Sep 26, 2010
समाचार 4 मीडिया.कॉम : इतना अच्छा होगा सोचा न था।
यह समाचारों का समाचार है या मीडिया के लिए समाचार, मेरे लिए इसका फैसला कर पाना मुश्किल है। आप स्वयं विचार करें ... मैं तो सिर्फ इसका लिंक दे रहा हूँ। हिन्दी दिवस पर भी समाचार 4 मीडिया में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के गंभीर विचार हैं -
§ हॊम
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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9/26/2010 07:45:00 PM
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Sep 24, 2010
हिंदी और मैं
-अजय मलिक
नासूर बनकर
पाताल के किसी अंधेरे कौने में
जा बसी है ये उदासी मेरी
खरपतवारों से पटे
खेत की मेढ़ पर
बस दो-चार बचे हैं
बरसिम से पौधे
किसी उम्मीद के धोखे में
राह तकते
लंबाई से भी लंबी
हो जाती हैं रातें
ज़ख्म गहरे हैं
मगर न रोने की रियायत है
न आह भरने की इजाजत है
किसी चौराहे पर
रंगीन पोस्टरों के बीच
एक बीते साल का कलेंडर हूँ मैं
नासूर बनकर
पाताल के किसी अंधेरे कौने में
जा बसी है ये उदासी मेरी
खरपतवारों से पटे
खेत की मेढ़ पर
बस दो-चार बचे हैं
बरसिम से पौधे
किसी उम्मीद के धोखे में
राह तकते
लंबाई से भी लंबी
हो जाती हैं रातें
ज़ख्म गहरे हैं
मगर न रोने की रियायत है
न आह भरने की इजाजत है
किसी चौराहे पर
रंगीन पोस्टरों के बीच
एक बीते साल का कलेंडर हूँ मैं
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9/24/2010 07:16:00 AM
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Sep 19, 2010
आप हिंदी अधिकारी हैं मगर और क्या करते हैं ?
(अशिष्ट जी की एक नई कहानी )
उनका नाम ही निरोगीलाल था। तन-मन और कर्म से अपने नाम की तरह पूरी तरह निरोग। उनकी प्रतिरोधक क्षमता इतनी की रोग के कीटाणु उनपर हमला करने की बजाय उनकी परछाई तक से दूर भागते थे। कुछ लोग उन्हें सलाह देते थे कि अपना देशी नाम थोड़ा सा टिप-टाप कर लें और तनिक स्टाइल में ज़रा सा आधुनिकता का तड़का लगाकर मिस्टर एन. जी. लाल बन जाएं तो मैनेज़री का रूतबा भी झलकने लगेगा। मगर वे अपने देशीपन से बाहर आने को तैयार नहीं थे। उनके मन पर ‘खोसला का घोसला’ के चिरोंजीलाल की अमिट छाप थी।
उनका नाम ही निरोगीलाल था। तन-मन और कर्म से अपने नाम की तरह पूरी तरह निरोग। उनकी प्रतिरोधक क्षमता इतनी की रोग के कीटाणु उनपर हमला करने की बजाय उनकी परछाई तक से दूर भागते थे। कुछ लोग उन्हें सलाह देते थे कि अपना देशी नाम थोड़ा सा टिप-टाप कर लें और तनिक स्टाइल में ज़रा सा आधुनिकता का तड़का लगाकर मिस्टर एन. जी. लाल बन जाएं तो मैनेज़री का रूतबा भी झलकने लगेगा। मगर वे अपने देशीपन से बाहर आने को तैयार नहीं थे। उनके मन पर ‘खोसला का घोसला’ के चिरोंजीलाल की अमिट छाप थी।
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9/19/2010 10:37:00 PM
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Sep 17, 2010
प्रवीण पाठमाला पाठ 3 से 6 तक का तमिल अनुवाद
(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सी डेक)
Lesson 3
மோகினி : ஓ, பிரசாந்த் நீ இன்றும் மிகவும் கவலையுடன் காணப்படுகிறாயே.
ஏதேனும் கஷ்டமிருந்தால் என்னிடம் கூறு.
ஒருவேளை நான் சற்று உதவி செய்யமுடியும்.
பிரசாந்த் : ஆம், அம்மணி.
நான் ரூ.25,000/- செலுத்தி, நகர வீட்டு வசதி வளர்ச்சி ஆணைக்குழுவின் கீழ் ஒரு அடுக்கு வீடு வாங்க விண்ணப்பம் செய்திருந்தேன்.இப்போது என் பெயர் அந்தக் குலுக்கலில் வந்துள்ளது.
Lesson 3
மோகினி : ஓ, பிரசாந்த் நீ இன்றும் மிகவும் கவலையுடன் காணப்படுகிறாயே.
ஏதேனும் கஷ்டமிருந்தால் என்னிடம் கூறு.
ஒருவேளை நான் சற்று உதவி செய்யமுடியும்.
பிரசாந்த் : ஆம், அம்மணி.
நான் ரூ.25,000/- செலுத்தி, நகர வீட்டு வசதி வளர்ச்சி ஆணைக்குழுவின் கீழ் ஒரு அடுக்கு வீடு வாங்க விண்ணப்பம் செய்திருந்தேன்.இப்போது என் பெயர் அந்தக் குலுக்கலில் வந்துள்ளது.
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9/17/2010 12:44:00 PM
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Sep 14, 2010
हिंदी दिवस पर मुझे क्या करना चाहिए?
आप ही बताइए, आज हिंदी दिवस पर मुझे क्या करना चाहिए?
राजभाषा हिंदी इकसठ साल की हो गई. इतनी आयु में तो नाती, पोते हो जाते हैं... कभी-कभी पडपोते भी!
राजभाषा हिंदी इकसठ साल की हो गई. इतनी आयु में तो नाती, पोते हो जाते हैं... कभी-कभी पडपोते भी!
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9/14/2010 09:28:00 AM
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Sep 13, 2010
प्रवीण पाठमाला विविधा 1 से 4 तक का अँग्रेज़ी अनुवाद
(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सी डेक)
VIVIDHA 1
Today the consumer in our country has become more aware than before. Giving importance to the protection of the rights of consumers the Government of India made provision of the Consumer Protection Act in 1986.The matter of protection of the rights of consumers comes under the 'Consumer Affairs, Food and Public Distribution Ministry'.
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9/13/2010 01:35:00 PM
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प्रवीण पाठमाला पाठ 19 से 24 तक का अँग्रेज़ी अनुवाद
(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सी डेक)
Lesson 19
Ramesh : Congratulations. I heard that this time the closing ceremony of the Hindi week was very well organised.
Dinesh : Yes, with everybody's continuous co-operation the programme was a success. This time a greater number of people were also present. The hall was jam-packed. Yes, tell me why didn't you come for the function? Didn't you receive the invitation card in time?
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9/13/2010 01:32:00 PM
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प्रवीण पाठमाला पाठ 13 से 18 तक का अँग्रेज़ी अनुवाद
(सौजन्य - राजभाषा विभाग एवं सी डेक)
Lesson 13
Prakash : Listen, Deepa. Did Anant call? By now Anant and his friends must have reached Manali. Did you keep warm clothes and a blanket in his things or not? In the month of March it must be quite cold there in the morning and evening.
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9/13/2010 08:43:00 AM
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प्रवीण पाठमाला पाठ 7 से 12 तक का अँग्रेज़ी अनुवाद
(सौजन्य - राजभाषा विभाग एवं सी डेक)
Lesson 7
Lesson 7
Patient : Namaste, doctor Sahib.
Doctor : Namaste, Tell me, what is troubling you?
Patient : Doctor, since a few days I am feeling feverish. I have cough too. I don't feel hungry. I am not able to eat also.
Doctor : Since when have you been feeling like this? Patient : Since about one month.
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9/13/2010 08:37:00 AM
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Sep 12, 2010
प्रवीण पाठमाला पहले दो पाठों का तमिल अनुवाद
(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सी डेक )
Lesson 1
இம்முறை நாங்கள் விடுமுறைப் பயணச் சலுகை எடுத்து, இந்தியாவின் கிழக்கிலுள்ள ஒரிசா செல்ல திட்டமிட்டோம்.
ஒரிசா எங்களை எப்போதும் கவர்ந்து வருகிறது.
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9/12/2010 08:30:00 PM
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प्रवीण पाठमाला पहले छ: पाठों का अँग्रेज़ी अनुवाद
बहुत पहले हमने प्रवीण पाठमाला का अँग्रेज़ी अनुवाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था.पहली किस्त में पहले छ: पाठों का अँग्रेज़ी अनुवाद यहाँ दिया जा रहा है.
(सौजन्य राजभाषा विभाग एवं सी डेक)
Lesson 1
This time we made a programme to take leave travel concession and visit Orissa, situated in the east of India. Orissa has always attracted us. As we have deep faith in God, my wife and I wished to see Jagannath Puri. Along with this I also wanted to see the battle field of King Asoka’s Kalinga Victory and other historical sites. We reached Orissa is capital Bhubaneswar by train. From there we went by bus to Lord Jagannath’s town Puri . From Bhubaneswar the distance till Puri is approximately 52 kilometers.
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9/12/2010 08:26:00 PM
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Sep 11, 2010
तो मैं तर जाऊं ...
