Nov 12, 2011

भारत का 42वाँ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 23 से गोवा में



भारत का बयालीसवाँ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, गोवा में 23 नवम्बर 2011 से 03 दिसंबर 2011 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान देश-विदेश की अनेक फिल्मों का प्रदर्शन विभिन्न खंडों में किया जारगा। फिल्म समीक्षकों/ मीडिया के सदस्यों के लिए पंजीकरण की ऑनलाइन सुविधा नीचे दिए लिंक पर 15 नवम्बर 2011 तक उपलब्ध है-


-अजय मलिक

Oct 30, 2011

खाली मन के कई सवाल और मन-मन भर के कई उत्तर मनके

आदमी सोचता कुछ है, करता कुछ है और होता कुछ है। गाँव, घर, बूढ़े बाबा (दादा) और बड़े मामा की जब याद आती है तो अतीत के ढेर सारे पन्ने फड़फड़ाते पंखों की तरह खुलते चले जाते हैं। चौमासे के हफ्तों तक चले झड़ (लगातार झर-झर झरती बूदों ) के बाद नीले खुले आसमान तले, पानी के तेज प्रवाह से बहकर आई मिट्टी से बनी गोल मसनद सी पर कूदना और घुटनों तक मिट्टी में धँस जाना। ढेंचे के वे बड़े-बड़े हरे पौधे, ज्वार के आठ-दस फुट लंबे हरे पेड़ या पोधे, सुबह-सुबह न्यार (चारा) लेने सिद्धों या लालावाले  खेतों पर जाना। वो बड़ी-बड़ी गड्डियाँ सिर पर लादे, गर्दन ताने दौड़ने के मानिद चलना... फिर स्कूल के लिए जैसे-तैसे भागना। स्कूल से आने पर बड़े बाबा (ताऊ) का हुक्का ताजा करने, चिलम भरने का आदेश। शाम को भैंस का दूध दूहने  के लिए घंटों बैठे रहना... मच्छर ही नहीं डांस तक के डंक झेलना... सुबह-शाम कुएँ पर बाल्टी से पानी खींचकर नहाना। बरसात में कुआँ ऊपर तक भर जाता था, गज भर की रस्सी पानी खिचने के लिए काफी होती थी। काफी लोग एक साथ अलग-अलग बाल्टी लिए कुएँ पर नहाया कराते थे... वह कुआँ, उसके सामने की खुली जगह सब न जाने किस-किसने कब्जा ली है... अब वह रौनक कहीं भी नज़र नहीं आती। गाँव के लोग आज स्नेह भरी नज़रों से देखते नहीं, बल्कि संदेह भरी निगाहों से घूरते हैं। पिछले दिनों कृष्णबीर से बात हुई ... दशकों पहले वह मध्यप्रदेश पुलिस में भर्ती हो गया था... उसने बताया इस बार भी गाँव के चारों और रौह आ गई थी, खूब बरसा मेह इस बार... मगर वे छप्पर, वे ओसारे, वह छान अब गाँव में कहीं नहीं जो गाँव को गाँव होने का गौरव देते थे... 
कल मोटी-मोटी नमकीन रोटियाँ बनवाईं और प्याज की गंठी के साथ खाईं...इसे आप सनक कह सकते हैं... मुँह और गला प्याज से अभी तक जला हुआ है, मगर जो आनंद मिला उसे बयान नहीं किया जा सकता। आज शहरी हो जाने के बाद सब कुछ बनावटी सा हो गया है... मिट्टी से जीवन भर आदमी भागता फिरता है और अंत में उसी मिट्टी में शरण पाता है... चांदी-सोना कितना ललचाता है, मगर अंतत: सब मिट्टी हो जाता है।          

लिनक्स और भारतीय भाषाओं के लिए यूनिकोड

        लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम्स वाले कंप्यूटरों पर भी भारतीय भाषाओं में यूनिकोड में काम करने में कोई कठिनाई नहीं है, यहाँ कुछ लिंक्स देकर आपको सीधे लिनक्स की दुनिया तक पहुँचाया जा रहा है -
http://www.cdacmumbai.in/projects/indix/n_download.shtml

        "इंडिक्स" प्रस्तावना से साभार एक पैरा यहाँ दिया जा रहा- "टीडीआईएल कार्यक्रम के अंतर्गत संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा निधिक इंडिक्स परियोजना का मुख्य उद्देश्य है, नि:शुल्क सॉफ्टवेयर तथा खुले प्लैटफार्म और प्रणालियों के द्वारा भारतीय भाषाओं के कम्प्यूटिंग अनुप्रयोगों का बड़े पैमाने पर उपयोग उपलब्ध करना। इस परियोजना का विशिष्ट एवं तात्कालिक लक्ष्य है, यूनीकोड (UNICODE) तथा इस्की (ISCII) कूटों का प्रयोग करते हुए लिनक्स ऑपरेटिंग प्रणाली के योग्य अंगभूतों का स्थानीकरण, ताकि 12 मुख्य भारतीय भाषाओं के विषय विस्तु का सृजन, सम्पादन, अवलोकन तथा मुद्रण किया जा सके। ये 12 भाषाएं है- असमिया, बंगला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल और तेलुगु। इंडिक्स परियोजना के पहले चरण में भारतीय लिपियों, विशेषकर हिंदी भाषा, की विशेषताओं को उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया गया"
        नीचे कुछ लिंक्स दिए जा रहे हैं, उनके लिए, जो लिनक्स जैसे मुद्दों पर आगे पढ़ना और बढ़ना चाहते हैं । इनके माध्यम से कई व्यावहारिक समस्याओं के समाधान पाए जा सकते हैं। निशुल्क उपलब्ध यह सामग्री कितनी उपयोगी है, यह आप स्वयं आजमाइए-


http://epandit.shrish.in/labs/Indic-IME-Lite

       इसके अलावा नीचे दिए गए लिंक से यदि चाहें तो तीन चीजें डाउन लोड करें-

1. remington-installer

2. Linux pocket guide in Hindi

3. Converter-Training
और लिंक है-
http://cid-60eace63e15a752a.office.live.com/self.aspx/.Public/remingt...


-अजय मलिक



Oct 26, 2011

कुछ दीप जलाओ तुम भी, कुछ दीप जलाएँ हम भी

हर घर में उजियारा भरने
कुछ दीप जलाओ तुम भी
जग भर को उजियारा करने

Oct 19, 2011

यदि विंडोज XP में लैंग्वेज़ बार गायब हो जाए...

