Jun 25, 2011

कंप्यूटर से हिन्दी में हल्ला बोल

-इस काम के लिए निम्नलिखित सॉफ्टवेर बहुत उपयोगी है -


i386 = इसमें विंडोज एक्स पी की वे फ़ाइलें हैं जो हिन्दी सक्रिय करने के लिए काम आती हैं .

MySQL = यह मंत्र आदि स्थापित करने के काम आता है.

Paragon partition magic आपके कंप्यूटर में हार्ड डिस्क में एक ड्राइव से दूसरे ड्राइव में स्पेस घटाने - बढ़ाने के काम आता है.

winRAR = कम्प्रेस्ड फाईल्स को खोलने के काम आता है . सभी IME जिप फ़ाइल हैं जिन्हें OPEN करने के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी .

Suvidha, Saaraansh, TBIL यूनिकोड फ़ॉन्ट परिवर्तक हैं. TBIL से किसी भी भारतीय भाषा का फ़ॉन्ट किसी भी अन्य भारतीय भाषा के यूनिकोड अथवा नॉन यूनिकोड फ़ॉन्ट में परिवर्तित किया जा सकता है तथा इसके विपरीत भी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.

Hindi.exe विंडोज vista तथा WIN 7 में हिन्दी में अग्रेजी /रोमन लिपि के माध्यम से हिन्दी में काम करने की सुविधा प्रदान करता है. अत्यंत उपयोगी है . विंडोज एक्सपी में इसे स्थापित करने से पहले dotnetfx3 तथा win xp dotnetfx3setup को स्थापित करने की जरूरत है. अन्य भाषाओं में काम करने के लिए भी Tamil Indic Input/ Malayalam Indic Input/ Bangla Indic Input/ Hindi Indic Input आदि दिए गए हैं.

यूनिकोड समर्थित ओपन टाइप फॉन्ट & यूनिकोड समर्थित की-बोर्ड ड्राइवर्स : यह हिन्दी कुंजी पटल तथा 160 से अधिक हिन्दी यूनिकोड फ़ॉन्ट्स स्थापित करता है.

इन उपयोगी सॉफ्टवेयर के साथ आप बड़े-बड़ों की छुट्टी कर सकते हैं.

-अजय मलिक

राजभाषा की अवधारणा, हमारे कर्तव्य और मनमानी व्याख्याएँ

- अजय मलिक
[इस आलेख में व्यक्त विचार लेखक के एक भारतीय नागरिक के रूप में पूरी तरह निजी विचार हैं]

हमारा संविधान कब, कैसे और क्यों बना ? हमारे संविधान के किसी भाग के किसी अनुच्छेद में कोई प्रावधान विशेष क्यों किया गया ? हमारे संविधान में की गई व्यवस्थाएँ अच्छी हैं या बुरी, सही हैं या सही नहीं हैं ? ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिन्हें जाने-अनजाने हर बहस का मुद्दा बनाया जाता है ।

एक आम भारतीय नागरिक के नाते इन प्रश्नों के उत्तरों की खोज में उलझने से कहीं बेहतर यह स्वीकारना क्या सही नहीं है कि हमने, हमारे पूर्वजों ने, हमारी व्यवस्था ने जो विधान हमें दिया है वह सर्वोपरि है उसका प्रत्येक अनुच्छेद, प्रत्येक पंक्ति और प्रत्येक शब्द 'विधि' अर्थात कानून है और कानून का पालन करना हर नागरिक का प्रथम कर्तव्य है? -एक ऐसा कर्तव्य जो अगर थोपा हुआ प्रतीत होता है तब भी विधि द्वारा अन्य कोई व्यवस्था किए जाने तक उसका पालन करने से बचा नहीं जा सकता?

संविधान में समसामयिक आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधन आदि के लिए हमारे लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च सभा यानी हमारी संसद है।

हमारे लिए, हमारे द्वारा दिए गए विधान में किसी बात, तथ्य या कथ्य का क्या मतलब है अर्थात संवैधानिक प्रावधानों का वास्तविक अभिप्राय क्या है इसकी व्याख्या करने के लिए हमारा सर्वोच्च न्यायालय है।

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -2

1. सुंदर लिखावट में लिखिए-

वैज्ञानिकों ने पहली बार ब्रहंमाण्ड में एक ऐसे ग्रह को चिन्हित किया है जो देखने में हूबहू पृथ्वी जैसा है। यह ग्रह हमारे सौर मंडल से बाहर देखा गया है। इस पर जीवन के आसार हमारी धरती जैसे ही है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का दावा है कि इस ग्रह को सौर मंडल से बाहर ऐसे इलाके में देखा गया है जिसमें जीवन की संभावनाएं पहले से ही जताई जा रही हैं। इसे "गोल्डीलॉक्स जोन" कहा जाता है।

