 2011

इस अंतराल का अंतर्द्वंद्व

जब से हिन्दी सबके लिए ब्लॉग शुरू हुआ है तब से इतना लंबा अंतराल हावी नहीं हुआ। मैं खुद हैरान-परेशान हूँ कि क्यों टंकण करने वाली दो अंगुलियाँ कुछ भी लिखने / टंकित करने के विचार भर से ही दुखने लगती हैं! क्यों विभ्रम जैसी मनोदशा है? क्यों, कुछ भी लिखने के ख्याल से मन में अजीब सी गहरी उदासी भर जाती है? विचार आते हैं और कभी-कभी बड़ी तेजी से और बेहिसाब आते हैं मगर बारिश होने से पहले ही बादल छट जाते हैं। तपती धूप में तन-मन जलने लगता है। समंदर के किनारे रहते हुए भी लू के थपेड़े झुलसाते हैं?

पता नहीं मैं हिंदी को लेकर परेशान हूँ या मेरी परेशानी का कारण हिंदी है? पता नहीं मैं पढ़ाने को लेकर परेशान हूँ या प्रशासन को लेकर परेशान हूँ। कभी-कभी लगता है कि परेशान रहना, परेशानी के साथ रहना, परेशानों और महा परेशानों के बीच रहकर खुद को परेशान रखना और फिर इस सबसे परेशान होकर खुद को परेशान महसूस करना ही मेरी नियति बन गई है। फिर सोचता हूँ अपनी परेशानी को लेकर घुटते रहने की कोई पक्की वज़ह भी तो होनी चाहिए!

सोचने से कान, नाक और फिर गले में दर्द होने लगता है। फिर यह दर्द माथे में और फिर पूरे सिर में हो जाता है। दर्द की दवाए बेअसर हो गई लगती हैं। अच्छी नींद आ जाती है तो सब ठीक हो जाता है। नाक के ऑपरेशन के बाद संवेदनशीलता बहुत बढ़ गई है। अब बदबू ज्यादा महसूस होती है। बाग-बगीचे तो दिखाई नहीं पड़ते। गटर के ढक्कन और उनसे बहता काला-नीला सा पानी वगैरा बहुत दिखाई देते हैं। स्कूटर चलाते समय बहुत सावधान रहना पड़ता है। इस चक्कर में  गटर ही गटर दिखाई देते हैं। गटर और गड्ढों से बचकर चलने की सावधानी में कई बार आदमी पास से गुजर जाता है।

फिर अंतराल आता है और अंतर्द्वंद्व से फलने फूलने लगता है।

Apr 18, 2011

टूटी दुकान में बड़ी तिजोरी है

टूटी फूटी सी दुकान में
चोरों ने देखा-
बड़ी सी एक तिजोरी में
बड़ा मजबूत सा ताला पड़ा है।

हैरान से हँसकर वे बोले-
गुरु घंटाल हैं बड़े
बेशर्म हैं जिनसे पाला पड़ा है।

ये खुरदरे चेहरे बड़े बे-रौनक सही
मगर हैं मगर
अंदर बड़ा घोटाला पड़ा है।

इस पुरानी
रेजगारी पर मत जाइए
तनिक घिसे सिक्कों को
परे सरकाइए

फिर देखिए
कितना बे-हिसाब और
बे-शुमार है
जो काला पड़ा है।

टूटी दुकान में बड़ी तिजोरी है
और तिजोरी में ताला पड़ा है।
-अजय मलिक
03-05-1985, प्रात: 9.00 बजे

बरस, दो-चार बरस

बरस, दो-चार बरस
वेदना-फुहार बरस
ज़ख्मों को छील-छील
प्रीत की पुकार बरस

चल कहीं दूर चलें
बरस दो चार बरस
भूल जाएं बीते सब
बरस दो चार बरस

आह से छलक-छलक
बीती बहार बरस
जीवन को लांघ कर
सपनों के पार बरस

पलकों की कोर छोड़
आंसू की धार बरस
हो सके तो बार-बार
और बहुत बार बरस

-अजय मलिक 
(01 -03 -1988) प्रात:

Apr 10, 2011

ए सी की सीली सीली सी हवा में

अब भी बहुत याद आता है
वह पुराना घर
वह घेर का ओसारा
बकांद के  पेड़ तले  बनी
गाय की खोर।

वह चौमासे की टपकती रात में
बिन बारिश भी
घंटों बरसती छान।

बूढ़े बाबा की बुनी वह खाट
और उसके बान, पायतें
वह हुक्का-गुडगुडी-चिलम
और दहकते अंगारे।

कोल्हू की वह रात-रात भर चलती जोटें
ताजे गुड की महक और
खोई की भट्टी का वह धुंआधार अलाव।

कुंडीवाले कुएं पर तपती दुपहरी में
घंटों डुबकियां लगाना - नहाना  
हरट के पतनाले की धार की गुलगुलियाँ,

वाह क्या खूब थी वह भी
हमारी जिंदादिल
चालीस साल पुरानी दुनियाँ।

अब पचास के चेहरे पर
सदाबहार तने तनाव के बीच
ए सी की सीली सीली सी हवा में
ये यादें  पुरवाइयां भर जाती हैं...

- अजय  मलिक  

Apr 7, 2011

दो अच्छी गज़लें

 (१)  
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है
कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है

जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है

होश अपने का भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है

देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,
फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है

हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में
रास्ता है कि कहीं और चला जाता है

दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की
आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।
                                             -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
(२)
अगर आप होते भुलाने के क़ाबिल,
तो होते कहां दिल लगाने के क़ाबिल !

वो वादा तुम्हारा , भरोसा हमारा ,
लगे कब हमें टूट जाने के क़ाबिल !

बसी है जो आंखों में तस्वीर तेरी ,
नहीं आंसुयों से मिटाने के क़ाबिल !

अँधेरे जुदाई के कुछ कम तो होते ,
जो होते तेरे ख़त जलाने के क़ाबिल !

मुहब्बत की शायद हक़ीक़त यही है ,
कि शै है ये सपने सजाने के क़ाबिल !

सनम मुझ को मंज़ूर मरना ख़ुशी से ,
बने मौत लेकिन फ़साने के क़ाबिल !

                                            -मधुभूषण शर्मा 'मधुर'


(कविता कोश के सौजन्य से) 

Apr 4, 2011

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ




नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें । यह पर्व साल में दो बार आता है। एक शारदीय नवरात्रि, दूसरा है चैत्रीय नवरात्रि। नवरात्रि के नौ रातो में तीन हिंदू देवियों - पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं ।

नौ देवियाँ है :-


श्री शैलपुत्री

श्री ब्रह्मचारिणी

श्री चंद्रघंटा

श्री कुष्मांडा

श्री स्कंदमाता

श्री कात्यायनी

श्री कालरात्रि

श्री महागौरी

श्री सिद्धिदात्री

शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं । नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।

नवदुर्गा और दस महाविधाओं में काली ही प्रथम प्रमुख हैं। भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दस महाविधाएँ अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं। देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है। सभी देवता, राक्षस, मनुष्य, गंधर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं।

( उपर्युक्त पाठ  विकिपीडिया से साभार लिया गया है. विस्तृत पाठ संलग्न लिंक 

नवरात्रि 

 से से प्राप्त  किया जा सकता है  )



Apr 2, 2011

अब लीला पाठ्यक्रमों के साथ मॉडल ऑनलाइन परीक्षा भी


राजभाषा विभाग ने लीला हिंदी प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पाठ्यक्रमों की ऑनलाइन परीक्षा के परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए अब अपनी वेबसाईट http://www.rajbhasha.gov.in/ पर उपर्युक्त लीला पाठ्यक्रमों के साथ मॉडल ऑनलाइन परीक्षा भी उपलब्ध करा दी है। इस मॉडल परीक्षा का लिंक लीला पाठ्यक्रमों के पंजीकरण पृष्ठ पर दिया गया है। इस प्रयास से राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में अवश्य ही प्रगति होगी।
हिंदी सबके लिए परिवार की और से साधुवाद।


(राजभाषा विभाग के सौजन्य से)

Apr 1, 2011

बहुवचन

निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन बताएं -

१. चौथाई
२. आधा
३. तिहाई
४. पौना


( एक अप्रेल पर विशेष )

Mar 31, 2011

चार से भी ज्यादा चाँद हैं यहाँ ... राजभाषा विभाग की वेबसाइट का कायाकल्प और नया वार्षिक कार्यक्रम

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की वेबसाईट ने आज एक नए युग में प्रवेश किया है। सब कुछ इतना प्रीतिकर, सुखद, आकर्षक और उपयोगी है कि इसे कायाकल्प कहने में कोई संकोच नहीं है। राजभाषा हिन्दी से संबन्धित जो भी चाहिए मुखपृष्ठ से एक क्लिक करने भर से पाया जा सकत है। वेबसाईट के हर कोण से राजभाषा के रूप में हिंदी का रूतबा साफ़ नज़र आता है.

