यह मेरे जीवन का सबसे यादगार इंटरव्यू था ..
-अजय मलिक
यह मेरे जीवन का सबसे यादगार इंटरव्यू था ..
-अजय मलिक
इन ऑडियो कैसेट्स को इतने साल तक बचाए रखना आसान नहीं था।
इंतजार कीजिए अगली पोस्ट का जिसमें आप रूबरू होंगे जनाब सईद जाफरी से
-अजय मलिक
एक बात...
दो बात,
तीन बात...
बहुत सारी बातें हैं
कहने, सुनने के लिए।
मगर अजीब गफ़लत है-
कहने वाले की
कोई सुनता नहीं ।
सुनने वाले से
कोई कहता नहीं ।
सारा शहर सुनसान सा शान्त है।
फिर भी हर ओर घोर अशान्ति है...
अराजकता के खुले मुँह में
रसगुल्ला नीरस होकर
बेबस पड़ा है,
निठल्लापन
बक-बक करता
मस्त खड़ा है...
बेचारा आदमी
ज़हरीली हवा से
धुले आसमान में
कुछ ढूँढ रहा है ।
-अजय
असंभव को संभव, बनाकर तो देख !
एक बार फिर से, बुलाकर तो देख !
तिरी झुर्रियों से, ख़फ़ा है चाँद भी
तू दिल को दर्पण, दिखाकर तो देख !
कई बरस बीते, याद करते तुझे
यादों से पर्दा, हटाकर तो देख !
सरेआम मुझको, कत्ल करने वाले,
अब नयी दुनियाँ, बसाकर तो देख !
बरसों बरस तक, आज़माया मुझे,
खुद को भी अब, अज़माकर तो देख !
मिरा क्या, मैं तो, गुज़र ही जाऊँगा,
तू कील काँटे, बिछाकर तो देख !
अदब को मेरे, खूब घायल किया,
मुस्कान मिरी तू, मिटाकर तो देख !
-अजय मलिक (c)
मूलत: यह पावर पॉइंट हमारे गुरु समान मित्र श्री शैलेन्द्र नाथ जी (भूतपूर्व महा प्रबंधक, फील्ड गन फेक्ट्री, कानपुर) ने अपनी आवड़ी में तैनाती के दौरान तैयार किया था। मैंने इसमें अपनी ओर से बस थोड़ा बहुत जोड़-घटा कर एक फिल्म के रूप में परिवर्तित किया है। श्री शैलेन्द्र नाथ जी के प्रति कृतज्ञता के साथ एक अनाधिकार चेष्टा ... -अजय मलिक
गाँव तक आए शहर
छाँव तक ले उड़े …
नेता के झूठ, सिर
पाँव तक ले उड़े …
भूख से मरा कोई
चाम तक ले उड़े…
सुबह कभी हुई नहीं
शाम तक ले उड़े…
घाव नित नये दिये
बाम तक ले उड़े…
प्रेम की दुकान से
जाम तक ले उड़े…
न्याय से अन्याय कर
दाम तक ले उड़े…
पाँच सेर नाज पर
काम तक ले उड़े…
अब न कोई ठौर है
छान तक ले उड़े…
देश के करणधार
कान तक ले उड़े…
आन-बान-शान संग
जान तक ले उड़े…
-अजय मलिक
-अजय मलिक
वो मीत जो मिले नहीं,
वो गीत जो सुने नहीं,
वो फूल जो खिले नहीं,
वो शूल जो चुभे नहीं,
वो होंठ जो हिले नहीं.. !
क्यूँ , दिल धडकाते हैं !
क्यूँ, याद बहुत आते हैं ?
-अजय मलिक
दो दिन उधार लिए,
चुपचाप सोने के लिए ।
एक रात नींद आई नहीं
और एक रात मैं जगता रहा,
यह जानने के लिए कि आख़िर
ये नींद आती है, तो कहाँ से,
कैसे और किस रास्ते से !!!
-अजय मलिक