(इस लेख में व्यक्त विचार एक भारतीय नागरिक के नाते पूर्णत: मेरे व्यक्तिगत विचार हैं।इनका किसी सरकारी विभाग आदि से कोई संबंध नहीं है।)
जब एन सी ई आर टी में पढ़ रहा था तब भी व्यवहार कुशल नहीं था। अपने अध्यापकों का स्नेह तब भी पाया था। वे मेरी अव्यावहारिकता में कुछ अलग देखते थे जो जबरदस्त पढ़ाकुओं में नहीं होता था। मैंने मूर्खताएं भी कुछ कम नहीं की थीं। ये कहना ज्यादा सही रहेगा कि वह मेरा बिना लाग-लपेट वाला स्वाभाविक व्यवहार था। शैक्षिक एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन डिप्लोमा पाठ्यक्रम की परीक्षा में हिंदी में लिखने वाला और विशेष योग्यता के साथ पास होने वाला शायद मैं पहला लड़का था। प्रोफ़ेसर सक्सेना जो राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा शुरू कराने वालों में से एक थे, हमारे विभागाध्यक्ष थे। डॉ बी० फालाचंद्रा हमारे कोर्स कोर्डिनेटर थे। कुल मिलाकर शैक्षिक मनोविज्ञान एवं परामर्श विभाग के लोग अपने क्षेत्र के जाने-माने विद्वान थे।
मैं हिंदी भाषा के प्रति पागल था मगर राजभाषा के रूप में हिंदी की कोई समझ नहीं थी। हिंदी शिक्षण योजना क्या है, राजभाषा विभाग क्या है? -इस सब की मुझे रत्ती भर भी जानकारी नहीं थी। मैं एक प्रशिक्षित परामर्शदाता बनकर हिंदी के लिए हिंदी शिक्षण योजना में चला आया।
आज बाईस बरस बाद यह सोचने का कोई अर्थ नहीं है कि मेरा निर्णय सही था अथवा गलत। मद्रास में पहली तैनाती हुई। दिल्ली से बहुत दूर जाने की सनक में मैं स्वेच्छा से लक्षद्वीप चला गया जहां कोई भी जाना नहीं चाहता था। वहाँ आत्मावलोकन का अच्छा अवसर मिला। वहीँ नौकरी के कायदे-क़ानून सीखने का अवसर भी मिला। वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त श्री वज़ाहत हबीबुल्ला साहेब तब लक्षद्वीप के प्रशासक थे और वे ही मेरे पहले सर्वकार्यभारी अधिकारी थे। उनकी विनम्रता और सादगी आज भी याद आती है। लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप से तिरुचिरापल्ली और वहाँ से मुंबई। मुंबई में सब कुछ मिला, माँ मुंबा का आशीर्वाद भी मिला, दोस्त मिले, फ़िल्मकार-लेखक-कवि-सहयोगी-विरोधी-प्रतियोगी... इनमें बहुत सारे अच्छे थे और कुछ ऐसे भी थे जो बेमेल थे।
जब एन सी ई आर टी में पढ़ रहा था तब भी व्यवहार कुशल नहीं था। अपने अध्यापकों का स्नेह तब भी पाया था। वे मेरी अव्यावहारिकता में कुछ अलग देखते थे जो जबरदस्त पढ़ाकुओं में नहीं होता था। मैंने मूर्खताएं भी कुछ कम नहीं की थीं। ये कहना ज्यादा सही रहेगा कि वह मेरा बिना लाग-लपेट वाला स्वाभाविक व्यवहार था। शैक्षिक एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन डिप्लोमा पाठ्यक्रम की परीक्षा में हिंदी में लिखने वाला और विशेष योग्यता के साथ पास होने वाला शायद मैं पहला लड़का था। प्रोफ़ेसर सक्सेना जो राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा शुरू कराने वालों में से एक थे, हमारे विभागाध्यक्ष थे। डॉ बी० फालाचंद्रा हमारे कोर्स कोर्डिनेटर थे। कुल मिलाकर शैक्षिक मनोविज्ञान एवं परामर्श विभाग के लोग अपने क्षेत्र के जाने-माने विद्वान थे।
मैं हिंदी भाषा के प्रति पागल था मगर राजभाषा के रूप में हिंदी की कोई समझ नहीं थी। हिंदी शिक्षण योजना क्या है, राजभाषा विभाग क्या है? -इस सब की मुझे रत्ती भर भी जानकारी नहीं थी। मैं एक प्रशिक्षित परामर्शदाता बनकर हिंदी के लिए हिंदी शिक्षण योजना में चला आया।
आज बाईस बरस बाद यह सोचने का कोई अर्थ नहीं है कि मेरा निर्णय सही था अथवा गलत। मद्रास में पहली तैनाती हुई। दिल्ली से बहुत दूर जाने की सनक में मैं स्वेच्छा से लक्षद्वीप चला गया जहां कोई भी जाना नहीं चाहता था। वहाँ आत्मावलोकन का अच्छा अवसर मिला। वहीँ नौकरी के कायदे-क़ानून सीखने का अवसर भी मिला। वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त श्री वज़ाहत हबीबुल्ला साहेब तब लक्षद्वीप के प्रशासक थे और वे ही मेरे पहले सर्वकार्यभारी अधिकारी थे। उनकी विनम्रता और सादगी आज भी याद आती है। लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप से तिरुचिरापल्ली और वहाँ से मुंबई। मुंबई में सब कुछ मिला, माँ मुंबा का आशीर्वाद भी मिला, दोस्त मिले, फ़िल्मकार-लेखक-कवि-सहयोगी-विरोधी-प्रतियोगी... इनमें बहुत सारे अच्छे थे और कुछ ऐसे भी थे जो बेमेल थे।
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9/11/2010 05:11:00 PM
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गणपति बाप्पा मोरिया...
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9/11/2010 07:09:00 AM
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Sep 10, 2010
"हिंदी पखवाड़े में हिंदी पर बवाल!" -दैनिक भास्कर से एक खबर
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9/10/2010 07:46:00 PM
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Sep 4, 2010
मगर क्या करूँ ‘कंट्रोल’ नहीं होता।
कुछ कहने पर तूफान उठा लेती है दुनियाँ… मगर क्या करूँ ‘कंट्रोल’ नहीं होता।
हिंदी की तनख्वाह से जो नित अँग्रेजी शराब का आनंद उठाते हैं और अँग्रेजी के प्रति जिनका मोह बस अँग्रेजी शराब के प्रति मोह जितना है… रोज मदिरापान के बाद नशाबंदी पर प्रवचन देना जिनकी लत है और हर शाम जिसकी भी मिल जाए मुर्गे, बकरे या भैंसे की टांग चबाने के बाद अहिंसा पर भाषण देकर नकदी प्राप्त करना जिनकी नियति है… जो हिन्दी के औपचारिक और अनौपचारिक ट्यूशन्स के लिए जाने जाते हैं… जिनके वाक्यों की संरचना कुछ ऐसी होती है -
“मैं जो आपको आठ आना दिया हूँ वो उनके कहने पर दिया हूँ“…
जो हिन्दी के बड़े ठेकेदार होते या कहे जाते हैं और दिन-रात हिंदी के नदी-नाले, पुल, बंकर आदि बनाने के बड़े-बड़े ठेके जिनके नाम पर छूटते हैं… सितंबर के महीने में जिनकी ठेकेदारी कुछ ज्यादा ही फलती-फूलती है… हर साल जो इस मौसमी महीने में सैंकड़ों हिंदी के पुल रेत के घरोंदों की तरह बनवाने का ढिंढोरा पीटकर फूली-फूली चुनते और चुगते हैं… अँग्रेजी की बेहद मरी-मरी सी लहरें जिनके बनाए तथाकथित पुल वगैरा को पल भर में मटियामेट कर देती हैं… जो अपने टेंडर हमेशा अँग्रेजी में भेजते हैं… जो अँग्रेजी की मोहर को रुतबे का प्रतीक मानते हैं तथा अँग्रेजी में लिखी अपनी नामपट्टिका को देखकर गद्गद हो जाते हैं… हिंदी की दुहाई देते हुए हिंदी भाषियों तक के हिन्दी मेँ भेजे गए पत्रों के जवाब में जो अँग्रेजी पत्रों द्वारा हिंदी में कामकाज करने के नुस्खे बताते हैं और यह सब वे हिंदी की सेवा के नाम पर करते हैं… हिंदी के साथ-साथ अँग्रेजी पर भी जिनकी पकड़ उतनी ही जबरदस्त और मजबूत है जितनी सड़क पर लावारिस पड़े केले के छिलके और उस पर अनजाने में पड़ जाने वाले किसी बदकिस्मत पैर की होती है…
हिंदी के ऐसे सदाबहार ठेकेदार महापुरुषों को मेरा प्रणाम।
उनके लिए क्या आप भी कोई संदेश देना चाहेंगे?
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हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
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9/04/2010 04:12:00 PM
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Sep 2, 2010
हिंदी के नए विद्यार्थियों के लिए कुछ उपयोगी सामग्री
अभी-अभी जिन्होंने हिंदी सीखना शुरू किया है उन विद्यार्थियों के लिए कुछ उपयोगी सामग्री नीचे दिए गए लिंक्स में उपलब्ध है।
Grammar New York University Virtual Hindi course एवं हिन्दी कॉर्नर से साभार
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9/02/2010 08:50:00 AM
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Sep 1, 2010
तीन बेहद उपयोगी ब्लॉग
सबसे पहले मोनू का धन्यवाद जिनके माध्यम से इन तीन ब्लोग्स की जानकारी मिली। अगर आप किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो नीचे दिए गए लिंक्स से इन बहुपयोगी तीनों ब्लोग्स को देखना मत भूलिएगा। इनमें आल एक्ज़ाम गुरु अंग्रेजी में है तथा शेष दोनों हिंदी में।
All Exam गुरु
सामान्य ज्ञान हिन्दी में world General Knowledge
साहित्यालोचन
All Exam गुरु
सामान्य ज्ञान हिन्दी में world General Knowledge
साहित्यालोचन
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9/01/2010 09:01:00 PM
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Aug 31, 2010
एक दोस्त की सेवानिवृति पर ....
उनसे परिचय तो नवम्बर 2006 में फोन पर हो गया था मगर मुलाक़ात हुई जनवरी 2008 में। उनके व्यवहार में अजीब सी सादगी मगर बातों में थोड़ा सा रोष झलकता था। उन्हें शायद सबसे अधिक गुस्सा स्वयं पर आता था। अक्सर मन में कहीं गहरी उदासी को छुपाए एक दुबला-पतला सा व्यक्ति जो दिल का रोग भी गले लगा चुका था जमाने भर को ललकारने में पल भर की भी देर नहीं करता था। उस व्यक्ति के प्रति एक अजीब सी श्रद्धा मेरे मन में जगी। न जाने क्यों मुझे उनका चिडचिडापन अच्छा लगने लगा और आज श्री हरिदास चट्टोपाध्याय से मिले दो वर्ष से अधिक गुज़र जाने पर भी ऐसा लगता है कि कल ही तो उनसे मुलाक़ात हुई थी।
आज श्री हरिदास चट्टोपाध्याय सेवानिवृत हो रहे हैं, उन्होंने लंबे समय तक हिंदी की निस्वार्थ सेवा की है और पूरे दल-बल के साथ की है। उनके पोर्टब्लेयर नराकास के सदस्य सचिव के रूप में किए गए प्रयास सदैव याद किए जाएंगे। उन्होंने पोर्टब्लेयर नराकास को देश की पहली ई-नराकास होने का गौरव दिलाया। उनके सभी सदस्य कार्यालयों को जाने वाले पत्र पहले ई-मेल से पहुँचते थे और डाकखाने की बारी बहुत बाद में आती थी। उनकी सेवानिवृति के अवसर पर हिंदी सबके लिए परिवार की ओर से उनके सदैव हिंदी के योद्धा बने रहने, स्वस्थ, शांतिमय सुखद एवं सक्रिय जीवन हेतु ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।
-अजय मलिक
आज श्री हरिदास चट्टोपाध्याय सेवानिवृत हो रहे हैं, उन्होंने लंबे समय तक हिंदी की निस्वार्थ सेवा की है और पूरे दल-बल के साथ की है। उनके पोर्टब्लेयर नराकास के सदस्य सचिव के रूप में किए गए प्रयास सदैव याद किए जाएंगे। उन्होंने पोर्टब्लेयर नराकास को देश की पहली ई-नराकास होने का गौरव दिलाया। उनके सभी सदस्य कार्यालयों को जाने वाले पत्र पहले ई-मेल से पहुँचते थे और डाकखाने की बारी बहुत बाद में आती थी। उनकी सेवानिवृति के अवसर पर हिंदी सबके लिए परिवार की ओर से उनके सदैव हिंदी के योद्धा बने रहने, स्वस्थ, शांतिमय सुखद एवं सक्रिय जीवन हेतु ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।
-अजय मलिक
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8/31/2010 10:13:00 AM
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"कश्मीर" पूजा लाखन की कविता
यह जगह क्या है?
युद्ध स्थल या वध स्थल ?
सिर पर निशाना साधे
सेना के इतने जवान
यहाँ क्यों हैं?
क्या यह हमारा ही देश है
या दुश्मन देश पर कब्जा है
खून से लथपथ बच्चे, महिलाएँ, युवा, बूढ़े
सब क्यों उठाये हुए हैं
दोनों हाथों में पत्थर ?