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र-1


1. सुंदर लिखावट में लिखिए-

भारत में पहले दस विशिष्ट पहचान नंबर महाराष्ट्र के आदिवासियों को दिए गए हैं। पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह नंबर देते हुए कहा कि इससे गरीबों को कल्याणकारी योजनाओं का फायदा लेने में मदद होगी। भारत में सभी नागरिकों को खास पहचान पत्र जारी करने की दिशा में काम हो रहा है। इसी के तहत प्रधानमंत्री सिंह और श्रीमती सोनिया गांधी ने दस टेंभली आदिवासियों को "आधार कार्ड" दिए हैं।

2. नीचे दिए गए पैरा के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

जाने क्यों अच्छे लगते हैं घनानंद के ये छंद

परकाजहि देह को धारि फिरौ, परजन्य जथारथ ह्वै दरसौ।
निधि-नीर सुधा के समान करौ, सबही बिधि सज्जनता सरसौ।
घनआनँद जीवन दायक हौ, कछू मेरियौ पीर हियें परसौ।
कबहूँ वा बिसासी सुजान के आँगन, मो अँसुवानहिं लै बरसौ॥

’घनाआनँद’ जीवन मूल सुजान की, कौंधनि हू न कहूँ दरसैं ।
सु न जानिये धौं कित छाय रहे, दृग चातक प्रान तपै तरसैं ॥
बिन पावस तो इन्हें थ्यावस हो न, सु क्यों करि ये अब सो परसैं।
बदरा बरसै रितु में घिरि कै, नितहीं अँखियाँ उघरी बरसैं ॥

अति सूधो सनेह को मारग है, जेहुं नेकु सयानप बाँक नहीं।
तहाँ साँचे चलैं तजि आपनपौ झिझकैं कपटी जे निसाँक नहीं॥
घनआनंद प्यारे सुजान सुनौ इहैं एक ते दूसरो आँक नहीं।
तुम कौन सी पाटी पढ़े हौ लला, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं॥

कितने शहरों तक गाँव चले

किसी गीत की छांव तले
कितने शहरों तक गाँव चले

सब छूट गए पीपल पीछे
जब हाँफे-हारे पाँव चले

पनघट पनचक्की पतनाले
सब खेत गए लालावाले

न पछुवा चली न पुरवाई
झूले से रूठी अंगड़ाई

ओसारे का छप्पर छूटा
घर लुटा द्वार टूटा फूटा

बाबा की वह टूटी खटिया
जाने किसने लूटी बछिया

जिसने जो देखा छीन लिया
टूटा-फूटा तक बीन लिया

सब बदल गए इंसान भले
कितने शहरों तक गाँव चले

-अजय मलिक (c)

Jun 22, 2011

गूगल ने दी हिन्दी के अतिरिक्त अन्य पाँच भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा

गूगल ने भारत में अपनी अनुवाद सेवाओं का विस्तार किया है। अब गूगल अनुवाद की सुविधा हिन्दी के साथ-साथ  बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में भी उपलब्ध है।

यहाँ हम गूगल अनुवाद के माध्यम से प्रवीण पाठ्यक्रम के प्रथम पाठ का तमिल अनुवाद दे रहे हैं। तमिल भाषी हिन्दी के विद्यार्थी कृपया बताएं कि इसमें कितनी शुद्धता है और कितने सुधार की आवश्यकता है?

நாங்கள் இந்தியாவின் கிழக்கு ஒரிசா பயணம் சலுகை விட்டு இந்த திட்டம் உருவாக்கப்பட்டது.

ஒரிசா எப்போதும் எங்களை கவர்ந்து வருகிறது. கடவுள் என் மனைவியும் சத்தியம் செய்ய பூரி ஜெகன்னாத் என்னை வணங்க தேவைப்பட்டது.நாங்கள் இரயில் ஒரிசா தலைநகர் புவனேஸ்வர் முடிவு வந்தோம்.

Jun 16, 2011

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित यहाँ दिए जा रहे प्रश्नोत्तर बड़े ही परिश्रम से हमारे मित्र श्री विश्वजीत मजूमदार, हिन्दी प्राध्यापक, हिन्दी शिक्षण योजना, दुर्गापुर ने तैयार किए हैं। 
  
पाठ -1

उड़ीसा की सैर


1.  लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर कहाँ जाने का कार्यक्रम बनाया ?