टास्क बार से यदि लैंग्वेज़ बार गायब हो जाए तो क्या हो...

आज विंडोज XP में लैंग्वेज़   की बात करेंगे। यदि टास्क बार से EN गायब हो गया है तो पहले स्क्रीन पर लैंग्वेज़  बार तलाशें। हो सकता है आपने लैंग्वेज़ बार रेस्टोर बटन क्लिक कर दिया हो। यदि स्क्रीन पर लैंग्वेज़ बार नहीं है तो आपने लैंग्वेज़  बार को छुपा (hide) दिया है। इसे पुन: पाने के लिए कंट्रोल पैनल में रीज़नल  एवं लैंग्वेज़  विकल्प में जाएँ और Languages क्लिक करने के बाद नीचे दिए

Oct 18, 2011

यदि लैड्ग्वेज बार गायब हो जाए तो क्या हो...

कुछ मित्रों ने पूछा है-
टास्क बार से यदि लैड्ग्वेज बार गायब हो जाए तो क्या हो...
आज विंडोज विस्ता और 7 की बात करेंगे। यदि टास्क बार से EN गायब हो गया है तो पहले स्क्रीन पर लैड्ग्वेज बार तलाशें। हो सकता है आपने लैड्ग्वेज बार रेस्टोर बटन क्लिक कर दिया हो। यदि स्क्रीन पर लैड्ग्वेज बार नहीं है तो आपने लैड्ग्वेज बार को छुपा (hide) दिया है। इसे पुन: पाने के

Oct 17, 2011

विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम्स में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं की यनिकोड सक्रियता हेतु सहायता

ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ हों या मैक या लिनक्स, भारतीय भाषा हिंदी हो या तमिल, बांग्ला हो या मलयालम, यूनिकोड सक्रियता हेतु निशुल्क सहायता उपलब्ध है- विकीपीडिया पर। एक ही आलेख में लगभग सारी बातों पर चर्चा और संभावित समाधान और...और भी बहुत कुछ, बस नीचे दिए लिंक को क्लिक करें... हो जाएगी बल्ले-बल्ले    


(wikipedia.org के सौजन्य से)

Oct 15, 2011

भाषायी कंप्यूटरीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान

                 राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट http://www.rajbhasha.gov.in/  पर सामूहिक चर्चा-परिचर्चा का एक मंच हाल ही में शुरू किया गया है जिसे नाम दिया गया है- "भाषायी कंप्यूटरीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान।"  देश-विदेश का कोई भी व्यक्ति जिसके पास गूगल ई मेल का पता है, इस समूह का सदस्य बन सकता है। समूह के  सदस्य हिन्दी/इंडिक कम्प्यूटिंग से संबंधित अपनी समस्याएँ पोस्ट कर सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान भी समूह के सदस्यों द्वारा सुझाए जाएँगे। हिन्दी/इंडिक  कम्प्यूटिंग पर राष्ट्रीय सूचना केंद्र के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक श्री केवल कृष्ण जी की विशेष अभ्युक्तियाँ भी इस मंच पर उपलब्ध होंगी। इस समूह के बारे और अधिक जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें- 

भाषायी कंप्यूटरीकरण संबंधी समस्याओं का समाधान


Oct 7, 2011

चाणक्य फॉन्ट को निशुल्क यूनिकोड में बदलें

शुषा, कृतिदेव, चाणक्य, शिवाजी और श्रीलिपि फोंट्स को निशुल्क यूनिकोड फोंट्स में बदलने की सुविधा कविता कोश (www.kavitakosh.org/) पर उपलब्ध है। कवितकोष के मुखपृष्ठ  पर फॉन्ट परिवर्तक बटन दबाने पर आप उपर्युक्त फॉन्ट कन्वर्टर पृष्ठ पर पहुँच जाएंगे। उपर्युक्त जिस भी फॉन्ट में आपका दस्तावेज़ है उसे चुनिए और बाक्स में पेस्ट कर दीजिए, बस आपका काम हो जाएगा। यदि आप यूनिकोड फोंट्स में तैयार दस्तावेज़ को उपर्युक्त नॉन यूनिकोड फोंट्स में बदलना चाहते हैं तो उसका विकल्प भी मौजूद है। मुफ्त आजमाने में आपका क्या जाता है?

बस एक बात का ध्यान जरूर रखें कि कविताकोश फ़ायरफ़ॉक्स तथा गूगल क्रोम में ही सर्वोत्तम दिखाई देता है।

-अजय मलिक

Oct 6, 2011

विश्व जन की विजय हो, नव सृजन की विजय हो...... असत्य परे सत्य हो और सत्य की ही विजय हो......




                                                                                                           सभी छवियाँ गूगल छवि से साभार

Oct 1, 2011

थोड़ा मनोरंजन, फ़ेसबुक से विशाल अग्रवाल का संकलन-3

थोड़ा मनोरंजन, फ़ेसबुक से विशाल अग्रवाल का संकलन-2

थोड़ा मनोरंजन, फ़ेसबुक से विशाल अग्रवाल का संकलन-1

राजभाषा विभाग के नए सचिव
















व्हिसपर्स इन दा कोरिडोर्स की खबर के अनुसार वर्तमान पॅंचायती राज सचिव श्री ए एन पी सिन्हा राजभाषा विभाग के नए सचिव बनाए गए हैं। वे बिहार कैडर के 1974 बैच के वरिष्ठ आई ए एस अधिकारी हैं।  

Sep 30, 2011

एक प्रश्नपत्र राजभाषा से संबंधित


राजभाषा प्रतियोगिता : 2011

नोट : प्रश्न - 1 से 25 तक अनिवार्य हैं तथा प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है। प्रश्न - 26 में हिंदी में अनुवाद हेतु 5 अँग्रेजी टिप्पणियाँ दी गई हैं। प्रत्येक टिप्पणी के लिए 2 अंक हैं तथा यह प्रश्न 10 अंक का है। प्रश्न - 27 में पाँच विषय दिए गए हैं जिनमें से किसी एक विषय पर हिंदी में निबंध लिखिए। यह प्रश्न 15 अंक का है।

समय 1 घंटा
पूर्णांक – 50

1- राजभाषा किसे कहते हैं ? (1X25=25)

राजकाज की भाषा को / उत्तर भारतीय जनता की भाषा को / निजी पत्राचार की भाषा को / संस्कृत को

2- तारामणि, चेन्नई में किसकी नींव स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री ने रखी थी ?