राष्ट्रपति जी के आदेश हों या राजभाषा भारती के अंक...इस वर्ष के क्षेत्रीय सम्मेलन हों या पिछले कई वर्षों के सम्मेलन...फोटो गैलरी हो या वार्षिक कार्यक्रम वगैरा सभी कुछ मौजूद है और पूरी बेबाकी के साथ।

-और सबसे बड़ी बात मुखपृष्ठ पर ही हिंदी के अनगिनत सितारों के साथ, चार नहीं पूरे पांच चमकते चाँद भी अपनी भरपूर चाँदनी के साथ मौजूद हैं - भारतेंदु हरिश्चंद, महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद, महात्मा गांधी और महावीर प्रसाद द्विवेदी ...

वर्ष 2011-12 का वार्षिक कार्यक्रम भी आज जारी कर दिया गया है। इस वार्षिक कार्यक्रम में सभी मदों के लक्ष्य बेहद व्यवस्थित और तार्किक रूप में निर्धारित किए गए हैं। हिंदी में डिक्टेशन के लक्ष्य क, ख, और ग क्षेत्र के लिए क्रमश: 65, 55 और 30 प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं ताकि उपर्युक्त क्षेत्रों के लिए निर्धारित हिंदी पत्राचार के 75 से 100 , 75 से 90 और 55 प्रतिशत लक्ष्यों को प्राप्त करने में आसानी हो।

इसी प्रकार हिंदी पुस्तकों की खरीद के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्यापक संभावनाएं सृजित करते हुए सभी प्रकार के हिंदी / इंडिक सॉफ्टवेयर, सी डी, डी वी डी यहाँ तक कि पैन ड्राइव्स तक के लिए छूट दी गई है।

शत-प्रतिशत हिंदी में कार्य करने के लिए विनिर्दिष्ट किए जाने वाले अनुभागों के मामले में बेहद सहजता के साथ समस्या समाधान करते हुए नए वित्तीय वर्ष के लिए क, ख, ग क्षेत्र के कार्यालयों के लिए क्रमश: 40, 30 तथा 20 प्रतिशत अनुभागों को समस्त कार्य हिन्दी में करने का लक्ष्य रखा गया है। जिन कार्यालयों में कोई अनुभाग नहीं हैं वहाँ क्षेत्रवार कार्यालय के संपूर्ण कार्य का 40 , 30 तथा 20 प्रतिशत कार्य हिंदी में करने का लक्ष्य रखा गया है।

इतने व्यवस्थित और व्यवहारिक प्रयासों में राजभाषा विभाग की माननीय सचिव जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में जिन वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्मिकों ने अथक परिश्रम किया है वे सभी बधाई के पात्र हैं।

निशुल्क पाइए, लीला प्रबोध, प्रवीण एवं प्राज्ञ पाठ्यक्रमों की सी डी !!

सूचना अधिकार अधिनियम 2005  के तहत सी डेक से प्राप्त जानकारी के अनुसार लीला प्रबोध, प्रवीण एवं प्राज्ञ पाठ्यक्रमों की सी डी'ज़ अब निशुल्क मिल सकेंगी!!  सी डेक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार  राजभाषा विभाग अथवा केन्द्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान से लिखित अनुरोध किए जाने पर उपर्युक्त पाठ्यक्रमों की सी डी'ज़ निशुल्क प्राप्त हो सकेंगी !! 

Mar 20, 2011

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

Mar 13, 2011

सुनामी को सर्वनाशी या महाविनाशी कहना चाहिए!!

जापान में भूकंप और सुनामी से जो कुछ हुआ है उसकी कल्पना से भी डर लगता है. सागर का संहार देखकर आदमी को अपने अस्तित्व का एहसास करना होगा और प्रकृति की परम सत्ता को स्वीकारना होगा. हमारा विज्ञान प्रकृति या ब्रह्मांड की विशालता के समक्ष अज्ञान भर है. बस इतना जरूर सोचना चाहिए कि क्या हिंदी में सुनामी को कुछ और नहीं कहा जा सकता? सु से अच्छे का बोध होता है, प्रलयंकारी सुनामी को 'अच्छे नाम वाली'  तो नहीं ही कहा जाना चाहिए.

सुनामी को सर्वनाशी, महाविनाशी, कुनामी अथवा क्रूरनामी कहने में क्या हर्ज़ है!!

Mar 2, 2011

दो वर्ष तक होती है पोस्टल ऑर्डर की वैधता।

एक जमाने में पोस्टल ऑर्डर पर मुद्रित होता था कि इसकी वैधता जारी किए जाने की तिथि से छह माह तक है। आजकल ऐसा कोई निर्देश पोस्टल ऑर्डर पर मुद्रित नहीं होता। डाक विभाग का इंटरनेट पर उपलब्ध मैन्युअल अपने मूल रूप में है और उसमें भी यही दर्ज़ है कि पोस्टल ऑर्डर की वैधता मात्र छह माह तक है तथा अतिरिक्त कमीशन देने पर इसे जारी किए जाने की तारीख से एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।    
वास्तविकता यह है कि डाक विभाग द्वारा दिनांक: 25-09-1995 को जारी डी.ओ.नं. 15-6/88-पी ओ द्वारा भारतीय पोस्टल ऑर्डर की वैधता जारी किए जाने की तिथि से दो वर्ष तक की जा चुकी है। दो वर्ष की अवधि के बाद अतिरिक्त कमीशन के डाक टिकट पोस्टल ऑर्डर के पीछे लगाए जाने पर यह तीसरे वर्ष के लिए भी वैध हो जाता है।

Feb 22, 2011

युनाइटेड इंडिया के हिंदी अधिकारियों की कार्यशाला : केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उपसंस्थान, चेन्नै की एक और उपलब्धि







केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उपसंस्थान, चेन्नै के लीला हिंदी कंप्यूटर केंद्र में दिनांक 21.02.2011 से 22.02.2011 तक युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंश कं0 लि0 के देश के विभिन्न प्रांतों से आए हिंदी अधिकारियों के लिए "हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड" विषय पर दो दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंश के 21 क्षेत्रीय कार्यालयों से आए प्रतिभागियों ने निम्नलिखित विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया-

1. हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड परिचय एवं विभिन्न विंडोज में सक्रियता,

2. कंप्यूटर हार्डवेयर-सॉफ्टवेर एवं इंडिक के साथ विंडोज इन्स्टालेशन,

3. हिंदी ई-लर्निंग एवं एवं भारतीय भाषाओं में ई-मेल,

4. एम एस ऑफिस,(वर्ड, एक्सेल व पावर पाइंट ) में इंडिक एवं हिंदी यूनिकोड का प्रयोग,

5. विभिन्न यूनिकोड एवं लिपि परिवर्तक

लगभग 25 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया। साथ ही उन्होंने और अधिक प्रेक्टिकल्स व अभ्यास के लिए समय दिए जाने तथा विंडोज एक्स पी तथा विंडोज 2000 ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कुछ कंप्यूटरों की भी उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने का सुझाव दिया।

कार्यशाला का उद्घाटन युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंश मुख्यालय के महाप्रबंधक ने किया तथा व्याख्याता थे श्री अजय मलिक, श्री ई गुरूप्रसाद तथा श्रीमती प्रतिभा मलिक।


  

Feb 20, 2011

तमिलनाडु जितनी ईमानदारी हिंदी के प्रति कहीं नहीं है

मैं एक दिल्ली में रहने वाले ऐसे सज्जन को जानता हूँ जो हमेशा किसी भी सुधारात्मक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया में रटा-रटाया जवाब देते हैं -"अरे साहब, ऐसा करने से तमिलनाडु में हंगामा हो जाएगा।" उनके इस उत्तर से उनका कितना हित होता है ये तो वे ही बता सकते हैं मगर इससे हिन्दी का तो कोई हित होता मुझे नज़र नहीं आता। मुझे हैरानी होती है कि हिन्दी के प्रचार-प्रसार का तथाकथित बीड़ा उठाने वाले लोग तमिलनाडु में हिंदी के नाम से इतने अधिक क्यों डरते हैं?