इतना गुस्सा
मौत के खिलाफ़ इतनी बदसलूकी
इस क़दर बेफिक्री
क्या यह फिलीस्तीन है या
लौट आया है 1942 का मंज़र
समय समाज के साथ पकता है
और समाज बड़ा होता है
इंसानी जज़्बों के साथ
उस मृत बच्चे की आँख की चमक
धरती की शक्ल बदल रही है
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर का समय बीत चुका है
और तुम्हारे निपटा देने के तरीकों से
बन गए हैं कितने दलदल,
गुप्त कब्रें और श्मशान घाट
आग और मिट्टी के इस खेल में
क्या दफ़्न हो पायेगा एक पूरा देश
उस देश का पूरा जन
या गुप्त फाइलों में छुपा ली जाएगी
जन के देश होने की हक़ीक़त
आज़ाद मन के बेबस गुलाम हो जाने की ललक
धरती के लहूलुहान होने की सूरत
मैं मक्के के खेत में भुट्टे तोड़ती
अपने कश्मीर के बारे में सोच रही हूँ
युद्ध स्थल या वध स्थल ?
सिर पर निशाना साधे
सेना के इतने जवान
यहाँ क्यों हैं?
क्या यह हमारा ही देश है
या दुश्मन देश पर कब्जा है
खून से लथपथ बच्चे, महिलाएँ, युवा, बूढ़े
सब क्यों उठाये हुए हैं
दोनों हाथों में पत्थर ?
इतना गुस्सा
मौत के खिलाफ़ इतनी बदसलूकी
इस क़दर बेफिक्री
क्या यह फिलीस्तीन है या
लौट आया है 1942 का मंज़र
समय समाज के साथ पकता है
और समाज बड़ा होता है
इंसानी जज़्बों के साथ
उस मृत बच्चे की आँख की चमक
धरती की शक्ल बदल रही है
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर का समय बीत चुका है
और तुम्हारे निपटा देने के तरीकों से
बन गए हैं कितने दलदल,
गुप्त कब्रें और श्मशान घाट
आग और मिट्टी के इस खेल में
क्या दफ़्न हो पायेगा एक पूरा देश
उस देश का पूरा जन
या गुप्त फाइलों में छुपा ली जाएगी
जन के देश होने की हक़ीक़त
आज़ाद मन के बेबस गुलाम हो जाने की ललक
धरती के लहूलुहान होने की सूरत
मैं मक्के के खेत में भुट्टे तोड़ती
अपने कश्मीर के बारे में सोच रही हूँ
-पूजा लाखन
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8/31/2010 07:03:00 AM
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Aug 29, 2010
विन्डोज़ xp में हिंदी (यूनिकोड) सक्रिय करने में आने वाली कठिनाइयाँ और समाधान
विन्डोज़ xp में हिंदी (यूनिकोड) सक्रिय करने के लिए हम कई बार जानकारी तथा लिंक्स दे चुके हैं। जिन कंप्यूटरों में विंडोज़ एक्सपी सर्विस पैक-2 है उनमें हिन्दी (यूनिकोड) या भारतीय भाषाओं को सक्रिय करते समय सामान्यत: कोई कठिनाई नहीं आती । जब आप स्टार्ट मैन्यू -> कंट्रोल पैनल-> रीज़नल एंड लंग्वेज़ेज़ -> लेंग्वेज़ेज़ के बाद कांप्लेक्स स्किप्ट फाइल्स के चेक बाक्स को क्लिक करते हैं तो OK क्लिक करने पर आपका कंप्यूटर विंडोज़ xp प्रोफेशनल sp-2 की सी डी ड्राइव में डालने का अनुरोध करता है। सी डी से i386 की विभिन्न फाइलें स्वत: इंस्टाल हो जाती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि win xp sp-2 की कोई भी असली/ नकली सी डी इस कार्य के लिए पर्याप्त होती है।
आजकल आपका कंप्यूटर लगातार इंटरनेट से जुड़ा होता है और win xp sp-3 स्वत: अपडेट के जरिए स्थापित हो चुका होता है तो win xp sp-2 की सी डी से काम नहीं चलता। जो सूचना प्रौद्योगिकी के एक्सपर्ट हैं वे i386 की फाइलों से काम चला सकते हैं। लेकिन एक सामान्य व्यक्ति के लिए कठिनाई पैदा हो जाती है क्योंकि आपका कंप्यूटर लगातार win xp sp-3 की सी डी मांगता है और अलग से i386 की फाइलों से भी समाधान आसानी से नहीं हो पाता। इसी तरह की समस्या win xp 64 बिट्स वाले कम्प्यूटरों में भी आती है। एक आम आदमी के लिए सरल समाधान यही है कि win xp 64 बिट्स तथा win xp pro sp-3 की सी डी भी साथ में रखी जाएँ।
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8/29/2010 03:34:00 PM
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Aug 24, 2010
रक्षा बंधन पर सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं
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8/24/2010 09:27:00 AM
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Aug 22, 2010
तुमको-उनको-उसको-सबको ओणम की शुभकामनाएं
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8/22/2010 08:56:00 PM
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Aug 19, 2010
विक्शनरी, प्रतिभास और रचनाकार का क्या कहना !
यहाँ सबसे पहले रचनाकार का धन्यवाद जिसके माध्यम से प्रतिभास तक पहुँचना संभव हुआ। आप मान लीजिए कि हिंदी में किसी भी ऐसी सुविधा की अब कोई कमी नहीं है जो हिंदी से बचने के बहाने के रूप में आजमाई जा सके। जिद और जबरदस्ती के बूते कोई अगर अँग्रेज़ी का पिछलग्गू बने रहना चाहता है तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता। आप स्वयं नीचे दिए गए लिंक्स से इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि नेट पर हिंदी का हलुआ, जलेबी, इमरती, बरफी, पेड़ा सब कुछ उपलब्ध है जिसका जो जितना मजा लेना चाहे मुफ्त में ले सकता है।
सबसे पहले शर्मा जी को समर्पित हरयाणवी शब्दकोश 'जाटलैंड' के सौजन्य से-हरयाणवी भाषा शब्दावली
हरयाणवी भाषा मुहावरे और लोकोक्तियां
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8/19/2010 10:34:00 PM
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Aug 15, 2010
हम सब भारतवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं.
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8/15/2010 01:19:00 PM
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Aug 14, 2010
भारतीय साहित्य संग्रह से दो पुस्तकें
भारतीय साहित्य संग्रह की वेब साइट पर आपको कुछ बेहद उपयोगी जानकारी मिल सकती है। अक्सर लोग हिंदी प्रकाशकों के बारे में पूछताछ करते रहते हैं, ऐसे लोगों के लिए हिंदी प्रकाशकों तथा लेखकों की सूची इस वेब साइट पर उपलब्ध है। कुछ पुस्तकें निशुल्क पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं। इनमें बाबू देवकी नंदन खत्री की चंद्रकांता तथा हिंदी का व्याकरण प्रमुख हैं।
हिंदी व्याकरण का लिंक है- हिंदी व्याकरण पृष्ठ
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8/14/2010 07:03:00 PM
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Aug 12, 2010
हिंदी में हिंदी की ई-लर्निंग
ई-लर्निंग में इलेक्ट्रॉनिक समर्थित शिक्षा, शिक्षण और अधिगम के ऐसे सभी व्यवस्थित प्रकार शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सीखने वाले के व्यक्तिगत कौशलों, अनुभवों, व्यवहार और ज्ञान में नेटवर्क आधारित अथवा बिना नेटवर्क के सूचना प्रोद्यौगिकी, विशिष्ट मीडिया, संचार प्रणाली, इलेक्ट्रानिक उपकरणों के माध्यम से सुधार, परिवर्तन, विकास अथवा वृद्धि करना होता है।
ई-लर्निंग मूलत: कंप्यूटर और नेटवर्क पर आधारित शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया है। इसमें निर्धारित कौशलों का विकास इंटरनेट, इंट्रानेट, विभिन्न सॉफ्टवेयर्स, ऑडियो या वीडियो टेप, उपग्रह टीवी के माध्यम से अधिगम सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इस सामाग्री में पाठ, परीक्षण, छवि, एनिमेशन, वीडियो, ऑडियो, अभ्यास की सुविधा आदि शामिल होती है। ई लर्निंग में कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण, इंटरनेट आधारित प्रशिक्षण या वेब आधारित प्रशिक्षण सभी कुछ शामिल है।
राजभाषा विभाग ने राजभाषा के रूप में हिंदी तथा एक भाषा के रूप में हिंदी के शिक्षण-अधिगम, प्रयोग तथा व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए ई-लर्निंग की उपयोगिता को काफी पहले महसूस कर लिया था। प्रारम्भ में प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पाठ्यक्रमों के विभिन्न भारतीय भाषाओं में आडिओ कैसेट्स तैयार कर वितरित किए गए। फिर जब कंप्यूटर सहज-सुलभ होने लगे तो लीला हिंदी सोफ्टवेयर्स का विकास सी-डेक के माध्यम से कराया गया। प्राम्भ में इंटरनेट की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं थी इसलिए इन सोफ्टवेयर्स के सी डी वर्ज़न तैयार किए गए। इंटरनेट की उपलब्धता जैसे-जैसे सुलभ होती गई लीला सोफ्टवेयर्स के इंटरनेट वर्ज़न भी तैयार किए गए तथा राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर निशुल्क उपलब्ध करा दिए गए।
हिंदीतर भाषा भाषियों की सुविधा तथा मातृभाषा के महत्व को ध्यान में रखते हुए लीला पाठ्यक्रमों द्वारा 14 भारतीय भाषाओं के माध्यम से इंटनेट पर हिंदी सीखने की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जा चुकी है। इन पाठ्यक्रमों का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि सीखने वाला प्रत्येक पाठ की समाप्ति पर अपना मूल्यांकन स्वयं पाठ के अंत में दिए गए परीक्षण के द्वारा कर सकता है। ई-लर्निंग के क्रम में राजभाषा विभाग की नई उपलब्धि है - लीला पाठ्यक्रमों की ऑनलाइन परीक्षा का सफलता पूर्वक आयोजन ।
-अजय मलिक
-प्रतिभा मलिक
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8/12/2010 09:27:00 AM
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Aug 10, 2010
हिंदी यूनीकोड सक्रियता एवं माइक्रोसॉफ्ट इंडिक इनपुट टूल कैसे स्थापित करें
हिंदी यूनीकोड सक्रियता एवं माइक्रोसॉफ्ट इंडिक इनपुट टूल कैसे स्थापित करें? इस कठिनाई को दूर करने के लिए हम भाषा इंडिया डाट कॉम से सीधे लिंक दे रहे हैं। ये लिंक्स विन्डोज़ एक्स पी, विन्डोज़ विस्ता और विन्डोज़ 7 में कैसे हिंदी यूनीकोड में काम करने के लिए क्या किया जाए, इसकी पूरी जानकारी आप को उपलब्ध कराते हैं। आप पहले माइक्रोसॉफ्ट इंडिक लेंगवेज़ इनपुट टूल डाउनलोड कर लें और फिर नीचे दिए गए लिंक्स से अपने आपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकतानुसार कमांड्स दें-
Instructions for Windows XPInstructions for Windows Vista
Instructions for Windows 7
bhashaindia.com के सौजन्य से।
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8/10/2010 08:52:00 PM
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माननीय संसदीय राजभाषा समिति की वेबसाइट
माननीय संसदीय राजभाषा समिति की वेबसाइट का लिंक नीचे दिया जा रहा है। इस वेबसाइट पर समिति, समिति की उपसमितियों तथा समिति के माननीय सदस्यों के बारे में विवरण उपलब्ध है। इसी के साथ समिति की निरीक्षण प्रश्नावली, राजभाषा संबंधी विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों, राष्ट्रपति जी के आदेशों, नियमों की भी जानकारी दी गई है।
मुख्य(माननीय संसदीय राजभाषा समिति की वेबसाइट) पृष्ठ
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8/10/2010 06:28:00 PM
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Aug 8, 2010
हिंदी वर्तनी जांचें
इससे पहले भी एक हिंदी वर्तनी जांचने के लिए हमने लिंक दिया था। यहाँ दिया गया एक नया लिंक 27 भाषाओं की वर्तनी जांचने वाला बताया जाता है। यह ऑनलाइन काम करता है। आप भी देखें कि इसमें कितना दम-ख़म है-
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8/08/2010 10:04:00 PM
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आना फ्री, जाना फ्री, पकड़े गए तो खाना फ्री...