Sep 29, 2011

कराहटों सी करवटें


कराहटों सी करवटें
जख्मों के जश्न से
बदल रही हैं बार-बार

आर-पार, वार-पार
धूम मची द्वार-द्वार
तार-तार दामन में
दिल भी हुए तार-तार

यह धरा भी धरी धरी
धड़कती है धार-धार
जीत रहा जुल्म जहां
हार रहे वीर वार

ये फिरंगी आग आज
फ़ैल गई बाज-बाज़
हिंद में ही सिंध धसी
सभी फंसे द्वार पार


रूठ गया कंठ सुन
जालिमों की अंट संट
डंठल से दंश डसें
स्याम से न सधे कंस

रावण का राग सुन
सुर भी जपें सरगम

रोज इस झन झन से
झेंप रहें सद जन


काठ के कुम्हार
अवे, ढूढ़ रहे कुल्हड़
कराहटों सी करवटें...

-अजय मलिक

Sep 23, 2011

हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग

पेश हैं चार गज़ले कविताकोश के सौजन्य से।

शायर हैं दुष्यंत कुमार, मुनव्वर राना और सर्वत एम जमाल


एक:

खँडहर बचे हुए हैं, इमारत नहीं रही
अच्छा हुआ कि सर पे कोई छत नहीं रही

हिन्दी व्याकरण से संबंधित दो बहुपयोगी लिंक

भारतकोश पर उपलब्ध है ज्ञान का भंडार। हिन्दी भाषा एवं अन्य भारतीय भाषाओं के संबंध में इतने सरल और गंभीर रूप में जानकारी मिलना बहुत कठिन है। हिन्दी व्याकरण से संबंधित दो बहुपयोगी लिंक यहाँ भारतकोश से जुडने के लिए दिए जा रहे हैं-

हिन्दी व्याकरण



(सौजन्य : भारतकोश)

Sep 22, 2011

अजी भाई साहब जी, सुनो तो जी...

अंधेरा ... इस घनघोर अंधेरे में खड़ा हुआ मैं, उजाले में चलते-फिरते, गुलाटियाँ लगाते, गिलोरियाँ खेलते, गोटियाँ बिठाते कई तरह के चेहरों को, बड़ी आसानी से देख पाता हूँ। मुझे अंधेरे में गुम हो गया मान लिया गया है। मैं शायद ब्रह्मांड का हिस्सा बन गया हूँ... ब्लैक होल में समाकर सब ऊर्जाएँ सबसे बड़ी ऊर्जा का हिस्सा बन जाती हैं। अंधेरा जो सबसे बड़ी ऊर्जा है। अंधेरे से सब उजाले में जाना चाहते हैं ... उजाले से कोई भी अंधेरे में नहीं आना चाहता, मगर आना तो पड़ता है। ऐसा कोई नहीं जो अंधेरे में समाने से बच सके। घर का अंधेरा सब मिटाना चाहते हैं; बाकी किसी जगह बिखरे अंधेरे को कोई देखना तक नहीं चाहता। इस अंधेरे में छुपे रहस्यों को क्यों कोई जानना-समझना-छूना-पहचानना नहीं चाहता।

Sep 20, 2011

दो नंबरी तीन हों तो क्या हो...

लगभग 18 वर्ष पूर्व एक लेख लिखा था और शायद राष्ट्रीय सहारा में छपा था। लेख का शीर्षक था- "अधिकांश सुपर स्टारों का खास रिश्ता है दो के अंक से।" पाँच-छह साल पहले एक टी वी चैनल पर इसी विषय पर एक कार्यक्रम भी आया था।
संजय मासूम ने आज भट्ट साहब को जन्मदिन की बधाई दी है फेसबुक के माध्यम से। भट्ट साहब को मेरी ओर से भी बधाई। मैं उनसे कभी मिला तो नहीं मगर बंबई के मुंबई में बदलने के दौर में जब शक्ति सामंत सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हुआ करते थे तब एक बार फोन पर उनसे जरूर बातचीत हुई थी। 

Sep 18, 2011

रचना जो प्रस्तावना में ही खो गई

कल किसने देखा है? न आने वाला कल आता है न जाने वाला ही कभी लौटता है। आने वाले की आशा तो की जा सकती है मगर चले जाने वाले की तो बस कल्पना ही की जा सकती है। बीते कल में आने वाले कल की जो उम्मीदें थीं वे एक और बीते हुए कल में समा गईं। एक मुस्कराते हुए सौम्य चेहरे से खिलखिलाहट और किलकारियों की आशा में चमकते दो गौरवान्वित चेहरों पर अचानक ढेर सारी झुर्रियां छा गईं और रचना प्रस्तावना में ही खो गई।
एक रचना जो सैंकड़ों, हजारों और शायद लाखों ज़िंदगियों की उम्मीद और मुस्कान बनने को आतुर थी, वह अचानक उपसंहार तक पहुँचते-पहुंचते स्वत: मिट गई। कल शाम से मैं उसी रचना के बारे में सोच रहा हूँ... वह रचना जो अब नहीं है, वह रचना जिसे हम बहुत दूर तक असीमित संभावनाओं के साथ आगे जाता देख रहे थे...जिसके उपचार के भरोसे बुढ़ापे के दस सालों को बारह-पंद्रह तक बढ़ा लेने के सपने हम बहुत सारे लोग देख रहे थे। वह रचना अचानक न जाने कैसे मिट गई। सिर्फ साढ़े तीन महीने पहले जिस रचना के साथ हम लोग बहुत लंबी चौड़ी हांक रहे थे। जो हमें हाँकता देख हँस रही थी, हमारे साथ अपनी संपूर्णता के साथ थी, जिसे सुबह जल्दबाज़ी में हम उठाए बिना ही चले आए थे, वह हमारी रचना, कल से भी पहले कल न जाने क्यों हम सब से रूठकर कहीं खो गई। 
ऐसा भी कभी हो सकता है क्या? विश्वास नहीं हो रहा... मगर करना तो पड़ेगा क्योंकि बीता हुआ कल कभी भी नहीं आता। उस दिव्य आत्मा को जो दिवंगत हो गई, प्रणाम और ईश्वर से प्रार्थना है कि उसे शांति दे... और संबल, साहस और शक्ति दे उन रचनाकारों को जिनकी रचना अब नहीं रही।                 