आज पदमश्री डॉ रामासामी जी से एक बार फिर मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पिछले कई वर्षों से वे सचिव, भारत सरकार के पद पर आसीन हैं और आज भी उनकी सरलता मन मोह लेती है। एक महान वैज्ञानिक के साथ-साथ वे संस्कृत के प्रकांड पंडित कहे जा सकते हैं। उन्होंने केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान यानी सी एल आर आई, चेन्नई में कई वर्षों तक  बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के लिए हिंदी भाषा का प्रशिक्षण आयोजित करवाया। मुझे और श्रीमती प्रतिभा मलिक को वह प्रशिक्षण चलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  यह प्रशिक्षण कई अर्थों में लीक से हटकर था। देश भर में यह दूसरा प्रशिक्षण केंद्र था जहां हिंदी भाषा का प्रशिक्षण कंप्यूटर-इन्टरनेट और एल सी डी प्रोजेक्टर के माध्यम से चला।

उल्लेखनीय है कि हमारे देश में सबसे पहला कंप्यूटर-प्रोजेक्टर आधारित हिंदी भाषा प्रशिक्षण केंद्र भी वर्ष 2001 में चेन्नई में ही शुरू हुआ था और इसे शुरू करने सौभाग्य भी संयोग से मुझे ही प्राप्त हुआ। चेन्नई में एक जगह है पल्लीकर्णी और वहाँ एक बहुत बड़ा परिसर है- एन आई ओ टी का... इसी परिसर में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का एक छोटा सा कार्यालय और भी है -आई सी एम ए एम जिसे हम लोग इकमाम भी कहते हैं, यह वही कार्यालय है जहां हिंदी भाषा का पहला कंप्यूटर-एल सी डी प्रोजेक्टर आधारित सरकारी प्रशिक्षण केंद्र चला। उसके बाद सी एल आर आई... फिर आई आई टी मद्रास...बी ई एल मद्रास...ई टी डी सी और फिर राजाजी भवन, बेसंट नगर,  मद्रास...

क्या देश में तमिलनाडु के बाहर  किसी शहर में कोई और ऐसी जगह है जहां हिन्दी शिक्षण योजना के हिन्दी भाषा के कंप्यूटर-इन्टरनेट-एलसीडी प्रोजेक्टर आधारित इतने सारे केंद्र बिना किसी बाधा के चले हों?  

बहुत कम लोग यह जानते हैं कि हिन्दी प्राध्यापकों के मामले में माननीय मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अप्रेल 2009 में याचिकाकर्ता श्रीमती प्रतिभा मलिक को निर्देश दिया कि मामला हिन्दी प्राध्यापकों से संबन्धित है अत: क्यों न बहस भी हिन्दी में की जाए। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि खंडपीठ के दोनों माननीय न्यायाधीशों और याचिकाकर्ता में से  किसी की भी मातृभाषा हिन्दी नहीं थी। देश के इतिहास में पहली बार 9 अप्रेल 2009 को मद्रास उच्च न्यायालय में लगभग 10 मिनट तक हिन्दी  में बहस हुई और उसके बाद मिश्रित भाषा में। 

इतना सब होने के बाद भी कहीं कोई समस्या नहीं हुई कोई हंगामा नहीं हुआ। वर्ष 2006-07  में मदुरै में राजभाषा हिन्दी के कार्यक्रमों में 250 से 300 तक प्रतिभागी शामिल हुए और तीन स्थानीय टीवी चैनलों ने उस कार्यक्रम को रिकार्ड किया। कोई हंगामा नहीं हुआ।

इतने पर भी अगर कोई हिन्दी के बहाने तमिलनाडु पर अंगुली उठाता है तो वह अपेक्षा से कम ईमानदार है। सच्चाई यह है कि तमिलनाडु जितनी ईमानदारी हिंदी के प्रति देशभर में कहीं नहीं है।

-अजय मलिक

Feb 16, 2011

हिंदी और मलयालम में आन फ़िल्म का एक गीत

तुझे खो दिया हमने पाने के बाद हो – 2

तेरी याद आई… तेरी याद आई- तेरे जाने के बाद
तेरी याद आई
तुझे खो दिया हमने

मिला था ना जब तक जुदाई का गम
मोहब्बत का मतलब ना समझे थे हम
तड़पने लगे तीर खाने के बाद तड़पने लगे
तड़पने लगे तीर खाने के बाद
तेरी याद आई… तेरी याद आई- तेरे जाने के बाद
तेरी याद आई
तुझे खो दिया हमने


निगाहों में अब तू सामने लगा
तेरा नाम होठों पे आने लगा
हुए हम तेरे एक ज़माने के बाद
हुए हम तेरे
हुए हम तेरे एक ज़माने के बाद
तेरी याद आई… तेरी याद आई- तेरे जाने के बाद
तेरी याद आई
तुझे खो दिया हमने


मोहब्बत मिली और तू खो गया तू खो गया
ओह बदलते ही किस्मत यह क्या हो गया क्या हो गया
खुशी छिन गयी दिल लगाने के बाद
खुशी छिन गयी
खुशी छिन गयी दिल लगाने के बाद
तेरी याद आई… तेरी याद आई- तेरे जाने के बाद
तेरी याद आई

തുജ്ഹെ   ഖോ ഡിയ ഹംനേ പാനേ കെ ബാത്‌ ഹോ– 2

തെറി യാത് ആയി… തെറി യാത് ആയി- ടേറെ ജാനേ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി
തുജ്ഹെ ഖോ ഡിയ ഹംനേ


മില ത ഞ ജബ് ടക്‌ ജൂഡാി ക ഗം
മോഹബ്ബത്‌ ക മാത്ലബ് ഞ സാംച്േ തെ ഹം
താടപ്നേ ലാജ് തീര്‍ ഖാനെ കെ ബാത്‌ താടപ്നേ ലാജ്
താടപ്നേ ലാജ് തീര്‍ ഖാനെ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി… തെറി യാത് ആയി- ടേറെ ജാനേ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി
തുജ്ഹെ ഖോ ഡിയ ഹംനേ



നികാഹോന്‍ മീന് അബ്‌ ടു സാമാനെ ലാക
ടെറാ നാം ഹോത്ോണ് പെ ആനെ ലാക
ഹ്യൂയേ ഹം ടേറെ ഏക് സേമാനേ കെ ബാത്‌
ഹ്യൂയേ ഹം ടേറെ
ഹ്യൂയേ ഹം ടേറെ ഏക് സേമാനേ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി… തെറി യാത് ആയി- ടേറെ ജാനേ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി
തുജ്ഹെ ഖോ ഡിയ ഹംനേ


മോഹബ്ബത്‌ മിലി ഔര്‍ ടു ഖോ ഗായാ ടു ഖോ ഗായാ
ഓ ബദല്‍ടെ ഹി കിസ്മറ്റ് യ് ക്യാ ഹോ ഗായാ ക്യാ ഹോ ഗായാ
ഖൂശി ച്ചിന്‍ ഗായി ഡില്‍ ലകാണെ കെ ബാത്‌
ഖൂശി ച്ചിന്‍ ഗായി
ഖൂശി ച്ചിന്‍ ഗായി ഡില്‍ ലകാണെ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി… തെറി യാത് ആയി- ടേറെ ജാനേ കെ ബാത്‌
തെറി യാത് ആയി

Feb 9, 2011

मान जब हार लेता हूं तभी उम्मीद दिखती है

एक ग़ज़ल या गीत मुझे ई मेल से अग्रेषित होकर आया है. रचयिता का नाम नहीं दिया गया है. मुझे भी रचनाकार का पता नहीं है लेकिन इसे पढ़ना अच्छा लगा आप भी अपनी अवश्य राय दें -

कभी मिलती हैं मांगे से, कभी बिन चाह मिलती हैं,
अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं..

चलूं गर राह पर दिल की, तो मिलती ठोकरें हर दम,
बढ़ाऊं होश से कदमों को तो भी है मिले बस ग़म,

जलाकर रूह को, दिल से निकलती आह चलती हैं,
अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं..

मोहब्बत उनसे करते हैं, बड़ी मुश्किल से बतलाया,
सुना इनकार जो, दिल को बड़ी मुश्किल से समझाया,

मगर उन ही से टकराती मेरी हर राह चलती है,
अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं..

ज़रूरत से कभी दे ज़्यादा, वो विश्वास देता है,
कभी बस भूख देता है, उबलती प्यास देता है,

बढ़ाऊं या मैं रोकूं जो दुआ में बांह चलती हैं..
अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं..

मान जब हार लेता हूं तभी उम्मीद दिखती है,
कई रमज़ान गुज़रें साथ तब इक ईद दिखती है,

मनाऊँ मौत को तो जीने की फिर चाह पलती है,
अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं..

कभी मिलती हैं मांगे से, कभी बिन चाह मिलती हैं,
अजब है ज़िन्दगी, हर मोड़ पर दो राह मिलती हैं..