आज सुबह-सुबह दो मित्रों को जन्मदिन की बधाई देने के बाद दो दिन से बंद नेट को नेटगीयर से किसी तरह चालू किया तो जो एक मात्र मेल मिली उसका संदेश यही था कि आना फ्री, जाना फ्री, पकड़े गए तो खाना फ्री। जिस मित्र ने यह मेल भेजी थी उसका आज मौन व्रत है इसलिए उनसे आज बात कर पाना तो संभव नहीं है इसलिए सोचा कि इस मुद्दे पर मन की भड़ास ब्लॉग के जरिए निकाली जाए।
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8/08/2010 08:09:00 AM
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Aug 2, 2010
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये
मुनव्वर राना की तीन गज़ले कविता कोश के सौजन्य से
एक
जब कभी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूं
रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है
दिल की गलियों से तेरी याद निकलती ही नहीं
सोहनी फिर इसी पंजाब में आ जाती है
रात भर जागते रहने का सिला है शायद
तेरी तस्वीर-सी महताब[1] में आ जाती है
एक कमरे में बसर करता है सारा कुनबा
सारी दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है
ज़िन्दगी तू भी भिखारिन की रिदा[2] ओढ़े हुए
कूचा - ए - रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है
दुख किसी का हो छलक उठती हैं मेरी आँखें
सारी मिट्टी मिरे तालाब में आ जाती है
शब्दार्थ:
↑ चांद
↑ चादर
दो
नुमाइश के लिए गुलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
लड़ाई की मगर तैयारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मुलाक़ातों पे हँसते, बोलते हैं, मुस्कराते हैं
तबीयत में मगर बेज़ारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
खुले रखते हैं दरवाज़े दिलों के रात-दिन दोनों
मगर सरहद पे पहरेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
उसे हालात ने रोका मुझे मेरे मसायल[1] ने
वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मेरा दुश्मन मुझे तकता है, मैं दुश्मन को तकता हूँ
कि हायल[2] राह में किलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मुझे घर भी बचाना है वतन को भी बचाना है
मिरे कांधे पे ज़िम्मेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
शब्दार्थ:
↑ समस्याओं
↑ बाधक
तीन
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये
आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं
आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिये
ऐरे गैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों
आपको औरत नहीं अखबार होना चाहिये
जिंदगी कब तलक दर दर फिरायेगी हमें
टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये
अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये
एक
जब कभी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूं
रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है
दिल की गलियों से तेरी याद निकलती ही नहीं
सोहनी फिर इसी पंजाब में आ जाती है
रात भर जागते रहने का सिला है शायद
तेरी तस्वीर-सी महताब[1] में आ जाती है
एक कमरे में बसर करता है सारा कुनबा
सारी दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है
ज़िन्दगी तू भी भिखारिन की रिदा[2] ओढ़े हुए
कूचा - ए - रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है
दुख किसी का हो छलक उठती हैं मेरी आँखें
सारी मिट्टी मिरे तालाब में आ जाती है
शब्दार्थ:
↑ चांद
↑ चादर
दो
नुमाइश के लिए गुलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
लड़ाई की मगर तैयारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मुलाक़ातों पे हँसते, बोलते हैं, मुस्कराते हैं
तबीयत में मगर बेज़ारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
खुले रखते हैं दरवाज़े दिलों के रात-दिन दोनों
मगर सरहद पे पहरेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
उसे हालात ने रोका मुझे मेरे मसायल[1] ने
वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मेरा दुश्मन मुझे तकता है, मैं दुश्मन को तकता हूँ
कि हायल[2] राह में किलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मुझे घर भी बचाना है वतन को भी बचाना है
मिरे कांधे पे ज़िम्मेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
शब्दार्थ:
↑ समस्याओं
↑ बाधक
तीन
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये
आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं
आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिये
ऐरे गैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों
आपको औरत नहीं अखबार होना चाहिये
जिंदगी कब तलक दर दर फिरायेगी हमें
टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये
अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये
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8/02/2010 07:30:00 AM
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Jul 29, 2010
प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ ऑनलाइन परीक्षाओं की मॉडल परीक्षा
कुछ मित्रों को किसी तकनीकी कारण से केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान की लीला हिंदी प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ ऑनलाइन परीक्षाओं की मॉक परीक्षा के लोगिन में कठिनाई आ रही है। उनकी सुविधा के लिए राजभाषा विभाग द्वारा अपनी वेबसाइट www.rajbhasha.gov.in सीधा लिंक दिया जाना उपयोगी रहेगा.
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7/29/2010 07:51:00 PM
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हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के लिए कुछ और भी
समय हो तो यूनीकोड के मामले में इन्हें भी देख सकते हैं-
Indian Languages
Processor
Cafe Hindi Unicode Typing Tool 1
Download
Indian Languages
Processor
Cafe Hindi Unicode Typing Tool 1
Download
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7/29/2010 11:10:00 AM
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हिंदी यूनीकोड के लिए ज़रा इन्हें भी आजमाइए
कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं। इनकी उपयोगिता के बारे में आप स्वयं इन्हें आजमाकर देखें। इनमें कुछ का दावा है कि विन्डोज़ 98 में भी वे हिंदी यूनीकोड सक्रिय करने में सक्षम हैं। हमारे किसी भी सिस्टम में फिलहाल विन्डोज़ 98 ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है, साथ ही यह मूल्याधारित है यानी निशुल्क नहीं है। इस परिस्थिति में हम यह आप पर छोड़ते हैं कि इनका परिक्षण आप करना चाहते हैं या नहीं।
गोपी का यूनिकोड कन्वर्टर लगभग इंडिक ट्रांसलिटिरेसन की तरह है। एक और विकल्प हो तो क्या बुरा है!
Gopi's Unicode Hindi Converter - Kamaraj 3.0
DevaNagari Unicode Software - Sugam
It facilitates easy entry of Unicode encoded Nagari in Windows 98.
DevaNagari (Hindi)Fonts
Sugam-2K
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7/29/2010 10:00:00 AM
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Jul 26, 2010
बोलचाल की हिंदी क्रेज़ी लस्सी हिंदी lessons के सौजन्य से
कुछ प्रूफ की त्रुटियाँ हमारे ब्लॉग में अक्सर रह जाती हैं। कई बार इन्हें बार-बार सही करना पड़ता है। इन्हें यदि क्षम्य माना जा सके तो नीचे दिए गए CrazyLassi HINDI lessons के पाठों के लिंक्स बोलचाल की हिंदी सीखने में बहुत उपयोगी हो सकते हैं-
some very useful links for spoken hindi lerners are given bellow from CrazyLassi HINDI LESSONS-
ABSTRACT NOUNS
ADJECTIVES
Adverbs
AGE
ANIMALS
BAD WORDS
CLOTHES
COLORS
COLORS
DAYS OF THE WEEK
CrazyLassi HINDI LESSONS एवं www.learnhindifree.blogspot.com के सौजन्य से
some very useful links for spoken hindi lerners are given bellow from CrazyLassi HINDI LESSONS-
ABSTRACT NOUNS
ADJECTIVES
Adverbs
AGE
ANIMALS
BAD WORDS
CLOTHES
COLORS
COLORS
DAYS OF THE WEEK
CrazyLassi HINDI LESSONS एवं www.learnhindifree.blogspot.com के सौजन्य से
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7/26/2010 12:28:00 PM
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एक साल बाद
आज 'हिंदी सबके लिए' को एक साल हो गया। पहली पोस्ट याकि चिट्ठा या लेख पिछले वर्ष आज ही के दिन यानी 26 जुलाई को ही हमने प्रकाशित किया था। इस एक साल में क्या खोया और क्या पाया, इसका हिसाब लगाना तो मुश्किल है। एक ओर माननीय संसदीय राजभाषा समिति की सराहना, पाठकों, मित्रों का स्नेह...
दूसरी ओर तरह-तरह की ढ़ेर सारी बातें, जिनमें ज्यादातर निराशा पैदा करने वाली थीं... बहुत सारी तरेरती आँखें जिनमें एक अजीब सा ईर्ष्या और नफ़रत का मिला-जुला भाव...नकारने की हज़ारों कोशिशों के बीच, बेहद हतोत्साहित करने वाली परिस्थितियों के बीच हम हिंदी के सहारे एक साल तक डटे रहने में तो कामयाब हो गए, आगे ईश्वर इच्छा और उन इंसानों की भी जो ईश्वर से बस थोड़ा सा ही स्वयं को कम मानते हैं और कभी-कभी ईश्वर से बड़े होने की गफलत में भी वे कुछ न कुछ तो अर्थ का अनर्थ अवश्य ही करते हैं।
हमने आपके इस ब्लॉग में तीन विज़ेट लगाए हुए हैं यह जानने के लिए कि क्या कोई इसे देख-पढ़ भी रहा है या फिर हम भी सिर्फ अपने ख्याली पुलावों के सहारे जी रहे हैं। तीनो विज़ेट का औसत निकालने पर पता चला कि पिछले 365 दिनों में विश्व भर से प्रतिदिन औसतन 36 सर्वरों ने हिंदी सबके लिए से संपर्क साधा। इस अवधि में हमने विविध विषयों पर 334 पोस्ट प्रकाशित कीं। लगभग 75 टिप्पणियाँ भी मिलीं। लगभग 2350 लोगों नें प्रोफ़ाइलें देखीं। 31 मित्रों ने हिंदी सबके लिए का अनुसरण किया।
यह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है मगर लंबे रास्ते पर आगे बढ़ने और बढ़ते जाने के लिए जितनी न्यूनतम ऊर्जा चाहिए वह तो इसमें अवश्य ही मौजूद है। आपके स्नेह, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करना तो पर्याप्त नहीं है मगर इसके सिवाय कुछ है भी तो नहीं। आशीर्वाद बनाए रखें और हमें साहस दें कि ब्लॉग के साथ हम वेबसाइट भी अच्छे से शुरू कर सकें।
-प्रतिभा मलिक -अजय मलिक
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7/26/2010 08:35:00 AM
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Jul 24, 2010
इस हवा से क्या कहूँ?
(अजय मलिक की एक नई कविता )
ये हवा ...
मदहोशी से पुर ज़ोर बहती
इस हवा से क्या कहूँ?
भूली दिशा, दर्शन, वतन
परदेश में घर छोड़ आई
सीधी गली के मोड़ पर
सन-सना-सन सनसनाती
समंदर से मुँह मोड़ सूखी
इस हवा से क्या कहूँ?