Sep 15, 2011

पुरस्कृत होकर एक साल तक अपना नाम सिर्फ हिंदी में लिखेंगे

कितने सारे पुरस्कार!
       हिंदी में श्रेष्ठ या उत्कृष्ट काम करने के लिए या सिर्फ हिंदी में काम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर से लेकर छोटे-छोटे कार्यालयों के स्तर पर पुरस्कार ग्रहण करने वाले हिंदी सेवियों को हार्दिक बधाई। उनके सत्प्रयत्नों से राजभाषा हिंदी को जो मान-सम्मान मिला है उसके लिए सचमुच वे बधाई के पात्र हैं, अनुकरणीय हैं। उनसे तथा हिंदी से जुड़े पुरस्कारों से प्रेरित होकर अनेक लोग हिंदी से जुड़ेंगे, हिंदी में कामकाज करेंगे, हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। प्रेरणा, प्रोत्साहन और सद्भावना ये ही तो मूल मंत्र हैं सरकार की राजभाषा नीति के।

Sep 14, 2011

हिंदी दिवस समारोह का सीधा प्रसारण (लाइव वैबकास्ट) राजभाषा विभाग की वेबसाइट के माध्यम से

आज प्रात: 11.30 बजे से विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित हिंदी दिवस समारोह का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के साथ-साथ राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र भवन, नई दिल्ली से लाइव वैबकास्ट के जरिए देखा जा सकेगा। इसके लिए राजभाषा विभाग की वेबसाइट http://www.rajbhaasha.gov.in/  पर भी लिंक उपलब्ध है-


http://webcast.gov.in/hindi-diwas/


हिंदी दिवस मनाएँ, हिंदी को हर दिल की मंजिल बनाएँ 

हम हिन्दुस्तानी हैं, हिंदी हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है  

भारत का कोई भी नागरिक हिंदी से अपरिचित नहीं है



  

Sep 11, 2011

हिंदी सबके लिए की ओर से हिंदी दिवस 14 सितंबर 2011 के अवसर पर शुभकामनाएँ

अद्भुत है हिंदी दिवस का ऐसा कलात्मक स्वागत

राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर इस बार अद्भुत कलात्मक ढंग से हिंदी दिवस का स्वागत किया गया है। एक बार जरूर लॉग इन करें- http://www.rajbhasha.gov.in/ पर


राजभाषा विभाग की वेबसाइट से साभार

Sep 8, 2011

हिंदी दिवस पर माननीय गृह मंत्री जी का संदेश


राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय की वेबसाइट http://www.rajbhasha.nic.in/ के सौजन्य से

Sep 4, 2011

मेरे गुरु...और गुरुजनों को प्रणाम

मन की उदासी या उदास मन, आवारा फिल्म का वह संवाद “दिल और कानून... कानून और दिल; कानून किसी दिल को नहीं मानता... और दिल भी किसी कानून को नहीं मानता...”  स्वर्गीय डॉ0 के पी अग्रवाल की बहुत याद आती है... विशेषकर सितंबर का महीना शुरू होने पर... ऐसे गुरु, शुभचिंतक और जिगरी दोस्त के बिना उदास मन की उदासी और अधिक बढ़ जाती है।

Sep 1, 2011

यूँ तुझे नमन है गजानन






Aug 18, 2011

कुछ नए लिंक्स हिंदीटैक के सौजन्य से

कल मेल से हिंदीटैक का एक लिंक मिला और उसपर कुछ बेहद उपयोगी लिंक्स मिले। इन लिंक्स को यहाँ बिना किसी अभ्युक्ति के दिया जा रहा है। कृपालु पाठक ही इनपर अपनी प्रतिक्रिया दें... 






Aug 16, 2011

किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है...

      राहत इन्दौरी की 2 ग़ज़लें
          (वेब दुनिया के सौजन्य से)
            (1)

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे


तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे

लहूलोहान पड़ा था ज़मीं पे इक सूरज
परिन्दे अपने परों से हवाएँ करने लगे


ज़मीं पे आ गए आँखों से टूट कर आँसू
बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे

झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले
वो धूप है कि शजर इलतिजाएँ करने लगे

अजीब रंग था मजलिस का, ख़ूब महफ़िल थी
सफ़ेद पोश उठे काएँ-काएँ करने लगे

           (2)

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
 

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है


मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
 
हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है


जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है


सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

                                                               (वेब दुनिया के सौजन्य से)

Aug 15, 2011

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा










Aug 10, 2011

क्या आप जानते हैं ??



यह अजीब सी बात है मगर शर्तिया आप इस सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं कि...

अंग्रेज़ी के a, b, c, और d अक्षर 1 से 99 तक की अंगेजी गिनतियों में प्रयोग नहीं होते,


अक्षर पहली बार 100 (Hundred) में प्रयोग होता है...

a, b और c अक्षर 1 से 999 तक की अंगेजी गिनतियों में प्रयोग नहीं होते,

a अक्षर पहली बार 1000 (Thousand) में प्रयोग होता है...

b और c अक्षर 1 से 999,999,999 तक की अंगेजी गिनतियों में प्रयोग नहीं होते,

b अक्षर पहली बार अरब (Billion) में प्रयोग होता है...

और

c अक्षर का प्रयोग अंगेजी गिनतियों में कहीं भी नहीं होता।

(हिंदी शिक्षक बंधु से प्राप्त ई मेल पर आधारित)

Jul 31, 2011

विन्डोज़-7 तथा एम एस ऑफिस 2010 में तैयार पॉवर पॉइंट...

यदि आपने कोई पॉवर पॉइंट  प्रस्तुति विन्डोज़-7  तथा एम एस ऑफिस 2010 में तैयार की है और काफी कुछ एनीमेशन आदि का प्रयोग किया है तो जहा भी प्रस्तुति  के लिए जाएं अपना लैपटॉप साथ ले जाएं, क्योंकि उपर्युक्त प्रस्तुति विन्डोज़-7 तथा माक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2010 के बिना सही से काम नहीं   करेगी.  