Feb 8, 2011

यह शोक की घड़ी है

                                                                                                                                                                 श्री केवल कृष्ण के साथ स्वर्गीय शमशेर अहमद खान    

                                                                                                       
          
एक सहकर्मी मित्र श्री शमशेर अहमद खान के असामयिक निधन पर हम सब शोकग्रस्त हैं तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। केंद्रीय हिन्दी प्रशिक्षण संस्थान के सहायक निदेशक श्री शमशेर अहमद खान अब हमारे बीच नहीं रहे।  

Feb 7, 2011

मूल्यांकन रिपोर्ट

राजभाषा विभाग,गृह मंत्रालय की वेब साइट से साभार

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Feb 6, 2011

अँधियारा मिटाते-मिटाते मिट जाता है उजाला !

कितने लोग, कितने विचार और कितनी कहानियाँ...बस यूंही एक विचार सा आया... अचानक एक पत्रकार मित्र की याद आई...पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में मुलाक़ात हुई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया में काफी गंभीर लेख छपते थे उनके... करीब 15 वर्ष पहले फोन पर बात हुई थी...मुंबई से वे दोनों पति-पत्नी कार में पूरे केरल की यात्रा करके लौटे थे...

आज अचानक नाम याद आया तो फेसबुक पर ढूंढ बैठा...पता चला दोनों कैलिफोर्निया में यू एन करी नाम से कैटरिंग का व्यापार कर रहे हैं। कई किताबें हैं उनकी स्वादिष्ट भोजन और पकवानों पर... थ्री इडियट्स फिल्म की याद ताज़ा हो गई... हमें करना वही चाहिए जिसे करने में मज़ा आए।

एक और मित्र आई आई टी के श्रेष्ठ विद्यार्थी आजकल अचल संपत्ति का व्यापार कर रहे हैं जिसे प्रॉपर्टी बिजनेस भी कहते हैं... बता रहे थे यह प्रॉपर्टी 95 लाख की है और ये तीन करोड़ की, सिर्फ 10 प्रतिशत प्रीमियम चाहिए। मैं इन्हीं विचारों में खोया हूँ और अपना हिसाब-किताब देख रहा हूँ। पी एफ के अलावा और कोई छलावा नहीं, नकदी के नाम पर कुछेक हज़ार रुपए... हिंदी के अलावा कोई और लगाव नहीं... हिंदी की वजह से जाने कितने लोगों से अलगाव।

एक वरिष्ठ गुरु मित्र ने दस दिन पहले बताया था “अधिकांश वीरता चक्र मरणोपरांत मिलते हैं...जीने का मोह है तो चक्रों का चिंतन छोड़ दो।” एन सी ई आर टी ने तो पूरी कोशिश की थी मुझे एक अच्छा परामर्शदाता बनाने की...तब मुझे भी लगता था कि मैं लोगों का मनोविज्ञान समझने लगा हूँ...मगर आज लगता है कि मुझसे ज्यादा अनपढ़-गवार कोई नहीं है और सबसे ज्यादा परामर्श की जरूरत शायद मुझे ही है।

मैं घर का बल्ब बदलने से लेकर पंखे फिट करने तक का सारा बिजली का काम कर लेता हूँ, मौंके-बेमौके प्लम्बिंग में भी हाथ आज़मा लेता हूँ। खेती करने, हल जोतने, गुड बनाने, थ्रेशर चलाने, डीजल इंजिन की मरम्मत करने, कंप्यूटर के हिस्से-पुर्जे लाकर जोड़ने और उल्टे-सीधे सॉफ्टवेयर लगाकर चालू करने का काम मैं कर लेता हूँ। खिचड़ी बनाने का बहुत लंबा अनुभव है मेरे पास और मेरी बनाई खिचड़ी खाने वालों में चाणक्य फेम डॉ चन्द्रप्रकाश से लेकर ‘ये साली ज़िंदगी’ के इरफान खान तक शामिल हैं।

इतने पर भी मैं हिंदी-हिंदी के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ और इस काम में भी मैं प्रामाणिक सफलता से दूर ही नहीं, बहुत दूर हूँ। हाँ, दुश्मनों की एक इतनी लंबी कतार जरूर है जो शुरू होती तो दिखाई देती है मगर कहाँ तक जाती है यह नज़र नहीं आता...शायद आसमान तक है इसकी लंबाई।

क्या मैं आज अपने हिंदीग्रस्त व्यक्तित्व को बदल सकता हूँ...क्या मैं पचास की उम्र में इस रोग का इलाज कर सकता हूँ याकि कहीं कोई ऐसा डॉक्टर है जो इस लाइलाज बीमारी का इलाज कर सकता है? अगर नहीं तो मुझे अपने आपको स्वीकारना होगा और अपनी इस बीमारी को वरदान समझते हुए सहजता से जीना होगा क्यों कि ऐसा ना करने पर मेरा व्यक्तित्व पूरी तरह विखंडित हो जाएगा। एक सिपाही को मृत्यु के भय से फ्रंट से भागना शोभा नहीं देता, उसे तो सिर्फ अपना युद्ध करने का कर्तव्य पूरा करना है, वह सीमा पर दुश्मन की फौज से किसी चक्र की प्राप्ति के लिए नहीं लड़ता बल्कि अपने धर्म के पालन के लिए लड़ता है। उसके जीवन का उद्देश्य ही अपने धर्म अपने कर्तव्य के लिए, अपनी मातृभूमि के लिए जीवन न्यौछावर कर देना है। वह यह नहीं देखता कि दूसरे सिपाही क्या कर रहे हैं। उसे हार जीत की भी चिंता नहीं है, उसे सिर्फ लड़ते जाना है जब तक लड़ने की शक्ति है... चेतना है।

क्या लड़ाइयाँ केवल किसी युद्ध को जीतने के लिए लड़ी जाती है? लड़ने वाला यूंही तो नहीं लड़ता और लड़ने वाले दोनों–तीनों या चारों अपनी-अपनी सोच के अनुसार सही काम कर रहे होते हैं। छोटी-छोटी लड़ाइयाँ कब युद्ध बन जाती हैं...और कितने दुश्मन हमला करने निकाल पड़ते हैं... एक छोटा सा बेक्टीरिया कितनी जल्दी अरबों की फौज खड़ी कर लेता है...उससे लड़ने के लिए शरीर को कितने एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ती है। शरीर का धर्म है बेक्टीरिया से लड़ना उधर बेक्टीरिया का धर्म है शरीर को समाप्त करना...

कुछ लड़ाइयाँ बल्कि अधिकांश लड़ाइयाँ हारने के लिए ही लड़ी जाती हैं...उन्हें हार जाने में ही सबसे बड़ी जीत होती है...महाभारत के पात्र भीष्म पितामह न चाहते हुए भी पूरी ईमानदारी से कौरवों की ओर से लड़ते हैं...वे युद्ध की परिणति अच्छी तरह से जानते हैं मगर ये भी जानते हैं कि युद्ध के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है। वे जानते हैं कि उनकी मृत्यु इसी महाभारत में छुपी है मगर वे ये भी जानते हैं कि हस्तिनापुर की रक्षा के लिए उनकी मृत्यु भी उतनी ही आवश्यक है जितना उनका जीवन। वे जीते हैं तो हस्तिनापुर के लिए और मरते हैं तो भी हस्तिनापुर के लिए... महाभारत की परिणति धृतराष्ट्र और दुर्योधन भी जानते हैं मगर उस परिणति तक पहुँचने के लिए ही तो वे जन्मे थे। युद्ध के बिना उनके जीवन का उद्देश्य कैसे पूरा हो सकता था?