लोभ से लब तक लबालब
झूठ का परचम उठाए
रात दिन दम ठोकती
और दनदनाती दसोंदिश
बौखलाहट से भरी, रीती
सिकुडती, काँपती थर-थर
थकी-हारी, अवश फुंकारती
इस हवा से क्या कहूँ?
मैं कौन!!
मैं समंदर, आ गले मिल ।
ले नशीले मेघ,
ले जाकर इन्हें,
भर दे धरा की गोद
और फिर झूम,
रूम-झुम नाचती मखमल भरी,
उन क्यारियों में ।
कोयलों की कूक से
भर जाएगा हर छोर।
गति मोड़कर हट छोड़
बन पुरवा सहला पलक के पोर
मैं समंदर, आ गले मिल...
अरे ए हवा .
ये हवा ...
मदहोशी से पुर ज़ोर बहती
इस हवा से क्या कहूँ?
भूली दिशा, दर्शन, वतन
परदेश में घर छोड़ आई
सीधी गली के मोड़ पर
सन-सना-सन सनसनाती
समंदर से मुँह मोड़ सूखी
इस हवा से क्या कहूँ?
लोभ से लब तक लबालब
झूठ का परचम उठाए
रात दिन दम ठोकती
और दनदनाती दसोंदिश
बौखलाहट से भरी, रीती
सिकुडती, काँपती थर-थर
थकी-हारी, अवश फुंकारती
इस हवा से क्या कहूँ?
मैं कौन!!
मैं समंदर, आ गले मिल ।
ले नशीले मेघ,
ले जाकर इन्हें,
भर दे धरा की गोद
और फिर झूम,
रूम-झुम नाचती मखमल भरी,
उन क्यारियों में ।
कोयलों की कूक से
भर जाएगा हर छोर।
गति मोड़कर हट छोड़
बन पुरवा सहला पलक के पोर
मैं समंदर, आ गले मिल...
अरे ए हवा .
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7/24/2010 07:35:00 PM
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Jul 21, 2010
हम धान की पौध से गेहूँ उगाएंगे...
(अशिष्ट जी फिर मुखातिब हैं एक तथाकथित नई कविता के साथ )
हम धान की पौध से गेहूँ उगाएंगे
गन्ने के रस से नई रूई बनाएंगे
गुड़ से बनेंगे कपड़े जलेबीदार
जई से बनेगी रबड़ी जायकेदार
चोर होंगे हमारे नए चौकीदार
सब काम हम नए ढंग से कराएंगे
अपने मुताबिक़ नई दुनिया बनाएंगे
भगवान से कहेंगे- रुको भागो नहीं
स्वर्ग में भी जल्द हम झाडू लगाएंगे
हम धान की पौध से गेहूँ उगाएंगे
गन्ने के रस से नई रूई बनाएंगे
गुड़ से बनेंगे कपड़े जलेबीदार
जई से बनेगी रबड़ी जायकेदार
चोर होंगे हमारे नए चौकीदार
सब काम हम नए ढंग से कराएंगे
अपने मुताबिक़ नई दुनिया बनाएंगे
भगवान से कहेंगे- रुको भागो नहीं
स्वर्ग में भी जल्द हम झाडू लगाएंगे
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7/21/2010 01:12:00 PM
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Jul 19, 2010
जो खोया जब उसकी भरपाई नहीं तो जो पाया उसकी तुलना क्या होगी
इस ख़ुशी को कैसे अभिव्यक्त करूँ !!
इस ख़ुशी की नींव जिन ग़मों पर रखी गई , उन्हें कैसे भुलाऊं... आज अगर वह होती तो थोड़ी बहुत गालियाँ सुनाकर हँसती...फिर दो-चार ताने देती और फिर हँसती, गर्व से गर्दन तानकर कहती- देख ले भैया, मैंने कर दिखाया यह भी। मैं उसकी गालियाँ सुनकर हँसता और उसे थोड़ा सा और चिढ़ाता ताकि वह कुछ और गालियाँ दे सके और फिर हँसे।
बचपन की यादें... उन यादों में उसकी गालियाँ बहुत भाती थीं। वक़्त अपना काम करता है और उससे बड़ा, उससे शक्तिशाली कोई नहीं। 20 फरवरी, 2003 का वह मनहूस दिन, एक दुर्घटना ने सब कुछ लील लिया। एक हँसता-मुस्कराता परिवार बैसाखियों पर आ गया। घर के मुखिया का एक समूचा पैर ही चला गया। उसके दोनों पैरों की हड्डियां जो टूटीं तो वह चारपाई पर आ गई। उसके स्वाभिमान का मैं सदैव कायल रहा। वह चारपाई से उठी भी मगर बार-बार चारपाई उस तक खिंच आती रही। परिस्थितियों ने ऐसा रंग बदला कि जहाँ इलाज संभव था वहीँ से वक़्त ने उसे वापस जाने पर मजबूर कर दिया और 29 नवम्बर को जन्मीं वह मेरी बहन पिछले वर्ष 11 नवम्बर को दुनियाँ से विदा हो गई। उसकी कराहटें आज भी कानों में गूँजती हैं।
घर के मुखिया की उदासी तक अपाहिज हो गई...और भी बहुत कुछ हुआ जिसे नहीं होना चाहिए था। गलतफहमियों का जंजाल बोलने से बढ़ता है तो चुप रहने से और भी ज्यादा उलझता है।
सुलझाता उसे वक्त ही है अन्यथा सारे प्रयास नाव को भंवर की ओर ही धकेलते हैं।
आज मैं उस मुखिया के चेहरे पर हजारों गुनी चमक देखने को आतुर हूँ। उन दोनों ने जिस धैर्य और संकल्प से शुरुआत की थी आज उसने बहुत सारी घूरती निगाहों को निश्तेज कर दिया है। बहन ने अपना जीवन न्योछावर करके, घर के मुखिया ने सब कुछ सहकर आज जो पाया है उसके लिए शब्द पूरे नहीं पड़ रहे हैं...
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7/19/2010 07:41:00 PM
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Jul 17, 2010
जल्दी ही हिंदी सबके लिए की एक अपनी वेब साइट भी होगी
हिंदी सबके लिए यानी hindiforyou जल्दी ही अपनी वेबसाईट पर भी होगा। आप सबके स्नेह और प्रोत्साहन से प्रेरित होकर हमने डोमेन पंजीकृत करा लिया है, जिसका पता होगा-
hindiforyou.in
बस थोड़ा सा इंतज़ार और...
hindiforyou.in
बस थोड़ा सा इंतज़ार और...
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7/17/2010 08:57:00 AM
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ज़रा बताएं तो भारत कोश में क्या नहीं है !!
यह अद्भुत है। इसमें वेद हैं, पुराण हैं, उपनिषद् हैं, हिंदी काव्य है, गद्य है, कवि हैं , लेखक हैं , इतिहास है, पयटन है, व्याकरण है, हिंदी है, संस्कृत है ... अब आप ही बताइए कि "भारत कोश" में जो कि विकसित किए जाने की प्रक्रिया में है, हिंदी में ऐसा क्या है जो नहीं है?
भारत कोश से कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं-
(भारत कोश से साभार)
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7/17/2010 08:40:00 AM
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ग़ालिब की शाइरी के लिए
मिर्ज़ा ग़ालिब की की शाइरी के लिए यहाँ कुछ लिंक्स दिए जा रहे हैं। बस संकोच यही है कि इनमें रोमन लिपि का प्रयोग है।
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7/17/2010 08:36:00 AM
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Jul 16, 2010
यूनीकोड क्या है?
यहाँ हम यूनीकोड से संबंधित वेबसाईट का लिंक दे रहे हैं जिससे आप यूनीकोड के बारे में बहुत कुछ जान-समझ सकते हैं-
.
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7/16/2010 07:26:00 AM
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Jul 15, 2010
शर्मा जी उवाच: इनसे बहुत कुछ सीखा है....
शर्मा जी और गुप्ता जी की दोस्ती जगजाहिर सी लगती थी। शर्मा जी गुप्ता जी से अनुभव एवं उम्र दोनों में बड़े थे किंतु गुप्ता जी से वर्तमान नौकरी में छ: माह बाद आए थे। जब शर्मा जी आए तब गुप्ता जी गोवा में ज्ञान बांटने का काम करते थे । गुप्ता जी से वहां जाकर शर्माजी ने ज्ञान का भंडार संभाल लिया और थोड़ा-थोड़ा कर वितरित करने लगे। कुछ दिन गुप्ता जी ज्ञान बांटने से मुक्ति पाकर मोक्ष प्राप्ति के चक्कर में गोवा में रूक गए। दोनों रोटियाँ बनाने का अभ्यास करते और गोवा के अंदाज़ में भोजन पूर्व सम्पूर्ण सामग्री के आचमनोपरांत भक्षण कर निश्चिंत निन्द्रालीन हो जाते। शर्माजी के अनुभव से गुप्ता जी भी अनुभवी होने का अनुभव करने लगे। गुप्ता जी गोवा में ज्ञान बांटते समय जो नहीं जानते थे उसके अभ्यस्त हो कर गोवा से चले गए।
शर्मा जी ने अपना अनुभव गुप्ता जी के मत्थे मढ़ दिया और धीरे-धीरे पान-बीडी-सिगरेट-तम्बाकू और शराब सबसे तौबा कर ली। शर्मा जी दृढ संकल्प वाले और लंगोट के पक्के आदमी थे। वे अपने अनुभव और व्यावहारिकता की बदौलत गोवा में छा गए। गुप्ता जी को जब शर्मा जी की वाहवाही सुनने को मिलती तो वे तिलमिलाकर रह जाते।
दिन गुजरते गए। गुप्ता जी व्यवसाय की नब्ज़ टटोलते-टटोलते एक दिन फ़ूड इंस्पेक्टर बन गए। एक दिन वे मुंबई के एक बड़े होटल में पहुंचे और मैनेजर से बताया कि पाकशाला का इंस्पेक्शन करने आए हैं। मैनेजर ने अपने असिस्टेंट से कहा - " साहब को पहले कॉफ़ी शॉप ले जाकर कुछ नाश्ता-पानी कराओ , उसके बाद जो भी साहब कहें वह करें। "
गुप्ता जी कॉफ़ी शॉप पहुंचे तो असिस्टेंट मैनेजर ने उन्हें मीनू कार्ड थमा दिया और बड़ी मिन्नत से पूछा कि साब को क्या पेश किया जाए। गुप्ता जी बहुत देर तक मीनू कार्ड को उलट-पलट कर देखते रहे। फिर एक जगह उनकी अंगुली थम गई । उन दिनों पांच सितारा होटलों में भी चाय- कॉफ़ी बमुश्किल दो-तीन रूपए की हुआ करती थी। मीनू कार्ड में सबसे महँगी चीज़ दस रूपए की थी जहाँ गुप्ता जी की अंगुली ठहरी थी। असिस्टेंट मैनेजर ने लाख समझाया कि साब यह तो बिलकुल पानी की तरह होता है, आप कुछ और ले लीजिए। मगर गुप्ता जी अड़ गए-" आप ये ही लाइए, हमें ये ही चलता है।" बेचारा असिस्टेंट मैनेज़र, एक बार फिर गुजारिश की मगर गुप्ता जी टस से मस नहीं हुए। मरता क्या न करता ! उसने वेटर को एक गिलास मिनरल वाटर लाने का आर्डर दे दिया। उन दिनों मिनरल वाटर की शरूआत का दौर था। पानी आ गया और गुप्ता जी ने जैसे ही पहली चुस्की ली माजरा समझ गए मगर अपनी मूर्खता जाहिर करने का समय नहीं था। फिर भी प्रभु इच्छा को कौन टाल सकता है, गुप्ता जी का चुस्की ले लेकर मिनरल वाटर पीने का अंदाज़ सब कुछ साफ़- साफ़ बतला रहा था। कॉफ़ी शॉप में बैठे सभी लोग मुस्करा रहे थे।