राजभाषा मंत्र को विन्डोज़-7 में आजमाइए

राजभाषा विभाग द्वारा सीडेक से तैयार कराए जा रहे अंग्रेजी  हिंदी अनुवाद सॉफ्टवेयर मंत्र को   विंडोज एक्स-पी तथा विडोज़ विस्ता ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटर्स में इंस्टाल करने में एमएसक्यूएल सर्वर की आवश्यकता के कारण कठिनाई होती थी। प्रशासनिक कामकाज के लिए विकसित कराए जा रहे राजभाषा मंत्र  सॉफ्टवेयर को यूंही आजमाने के उद्देश्य से जब मैंने  विंडोज-7 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ इंस्टाल करने की कोशिश की तो यह बिना एमएसक्यूएल सर्वर के न सिर्फ इंस्टाल हो गया बल्कि अनुवाद भी इससे कहीं अधिक सरलता से हुआ। संभवत:  विंडोज-7 में मंत्र के लिए अलग से  एमएसक्यूएल सर्वर की आवश्यकता  नहीं होती और यह तुलनात्मक रूप से काफी अच्छी तरह  काम करता है। मंत्र से हालाँकि गूगल अनुवाद जैसी तेज गति से तो अनुवाद नहीं होता किन्तु डोमेन आधारित होने के कारण शुद्धता की दृष्टि से संभवत: मंत्र उपयोगी हो सकता है। मंत्र के लिए गूगल अनुवाद की तरह इंटरनेट की आवश्यकता नहीं है। आप भी इसे आजमाकर देखिए।

-अजय मलिक

Jul 26, 2011

हिंदी सबके लिए का दो वर्ष का सफर...

आज हिंदी सबके लिए ने दो वर्ष का सफर पूरा कर लिया। मूलत: राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित इस छोटे से प्रयास से बेशक बहुत कुछ तो नहीं पाया जा सका, फिर भी कुछ थके-हारे से कदम बढ़ाने की हिम्मत तो जुटाई ही गई। पाठकों का जितना स्नेह पाने के मोह के साथ हमने शुरुआत की थी उससे तो ज्यादा ही पाया सा लगता है। हाँ, हमारे प्रयासों में जरूर कुछ शिथिलता आई है जिसका कारण व्यस्तता भी है। यदि ईश्वर कृपा रही तो इस तीसरे वर्ष में कुछ स्फूर्ति दिखा सकने का प्रयास हम जरूर करेंगे।

-हिंदी सबके लिए परिवार

Jul 15, 2011

केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उपसंस्थान, राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नै में केनरा बैंक, सर्किल कार्यालय, चेन्नई के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए "हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड एवं ई-लर्निंग" विषय पर एक दिवसीय विशेष हिंदी कार्यशाला

केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण उपसंस्थान, राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नै के लीला हिंदी भाषा कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र में दिनांक:12-07-2011 को केनरा बैंक , सर्किल कार्यालय, चेन्नई के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए "हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड एवं ई-लर्निंग" विषय पर एक दिवसीय विशेष हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने निम्नलिखित विषयों पर विभिन्न व्याख्याताओं से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया-
1. हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड परिचय एवं विभिन्न विंडोज में सक्रियता (विंडोज 2000/ विंडोज एक्सपी/ विंडोज विस्ता/ विंडोज 7 में हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड सक्रिय करने की विधियों पर पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं परिचर्चा )
– श्री अजय मलिक , सहायक निदेशक द्वारा
2. हिंदी ई-लर्निंग एवं एवं भारतीय भाषाओं में ई-मेल, ऑनलाइन डैमो/ प्रदर्शन
- श्रीमती प्रतिभा मलिक, हिंदी प्राध्यापक, हिंदी शिक्षण योजना, चेन्नै
3. कंप्यूटर हार्डवेयर-सॉफ्टवेर एवं इंडिक के साथ विंडोज इन्स्टालेशन, पावर पॉइंट प्रस्तुति
– श्री गुरु प्रसाद, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, सीएलआरआई
4. एम एस ऑफिस वर्ड, एक्सेल एवं पावर पाइंट में हिंदी एवं इंडिक यूनिकोड का प्रयोग; विभिन्न यूनिकोड फोंट एवं लिपि परिवर्तक सुविधा / टिबिल फोंट परिवर्तकों का प्रदर्शन
-श्री अजय मलिक, सहायक निदेशक
कुल 21 प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला का उद्घाटन केनरा बैंक , सर्किल कार्यालय, चेन्नई  के सहायक महाप्रबंधक श्री वी सुंदरम ने किया। कार्यशाला का समन्वय एवं संचालन श्री अजय मलिक, सहायक निदेशक, केंद्रीय हिन्दी प्रशिक्षण उपसंस्थान, चेन्नई ने किया। उदघाटन अवसर पर चेन्नई नराकास (बैंक एवं वित्तीय संस्थाएं) के सदस्य सचिव श्री सुरेश कुलकर्णी तथा केनरा बैंक क्षेत्रीय कर्मचारी प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्रभारी श्री श्रीनिवासन तथा वरिष्ठ प्रबंधक राजभाषा श्री रामकुमार भी उपस्थित थे।






Jul 9, 2011

केरल विश्वविद्यालय एम. ए. हिंदी का एक पुराना प्रश्न-पत्र :: क्या प्राज्ञ के परीक्षार्थी इसे हल कर पाएँगे?




 

(केरल विश्वविद्यालय की वेबसाइट से साभार)

Jun 25, 2011

कंप्यूटर से हिन्दी में हल्ला बोल

-इस काम के लिए निम्नलिखित सॉफ्टवेर बहुत उपयोगी है -


i386 = इसमें विंडोज एक्स पी की वे फ़ाइलें हैं जो हिन्दी सक्रिय करने के लिए काम आती हैं .

MySQL = यह मंत्र आदि स्थापित करने के काम आता है.

Paragon partition magic आपके कंप्यूटर में हार्ड डिस्क में एक ड्राइव से दूसरे ड्राइव में स्पेस घटाने - बढ़ाने के काम आता है.

winRAR = कम्प्रेस्ड फाईल्स को खोलने के काम आता है . सभी IME जिप फ़ाइल हैं जिन्हें OPEN करने के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी .

Suvidha, Saaraansh, TBIL यूनिकोड फ़ॉन्ट परिवर्तक हैं. TBIL से किसी भी भारतीय भाषा का फ़ॉन्ट किसी भी अन्य भारतीय भाषा के यूनिकोड अथवा नॉन यूनिकोड फ़ॉन्ट में परिवर्तित किया जा सकता है तथा इसके विपरीत भी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.