गलतियाँ पांडव भी करते हैं क्योंकि उन गलतियों के बिना कथा पूरी नहीं होती...महाभारत नहीं होता। -और अगर महाभारत नहीं है तो फिर न पांडवों का कोई अस्तित्व है न ही कौरवों का।

एक लड़ाई है जो अन्याय के विरोध में है...एक लड़ाई है जो अहम के पक्ष में है। प्रेशर कुकर का प्रेशर एक हद से अधिक बढ़ जाने पर कुकर को फाड़ देता है...सारे पके-पकाए चावल पूरी रसोई में बिखर जाते हैं। खाद्य अखाद्य हो जाता है। प्रेशर कुकर में उतना ही प्रेशर उचित है जितना चावल पकाने के लिए चाहिए उससे ज्यादा प्रेशर निकाल दिया जाता है और सीटी की आवाज और संख्या यह संकेत करती है कि बस अब बहुत हो गया, गैस बंद कीजिए और कुकर को चूल्हे से उतार लीजिए।

न्याय-अन्याय की भी हरेक की अपनी परिभाषाएं हैं। अन्याय अगर जीतता भी है तो खुद नाकों चने चबाने के बाद ही जीतता है। अन्याय को भी अपने अस्तित्व का अंदाज लग जाता है। न्याय अगर हारता भी है तो अन्याय को थकाकर ही हारता है। अन्याय की तुलना अंधेरे से की जा सकती है और न्याय की एक दीपक से। अंधेरा जो सर्वव्यापीहै, सबसे बड़ी ऊर्जा है... जिसे सूरज जैसी छोटी-छोटी ऊर्जाए मिटाने की कोशिश करती हैं और फिर स्वयं ही ब्लैक होल का निवाला बनकर अंधकार की बड़ी ऊर्जा का हिस्सा बन जाती हैं। यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे स्वीकारना और गले के नीचे उतारना बहुत मुश्किल है मगर जीवन भी तो एक इसी तरह की सच्चाई है जिसे अंतत: काल का ग्रास बनना ही है मगर जीते जी मृत्यु से लड़ना ही तो शरीर का कर्म है, यही तो धर्म है। उजाला, अँधियारा मिटाते-मिटाते मिट जाता है। अँधियारे को उजाला चुनौती तो दे सकता है मगर मिटा नहीं सकता क्योंकि उजाले को भी तो अंतत: अँधियारे के आगोश में समा जाना है।
-अजय मलिक



Feb 4, 2011

प्रबोध अभ्यास पुस्तिका आधारित रिक्त स्थान भरने संबंधी अभ्यास

यहाँ दिए गए सभी अभ्यास हम दुबारा दे रहे हैं।
FILL IN THE BLANKS

P.No 17
मुझे नई नई जगहें देखना पसंद है‎1 घूमने के लिए समय और धन भी चाहिए‎। पहाड़ों पर जाने के लिए गरम कपड़े, विशेष जूते आदि चाहिए‎। मुझे पहाड़ों पर सूर्योदय तथा सूर्यास्त देखना बहुत पसंद है‎। पहाड़ों की सुंदरता को कैद करने के लिए मुझे एक अच्छा कैमरा चाहिए‎।

प्रबोध पाठमाला के पाठों पर आधारित प्रश्न एवं उत्तर

TEXUAL QUESTION AND ANSWERS
1. गोपाल वर्मा कौन हैं ?

Ans. गोपाल वर्मा हिंदी प्राध्यापक हैं।

2. कविता कहाँ काम करती है ?

Ans. कविता गृह मंत्रालय में काम करती है।

3. कविता किस पद पर काम करती है ?

Ans. कविता सहायक के पद पर काम करती है।

Feb 3, 2011

प्रबोध के लिए विलोम शब्द एवं वाक्यों में प्रयोग

ANTONYMS AND USE IN HINDI SENTENCES


कभी - कभी X रोज़

Sometimes X daily

मैं रोज़ / कभी कभी पढ़ता हूं।

दिन X रात

Day X Night

आज का दिन / की रात अच्छा/अच्छी है।

प्रबोध के लिए पर्यायवाची शब्द एवं वाक्यों में प्रयोग

यह सामग्री हम दुबारा दे रहे हैं।

SYNONYMS AND USE IN HINDI SENTENCES


रोज़, प्रतिदिन, रोज़ाना

Daily

मैं रोज़ / प्रतिदिन हिंदी पढ़ता हूं।

बेटी - पुत्री

Daughter

मेरी बेटी / पुत्री सुंदर है।

शांतिनिकेतन में



फोटो: (c) अजय मलिक

Feb 2, 2011

पुरानी फ़िल्म देवदास का एक गीत चार भारतीय लिपियों में

जिसे तू क़ुबूल कर ले वो अदा कहाँ से लाऊँ
तेरे दिल को जो लुभा ले वो सदा कहाँ से लाऊँ
जिसे तू क़ुबूल कर ले...

मैं वो फूल हूँ के जिसको गया हर कोई मसल के
मेरी उम्र बह गयी है मेरे आँसुओं में ढल के -2
जो बहार बन के बरसे वो घटा कहाँ से लाऊँ
तेरे दिल को जो...

तुझे और की तमन्ना मुझे तेरी आरज़ू है
तेरे दिल में गम ही गम है मेरे दिल में तू ही तू है -2
जो दिलों को चैन दे दे वो दवा कहाँ से लाऊँ
तेरे दिल को जो...


मेरी बेबसी है ज़ाहिर मेरी आह-ए-बे-असर से
कभी मौत भी जो माँगी तो ना पाई उसके दर से -2
जो मुराद ले के आए वो दुआ कहाँ से लाऊँ
तेरे दिल को जो...

జీసే టూ క్వ్బవొల్ కార్ లే వో ఆడయ కహన్ శె లాఊం
తెరే దిల్ కొ జో లుభా లే వో సదా కహాన్ శె లాఊం
జీసే తూ క్వ్బవొల్ కార్ లే

మైన్ వో ఫూల్ హూన్ కె జిస్కో గయా హార్ కాయ్ మసాల్ కె
మేరీ ఉంర్ బా గాయీ హై మేరే ఆంసుఒన్ మీన్ ఢల్ కె -2
జో బహార్ బాన్ కె బర్సె వో ఘటా కహాన్ శె లాఊణ్
తెరే దిల్ కొ జో...


తూఝే ఔర్ కి తమన్నా ముఝే తెరి ఆయార్స్ హై
తెరే దిల్ మీన్ ఘం హీ ఘం హై మేరే దిల్ మీన్ తూ హీ తూ హై -2
జో దిలొణ్ కొ చైన్ దే దే వో దావా కహాణ్ శె లాఊణ్
తెరే దిల్ కొ జో...

మేరీ బెబసి హై సయాహియర్ మేరీ ఆ-ఏ-బే-ఆసర్ శె
కభి మౌత్ భీ జో మాణ్గి తో న పాయీ ఉస్కే దార్ శె -2
జో మురాద్ లే కె ఆయే వో డూఆ కహాణ్ శె లాఊణ్
తెరే దిల్ కొ జో


ಜಿಸೆ ಟೂ ಕ್ವ್ಬವೊಲ್ ಕರ್ ಲೇ ವೋ ಆಡಯ ಕಹನ್ ಸೆ ಲಾಊನ್
ತೆರೆ ದಿಲ್ ಕೋ ಜೋ ಲುಭಾ ಲೇ ವೋ ಸದಾ ಕಹಾನ್ ಸೆ ಲಾಊನ್
ಜಿಸೆ ಟು ಕ್ವ್ಬವೊಲ್ ಕರ್ ಲೇ

 ಮೇನ್ ವೋ ಫೂಲ್ ಹೂನ್ ಕೆ ಜಿಸ್ಕೊ ಗಯಾ ಹಾರ್ ಕಾಯ್ ಮಸಲ್ ಕೆ
ಮೇರಿ ಉಮ್ರ್ ಬಾ ಗಯೀ ಹೈ ಮೇರೆ ಆಂಸುಒಂ ಮೆಇನ್ ಢಲ್ ಕೆ -2
ಜೋ ಬಹಾರ್ ಬಾನ್ ಕೆ ಬರ್ಸೆ ವೋ ಘಟಾ ಕಹಾನ್ ಸೆ ಲಾಊಣ್
ತೆರೆ ದಿಲ್ ಕೋ ಜೋ...


ತುಜ್ೆ ಔರ್ ಕೀ ತಮಣ್ನಾ ಮುಝೆ ತೇರಿ ಆರ್ಜ಼ೂ ಹೈ
ತೆರೆ ದಿಲ್ ಮೆಇನ್ ಘಾಂ ಹಿ ಘಾಂ ಹೈ ಮೇರೆ ದಿಲ್ ಮೆಇನ್ ಟು ಹಿ ಟು ಹೈ -2
ಜೋ ದಿಲೊಣ್ ಕೋ ಚೈನ್ ದೇ ದೇ ವೋ ದಾವಾ ಕಹಾಣ್ ಸೆ ಲಾಊಣ್
ತೆರೆ ದಿಲ್ ಕೋ ಜೋ...


ಮೇರಿ ಬೇಬಸಿ ಹೈ ಜ಼ಾಹೀರ್ ಮೇರಿ ಆ-ಎ-ಬೇ-ಅಸಾರ್ ಸೆ
ಕಾಭಿ ಮೌತ್ ಭೀ ಜೋ ಮಾಣ್ಗಿ ತೋ ನ ಪಾಯೀ ಉಸ್ಕೇ ಡರ್ ಸೆ -2
ಜೋ ಮೂರಾಡ್ ಲೇ ಕೆ ಆಯೆ ವೋ ಡೂಆ ಕಹಾಣ್ ಸೆ ಲಾಊಣ್
ತೆರೆ ದಿಲ್ ಕೋ ಜೋ


ஜிசே டூ க்வ்பவொல் கார் லே வோ ஆடய கஹான் சே லாூன்
தேரே தில் கோ ஜோ லூபா லே வோ சதா கஹான் சே லாூன்
ஜிசே து க்வ்பவொல் கார் லே


மைந் வோ பூழ் ஹூந் கே ஜிஸ்கொ காயா ஹார் கொய் மசல் கே
மேரி உம்ர் பா கயீ ஹை மியர் ஆன்சுஒன் மென் தாள் கே -2
ஜோ பஹார் பண் கே பார்ஸெ வோ க்ஹடா கஹான் சே லாஊண்
தேரே தில் கோ ஜோ...