समय बीतता गया । दो दशक बाद गुप्ता जी की मुलाक़ात शर्मा जी से हैदराबाद में हुई। अब गुप्ता जी बहुत बड़े अफसर बन गए थे। होटल वाले उनके चारों ओर चक्कर लगाया करते। गुप्ता जी मिनरल वाटर का इस्तेमाल अलग ही तरीके से करते । उनके लिए नहाने के लिए मिनरल वाटर की बोतले टब में भरी जातीं। वे अब बड़े आकार के तोहफे नहीं कबूलते थे। उन्हें छोटे आकार की बेशकीमती वस्तुएं तोहफे में दी जातीं। वे खुश होते मगर ख़ुशी का इज़हार करने से बचते। उनके नहाने के लिए यदि मिनरल वाटर की ज़रा सी भी कमी होती तो उस होटल के बंद होने की नौबत आ जाती।
गुप्ता जी ने हैदराबाद प्रवास के दौरान शर्मा जी को अपने होटल के सूट में बुलवा भेजा। वहां कुछ बड़े लोगों के बीच शर्मा जी का हाल चाल पूछा गया। फिर जब खाने-पीने का दौर चला तो गुप्ता जी झूमते हुए शर्मा जी से बोले- "देखिए जी, ऐसा है शर्मा जी, हम आपको आज भी नहीं भूले। गोवा में तो आप हमारे जूनियर हुआ करते थे, याद है ना। "
शर्मा जी ने अपना अनुभव गुप्ता जी के मत्थे मढ़ दिया और धीरे-धीरे पान-बीडी-सिगरेट-तम्बाकू और शराब सबसे तौबा कर ली। शर्मा जी दृढ संकल्प वाले और लंगोट के पक्के आदमी थे। वे अपने अनुभव और व्यावहारिकता की बदौलत गोवा में छा गए। गुप्ता जी को जब शर्मा जी की वाहवाही सुनने को मिलती तो वे तिलमिलाकर रह जाते।
दिन गुजरते गए। गुप्ता जी व्यवसाय की नब्ज़ टटोलते-टटोलते एक दिन फ़ूड इंस्पेक्टर बन गए। एक दिन वे मुंबई के एक बड़े होटल में पहुंचे और मैनेजर से बताया कि पाकशाला का इंस्पेक्शन करने आए हैं। मैनेजर ने अपने असिस्टेंट से कहा - " साहब को पहले कॉफ़ी शॉप ले जाकर कुछ नाश्ता-पानी कराओ , उसके बाद जो भी साहब कहें वह करें। "
गुप्ता जी कॉफ़ी शॉप पहुंचे तो असिस्टेंट मैनेजर ने उन्हें मीनू कार्ड थमा दिया और बड़ी मिन्नत से पूछा कि साब को क्या पेश किया जाए। गुप्ता जी बहुत देर तक मीनू कार्ड को उलट-पलट कर देखते रहे। फिर एक जगह उनकी अंगुली थम गई । उन दिनों पांच सितारा होटलों में भी चाय- कॉफ़ी बमुश्किल दो-तीन रूपए की हुआ करती थी। मीनू कार्ड में सबसे महँगी चीज़ दस रूपए की थी जहाँ गुप्ता जी की अंगुली ठहरी थी। असिस्टेंट मैनेजर ने लाख समझाया कि साब यह तो बिलकुल पानी की तरह होता है, आप कुछ और ले लीजिए। मगर गुप्ता जी अड़ गए-" आप ये ही लाइए, हमें ये ही चलता है।" बेचारा असिस्टेंट मैनेज़र, एक बार फिर गुजारिश की मगर गुप्ता जी टस से मस नहीं हुए। मरता क्या न करता ! उसने वेटर को एक गिलास मिनरल वाटर लाने का आर्डर दे दिया। उन दिनों मिनरल वाटर की शरूआत का दौर था। पानी आ गया और गुप्ता जी ने जैसे ही पहली चुस्की ली माजरा समझ गए मगर अपनी मूर्खता जाहिर करने का समय नहीं था। फिर भी प्रभु इच्छा को कौन टाल सकता है, गुप्ता जी का चुस्की ले लेकर मिनरल वाटर पीने का अंदाज़ सब कुछ साफ़- साफ़ बतला रहा था। कॉफ़ी शॉप में बैठे सभी लोग मुस्करा रहे थे।
समय बीतता गया । दो दशक बाद गुप्ता जी की मुलाक़ात शर्मा जी से हैदराबाद में हुई। अब गुप्ता जी बहुत बड़े अफसर बन गए थे। होटल वाले उनके चारों ओर चक्कर लगाया करते। गुप्ता जी मिनरल वाटर का इस्तेमाल अलग ही तरीके से करते । उनके लिए नहाने के लिए मिनरल वाटर की बोतले टब में भरी जातीं। वे अब बड़े आकार के तोहफे नहीं कबूलते थे। उन्हें छोटे आकार की बेशकीमती वस्तुएं तोहफे में दी जातीं। वे खुश होते मगर ख़ुशी का इज़हार करने से बचते। उनके नहाने के लिए यदि मिनरल वाटर की ज़रा सी भी कमी होती तो उस होटल के बंद होने की नौबत आ जाती।
गुप्ता जी ने हैदराबाद प्रवास के दौरान शर्मा जी को अपने होटल के सूट में बुलवा भेजा। वहां कुछ बड़े लोगों के बीच शर्मा जी का हाल चाल पूछा गया। फिर जब खाने-पीने का दौर चला तो गुप्ता जी झूमते हुए शर्मा जी से बोले- "देखिए जी, ऐसा है शर्मा जी, हम आपको आज भी नहीं भूले। गोवा में तो आप हमारे जूनियर हुआ करते थे, याद है ना। "
शर्मा जी मुस्करा कर बोले-" गोवा में तो गुप्ता जी आपसे मैंने बहुत कुछ सीखा था।"
गुप्ता जी प्रसंशा सुनकर कुछ और झूमने लगे मगर बड़प्पन दिखाते हुए कुछ और प्रसंशा की आशा में बोले-" अरे नहीं, आप तो...मैं तो ...बस "
शर्मा जी ने कहा-" नहीं गुप्ता जी, मैंने जो कुछ भी आपसे सीखा था वह मैं बिलकुल भी नहीं भूला हूँ और कभी भूल सकता भी नहीं। याद है, आप ही ने तो मुझे काकटेल पीना सिखाया था, सिगरेट पीना...हेरा-फेरी करना सिखाया... मैं कभी झूठ नहीं बोलता था मगर वह भी मुझे आपसे ही सीखने को मिला। मैं सरकारी अफसरी को जनता की सच्ची सेवा समझता था मगर आपने मुझे सिखाया कि जनता सरकार के लिए होती है। आप सरकारी हैं इसलिए जनता का यह दायित्व बनता है कि वह आपकी सेवा करे।"
तब तक गुप्ता जी प्रसंशा सुनके की हालत में नहीं बचे थे। वे मद मग्न हो चुके थे। महफ़िल के नुमाइंदों ने गुप्ता जी को बिस्तर पर लिटाया और निश्चिंत होकर शर्मा जी को प्रणाम कर विदा हो गए।
शर्मा जी ने कहा-" नहीं गुप्ता जी, मैंने जो कुछ भी आपसे सीखा था वह मैं बिलकुल भी नहीं भूला हूँ और कभी भूल सकता भी नहीं। याद है, आप ही ने तो मुझे काकटेल पीना सिखाया था, सिगरेट पीना...हेरा-फेरी करना सिखाया... मैं कभी झूठ नहीं बोलता था मगर वह भी मुझे आपसे ही सीखने को मिला। मैं सरकारी अफसरी को जनता की सच्ची सेवा समझता था मगर आपने मुझे सिखाया कि जनता सरकार के लिए होती है। आप सरकारी हैं इसलिए जनता का यह दायित्व बनता है कि वह आपकी सेवा करे।"
तब तक गुप्ता जी प्रसंशा सुनके की हालत में नहीं बचे थे। वे मद मग्न हो चुके थे। महफ़िल के नुमाइंदों ने गुप्ता जी को बिस्तर पर लिटाया और निश्चिंत होकर शर्मा जी को प्रणाम कर विदा हो गए।
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7/15/2010 08:38:00 AM
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Jul 11, 2010
वे सही समझते है कि हम नासमझ कुछ नहीं समझते
उनकी गुर्राहट अक्सर उनकी मासूम मुस्कराहट में छुपी होती है। वे रोज बड़ी सहजता से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कभी किसी बात के लिए न नहीं कहा। आप उनसे यदि आसमान के तारे तोड़ लाने के लिए कहें तब भी उनका जवाब यही होगा- "हाँ, बिल्कुल।" उन्हें न इसके लिए नासा द्वारा तैयार किसी अन्तरिक्ष यान की आवश्यकता है, न ही किसी लांचिग पैड की। आप उनसे कहिए कि कल तो दुनिया का आखरी दिन होगा। वे बेखोफ़ कहेंगे-
"हाँ, बिल्कुल।"
किसी ने उनसे अनुरोध करते हुए कहा-
"जनाब, एक दिन के लिए किसी गेस्ट हाउस में ठहरने का इंतजाम करा देंगे ?"
उन्होंने तपाक से जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
एक हफ्ते बाद उनसे पूछा गया-
"जनाब, क्या गेस्ट हाउस का कुछ हुआ?"
उन्होंने जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
"हाँ, बिल्कुल।"
फिर एक हफ्ते बाद उनसे पूछा गया-
"जनाब, गेस्ट हाउस का ज़रा नाम बता देते तो अच्छा था!"
उन्होंने फिर जवाब दिया-
उन्होंने फिर जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
अच्छा बताइए तो क्या नाम बताया?
उन्होंने जो नहीं बताया था तब तक सोचकर बता दिया।
पूछने वाले ने जब अपने आगमन पर गेस्ट हाउस जाने का रास्ता पूछा तो वह भी उन्होंने निसंकोच बता दिया।
रात के ग्यारह बजे जब आने वाला निश्चिंतता के साथ बताए हुए पते पर पहुंचा तो वहां गेस्ट हाउस नाम का शराब का एक ठेका मिला।
उसके बाद जब उनसे फोन पर पूछा गया कि जनाब यह तो गेस्ट हाउस नहीं बल्कि इस नाम का शराब का ठेका है।
तो उन्होंने फिर उसी मासूमियत से जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
- और उसके बाद फोन स्विच ऑफ कर दिया।
॰
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7/11/2010 03:58:00 PM
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हिंदी में श्री गुरुग्रंथ साहिब: gurbanifiles.org के सौजन्य से
आज हम हिंदी में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सम्पूर्ण पाठ डाउन लोड करने के लिए लिंक दे रहे हैं -
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आपकी प्रतिक्रया की प्रतीक्षा रहेगी .
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7/11/2010 03:51:00 PM
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Jul 9, 2010
बाड़ क़ी भूख से कब तक बचोगे भगवन !!