Hindi.exe विंडोज vista तथा WIN 7 में हिन्दी में अग्रेजी /रोमन लिपि के माध्यम से हिन्दी में काम करने की सुविधा प्रदान करता है. अत्यंत उपयोगी है . विंडोज एक्सपी में इसे स्थापित करने से पहले dotnetfx3 तथा win xp dotnetfx3setup को स्थापित करने की जरूरत है. अन्य भाषाओं में काम करने के लिए भी Tamil Indic Input/ Malayalam Indic Input/ Bangla Indic Input/ Hindi Indic Input आदि दिए गए हैं.

यूनिकोड समर्थित ओपन टाइप फॉन्ट & यूनिकोड समर्थित की-बोर्ड ड्राइवर्स : यह हिन्दी कुंजी पटल तथा 160 से अधिक हिन्दी यूनिकोड फ़ॉन्ट्स स्थापित करता है.

इन उपयोगी सॉफ्टवेयर के साथ आप बड़े-बड़ों की छुट्टी कर सकते हैं.

-अजय मलिक

राजभाषा की अवधारणा, हमारे कर्तव्य और मनमानी व्याख्याएँ

- अजय मलिक
[इस आलेख में व्यक्त विचार लेखक के एक भारतीय नागरिक के रूप में पूरी तरह निजी विचार हैं]

हमारा संविधान कब, कैसे और क्यों बना ? हमारे संविधान के किसी भाग के किसी अनुच्छेद में कोई प्रावधान विशेष क्यों किया गया ? हमारे संविधान में की गई व्यवस्थाएँ अच्छी हैं या बुरी, सही हैं या सही नहीं हैं ? ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिन्हें जाने-अनजाने हर बहस का मुद्दा बनाया जाता है ।

एक आम भारतीय नागरिक के नाते इन प्रश्नों के उत्तरों की खोज में उलझने से कहीं बेहतर यह स्वीकारना क्या सही नहीं है कि हमने, हमारे पूर्वजों ने, हमारी व्यवस्था ने जो विधान हमें दिया है वह सर्वोपरि है उसका प्रत्येक अनुच्छेद, प्रत्येक पंक्ति और प्रत्येक शब्द 'विधि' अर्थात कानून है और कानून का पालन करना हर नागरिक का प्रथम कर्तव्य है? -एक ऐसा कर्तव्य जो अगर थोपा हुआ प्रतीत होता है तब भी विधि द्वारा अन्य कोई व्यवस्था किए जाने तक उसका पालन करने से बचा नहीं जा सकता?

संविधान में समसामयिक आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधन आदि के लिए हमारे लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च सभा यानी हमारी संसद है।

हमारे लिए, हमारे द्वारा दिए गए विधान में किसी बात, तथ्य या कथ्य का क्या मतलब है अर्थात संवैधानिक प्रावधानों का वास्तविक अभिप्राय क्या है इसकी व्याख्या करने के लिए हमारा सर्वोच्च न्यायालय है।

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -2

1. सुंदर लिखावट में लिखिए-

वैज्ञानिकों ने पहली बार ब्रहंमाण्ड में एक ऐसे ग्रह को चिन्हित किया है जो देखने में हूबहू पृथ्वी जैसा है। यह ग्रह हमारे सौर मंडल से बाहर देखा गया है। इस पर जीवन के आसार हमारी धरती जैसे ही है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का दावा है कि इस ग्रह को सौर मंडल से बाहर ऐसे इलाके में देखा गया है जिसमें जीवन की संभावनाएं पहले से ही जताई जा रही हैं। इसे "गोल्डीलॉक्स जोन" कहा जाता है।

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र-1


1. सुंदर लिखावट में लिखिए-

भारत में पहले दस विशिष्ट पहचान नंबर महाराष्ट्र के आदिवासियों को दिए गए हैं। पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह नंबर देते हुए कहा कि इससे गरीबों को कल्याणकारी योजनाओं का फायदा लेने में मदद होगी। भारत में सभी नागरिकों को खास पहचान पत्र जारी करने की दिशा में काम हो रहा है। इसी के तहत प्रधानमंत्री सिंह और श्रीमती सोनिया गांधी ने दस टेंभली आदिवासियों को "आधार कार्ड" दिए हैं।

2. नीचे दिए गए पैरा के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

जाने क्यों अच्छे लगते हैं घनानंद के ये छंद

परकाजहि देह को धारि फिरौ, परजन्य जथारथ ह्वै दरसौ।
निधि-नीर सुधा के समान करौ, सबही बिधि सज्जनता सरसौ।
घनआनँद जीवन दायक हौ, कछू मेरियौ पीर हियें परसौ।
कबहूँ वा बिसासी सुजान के आँगन, मो अँसुवानहिं लै बरसौ॥

’घनाआनँद’ जीवन मूल सुजान की, कौंधनि हू न कहूँ दरसैं ।
सु न जानिये धौं कित छाय रहे, दृग चातक प्रान तपै तरसैं ॥
बिन पावस तो इन्हें थ्यावस हो न, सु क्यों करि ये अब सो परसैं।
बदरा बरसै रितु में घिरि कै, नितहीं अँखियाँ उघरी बरसैं ॥

अति सूधो सनेह को मारग है, जेहुं नेकु सयानप बाँक नहीं।
तहाँ साँचे चलैं तजि आपनपौ झिझकैं कपटी जे निसाँक नहीं॥
घनआनंद प्यारे सुजान सुनौ इहैं एक ते दूसरो आँक नहीं।
तुम कौन सी पाटी पढ़े हौ लला, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं॥

कितने शहरों तक गाँव चले

किसी गीत की छांव तले
कितने शहरों तक गाँव चले

सब छूट गए पीपल पीछे
जब हाँफे-हारे पाँव चले

पनघट पनचक्की पतनाले
सब खेत गए लालावाले

न पछुवा चली न पुरवाई
झूले से रूठी अंगड़ाई

ओसारे का छप्पर छूटा
घर लुटा द्वार टूटा फूटा

बाबा की वह टूटी खटिया
जाने किसने लूटी बछिया

जिसने जो देखा छीन लिया
टूटा-फूटा तक बीन लिया

सब बदल गए इंसान भले
कितने शहरों तक गाँव चले

-अजय मलिक (c)

Jun 22, 2011

गूगल ने दी हिन्दी के अतिरिक्त अन्य पाँच भारतीय भाषाओं में अनुवाद की सुविधा

गूगल ने भारत में अपनी अनुवाद सेवाओं का विस्तार किया है। अब गूगल अनुवाद की सुविधा हिन्दी के साथ-साथ  बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, तमिल और तेलुगू में भी उपलब्ध है।

यहाँ हम गूगल अनुवाद के माध्यम से प्रवीण पाठ्यक्रम के प्रथम पाठ का तमिल अनुवाद दे रहे हैं। तमिल भाषी हिन्दी के विद्यार्थी कृपया बताएं कि इसमें कितनी शुद्धता है और कितने सुधार की आवश्यकता है?