தூஜ்ே ஓூர் கி தமன்னா மூஜ்ே தேறி ஆர்ஜூ ஹை
தேரே தில் மென் காம் ஹி காம் ஹை மியர் தில் மென் து ஹி து ஹை -2
ஜோ திலொண் கோ சைன் தே தே வோ தாவா கஹாண் சே லாஊண்
தேரே தில் கோ ஜோ...


மேரி பேபசி ஹை ஜாஹீர் மேரி ஆ-ஏ-பே-ஆசார் சே
காபி மௌட் பி ஜோ மாண்கி தொ நா பாயீ உஸ்கே தார் சே -2
ஜோ முராட் லே கே ஆயே வோ துா கஹாண் சே லாஊண்
தேரே தில் கோ ஜோ

Feb 1, 2011

चार भारतीय लिपियों में फ़िल्म 'अनुराधा' का एक गीत

स्वर्गीय शैलेन्द्र का लिखा फ़िल्म 'अनुराधा' का एक कभी न भुलाए जाने वाला गीत जिसका संगीत पंडित रवि शंकर ने दिया था चार भारतीय लिपियों में प्रस्तुत है-


हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए
जा जा के ऋतु, लौट आए

झिल-मिल वो तारे, कहाँ गये सारे
मनबाती जले, बुझ जाए



सूनी मेरी बीना, संगीत बिना
सपनों की माला, मुरझाए

हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए


ਹਾਯ ਰੇ ਵੋ ਦਿਨ ਕ੍ਯੂਂ ਨਾ ਆਏ
ਜਾ ਜਾ ਕੇ ਰਿਤੂ, ਲੌਟ ਆਏ



ਝੀਲ-ਮਿਲ ਵੋ ਤਰੇ, ਕਹਾਂ ਗਾਏ ਸਾਰੇ
ਮੰਬਾਤੀ ਜਲੇ, ਬੂਝ ਜਾਏ


ਸੂਨੀ ਮੇਰੀ ਬੀਨਾ, ਸੰਗੀਤ ਬਿਨਾ
ਸਪਨੋਂ ਕੀ ਮਾਲਾ, ਮੁਰਝਹਾਏ


ਹਾਯ ਰੇ ਵੋ ਦਿਨ ਕ੍ਯੂਂ ਨਾ ਆਏ


હાય રે વો દિન ક્યૂઁ ના આયે
ઇયા ઇયા ક રિટ્ચ, લોઉટ આયે

ઝીલ-મિલ વો તારે, કહન ગે સેર
મણબાતી જલે, બૂઝ જે


સૂની મ્રી બીના, સંગીત બીના
સાપનોં કી માળા, મુરઝાયે


હાય રે વો દિન ક્યૂઁ ના આયે


ஹாய் ரே வோ திண் கியூண் நா ஆயே
ஜ ஜ கே ரித்து, லௌஉத் ஆயே


ஜுஹில்-மில் வோ தாரே, கஹான் கே சாறே
மான்பாட்டி ஜாலே, பூஜ ஜே


ஸூநீ மேரி பீண, சங்கீத் பிண
சப்னோன் கீ மால, மூர்சுாயே
ஹாய் ரே வோ திண் கியூண் நா ஆயே

Jan 29, 2011

हिंदी फ़िल्मी गीतों का एक और गुलदस्ता: हिंदी लिरिक्स डॉट नेट

  हिंदी लिरिक्स डॉट नेट एक ऐसी वेबसाइट है जो हिंदी फ़िल्मी गीतों को रोमन लिपि में उपलब्ध करा रही है. इस वेब साइट पर चार श्रेणियों में गीत पढ़े जा सकते हैं- नवीनतम गीत; गायकों के अनुसार; संगीत निर्देशकों के अनुसार और गीतकारों के नाम के अनुसार. इस पर हमें महान गायक कुंदन लाल सहगल, उमा देवी, सुरैया जैसे सैंकड़ों गायकों के गाए हज़ारों गीत मिले. इसी प्रकार सैंकड़ों संगीतकारों और गीतकारों के हज़ारों गीत इस वेबसाईट पर मौजूद हैं. अनेक गीतों का अँग्रेज़ी अनुवाद भी दिया गया है. न  जाने क्यों हमें यह साइट बहुत अच्छी लगी. 

इस वेब साइट का पता तथा कुछ लिंक्स हम यहाँ साभार दे रहे हैं- 

(hindilyrics.net से साभार  )
  

पंडित प्रदीप का एक गीत चार भारतीय लिपियों में

मुखड़ा देख ले, देख ले
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में.. हो

देख ले कितना पुण्य है कितना पाप तेरे जीवन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में


कभी तो पल भर सोच ले प्राणी, क्या है तेरी करम कहानी - 2
पता लगा ले..
पता लगा ले पड़े हैं कितने दाग तेरे दामन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में


खुद को धोखा दे मत बंदे, अच्छे ना होते कपट के धंधे - 2
सदा ना चलता..
सदा ना चलता किसी का नाटक दुनिया के आँगन में
देख ले दरपन में


मुखड़ा देख ले प्राणी ज़रा दरपन में हो
देख ले कितना पुण्य है कितना पाप तेरे जीवन में
देख ले दरपन में
मुखड़ा देख ले प्राणी

முகாட டேக் லே, டேக் லே
முகாட டேக் லே பிராணி ஸ்யார தரபபன் மென்.. ஹோ

டேக் லே கீடன பூணி ஹை கீடன பாப் தேரே ஜீவன் மென்
டேக் லே தரபபன் மென்
முகாட டேக் லே பிராணி ஸ்யார தரபபன் மென்


காபி தொ பால் பார் சொச் லே பிராணி, க்யா ஹை தேறி கரம் கஹானி - 2
பட் லாக லே
பட் லாக லே பாடே ஹேந் கிதானே தாக் தேரே தாமங் மென்
டேக் லே தரபபன் மென்
முகாட டேக் லே பிராணி ஸ்யார தரபபன் மென்


க்குத் கோ தொக்க . மாட்ட் பண்டே, அச்ச்ே நா ஹோடே காபபத் கே தந்தே - 2
சதா நா சாலட்
சதா நா சாலட் கீசி க நாதக் துணிய கே ஆங்கண் மென்
டேக் லே தரபபன் மென்

முகாட டேக் லே பிராணி ஸ்யார தரபபன் மென் ஹோ
டேக் லே கீடன பூணி ஹை கீடன பாப் தேரே ஜீவன் மென்
டேக் லே தரபபன் மென்
முகாட டேக் லே பிராணி


মুখাদা দেখ লে, দেখ লে
মুখাদা দেখ লে প্রাণী জ়৅রা দরপন মেইন.. হো
দেখ লে কীটানা পুণ্য হাই কীটানা পাপ তেড়ে জীবন মেইন
দেখ লে দরপন মেইন
মুখাদা দেখ লে প্রাণী জ়৅রা দরপন মেইন
কাভি তো পল ভর সচ লে প্রাণী, ক্যা হাই টেরি কারাম কাহানী - 2
পাতা লাগা লে
পাতা লাগা লে পদে হেন কীতানে দাগ তেড়ে দামান মেইন
দেখ লে দরপন মেইন
মুখাদা দেখ লে প্রাণী জ়৅রা দরপন মেইন
খুদ কো ঢখা দে মত বন্দে, আচ্চ্ছে না হতে কাপাত কে ধন্ধে - 2
সাদা না চালতা
সাদা না চালতা কিসি কা নাটক দুনিয়া কে আঙ্গন মেইন
দেখ লে দরপন মেইন


মুখাদা দেখ লে প্রাণী জ়৅রা দরপন মেইন হো
দেখ লে কীটানা পুণ্য হাই কীটানা পাপ তেড়ে জীবন মেইন
দেখ লে দরপন মেইন
মুখাদা দেখ লে প্রাণী

മുഖത ദേഖ്‌ ലെ, ദേഖ്‌ ലെ
മുഖത ദേഖ്‌ . പ്രാണി സ്യാര ദരാപന്‍ മീന്.. ഹോ
ദേഖ്‌ ലെ കിതണാ പ്യൂനീ ഹൈ കിതണാ പാപ് ടേറെ ജീവന്‍ മീന്
ദേഖ്‌ ലെ ദരാപന്‍ മീന്
മുഖത ദേഖ്‌ ലെ പ്രാണി സ്യാര ദരാപന്‍ മീന്