"बाड़ खेत को खा गई" यह बहुत ही पुरानी, हर मौसम में मौजू और बेहद प्रचलित कहावत है। पहले वह सोचता था कि जो बाड़ खेत की चारदीवारी की तरह होती है वह खेत को कैसे खा सकती है भला? बड़े-बूढ़े समझाते थे- "बेटा जब तुम्हारे देखते-देखते यह सब होगा तब मान जाओगे। अभी बचपना है इसलिए बचकानी बाते करते हो, न जाने कितने खेत बाड़ के पेट में समा गए और ज़माना भौचक देखता रह गया।"
अब सब ओर वह यही देखता है कि खेत रो रहा है अपनी बेचारगी पर और बाड़ अट्टहास कर रही है अपनी दीवानगी पर। खेत को जैसे बाड़ ने अपने खूंखार जबड़ों में जकड़ा हुआ है... बड़े-बड़े नुकीले दांत खेत के सीने को छलनी करते जा रहे हैं मांस के लोथड़े चारों और बिखरे पड़े हैं... लहूलुहान है खेत का जर्रा-जर्रा... मगर यह सब देखकर भी जाने क्यों डरा हुआ सहमा-सहमा सा खामोश है विधाता ? क्या यही विधि का विधान है? क्या बाड़ और ब्लैक होल में कोई समानता है?
रेलगाड़ी का एक ऐसा इंजिन जिसके पहियों में जंग लगा हो, एक्सल टूटा हो, ब्रेक जाम हों, हर नट-बोल्ट से तेल रिस रहा हो, हर कल-पुर्जे से कान फोडू शोर निकलता हो, ऐसा इंजिन … अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नवनिर्मित डिब्बों को कैसे किसी पड़ाव तक पहुंचा सकता है? कैसे उन डिब्बों की अत्याधुनिक सभी सुख सुविधाओं से लबालब शायिकाओं को कोई सवारी मिल सकती है ?
सवारी को अपनी मंजिल तक पहुंचना है, लचर इंजिन के कोचों में सुनसान-बियाबान जंगलों में पड़े रहना कोई यात्री क्यों पसंद करेगा? फिर भी इंजिन को इस बात का गर्व है कि वह किसी भी अत्याधुनिक तकनीकी से निर्मित डिब्बे को कहीं भी, किसी भी जगह जाम कर देने, रोक देने, नाकारा और अनुपयोगी साबित करने में न सिर्फ सक्षम है बल्कि माहिर भी है।
बाड़ के खाने के लिए जब कोई खेत नहीं बचेगा तब क्या होगा? क्या बाड़ का अस्तित्व खेतों के बिना बचा रह सकेगा? वह भगवान् को पुकारना चाहता है मगर भगवान् भी बाड़ से भयभीत भागते नज़र आते हैं... मगर कब तक और कहाँ तक भागेंगे भगवान् ... एक दिन तो भगवान् को भी बाड़ क़ी चपेट में आकर लहुलुहान हो जाना ही पड़ेगा क्योंकि बाड़ क़ी भूख कभी मिटने वाली नहीं है।
- अजय मलिक
.
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7/09/2010 06:37:00 AM
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Jul 7, 2010
भारत का इतिहास: शिशिर थडानी के ब्लॉग से साभार
नीचे दिए गए ऐतिहासिक लेखों के लिंक्स इतिहास के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के साथ-साथ आम हिंदी पाठकों के लिए भी उपयोगी एवं रोचक हो सकते हैं। एक बार मुफ्त में आजमाने में आपका क्या जाता है?
ये लिंक्स शिशिर थडानी के ब्लॉग http://india_resource.tripod.com/Hindi-Essays.html से लिए गए हैं।
· आर्य आक्रमणः सिद्धांत, विपरीत सिद्धांत और ऐतिहासिक...
· उपनिषादिक तत्व मीमांसा से वैज्ञानिक यथार्थवादः दार...
· भारत में सामाजिक संबंधों का इतिहास
· भारत में गणित का इतिहास
· भारत में भौतिक विज्ञानों का इतिहास
· भारतीय कला और वास्तुशिल्प में प्रगति
· भारत में तकनीकी खोजें और उनके उपयोग
· भारत में हस्तकौशल और व्यापार के ऐतिहासिक स्वरूप
· भारतीय लोक चित्रकला
· बौद्ध नीतिशास्त्र और सामाजिक समीक्षा
· हिंदू और जैन परंपराओं के साथ प्रादेशिक सल्तनतों का...
· प्राचीन भारत में दार्शनिक विचार और वैज्ञानिक तौर त...
· उड़ीसा का इतिहासः एक परिचय
· सिंध की अरब विजय एवं इस्लामीकरण
· पंजाब और गजनी एवं गौर आक्रमण
· मुगलों का उत्थान और पतन
· इस्लाम और उपमहाद्वीपः उसके संघात का मूल्यांकन
· सूफी धारायें और इस्लामी राजदरबारों में सभ्यता
· भारतीय चित्राकला ( 16वीं से 19वीं सदी तक )
· व्यापार से उपनिवेशः ईस्ट इंडिया कंपनियों की ऐतिहास...
· भारतीय सामुद्रिक व्यापार पर यूरोपियन प्रभुत्व
· ब्रिटिश शासन में राजभक्ति पर दबाव - भाग एक
· ब्रिटिश शासन में राजभक्ति पर दबाव - भाग दो
· 1857 का क्रांतिकारी उभार
· गदर आंदोलन के महत्वपूर्ण दस्तावेज
· भारतीय स्वतंत्राता संग्राम में मूल युगांतरकारी घटन...
· भारतीय स्वतंत्राता संग्राम के दौरान की क्रान्तिकार...
· भारत में ब्रिटिश शिक्षा
· ब्रिटिश उपनिवेशिक बपौतीः भ्रान्तियां और जनसामान्य ...
· भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के लिए आदिवासी योगदान
· तिलक के इतिहास का मूल्यांकन
· दो राष्ट्र् नीति और विभाजन, ऐतिहासिक नजर
· जम्मू और कश्मीरः स्व निर्णय, जनमत संग्रह की मांग औ...
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· सिंध की अरब विजय एवं इस्लामीकरण
· पंजाब और गजनी एवं गौर आक्रमण
· मुगलों का उत्थान और पतन
· इस्लाम और उपमहाद्वीपः उसके संघात का मूल्यांकन
· सूफी धारायें और इस्लामी राजदरबारों में सभ्यता
· भारतीय चित्राकला ( 16वीं से 19वीं सदी तक )
· व्यापार से उपनिवेशः ईस्ट इंडिया कंपनियों की ऐतिहास...
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· ब्रिटिश शासन में राजभक्ति पर दबाव - भाग दो
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7/07/2010 09:22:00 AM
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Jul 6, 2010
हिंदी प्रवीण ऑनलाइन परीक्षा देते हुए प्रशिक्षार्थी


राजभाषा विभाग , गृह मंत्रालय , केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित गहन हिंदी लीला प्रवीण की ऑनलाइन परीक्षा में टाइडल पार्क स्थित सी-डेक, चेन्नै के परीक्षा कक्ष में दस परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा के आयोजन में सहयोग हेतु सी-डेक पुणे के एप्लाइड ग्रुप के सदस्य श्री शैलेन्द्र भी उपस्थित थे.
- अजय मलिक
(फोटो (C) अजय मलिक )
- अजय मलिक
(फोटो (C) अजय मलिक )
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7/06/2010 03:37:00 PM
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नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति ( कार्यालय ) चेन्नै द्वारा आई आई टी में आयोजित हिंदी कार्यशाला
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7/06/2010 03:10:00 PM
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हिंदी प्रवीण ऑनलाइन परीक्षा के लिखित भाग की परीक्षा लिखते परीक्षार्थी
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7/06/2010 03:02:00 PM
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Jul 5, 2010
क्या मदुरै विश्वविद्यालय ने मैट्रिक परीक्षा का आयोजन कभी नहीं किया ?
सूचना अधिकार अधिनियम - 2005 के तहत मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी द्वारा मैट्रिक अथवा सैकंडरी की परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाता। इस मामले में विश्वविद्यालय को दिनांक: 08.04.2010 तथा 16.04.2010 को पत्र लिखे गए थे। दिनांक: 08-04-2010 के उत्तर में विश्वविद्यालय ने अपने letter no. PIO/RTI/Info/10/232, dated 13.04.2010 द्वारा प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए गैरसरकारी व्यक्तियों को रूपए 750 तथा सरकारी कार्यालयों आदि को रूपए 500 फ़ीस जमा कराने के नियम का उल्लेख किया था। किंतु दिनाक : 16-04-2010 के पत्र द्वारा जब विश्वविद्यालय से अनुरोध किया गया कि हमने प्रमाणपत्र सत्यापन का अनुरोध नहीं किया है बल्कि कुछ सूचना मांगी है तो विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उक्त विश्वविद्यालय मैट्रिक अथवा सैकेंडरी की परीक्षाओं का आयोजन नहीं करता। इस संबंध में विश्वविद्यालय से पूछे गए प्रश्न एवं Public Information Officer के दिनांक: 26-05-2010 के पत्र संख्या: PIO/RTI/info/10/232 द्वारा दिए गए उत्तर निम्न प्रकार थे - (रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे )
प्रश्न .1. Kindly provide the name and the date of birth of the candidate (along with his/her father’s name) who appeared in the matriculation examination against Register No. xxxx(??), in March 1978 from Madurai University.
उत्तर: University does not conduct Matriculation Examinations.
(रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे)
उत्तर: University does not conduct Matriculation Examinations.
(रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे)
प्रश्न .2. Kindly provide the name and the date of birth of the candidate (along with his/her father’s name) who appeared and Passed the XI standard examination with Register No.xxxx (??) in March 1978 from Madurai University.
उत्तर: XI standard examination is also not conducted by University. Hence question not related to Madurai Kamraj University.
उत्तर: XI standard examination is also not conducted by University. Hence question not related to Madurai Kamraj University.
(रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। )
प्रश्न .3. In which class or division above mentioned candidates passed the said examinations.
उत्तर: Does not arise.
क्या उपर्युक्त से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि
1. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय , Palkalai नगर, मदुरै -625021 के जन सूचना अधिकारी के अनुसार उक्त विश्वविद्यालय द्वारा मैट्रिक अथवा XI परीक्षाओं का आयोजन 1978 में नहीं किया गया ?
2. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय सरकारी संस्थाओं द्वारा किसी डिग्री अथवा प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए रूपए 500 का शुल्क लेता है ?