நாங்கள் இந்தியாவின் கிழக்கு ஒரிசா பயணம் சலுகை விட்டு இந்த திட்டம் உருவாக்கப்பட்டது.

ஒரிசா எப்போதும் எங்களை கவர்ந்து வருகிறது. கடவுள் என் மனைவியும் சத்தியம் செய்ய பூரி ஜெகன்னாத் என்னை வணங்க தேவைப்பட்டது.நாங்கள் இரயில் ஒரிசா தலைநகர் புவனேஸ்வர் முடிவு வந்தோம்.

Jun 16, 2011

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रवीण पाठमाला के पाठों पर आधारित यहाँ दिए जा रहे प्रश्नोत्तर बड़े ही परिश्रम से हमारे मित्र श्री विश्वजीत मजूमदार, हिन्दी प्राध्यापक, हिन्दी शिक्षण योजना, दुर्गापुर ने तैयार किए हैं। 
  
पाठ -1

उड़ीसा की सैर


1.  लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर कहाँ जाने का कार्यक्रम बनाया ?

उत्तर- लेखक ने छुट्टी यात्रा रियायत लेकर उड़ीसा जाने का कार्यक्रम बनाया ।

2.  भगवान जगन्नाथ की नगरी किसे कहा जाता है ?

उत्तर- पुरी को भगवान जगन्नाथ की नगरी कहा जाता है ।

3.  जगन्नानथ मंदिर में किसकी मूर्तियां स्थापित हैं ?

उत्तर- जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं ।

4.  पुरी के समुद्र तट पर किस नदी का संगम होता है ?

उत्तर- पुरी के समुद्र तट पर चंद्रभागा नदी का संगम होता है ।

5.  कोणार्क का सूर्य मंदिर किस लिए विश्व प्रसिद्ध है ?

उत्तर- कोणार्क का सूर्यमंदिर अपने भव्य शिल्पकला केलिए विश्व प्रसिद्ध है ।

6.  लिंगराज मंदिर कितने मंदिरों का परिसर है ?

उत्तर- लिंगराज मंदिर 108 मंदिरों का परिसर है ।

Jun 12, 2011

ये फूल काश्मीर के

ये गुलिस्ताँ हमारा

गुलमार्ग

चश्मे-शाही और चार चिनार



फोटो: (c) अजय मलिक
             ऋचा मलिक

हुक्का, हारा, चूल्हा, चक्की

Jun 8, 2011

प्रवीण पाठमाला पाठ 1 तमिल लिप्यांतरण

(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सीडैक )

இஸ பார ஹமநே சுட்டீ யாத்ரா ரியாயத லேகர பாரத கே பூர்வ மேஂ ஸ்தித உட஼ீஸா ஜாநே கா கார்யக்ரம பநாயா .


உட஼ீஸா ஹமேஂ ஹமேஷா ஹீ ஆகர்ஷித கரதா ரஹா ஹை . ஈஷ்வர மேஂ அகாத ஷ்ரத்தா கே காரண ஜகந்நாத புரீ கே தர்ஷந கரநா மேரீ வ மேரீ பத்நீ கீ இச்சா தீ . இஸகே ஸாத ஹீ ஸம்ராட அஷோக கீ கலிஂக விஜய கா யுத்த க்ஷேத்ர வ அந்ய ஐதிஹாஸிக ஸ்தல பீ மைஂ தேகநா சாஹதா தா . ஹம ரேல ஸே உட஼ீஸா கீ ராஜதாநீ புவநேஷ்வர பஹு஁சே .

Jun 4, 2011

कुछ फूल कश्मीर से


                              फोटो:  (C) अजय मलिक

May 14, 2011

इस अंतराल का अंतर्द्वंद्व

जब से हिन्दी सबके लिए ब्लॉग शुरू हुआ है तब से इतना लंबा अंतराल हावी नहीं हुआ। मैं खुद हैरान-परेशान हूँ कि क्यों टंकण करने वाली दो अंगुलियाँ कुछ भी लिखने / टंकित करने के विचार भर से ही दुखने लगती हैं! क्यों विभ्रम जैसी मनोदशा है? क्यों, कुछ भी लिखने के ख्याल से मन में अजीब सी गहरी उदासी भर जाती है? विचार आते हैं और कभी-कभी बड़ी तेजी से और बेहिसाब आते हैं मगर बारिश होने से पहले ही बादल छट जाते हैं। तपती धूप में तन-मन जलने लगता है। समंदर के किनारे रहते हुए भी लू के थपेड़े झुलसाते हैं?

पता नहीं मैं हिंदी को लेकर परेशान हूँ या मेरी परेशानी का कारण हिंदी है? पता नहीं मैं पढ़ाने को लेकर परेशान हूँ या प्रशासन को लेकर परेशान हूँ। कभी-कभी लगता है कि परेशान रहना, परेशानी के साथ रहना, परेशानों और महा परेशानों के बीच रहकर खुद को परेशान रखना और फिर इस सबसे परेशान होकर खुद को परेशान महसूस करना ही मेरी नियति बन गई है। फिर सोचता हूँ अपनी परेशानी को लेकर घुटते रहने की कोई पक्की वज़ह भी तो होनी चाहिए!