उत्तर- लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर उड़ीसा जाने का कार्यक्रम बनाया ।

2.  भगवान जगन्नाथ की नगरी किसे कहा जाता है ?

उत्तर- पुरी को भगवान जगन्नाथ की नगरी कहा जाता है ।

3.  जगन्नानथ मंदिर में किसकी मूर्तियां स्थापित हैं ?

उत्तर- जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं ।

4.  पुरी के समुद्र तट पर किस नदी का संगम होता है ?

उत्तर- पुरी के समुद्र तट पर चंद्रभागा नदी का संगम होता है ।

5.  कोणार्क का सूर्य मंदिर किस लिए विश्व प्रसिद्ध है ?

उत्तर- कोणार्क का सूर्यमंदिर अपने भव्य शिल्पकला केलिए विश्व प्रसिद्ध है ।

6.  लिंगराज मंदिर कितने मंदिरों का परिसर है ?

उत्तर- लिंगराज मंदिर 108 मंदिरों का परिसर है ।

Jun 12, 2011

ये फूल काश्मीर के

ये गुलिस्ताँ हमारा

गुलमार्ग

चश्मे-शाही और चार चिनार



फोटो: (c) अजय मलिक
             ऋचा मलिक

हुक्का, हारा, चूल्हा, चक्की

Jun 8, 2011

प्रवीण पाठमाला पाठ 1 तमिल लिप्यांतरण

(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सीडैक )

இஸ பார ஹமநே சுட்டீ யாத்ரா ரியாயத லேகர பாரத கே பூர்வ மேஂ ஸ்தித உட஼ீஸா ஜாநே கா கார்யக்ரம பநாயா .


உட஼ீஸா ஹமேஂ ஹமேஷா ஹீ ஆகர்ஷித கரதா ரஹா ஹை . ஈஷ்வர மேஂ அகாத ஷ்ரத்தா கே காரண ஜகந்நாத புரீ கே தர்ஷந கரநா மேரீ வ மேரீ பத்நீ கீ இச்சா தீ . இஸகே ஸாத ஹீ ஸம்ராட அஷோக கீ கலிஂக விஜய கா யுத்த க்ஷேத்ர வ அந்ய ஐதிஹாஸிக ஸ்தல பீ மைஂ தேகநா சாஹதா தா . ஹம ரேல ஸே உட஼ீஸா கீ ராஜதாநீ புவநேஷ்வர பஹு஁சே .

Jun 4, 2011

कुछ फूल कश्मीर से


                              फोटो:  (C) अजय मलिक

May 14, 2011

इस अंतराल का अंतर्द्वंद्व

जब से हिन्दी सबके लिए ब्लॉग शुरू हुआ है तब से इतना लंबा अंतराल हावी नहीं हुआ। मैं खुद हैरान-परेशान हूँ कि क्यों टंकण करने वाली दो अंगुलियाँ कुछ भी लिखने / टंकित करने के विचार भर से ही दुखने लगती हैं! क्यों विभ्रम जैसी मनोदशा है? क्यों, कुछ भी लिखने के ख्याल से मन में अजीब सी गहरी उदासी भर जाती है? विचार आते हैं और कभी-कभी बड़ी तेजी से और बेहिसाब आते हैं मगर बारिश होने से पहले ही बादल छट जाते हैं। तपती धूप में तन-मन जलने लगता है। समंदर के किनारे रहते हुए भी लू के थपेड़े झुलसाते हैं?

पता नहीं मैं हिंदी को लेकर परेशान हूँ या मेरी परेशानी का कारण हिंदी है? पता नहीं मैं पढ़ाने को लेकर परेशान हूँ या प्रशासन को लेकर परेशान हूँ। कभी-कभी लगता है कि परेशान रहना, परेशानी के साथ रहना, परेशानों और महा परेशानों के बीच रहकर खुद को परेशान रखना और फिर इस सबसे परेशान होकर खुद को परेशान महसूस करना ही मेरी नियति बन गई है। फिर सोचता हूँ अपनी परेशानी को लेकर घुटते रहने की कोई पक्की वज़ह भी तो होनी चाहिए!