കഭി തോ പാല്‍ ഭര്‍ സോച്ച് ലെ പ്രാണി, ക്യാ ഹൈ തെറി കരം കഹാനി - 2
പാട ലാക ലെ
പാട ലാക ലെ പാടേ ഹേന് കിതണെ ടാഗ്‌ ടേറെ ദാമന്‍ മീന്
ദേഖ്‌ ലെ ദരാപന്‍ മീന്
മുഖത ദേഖ്‌ ലെ പ്രാണി സ്യാര ദരാപന്‍ മീന്


ഖുട് കോ ധോഖ ദേ മറ്റ് ബ്യാംഡെ, അച്ച്ചേ ഞ ഹോടെ കപട് കെ ദ്ദന്ധെ - 2
സാദാ ഞ ചാലത
സാദാ ഞ ചാലത കിസി ക നാടക്‌ ടുണീയ കെ ആങ്കാന്‍ മീന്
ദേഖ്‌ ലെ ദരാപന്‍ മീന്


മുഖത ദേഖ്‌ ലെ പ്രാണി സ്യാര ദരാപന്‍ മീന് ഹോ
ദേഖ്‌ ലെ കിതണാ പ്യൂനീ ഹൈ കിതണാ പാപ് ടേറെ ജീവന്‍ മീന്
ദേഖ്‌ ലെ ദരാപന്‍ മീന്
മുഖത ദേഖ്‌ ലെ പ്രാണി

आपको याद होगा बहुत पहले हमने quillpad का कमाल बताया था. ऊपर चार लिपियों में दिया गया गीत हमने रोमन लिपि में हिंदिलिरिक्स वेब साइट से साभार लिया और quillpad के माध्यम से  लिप्यांतरित कर दिया. ज़रा आप भी तो कुछ ऐसा कर देखिए. वैसे यह गीत हमारे कुछ ऐसे अत्याधुनिक मित्रों, बंधुओं और परिचितों को समर्पित है जो दर्पण तो रोज़  देखते हैं मगर अपना असली चेहरा देखने से परहेज़ रखते हैं...  

Jan 26, 2011

हम भारत के लोग, हमारा गणतंत्र भारत




जय हिंद
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Jan 22, 2011

बालेंदु शर्मा दाधीच का यूनिकोड विकृति संशोधक

कई बार हिन्दी यूनिकोड में भेजी गई मेल में कुछ विकृतियाँ आ जाती हैं। यह जीमेल,  याहू मेल आदि सभी में हो सकता है। ऐसी ही विकृतियों को ऑनलाइन सही करने का उपाय बताया जाता है बालेंदु शर्मा दाधीच द्वारा विकसित आनलाइन यूनिकोड विकृति संशोधक. यदि आपको कोई विकृत हिन्दी मेल मिली हो तो इसकी परख जरूर कीजिएगा। साभार लिंक नीचे दिया जा रहा है-

आनलाइन यूनिकोड विकृति संशोधक

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बॉलीव्हाट.काम का कमाल

  बॉलीवुड यानी बंबई यानी मुंबई की हिंदी फिल्मों की जगमगाती दुनिया, रुपहले परदे का सम्मोहित कर देने वाला संसार रचने वालों की दुनियाँ, जहाँ अँग्रेज़ी बोले बिना हिंदी स्टार होने का एहसास नहीं होता... इस दुनियाँ ने जाने- अनजाने बोलचाल की हिंदी का बहुत भला किया है. इसी बॉलीवुड पर आधारित  एक अनोखा प्रयास बॉलीव्हाट.काम ने अँग्रेज़ी में हिंदी सिखाने का किया है. हालांकि हम हिंग्लिश के पक्षधर नहीं हैं मगर यदि हिंग्लिश के माध्यम से ही हिंदी का कुछ और  प्रचार-प्रसार हो जाए तो इसमें बुरा ही क्या है! हमारे कुछ विद्यार्थियों ने पिछले सप्ताह ही कहा था- "हिन्दी फ़िल्मी गीतों की एक ऐसी महफ़िल हो जहाँ इन गीतों का अँग्रेज़ी अनुवाद भी मिल सकेऔर फिल्मों पर भी कुछ हो तो बात बन जाए." हम लोगों ने तलाश शुरू की और हमें bollywhat.com के रूप में एक नई कड़ी मिली.
   हम यहाँ साभार  बॉलीव्हाट.काम का लिंक दे रहें हैं और साथ ही आभारी हैं विकिपीडिया और Intermediate Hindi Resources के भी जहाँ हमें ये लिंक मिला. इस लिंक को जरूर परखिए... 
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Jan 18, 2011

अज्ञेय जी की दो कविताएं -कविताकोश के सौजन्य से

आज जाने क्यों अज्ञेय जी की ये दो कविताएँ  विशेष रूप से पोस्ट करने का मन हो रहा है!!

एक-

ये मेघ साहसिक सैलानी!

ये मेघ साहसिक सैलानी!
ये तरल वाष्प से लदे हुए
द्रुत साँसों से लालसा भरे
ये ढीठ समीरण के झोंके
कंटकित हुए रोएं तन के
किन अदृश करों से आलोड़ित
स्मृति शेफाली के फूल झरे!
झर झर झर झर
अप्रतिहत स्वर
जीवन की गति आनी-जानी!

झर -
नदी कूल के झर नरसल
झर - उमड़ा हुआ नदी का जल
ज्यों क्वारपने की केंचुल में
यौवन की गति उद्दाम प्रबल
झर -
दूर आड़ में झुरमुट की
चातक की करूण कथा बिखरी
चमकी टिटीहरी की गुहार
झाऊ की साँसों में सिहरी
मिल कर सहसा सहमी ठिठकीं
वे चकित मृगी सी आँखडि़याँ
झर!सहसा दर्शन से झंकृत
इस अल्हड़ मानस की कड़ियाँ!
झर -
अंतरिक्ष की कौली भर
मटियाया सा भूरा पानी
थिगलियाँ भरे छीजे आँचल-सी
ज्यों-त्यों बिछी धरा धानी
हम कुंज-कुंज यमुना-तीरे
बढ़ चले अटपटे पैरों से
छिन लता-गुल्म छिन वानीरे
झर झर झर झर
द्रुत मंद स्वर
आये दल बल ले अभिमानी
ये मेघ साहसिक सैलानी!

कम्पित फरास की ध्वनि सर सर
कहती थी कौतुक से भर कर
पुरवा पछवा हरकारों से
कह देगा सब निर्मम हो कर
दो प्राणों का सलज्ज मर्मर
औत्सुक्य-सजल पर शील-नम्र
इन नभ के प्रहरी तारों से!
ओ कह देते तो कह देते
पुलिनों के ओ नटखट फरास!
ओ कह देते तो कह देते
पुरवा पछवा के हरकारों
नभ के कौतुक कंपित तारों
हाँ कह देते तो कह देते
लहरों के ओ उच्छवसित हास!
पर अब झर-झर
स्मृति शेफाली
यह युग-सरि का
अप्रतिहत स्वर!
झर-झर स्मृति के पत्ते सूखे
जीवन के अंधड़ में पिटते
मरूथल के रेणुक कण रूखे!
झर -
जीवन गति आनी जानी
उठती गिरतीं सूनी साँसें
लोचन अन्तस प्यासे भूखे
अलमस्त चल दिये छलिया से
ये मेघ साहसिक सैलानी!

                                                      - अज्ञेय
दो-

 जो पास रहे

जो पास रहे
वे ही तो सबसे दूर रहे :
प्यार से बार-बार
जिन सब ने उठ-उठ हाथ और झुक-झुक कर पैर गहे,
वे ही दयालु, वत्सल स्नेही तो
सब से क्रूर रहे।
जो चले गये
ठुकरा कर हड्डी-पसली तोड़ गये
पर जो मिट्टी
उन के पग रोष-भरे खूँदते रहे,
फिर अवहेला से रौंद गये :
उसको वे ही एक अनजाने नयी खाद दे गाड़ गये :
उसमें ही वे एक अनोखा अंकुर रोप गये।
-जो चले गये, जो छोड़ गये,
जो जड़े काट, मिट्टी उपाट,
चुन-चुन कर डाल मरोड़ गये
वे नहर खोद कर अनायास
सागर से सागर जोड़ गये
मिटा गये अस्तित्व,
किन्तु वे
जीवन मुझको सौंप गये।
                                                   - अज्ञेय

 (कविताकोश से साभार )

Jan 17, 2011

प्रवीण नोट्स : प्रवीण पाठों के प्रश्न एवं उत्तर

हमारे मित्र श्री विश्वजीत मजूमदार द्वारा तैयार प्रवीण पाठमाला पर आधारित प्रश्न एवं उत्तर प्रवीण पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए यहाँ दिए जा रहे हैं।

पाठ -1 उड़ीसा की सैर

1॰ लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर कहाँ जाने का कार्यक्रम बनाया ?