सोचने से कान, नाक और फिर गले में दर्द होने लगता है। फिर यह दर्द माथे में और फिर पूरे सिर में हो जाता है। दर्द की दवाए बेअसर हो गई लगती हैं। अच्छी नींद आ जाती है तो सब ठीक हो जाता है। नाक के ऑपरेशन के बाद संवेदनशीलता बहुत बढ़ गई है। अब बदबू ज्यादा महसूस होती है। बाग-बगीचे तो दिखाई नहीं पड़ते। गटर के ढक्कन और उनसे बहता काला-नीला सा पानी वगैरा बहुत दिखाई देते हैं। स्कूटर चलाते समय बहुत सावधान रहना पड़ता है। इस चक्कर में  गटर ही गटर दिखाई देते हैं। गटर और गड्ढों से बचकर चलने की सावधानी में कई बार आदमी पास से गुजर जाता है।

फिर अंतराल आता है और अंतर्द्वंद्व से फलने फूलने लगता है।

Apr 18, 2011

टूटी दुकान में बड़ी तिजोरी है

टूटी फूटी सी दुकान में
चोरों ने देखा-
बड़ी सी एक तिजोरी में
बड़ा मजबूत सा ताला पड़ा है।

हैरान से हँसकर वे बोले-
गुरु घंटाल हैं बड़े
बेशर्म हैं जिनसे पाला पड़ा है।

ये खुरदरे चेहरे बड़े बे-रौनक सही
मगर हैं मगर
अंदर बड़ा घोटाला पड़ा है।

इस पुरानी
रेजगारी पर मत जाइए
तनिक घिसे सिक्कों को
परे सरकाइए

फिर देखिए
कितना बे-हिसाब और
बे-शुमार है
जो काला पड़ा है।

टूटी दुकान में बड़ी तिजोरी है
और तिजोरी में ताला पड़ा है।
-अजय मलिक
03-05-1985, प्रात: 9.00 बजे

बरस, दो-चार बरस

बरस, दो-चार बरस
वेदना-फुहार बरस
ज़ख्मों को छील-छील
प्रीत की पुकार बरस

चल कहीं दूर चलें
बरस दो चार बरस
भूल जाएं बीते सब
बरस दो चार बरस

आह से छलक-छलक
बीती बहार बरस
जीवन को लांघ कर
सपनों के पार बरस

पलकों की कोर छोड़
आंसू की धार बरस
हो सके तो बार-बार
और बहुत बार बरस

-अजय मलिक 
(01 -03 -1988) प्रात:

Apr 10, 2011

ए सी की सीली सीली सी हवा में

अब भी बहुत याद आता है
वह पुराना घर
वह घेर का ओसारा
बकांद के  पेड़ तले  बनी
गाय की खोर।

वह चौमासे की टपकती रात में
बिन बारिश भी
घंटों बरसती छान।

बूढ़े बाबा की बुनी वह खाट
और उसके बान, पायतें
वह हुक्का-गुडगुडी-चिलम
और दहकते अंगारे।

कोल्हू की वह रात-रात भर चलती जोटें
ताजे गुड की महक और
खोई की भट्टी का वह धुंआधार अलाव।

कुंडीवाले कुएं पर तपती दुपहरी में
घंटों डुबकियां लगाना - नहाना  
हरट के पतनाले की धार की गुलगुलियाँ,

वाह क्या खूब थी वह भी
हमारी जिंदादिल
चालीस साल पुरानी दुनियाँ।

अब पचास के चेहरे पर
सदाबहार तने तनाव के बीच
ए सी की सीली सीली सी हवा में
ये यादें  पुरवाइयां भर जाती हैं...

- अजय  मलिक  

Apr 7, 2011

दो अच्छी गज़लें

 (१)  
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है
कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है

जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है

होश अपने का भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त
द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है

देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,
फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है

हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में
रास्ता है कि कहीं और चला जाता है

दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की
आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।
                                             -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
(२)
अगर आप होते भुलाने के क़ाबिल,
तो होते कहां दिल लगाने के क़ाबिल !

वो वादा तुम्हारा , भरोसा हमारा ,
लगे कब हमें टूट जाने के क़ाबिल !

बसी है जो आंखों में तस्वीर तेरी ,
नहीं आंसुयों से मिटाने के क़ाबिल !

अँधेरे जुदाई के कुछ कम तो होते ,
जो होते तेरे ख़त जलाने के क़ाबिल !

मुहब्बत की शायद हक़ीक़त यही है ,
कि शै है ये सपने सजाने के क़ाबिल !

सनम मुझ को मंज़ूर मरना ख़ुशी से ,
बने मौत लेकिन फ़साने के क़ाबिल !

                                            -मधुभूषण शर्मा 'मधुर'


(कविता कोश के सौजन्य से) 

Apr 4, 2011

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ




नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें । यह पर्व साल में दो बार आता है। एक शारदीय नवरात्रि, दूसरा है चैत्रीय नवरात्रि। नवरात्रि के नौ रातो में तीन हिंदू देवियों - पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं ।

नौ देवियाँ है :-


श्री शैलपुत्री

श्री ब्रह्मचारिणी

श्री चंद्रघंटा

श्री कुष्मांडा

श्री स्कंदमाता

श्री कात्यायनी

श्री कालरात्रि

श्री महागौरी

श्री सिद्धिदात्री

शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं। इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं । नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है।

नवदुर्गा और दस महाविधाओं में काली ही प्रथम प्रमुख हैं। भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दस महाविधाएँ अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं। दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं। देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है। सभी देवता, राक्षस, मनुष्य, गंधर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं।

( उपर्युक्त पाठ  विकिपीडिया से साभार लिया गया है. विस्तृत पाठ संलग्न लिंक 

नवरात्रि 

 से से प्राप्त  किया जा सकता है  )



Apr 2, 2011

अब लीला पाठ्यक्रमों के साथ मॉडल ऑनलाइन परीक्षा भी


राजभाषा विभाग ने लीला हिंदी प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पाठ्यक्रमों की ऑनलाइन परीक्षा के परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए अब अपनी वेबसाईट http://www.rajbhasha.gov.in/ पर उपर्युक्त लीला पाठ्यक्रमों के साथ मॉडल ऑनलाइन परीक्षा भी उपलब्ध करा दी है। इस मॉडल परीक्षा का लिंक लीला पाठ्यक्रमों के पंजीकरण पृष्ठ पर दिया गया है। इस प्रयास से राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में अवश्य ही प्रगति होगी।
हिंदी सबके लिए परिवार की और से साधुवाद।


(राजभाषा विभाग के सौजन्य से)

Apr 1, 2011

बहुवचन

निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन बताएं -

१. चौथाई
२. आधा
३. तिहाई
४. पौना


( एक अप्रेल पर विशेष )