सोचने से कान, नाक और फिर गले में दर्द होने लगता है। फिर यह दर्द माथे में और फिर पूरे सिर में हो जाता है। दर्द की दवाए बेअसर हो गई लगती हैं। अच्छी नींद आ जाती है तो सब ठीक हो जाता है। नाक के ऑपरेशन के बाद संवेदनशीलता बहुत बढ़ गई है। अब बदबू ज्यादा महसूस होती है। बाग-बगीचे तो दिखाई नहीं पड़ते। गटर के ढक्कन और उनसे बहता काला-नीला सा पानी वगैरा बहुत दिखाई देते हैं। स्कूटर चलाते समय बहुत सावधान रहना पड़ता है। इस चक्कर में  गटर ही गटर दिखाई देते हैं। गटर और गड्ढों से बचकर चलने की सावधानी में कई बार आदमी पास से गुजर जाता है।

फिर अंतराल आता है और अंतर्द्वंद्व से फलने फूलने लगता है।

Apr 18, 2011

टूटी दुकान में बड़ी तिजोरी है

टूटी फूटी सी दुकान में
चोरों ने देखा-
बड़ी सी एक तिजोरी में
बड़ा मजबूत सा ताला पड़ा है।

हैरान से हँसकर वे बोले-
गुरु घंटाल हैं बड़े
बेशर्म हैं जिनसे पाला पड़ा है।

ये खुरदरे चेहरे बड़े बे-रौनक सही
मगर हैं मगर
अंदर बड़ा घोटाला पड़ा है।

इस पुरानी
रेजगारी पर मत जाइए
तनिक घिसे सिक्कों को
परे सरकाइए

फिर देखिए
कितना बे-हिसाब और
बे-शुमार है
जो काला पड़ा है।

टूटी दुकान में बड़ी तिजोरी है
और तिजोरी में ताला पड़ा है।
-अजय मलिक
03-05-1985, प्रात: 9.00 बजे

बरस, दो-चार बरस

बरस, दो-चार बरस
वेदना-फुहार बरस
ज़ख्मों को छील-छील
प्रीत की पुकार बरस

चल कहीं दूर चलें
बरस दो चार बरस
भूल जाएं बीते सब
बरस दो चार बरस

आह से छलक-छलक
बीती बहार बरस
जीवन को लांघ कर
सपनों के पार बरस

पलकों की कोर छोड़
आंसू की धार बरस
हो सके तो बार-बार
और बहुत बार बरस

-अजय मलिक 
(01 -03 -1988) प्रात:

Apr 10, 2011

ए सी की सीली सीली सी हवा में

अब भी बहुत याद आता है
वह पुराना घर
वह घेर का ओसारा
बकांद के  पेड़ तले  बनी
गाय की खोर।

वह चौमासे की टपकती रात में
बिन बारिश भी
घंटों बरसती छान।

बूढ़े बाबा की बुनी वह खाट
और उसके बान, पायतें
वह हुक्का-गुडगुडी-चिलम
और दहकते अंगारे।

कोल्हू की वह रात-रात भर चलती जोटें
ताजे गुड की महक और
खोई की भट्टी का वह धुंआधार अलाव।

कुंडीवाले कुएं पर तपती दुपहरी में
घंटों डुबकियां लगाना - नहाना  
हरट के पतनाले की धार की गुलगुलियाँ,

वाह क्या खूब थी वह भी
हमारी जिंदादिल
चालीस साल पुरानी दुनियाँ।

अब पचास के चेहरे पर
सदाबहार तने तनाव के बीच
ए सी की सीली सीली सी हवा में
ये यादें  पुरवाइयां भर जाती हैं...

- अजय  मलिक  

Apr 7, 2011

दो अच्छी गज़लें

 (१)  
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है
कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है

जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है

होश अपने का भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है

देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,
फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है

हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में
रास्ता है कि कहीं और चला जाता है

दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की
आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।
                                             -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
(२)
अगर आप होते भुलाने के क़ाबिल,
तो होते कहां दिल लगाने के क़ाबिल !

वो वादा तुम्हारा , भरोसा हमारा ,
लगे कब हमें टूट जाने के क़ाबिल !

बसी है जो आंखों में तस्वीर तेरी ,
नहीं आंसुयों से मिटाने के क़ाबिल !

अँधेरे जुदाई के कुछ कम तो होते ,
जो होते तेरे ख़त जलाने के क़ाबिल !

मुहब्बत की शायद हक़ीक़त यही है ,
कि शै है ये सपने सजाने के क़ाबिल !

सनम मुझ को मंज़ूर मरना ख़ुशी से ,
बने मौत लेकिन फ़साने के क़ाबिल !

                                            -मधुभूषण शर्मा 'मधुर'


(कविता कोश के सौजन्य से)