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7/05/2010 07:56:00 AM
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Jul 4, 2010
32 बिट एवं 64 बिट के लिए IME अलग-अलग हैं
जब आप अपने कंप्यूटर में भारतीय भाषाएँ सक्रिय करने के लिए IME आदि डाउनलोड करें तो पहले इस बात का पता अवश्य लगा लें कि आपके कंप्यूटर का हार्डवेयर एवं ऑपरेटिंग सिस्टम (विंडोज़ आदि ) 32 बिट्स के हैं अथवा 64 बिट्स के। दोनों तरह के कंप्यूटर्स के लिए आई एम ई (IME) अलग-अलग हैं। आमतौर पर हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर्स 32 बिट्स वाले होते हैं। 64 बिट्स वाले कम्प्यूटर्स काफी महंगे तथा स्पीड के मामले में बहुत तेज होते हैं। आई आई टी जैसे तकनीकी संस्थानों में अनुसंधान आदि के लिए 64 बिट्स वाले कम्प्यूटर्स उपयोग में लाए जाते हैं । इससे पहली पोस्ट में आई एम ई डाउनलोड लिंक्स 32 बिट्स वाले कंप्यूटर्स के लिए हैं।
-अजय मलिक
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7/04/2010 06:38:00 PM
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हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में र्इ-मेल और ऑनलाइन हिंदी प्रशिक्षण/ परीक्षा
हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में र्इ-मेल
1. जी मेल (Gmail ) : जी मेल/gmail से किसी भी भारतीय भारतीय भाषा में र्इ मेल लिखी और भेजी जा सकती है। आपको केवल अपनी भाषा का चयन करके रोमन में टाइप करना है। रोमन में tamil टाइप करने पर स्पेस बार दबाते ही आपकी भाषा / लिपि में तमिल बन जाता है।
2. IME – 1 और IME – 2 :- यदि आप htpp://bashaindia.com से IME –1(Download ) और IME –2 (Download ) – डाउनलोड कर इंस्टाल कर लें तो आप किसी भी ब्राउजर में किसी भी mail ( hotmail , yahoo mail etc.) में सीधे हिंदी अथवा अपनी भाषा में मेल तैयार कर भेज सकते हैं। यदि आप तमिल में मेल भेजना चाहते हैं तो तमिल IME-1 एवं IME-2 डाउनलोड कर इंस्टाल कीजिए और शुरु हो जाइए IME – 1 और IME – 2 से आप सीधे MS Office आदि में भी अपनी भाषा / लिपि में टाइप कर सकते हैं। विंडोज़ विस्ता तथा विंडोज़ – 7 में इसका प्रयोग तत्काल किया जा सकता है। किन्तु विंडोज़ 2000 एवं XP में पहले आपको हिंदी / भारतीय भाषाओं एवं उनके कुंजी पटल को सक्रिय ( activate ) करना होता है। उसके बाद सब कुछ सरल है।
3. Indic Transliteration – इसके द्वारा आप इंटरनेट पर सीधे हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं में Text ( पाठ ) तैयार कर MS Office अथवा मेल बाँक्स में कापी / पेस्ट कर सकते हैं।
4. quillpad – इसके द्वारा भी Indic transliteration वाली सारी सुविधाओं का लाभ उठाया जा सकता है। इसी के साथ यदि आपने offline ( बिना इंटरनेट के ) अपनी भाषा में Romanized पाठ तैयार किया है तो उसका लिप्यंतरण आपकी लिपि में सेकेंडस में हो जाता है।
5. ऑन लाइन हिंदी प्रशिक्षण – हिंदी के अक्षर ज्ञान से लेकर हिंदी में नोटिंग / ड्राफ्टिंग करना तक ऑन लाइन सीखा जा सकता है। इसकी सुविधा राजभाषा विभाग ने निशुल्क उपलब्ध करार्इ है। आपको पहले अपने कंप्यूटर में हिंदी यूनीकोड की सक्रियता सुनिश्चित करनी है। उसके बाद किसी भी भारतीय भाषा ( तमिल, तेलुगू, मलयालम , कन्नड़ , बांग्ला आदि ) अथवा अंग्रेज़ी के माध्यम से आप हिंदी सीख सकते हैं। उसकी विधि यानी तरीका बेहद आसान है –
आप LILA - Hindi Prabodh, Praveen and Pragya अथवा rajbhasha.nic.in पर लाग ऑन करें और लीला प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पर क्लिक करें। पाठ्यक्रम और अपना माध्यम चुनकर अपना रजिस्ट्रेशन करें; user name and password की पुष्टि होते ही सीखना शुरू कर दें। ऑनलाइन अध्ययन के साथ-साथ आप प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ की ऑन लाइन परीक्षा भी दे सकते हैं और तत्काल परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इस पूर्णकालिक गहन प्रशिक्षण के दौरान परीक्षा से पहले ऑनलाइन मॉडल परीक्षा ( model exam ) का अभ्यास भी कराया जाता है। केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए यह प्रशिक्षण चेन्नई में ई-3-सी राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नई-600 090 में चलाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के लिए भारत के किसी भी कौने से सरकारी कर्मचारी नामित किए जा सकते हैं।
1. जी मेल (Gmail ) : जी मेल/gmail से किसी भी भारतीय भारतीय भाषा में र्इ मेल लिखी और भेजी जा सकती है। आपको केवल अपनी भाषा का चयन करके रोमन में टाइप करना है। रोमन में tamil टाइप करने पर स्पेस बार दबाते ही आपकी भाषा / लिपि में तमिल बन जाता है।
2. IME – 1 और IME – 2 :- यदि आप htpp://bashaindia.com से IME –1(Download ) और IME –2 (Download ) – डाउनलोड कर इंस्टाल कर लें तो आप किसी भी ब्राउजर में किसी भी mail ( hotmail , yahoo mail etc.) में सीधे हिंदी अथवा अपनी भाषा में मेल तैयार कर भेज सकते हैं। यदि आप तमिल में मेल भेजना चाहते हैं तो तमिल IME-1 एवं IME-2 डाउनलोड कर इंस्टाल कीजिए और शुरु हो जाइए IME – 1 और IME – 2 से आप सीधे MS Office आदि में भी अपनी भाषा / लिपि में टाइप कर सकते हैं। विंडोज़ विस्ता तथा विंडोज़ – 7 में इसका प्रयोग तत्काल किया जा सकता है। किन्तु विंडोज़ 2000 एवं XP में पहले आपको हिंदी / भारतीय भाषाओं एवं उनके कुंजी पटल को सक्रिय ( activate ) करना होता है। उसके बाद सब कुछ सरल है।
3. Indic Transliteration – इसके द्वारा आप इंटरनेट पर सीधे हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं में Text ( पाठ ) तैयार कर MS Office अथवा मेल बाँक्स में कापी / पेस्ट कर सकते हैं।
4. quillpad – इसके द्वारा भी Indic transliteration वाली सारी सुविधाओं का लाभ उठाया जा सकता है। इसी के साथ यदि आपने offline ( बिना इंटरनेट के ) अपनी भाषा में Romanized पाठ तैयार किया है तो उसका लिप्यंतरण आपकी लिपि में सेकेंडस में हो जाता है।
5. ऑन लाइन हिंदी प्रशिक्षण – हिंदी के अक्षर ज्ञान से लेकर हिंदी में नोटिंग / ड्राफ्टिंग करना तक ऑन लाइन सीखा जा सकता है। इसकी सुविधा राजभाषा विभाग ने निशुल्क उपलब्ध करार्इ है। आपको पहले अपने कंप्यूटर में हिंदी यूनीकोड की सक्रियता सुनिश्चित करनी है। उसके बाद किसी भी भारतीय भाषा ( तमिल, तेलुगू, मलयालम , कन्नड़ , बांग्ला आदि ) अथवा अंग्रेज़ी के माध्यम से आप हिंदी सीख सकते हैं। उसकी विधि यानी तरीका बेहद आसान है –
आप LILA - Hindi Prabodh, Praveen and Pragya अथवा rajbhasha.nic.in पर लाग ऑन करें और लीला प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पर क्लिक करें। पाठ्यक्रम और अपना माध्यम चुनकर अपना रजिस्ट्रेशन करें; user name and password की पुष्टि होते ही सीखना शुरू कर दें। ऑनलाइन अध्ययन के साथ-साथ आप प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ की ऑन लाइन परीक्षा भी दे सकते हैं और तत्काल परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इस पूर्णकालिक गहन प्रशिक्षण के दौरान परीक्षा से पहले ऑनलाइन मॉडल परीक्षा ( model exam ) का अभ्यास भी कराया जाता है। केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए यह प्रशिक्षण चेन्नई में ई-3-सी राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नई-600 090 में चलाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के लिए भारत के किसी भी कौने से सरकारी कर्मचारी नामित किए जा सकते हैं।
इस संबंध में और अधिक जानकारी के लिए 09444713211 पर संपर्क किया जा सकता है।
-अजय मलिक
e-mail : hindiforyou@gmail.com
Posted by:AM/PM
हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
at
7/04/2010 01:36:00 PM
1 comments
Jul 2, 2010
उनकी याद और मेरी याददाश्त और कुंजम्मा
आज उनका जन्मदिन है और कल उनकी बहुत याद आई। किसी एक पल के लिए नहीं बल्कि पूरे दिन उनकी याद ...यादों की जैसे मूसलाधार बारिश हो रही थी। मैं उनकी यादों में सराबोर थी फिर भी भीगी हुई नहीं लग रही थी। उनकी यादों की नमी बार-बार मेरी आँखों से छलक पड़ना चाहती थी। मैं मंच से अपनी बात कहते हुए हर पल उन्हें अपने पीछे साक्षात उपस्थित पा रही थी। साढ़े दस बरस पहले संसार से विदा ले चुकीं गीता जी मुझे जैसे पल-पल लोरी सुना रही थीं। ऐसा क्यूं होता है कि जो नहीं हैं वे अपने होने के अहसास से जीने की और बढ़ते जाने की प्रेरणा देते हैं और जो हैं उन्हें हम भुलाए रहते हैं ?
गीता जी को हिंदी से लगाव क्यों था ? अपनी गुरु के इस विशेष लगाव के बारे में मैं कभी नहीं जान पाई। हाँ, मुझे हिंदी से लगाव अपनी गुरु के लगाव के कारण ही हुआ। मलयालम भाषी होते हुए भी हिंदी के प्रति इस लगाव ने मुझे कभी न धोखा दिया, न ही कभी सिर झुकाने की नौबत ही आने दी। सच कहूं तो इसी हिंदी के प्रति श्रद्धा के कारण मैंने सिर उठाकर जीना सीखा। खैर, इस सब के दोहराने का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि यह तो अपना-अपना नज़रिया है। परसों कुंजम्मा सेवानिवृत हो गईं। उनका फोन नंबर इंटनेट से तलाशा मगर तब तक रात के साढ़े दस हो गए थे। फोन तो मिला मगर बात न हो सकी। कल सुबह उनसे बात हुई। अच्छा लगा... बहुत अच्छा लगा। गीता जी बारह साल बड़ी थीं उनसे। आज होतीं तो सब कैसे तो बतिया रहे होते। समय असमय ही बीत जाता है। कुंजम्मा भी किसी क्षण मेरी प्रेरणा बनी थीं। वे सिंह थीं तो मैं मलिक बन गई।
यादों के इन झरोखों से क्या कुछ तो छलक गया है। यादों की बौछार से आखों का रूखापन कुछ कम हो गया। कल आई आई टी चेन्नै में इन यादों का साया मेरा रक्षा कवच बन गया और लोगों को लगा कि मैं बोल रही हूँ शायद कोई मेरठ वाली ...या फिर कोई पंजाबिन ... या फिर कोई अलीगढ़- आगरा - मथुरा वाली... देहातिन जाटनी... पर मेरे सिवाय ये कोई नहीं समझ पाया कि मैं स्वर्गीय गीता जी की प्रतिभा और मलिक बोल रही हूँ। है ना कुंजम्मा , क्या आप समझ पायीं इस रहस्य को ?
Posted by:AM/PM
हिंदी सबके लिए : प्रतिभा मलिक (Hindi for All by Prathibha Malik)
at
7/02/2010 08:48:00 PM
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