उत्तर-लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर उड़ीसा जाने का कार्यक्रम बनाया।

2. भगवान जगन्नाथ की नगरी किसे कहा जाता है ?

उत्तर- पुरी को भगवान जगन्नाथ की नगरी कहा जाता है ।

3. जगन्नानथ मंदिर में किसकी मूर्तियां स्थापित हैं ?

Jan 13, 2011

अत्यंत महत्वपूर्ण वैधानिक सूचना

एक बार फिर यह स्पष्ट किया जाता है कि हिंदी सबके लिए यानी http://www.hindiforyou.blogspot.com/ एक पूरी तरह गैर व्यवसायिक, नि:शुल्क एवं केवल हिंदी भाषा विशेषकर राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए है. इस ब्लॉग में दिए गए किसी भी लिंक का किसी भी रूप में इस ब्लॉग से कोई संबध नहीं है. इसमें  दिए गए सभी लिंक्स  सम्बद्ध वेबसाइट्स का साभार विवरण तथा क्रेडिट देते हुए हिंदी सीखने वालों को  केवल उन वेबसाइट्स तक पहुँचने में सहायता के लिए दिए गए हैं.  ब्लॉग के शुरू करने के समय से ही वैधानिक सूचना के रूप में इन सब बातों का  उल्लेख किया गया है. यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी वेबसाईट को अगर हमारे ब्लॉग पर दिए गए लिंक्स पर आपत्ति है तो सूचित करें, सूचना मिलने पर यथासंभव  तत्काल ऐसे लिंक अथवा लिंक्स को निकाल दिया जाएगा.

ब्लॉग में कमेंट्स कॉलम में बिना किसी रोकटोक अथवा संपादन के अपनी बात कहने और आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा है. हमें किसी भी वेबसाईट से अपने लिंक्स को हटाने का संदेश आज तक प्राप्त नहीं हुआ है.   अनेक वेबसाइट्स से हमें उनके  लिंक लगाने के अनुरोध भी मिले हैं मगर हमने उन अनुरोधों को भी हिंदी भाषा के प्रति समर्पण की परख करने के बाद ही स्वीकार किया हैं. 

इस ब्लॉग का उद्देश्य नेट पर उपलब्ध निशुल्क हिंदी सीखने की सुविधाओं की जानकारी देना और यह साबित करने का प्रयास करना रहा है कि हिंदी में नेट पर वह सब कुछ है जो अँग्रेज़ी जैसी किसी अन्य  भाषा/ भाषाओं के लिए हो सकता है. 

यदि किसी साभार दिए गए लिंक के बारे में ब्लॉग के कमेंट्स कॉलम में सक्षम प्राधिकारी द्वारा  ३० दिन के अन्दर यदि आपत्ति दर्ज नहीं कराई जाती है तो यह समझा जाएगा कि संबंधित लिंक के बारे में किसी को भी, किसी भी प्रकार की वैधानिक अथवा अन्य, ज्ञात-अज्ञात आपत्ति नहीं है तथा ऐसे में इस ब्लॉग अथवा इस ब्लॉग के सहयोगकर्ताओं की कोई जिम्मेदारी आदि का दावा नहीं किया जा सकेगा. इस ब्लॉग में दिए गए किसी लिंक, किसी सामग्री को पूरी तरह अथवा आंशिक रूप में ब्लॉग से निकालने, संपादित करने, प्रकाशित करने अथवा न करने आदि का पूरा अधिकार ब्लोगर का है.        

CAT मॉडल परीक्षा के लिए लिंक

हमें CAT मॉडल परीक्षा के लिए एक लिंक मिला है जो नीचे  दिया जा रहा है-
उपयोगी लगे तो आजमाइएगा   -


CAT Mock Exams

(जम्बो टेस्ट्स  से साभार)

चवन्नी में पाइए अंडमान का पोस्टकार्ड


 
भारतीय डाक विभाग ने अंडमान में पर्यटन को बढ़ावा देने वाले मेघदूत पोस्टकार्ड जारी किए हैं . गौरतलब है कि जहाँ सामान्य पोस्टकार्ड 50 पैसे में उपलब्ध होते हैं वहीँ मेघदूत पोस्टकार्ड मात्र 25 पैसे में उपलब्ध होते हैं। मेघदूत पोस्टकार्ड के पते वाले साइड में कुछ लिखा नहीं जा सकता वहाँ पर विभिन्न प्रकार के विज्ञापन या प्रचार सामग्री मुद्रित की जाती है। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के डाक सेवा निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उक्त मेघदूत पोस्टकार्ड बिक्री हेतु भारत के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध है। इस विज्ञापन में कभी काला पानी के लिए मशहूर पर अब ऐतिहासिक राष्ट्रीय स्मारक सेलुलर जेल, बैरन द्वीप और यहाँ स्थित भारत के एकमात्र सक्रिय बैरन ज्वालामुखी एवं राॅस और स्मिथ द्वीपों इत्यादि के चित्रों को प्रदशित किया गया है. राॅस और स्मिथ द्वीपों की यह विशेषता है कि ज्वार आने पर यह दोनों द्वीप आपस में मिल जाते हैं और भाटा के समय अलग हो जाते हैं. इसी कारण इन्हें सिस्टर-आइलैंड भी कहा जाता है. गौरतलब है कि इन मेघदूत पोस्टकार्डों को सूचना-प्रसार एवं पर्यटन निदेशालय, अंडमान व निकोबार प्रशासन द्वारा विज्ञापित किया गया है। निदेशक श्री यादव ने बताया कि उक्त मेघदूत पोस्टकार्डों की डाकघरों में काफी माँग है और वर्तमान में टूरिस्ट सीजन होने के चलते तमाम विदेशी और भारतीय पर्यटक इन पर पत्र लिखकर अपने परिजनों को भेज रहे हैं. यहाँ से भेजे जाने के कारण इन पर अंडमान के डाकघरों की मुहर भी लगी होती है, इस कारण इनकी फिलेटलिक वैल्यू भी बढ़ जाती है. देश-विदेश से लोग अंडमान में पर्यटन के बहाने आते हैं और एक बार उस सेलुलर जेल के दर्शन जरुर करते हैं जहाँ देशभक्तों ने इतनी यातनाएं सहीं. डाक विभाग भी इसके प्रति सचेत है और यहाँ के पोर्टब्लेयर प्रधान डाक घर से बाहर जाने वाले पत्रों पर जो मुहर लगाई जाती है, उस पर सेलुलर जेल का चित्र अंकित है. ऐसे में इन पत्रों को लोग यादगार के रूप में सहेज कर रखते हैं.
( युगमानस से साभार )

Jan 5, 2011

एक हिन्दी ई-लर्निंग कार्यशाला में प्रतिभा मलिक




Jan 4, 2011

प्याज को प्याज ही रहने दो कोई...

बचपन में प्याज से प्रेम जैसी कोई बात न थी. प्याज के महीन कतलों को सब्जी या दाल में जला भुना देखकर  चिडचिडाहट होती थी. गाँव में अरहर की दाल से होने वाली उकताहट का ब्यान करना मुश्किल है,  ऊपर से प्याज का काला-काला सा तड़का देखकर अजीब सी बोरियत हुआ करती थी.  मगर आज प्याज बस सपने की चीज़ बनकर रह गई है.  पत्नी रोज प्याज का भाव और उससे जुड़े किससे सुनाती है कि कैसे उसने उसे न खरीदने की हिम्मत दिखाई. अब तो बस यही एक गीत की पैरोडी मनमीत बन गई  है -
प्याज को प्याज ही रहने दो कोई नाम न दो
हमने देखी है प्याजों की महकती खुशबू,
एक एहसास है ये, रूह से महसूस करो ... 

Jan 1, 2011

नव वर्ष 2011 सारे संसार को शुभ एवं मंगलमय हो

बहुत विलंब तो हुआ है मगर अभी भी नयापन बरकरार है इस नए वर्ष में। मैं यात्रा कर रहा था और जहां भी वक्त मिला कुछ कहने की अधूरी सी कोशिश की जो जरूरत से ज्यादा ही अधूरी सी रही। सोचा था आज शाम तक पहुँच कर सब तक नव वर्ष की शुभकामनाएँ पहुंचाने की कोशिश करूंगा मगर वह भी विमान की देरी के कारण संभव नहीं हो सका।  चलिए देर से ही सही इस नए वर्ष को नमन किया जाए।
नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएँ