Jul 15, 2010

शर्मा जी उवाच: इनसे बहुत कुछ सीखा है....

शर्मा जी और गुप्ता जी की दोस्ती जगजाहिर सी लगती थी। शर्मा जी गुप्ता जी से अनुभव एवं उम्र दोनों में बड़े थे किंतु गुप्ता जी से वर्तमान नौकरी में छ: माह बाद आए थे। जब शर्मा जी आए तब गुप्ता जी गोवा में ज्ञान बांटने का काम करते थे । गुप्ता जी से वहां जाकर शर्माजी ने ज्ञान का भंडार संभाल लिया और थोड़ा-थोड़ा कर वितरित करने लगे। कुछ दिन गुप्ता जी ज्ञान बांटने से मुक्ति पाकर मोक्ष प्राप्ति के चक्कर में गोवा में रूक गए। दोनों रोटियाँ बनाने का अभ्यास करते और गोवा के अंदाज़ में भोजन पूर्व सम्पूर्ण सामग्री के आचमनोपरांत भक्षण कर निश्चिंत निन्द्रालीन हो जाते। शर्माजी के अनुभव से गुप्ता जी भी अनुभवी होने का अनुभव करने लगे। गुप्ता जी गोवा में ज्ञान बांटते समय जो नहीं जानते थे उसके अभ्यस्त हो कर गोवा से चले गए।
शर्मा जी ने अपना अनुभव गुप्ता जी के मत्थे मढ़ दिया और धीरे-धीरे पान-बीडी-सिगरेट-तम्बाकू और शराब सबसे तौबा कर ली। शर्मा जी दृढ संकल्प वाले और लंगोट के पक्के आदमी थे। वे अपने अनुभव और व्यावहारिकता की बदौलत गोवा में छा गए। गुप्ता जी को जब शर्मा जी की वाहवाही सुनने को मिलती तो वे तिलमिलाकर रह जाते।
दिन गुजरते गए। गुप्ता जी व्यवसाय की नब्ज़ टटोलते-टटोलते एक दिन फ़ूड इंस्पेक्टर बन गए। एक दिन वे मुंबई के एक बड़े होटल में पहुंचे और मैनेजर से बताया कि पाकशाला का इंस्पेक्शन करने आए हैं। मैनेजर ने अपने असिस्टेंट से कहा - " साहब को पहले कॉफ़ी शॉप ले जाकर कुछ नाश्ता-पानी कराओ , उसके बाद जो भी साहब कहें वह करें। "
गुप्ता जी कॉफ़ी शॉप पहुंचे तो असिस्टेंट मैनेजर ने उन्हें मीनू कार्ड थमा दिया और बड़ी मिन्नत से पूछा कि साब को क्या पेश किया जाए। गुप्ता जी बहुत देर तक मीनू कार्ड को उलट-पलट कर देखते रहे। फिर एक जगह उनकी अंगुली थम गई । उन दिनों पांच सितारा होटलों में भी चाय- कॉफ़ी बमुश्किल दो-तीन रूपए की हुआ करती थी। मीनू कार्ड में सबसे महँगी चीज़ दस रूपए की थी जहाँ गुप्ता जी की अंगुली ठहरी थी। असिस्टेंट मैनेजर ने लाख समझाया कि साब यह तो बिलकुल पानी की तरह होता है, आप कुछ और ले लीजिए। मगर गुप्ता जी अड़ गए-" आप ये ही लाइए, हमें ये ही चलता है।" बेचारा असिस्टेंट मैनेज़र, एक बार फिर गुजारिश की मगर गुप्ता जी टस से मस नहीं हुए। मरता क्या न करता ! उसने वेटर को एक गिलास मिनरल वाटर लाने का आर्डर दे दिया। उन दिनों मिनरल वाटर की शरूआत का दौर था। पानी आ गया और गुप्ता जी ने जैसे ही पहली चुस्की ली माजरा समझ गए मगर अपनी मूर्खता जाहिर करने का समय नहीं था। फिर भी प्रभु इच्छा को कौन टाल सकता है, गुप्ता जी का चुस्की ले लेकर मिनरल वाटर पीने का अंदाज़ सब कुछ साफ़- साफ़ बतला रहा था। कॉफ़ी शॉप में बैठे सभी लोग मुस्करा रहे थे।
समय बीतता गया । दो दशक बाद गुप्ता जी की मुलाक़ात शर्मा जी से हैदराबाद में हुई। अब गुप्ता जी बहुत बड़े अफसर बन गए थे। होटल वाले उनके चारों ओर चक्कर लगाया करते। गुप्ता जी मिनरल वाटर का इस्तेमाल अलग ही तरीके से करते । उनके लिए नहाने के लिए मिनरल वाटर की बोतले टब में भरी जातीं। वे अब बड़े आकार के तोहफे नहीं कबूलते थे। उन्हें छोटे आकार की बेशकीमती वस्तुएं तोहफे में दी जातीं। वे खुश होते मगर ख़ुशी का इज़हार करने से बचते। उनके नहाने के लिए यदि मिनरल वाटर की ज़रा सी भी कमी होती तो उस होटल के बंद होने की नौबत आ जाती।
गुप्ता जी ने हैदराबाद प्रवास के दौरान शर्मा जी को अपने होटल के सूट में बुलवा भेजा। वहां कुछ बड़े लोगों के बीच शर्मा जी का हाल चाल पूछा गया। फिर जब खाने-पीने का दौर चला तो गुप्ता जी झूमते हुए शर्मा जी से बोले- "देखिए जी, ऐसा है शर्मा जी, हम आपको आज भी नहीं भूले। गोवा में तो आप हमारे जूनियर हुआ करते थे, याद है ना। "
शर्मा जी मुस्करा कर बोले-" गोवा में तो गुप्ता जी आपसे मैंने बहुत कुछ सीखा था।"
गुप्ता जी प्रसंशा सुनकर कुछ और झूमने लगे मगर बड़प्पन दिखाते हुए कुछ और प्रसंशा की आशा में बोले-" अरे नहीं, आप तो...मैं तो ...बस "
शर्मा जी ने कहा-" नहीं गुप्ता जी, मैंने जो कुछ भी आपसे सीखा था वह मैं बिलकुल भी नहीं भूला हूँ और कभी भूल सकता भी नहीं। याद है, आप ही ने तो मुझे काकटेल पीना सिखाया था, सिगरेट पीना...हेरा-फेरी करना सिखाया... मैं कभी झूठ नहीं बोलता था मगर वह भी मुझे आपसे ही सीखने को मिला। मैं सरकारी अफसरी को जनता की सच्ची सेवा समझता था मगर आपने मुझे सिखाया कि जनता सरकार के लिए होती है। आप सरकारी हैं इसलिए जनता का यह दायित्व बनता है कि वह आपकी सेवा करे।"
तब तक गुप्ता जी प्रसंशा सुनके की हालत में नहीं बचे थे। वे मद मग्न हो चुके थे। महफ़िल के नुमाइंदों ने गुप्ता जी को बिस्तर पर लिटाया और निश्चिंत होकर शर्मा जी को प्रणाम कर विदा हो गए।

Jul 11, 2010

वे सही समझते है कि हम नासमझ कुछ नहीं समझते

उनकी गुर्राहट अक्सर उनकी मासूम मुस्कराहट में छुपी होती है। वे रोज बड़ी सहजता से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कभी किसी बात के लिए न नहीं कहा। आप उनसे यदि आसमान के तारे तोड़ लाने के लिए कहें तब भी उनका जवाब यही होगा- "हाँ, बिल्कुल।" उन्हें न इसके लिए नासा द्वारा तैयार किसी अन्तरिक्ष यान की आवश्यकता है, न ही किसी लांचिग पैड की। आप उनसे कहिए कि कल तो दुनिया का आखरी दिन होगा। वे बेखोफ़ कहेंगे-
"हाँ, बिल्कुल।"
किसी ने उनसे अनुरोध करते हुए कहा-
"जनाब, एक दिन के लिए किसी गेस्ट हाउस में ठहरने का इंतजाम करा देंगे ?"
उन्होंने तपाक से जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
एक हफ्ते बाद उनसे पूछा गया-
"जनाब, क्या गेस्ट हाउस का कुछ हुआ?"
उन्होंने जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
फिर एक हफ्ते बाद उनसे पूछा गया-
"जनाब, गेस्ट हाउस का ज़रा नाम बता देते तो अच्छा था!"
उन्होंने फिर जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
अच्छा बताइए तो क्या नाम बताया?
उन्होंने जो नहीं बताया था तब तक सोचकर बता दिया।
पूछने वाले ने जब अपने आगमन पर गेस्ट हाउस जाने का रास्ता पूछा तो वह भी उन्होंने निसंकोच बता दिया।
रात के ग्यारह बजे जब आने वाला निश्चिंतता के साथ बताए हुए पते पर पहुंचा तो वहां गेस्ट हाउस नाम का शराब का एक ठेका मिला।
उसके बाद जब उनसे फोन पर पूछा गया कि जनाब यह तो गेस्ट हाउस नहीं बल्कि इस नाम का शराब का ठेका है।
तो उन्होंने फिर उसी मासूमियत से जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
- और उसके बाद फोन स्विच ऑफ कर दिया।

हिंदी में श्री गुरुग्रंथ साहिब: gurbanifiles.org के सौजन्य से

आज हम हिंदी में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सम्पूर्ण पाठ डाउन लोड करने के लिए लिंक दे रहे हैं -

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आपकी प्रतिक्रया की प्रतीक्षा रहेगी .

Jul 9, 2010

बाड़ क़ी भूख से कब तक बचोगे भगवन !!

"बाड़ खेत को खा गई" यह बहुत ही पुरानी, हर मौसम में मौजू और बेहद प्रचलित कहावत है। पहले वह सोचता था कि जो बाड़ खेत की चारदीवारी की तरह होती है वह खेत को कैसे खा सकती है भला? बड़े-बूढ़े समझाते थे- "बेटा जब तुम्हारे देखते-देखते यह सब होगा तब मान जाओगे। अभी बचपना है इसलिए बचकानी बाते करते हो, न जाने कितने खेत बाड़ के पेट में समा गए और ज़माना भौचक देखता रह गया।"

अब सब ओर वह यही देखता है कि खेत रो रहा है अपनी बेचारगी पर और बाड़ अट्टहास कर रही है अपनी दीवानगी पर। खेत को जैसे बाड़ ने अपने खूंखार जबड़ों में जकड़ा हुआ है... बड़े-बड़े नुकीले दांत खेत के सीने को छलनी करते जा रहे हैं मांस के लोथड़े चारों और बिखरे पड़े हैं... लहूलुहान है खेत का जर्रा-जर्रा... मगर यह सब देखकर भी जाने क्यों डरा हुआ सहमा-सहमा सा खामोश है विधाता ? क्या यही विधि का विधान है? क्या बाड़ और ब्लैक होल में कोई समानता है?

रेलगाड़ी का एक ऐसा इंजिन जिसके पहियों में जंग लगा हो, एक्सल टूटा हो, ब्रेक जाम हों, हर नट-बोल्ट से तेल रिस रहा हो, हर कल-पुर्जे से कान फोडू शोर निकलता हो, ऐसा इंजिन … अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नवनिर्मित डिब्बों को कैसे किसी पड़ाव तक पहुंचा सकता है? कैसे उन डिब्बों की अत्याधुनिक सभी सुख सुविधाओं से लबालब शायिकाओं को कोई सवारी मिल सकती है ?

सवारी को अपनी मंजिल तक पहुंचना है, लचर इंजिन के कोचों में सुनसान-बियाबान जंगलों में पड़े रहना कोई यात्री क्यों पसंद करेगा? फिर भी इंजिन को इस बात का गर्व है कि वह किसी भी अत्याधुनिक तकनीकी से निर्मित डिब्बे को कहीं भी, किसी भी जगह जाम कर देने, रोक देने, नाकारा और अनुपयोगी साबित करने में न सिर्फ सक्षम है बल्कि माहिर भी है।

बाड़ के खाने के लिए जब कोई खेत नहीं बचेगा तब क्या होगा? क्या बाड़ का अस्तित्व खेतों के बिना बचा रह सकेगा? वह भगवान् को पुकारना चाहता है मगर भगवान् भी बाड़ से भयभीत भागते नज़र आते हैं... मगर कब तक और कहाँ तक भागेंगे भगवान् ... एक दिन तो भगवान् को भी बाड़ क़ी चपेट में आकर लहुलुहान हो जाना ही पड़ेगा क्योंकि बाड़ क़ी भूख कभी मिटने वाली नहीं है।
- अजय मलिक
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Jul 7, 2010

भारत का इतिहास: शिशिर थडानी के ब्लॉग से साभार

नीचे दिए गए ऐतिहासिक लेखों के लिंक्स इतिहास के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के साथ-साथ आम हिंदी पाठकों के लिए भी उपयोगी एवं रोचक हो सकते हैं। एक बार मुफ्त में आजमाने में आपका क्या जाता है?
ये लिंक्स शिशिर थडानी के ब्लॉग http://india_resource.tripod.com/Hindi-Essays.html से लिए गए हैं।

· आर्य आक्रमणः सिद्धांत, विपरीत सिद्धांत और ऐतिहासिक...
·
उपनिषादिक तत्व मीमांसा से वैज्ञानिक यथार्थवादः दार...
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भारत में सामाजिक संबंधों का इतिहास
·
भारत में गणित का इतिहास
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भारत में भौतिक विज्ञानों का इतिहास
·
भारतीय कला और वास्तुशिल्प में प्रगति
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भारत में तकनीकी खोजें और उनके उपयोग
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भारत में हस्तकौशल और व्यापार के ऐतिहासिक स्वरूप
·
भारतीय लोक चित्रकला
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बौद्ध नीतिशास्त्र और सामाजिक समीक्षा
·
हिंदू और जैन परंपराओं के साथ प्रादेशिक सल्तनतों का...
·
प्राचीन भारत में दार्शनिक विचार और वैज्ञानिक तौर त...
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उड़ीसा का इतिहासः एक परिचय
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सिंध की अरब विजय एवं इस्लामीकरण
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पंजाब और गजनी एवं गौर आक्रमण
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मुगलों का उत्थान और पतन
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इस्लाम और उपमहाद्वीपः उसके संघात का मूल्यांकन
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सूफी धारायें और इस्लामी राजदरबारों में सभ्यता
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भारतीय चित्राकला ( 16वीं से 19वीं सदी तक )
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व्यापार से उपनिवेशः ईस्ट इंडिया कंपनियों की ऐतिहास...
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भारतीय सामुद्रिक व्यापार पर यूरोपियन प्रभुत्व
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ब्रिटिश शासन में राजभक्ति पर दबाव - भाग एक
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ब्रिटिश शासन में राजभक्ति पर दबाव - भाग दो
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1857 का क्रांतिकारी उभार
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गदर आंदोलन के महत्वपूर्ण दस्तावेज
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भारतीय स्वतंत्राता संग्राम में मूल युगांतरकारी घटन...
·
भारतीय स्वतंत्राता संग्राम के दौरान की क्रान्तिकार...
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भारत में ब्रिटिश शिक्षा
·
ब्रिटिश उपनिवेशिक बपौतीः भ्रान्तियां और जनसामान्य ...
·
भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के लिए आदिवासी योगदान
·
तिलक के इतिहास का मूल्यांकन
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दो राष्ट्र् नीति और विभाजन, ऐतिहासिक नजर
·
जम्मू और कश्मीरः स्व निर्णय, जनमत संग्रह की मांग औ...

Jul 6, 2010

हिंदी प्रवीण ऑनलाइन परीक्षा देते हुए प्रशिक्षार्थी



दिनांक : 7 जुलाई , 2010
राजभाषा विभाग , गृह मंत्रालय , केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित गहन हिंदी लीला प्रवीण की ऑनलाइन परीक्षा में टाइडल पार्क स्थित सी-डेक, चेन्नै के परीक्षा कक्ष में दस परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा के आयोजन में सहयोग हेतु सी-डेक पुणे के एप्लाइड ग्रुप के सदस्य श्री शैलेन्द्र भी उपस्थित थे.
- अजय मलिक
(फोटो (C) अजय मलिक )

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति ( कार्यालय ) चेन्नै द्वारा आई आई टी में आयोजित हिंदी कार्यशाला






हिंदी में अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी : हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में ई-मेल एवं हिंदी ऑनलाइन प्रशिक्षण विषय पर आई आई टी चेन्नै में आयोजित हिंदी कार्यशाला में व्याख्यान एवं विभिन्न हिंदी वेबसाइट्स का प्रदर्शन करते हुए श्रीमती प्रतिभा मलिक

हिंदी प्रवीण ऑनलाइन परीक्षा के लिखित भाग की परीक्षा लिखते परीक्षार्थी



दिनांक : 01-07-2010 फोटो (C) अ० म०

Jul 5, 2010

क्या मदुरै विश्वविद्यालय ने मैट्रिक परीक्षा का आयोजन कभी नहीं किया ?

सूचना अधिकार अधिनियम - 2005 के तहत मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी द्वारा मैट्रिक अथवा सैकंडरी की परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाता। इस मामले में विश्वविद्यालय को दिनांक: 08.04.2010 तथा 16.04.2010 को पत्र लिखे गए थे। दिनांक: 08-04-2010 के उत्तर में विश्वविद्यालय ने अपने letter no. PIO/RTI/Info/10/232, dated 13.04.2010 द्वारा प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए गैरसरकारी व्यक्तियों को रूपए 750 तथा सरकारी कार्यालयों आदि को रूपए 500 फ़ीस जमा कराने के नियम का उल्लेख किया था। किंतु दिनाक : 16-04-2010 के पत्र द्वारा जब विश्वविद्यालय से अनुरोध किया गया कि हमने प्रमाणपत्र सत्यापन का अनुरोध नहीं किया है बल्कि कुछ सूचना मांगी है तो विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उक्त विश्वविद्यालय मैट्रिक अथवा सैकेंडरी की परीक्षाओं का आयोजन नहीं करता। इस संबंध में विश्वविद्यालय से पूछे गए प्रश्न एवं Public Information Officer के दिनांक: 26-05-2010 के पत्र संख्या: PIO/RTI/info/10/232 द्वारा दिए गए उत्तर निम्न प्रकार थे - (रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे )
प्रश्न .1. Kindly provide the name and the date of birth of the candidate (along with his/her father’s name) who appeared in the matriculation examination against Register No. xxxx(??), in March 1978 from Madurai University.
उत्तर: University does not conduct Matriculation Examinations.
(रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे)
प्रश्न .2. Kindly provide the name and the date of birth of the candidate (along with his/her father’s name) who appeared and Passed the XI standard examination with Register No.xxxx (??) in March 1978 from Madurai University.
उत्तर: XI standard examination is also not conducted by University. Hence question not related to Madurai Kamraj University.
(रजिस्टर नंबर बदल दिए गए हैं ताकि किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। )
प्रश्न .3. In which class or division above mentioned candidates passed the said examinations.
उत्तर: Does not arise.
क्या उपर्युक्त से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि
1. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय , Palkalai नगर, मदुरै -625021 के जन सूचना अधिकारी के अनुसार उक्त विश्वविद्यालय द्वारा मैट्रिक अथवा XI परीक्षाओं का आयोजन 1978 में नहीं किया गया ?
2. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय सरकारी संस्थाओं द्वारा किसी डिग्री अथवा प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए रूपए 500 का शुल्क लेता है ?

Jul 4, 2010

32 बिट एवं 64 बिट के लिए IME अलग-अलग हैं

जब आप अपने कंप्यूटर में भारतीय भाषाएँ सक्रिय करने के लिए IME आदि डाउनलोड करें तो पहले इस बात का पता अवश्य लगा लें कि आपके कंप्यूटर का हार्डवेयर एवं ऑपरेटिंग सिस्टम (विंडोज़ आदि ) 32 बिट्स के हैं अथवा 64 बिट्स के। दोनों तरह के कंप्यूटर्स के लिए आई एम ई (IME) अलग-अलग हैं। आमतौर पर हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर्स 32 बिट्स वाले होते हैं। 64 बिट्स वाले कम्प्यूटर्स काफी महंगे तथा स्पीड के मामले में बहुत तेज होते हैं। आई आई टी जैसे तकनीकी संस्थानों में अनुसंधान आदि के लिए 64 बिट्स वाले कम्प्यूटर्स उपयोग में लाए जाते हैं । इससे पहली पोस्ट में आई एम ई डाउनलोड लिंक्स 32 बिट्स वाले कंप्यूटर्स के लिए हैं।
-अजय मलिक

हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में र्इ-मेल और ऑनलाइन हिंदी प्रशिक्षण/ परीक्षा

हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में र्इ-मेल

1. जी मेल (Gmail ) : जी मेल/gmail से किसी भी भारतीय भारतीय भाषा में र्इ मेल लिखी और भेजी जा सकती है। आपको केवल अपनी भाषा का चयन करके रोमन में टाइप करना है। रोमन में tamil टाइप करने पर स्पेस बार दबाते ही आपकी भाषा / लिपि में तमिल बन जाता है।

2. IME – 1 और IME – 2 :- यदि आप htpp://bashaindia.com से IME –1(Download ) और IME –2 (Download ) – डाउनलोड कर इंस्टाल कर लें तो आप किसी भी ब्राउजर में किसी भी mail ( hotmail , yahoo mail etc.) में सीधे हिंदी अथवा अपनी भाषा में मेल तैयार कर भेज सकते हैं। यदि आप तमिल में मेल भेजना चाहते हैं तो तमिल IME-1 एवं IME-2 डाउनलोड कर इंस्टाल कीजिए और शुरु हो जाइए IME – 1 और IME – 2 से आप सीधे MS Office आदि में भी अपनी भाषा / लिपि में टाइप कर सकते हैं। विंडोज़ विस्ता तथा विंडोज़ – 7 में इसका प्रयोग तत्काल किया जा सकता है। किन्तु विंडोज़ 2000 एवं XP में पहले आपको हिंदी / भारतीय भाषाओं एवं उनके कुंजी पटल को सक्रिय ( activate ) करना होता है। उसके बाद सब कुछ सरल है।

3. Indic Transliteration – इसके द्वारा आप इंटरनेट पर सीधे हिंदी अथवा अन्य भारतीय भाषाओं में Text ( पाठ ) तैयार कर MS Office अथवा मेल बाँक्स में कापी / पेस्ट कर सकते हैं।

4. quillpad इसके द्वारा भी Indic transliteration वाली सारी सुविधाओं का लाभ उठाया जा सकता है। इसी के साथ यदि आपने offline ( बिना इंटरनेट के ) अपनी भाषा में Romanized पाठ तैयार किया है तो उसका लिप्यंतरण आपकी लिपि में सेकेंडस में हो जाता है।

5. ऑन लाइन हिंदी प्रशिक्षण – हिंदी के अक्षर ज्ञान से लेकर हिंदी में नोटिंग / ड्राफ्टिंग करना तक ऑन लाइन सीखा जा सकता है। इसकी सुविधा राजभाषा विभाग ने निशुल्क उपलब्ध करार्इ है। आपको पहले अपने कंप्यूटर में हिंदी यूनीकोड की सक्रियता सुनिश्चित करनी है। उसके बाद किसी भी भारतीय भाषा ( तमिल, तेलुगू, मलयालम , कन्नड़ , बांग्ला आदि ) अथवा अंग्रेज़ी के माध्यम से आप हिंदी सीख सकते हैं। उसकी विधि यानी तरीका बेहद आसान है –

आप LILA - Hindi Prabodh, Praveen and Pragya अथवा rajbhasha.nic.in पर लाग ऑन करें और लीला प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ पर क्लिक करें। पाठ्यक्रम और अपना माध्यम चुनकर अपना रजिस्ट्रेशन करें; user name and password की पुष्टि होते ही सीखना शुरू कर दें। ऑनलाइन अध्ययन के साथ-साथ आप प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ की ऑन लाइन परीक्षा भी दे सकते हैं और तत्काल परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इस पूर्णकालिक गहन प्रशिक्षण के दौरान परीक्षा से पहले ऑनलाइन मॉडल परीक्षा ( model exam ) का अभ्यास भी कराया जाता है। केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए यह प्रशिक्षण चेन्नई में ई-3-सी राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नई-600 090 में चलाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के लिए भारत के किसी भी कौने से सरकारी कर्मचारी नामित किए जा सकते हैं।
इस संबंध में और अधिक जानकारी के लिए 09444713211 पर संपर्क किया जा सकता है।
-अजय मलिक

Jul 2, 2010

उनकी याद और मेरी याददाश्त और कुंजम्मा

आज उनका जन्मदिन है और कल उनकी बहुत याद आई। किसी एक पल के लिए नहीं बल्कि पूरे दिन उनकी याद ...यादों की जैसे मूसलाधार बारिश हो रही थी। मैं उनकी यादों में सराबोर थी फिर भी भीगी हुई नहीं लग रही थी। उनकी यादों की नमी बार-बार मेरी आँखों से छलक पड़ना चाहती थी। मैं मंच से अपनी बात कहते हुए हर पल उन्हें अपने पीछे साक्षात उपस्थित पा रही थी। साढ़े दस बरस पहले संसार से विदा ले चुकीं गीता जी मुझे जैसे पल-पल लोरी सुना रही थीं। ऐसा क्यूं होता है कि जो नहीं हैं वे अपने होने के अहसास से जीने की और बढ़ते जाने की प्रेरणा देते हैं और जो हैं उन्हें हम भुलाए रहते हैं ?
गीता जी को हिंदी से लगाव क्यों था ? अपनी गुरु के इस विशेष लगाव के बारे में मैं कभी नहीं जान पाई। हाँ, मुझे हिंदी से लगाव अपनी गुरु के लगाव के कारण ही हुआ। मलयालम भाषी होते हुए भी हिंदी के प्रति इस लगाव ने मुझे कभी न धोखा दिया, न ही कभी सिर झुकाने की नौबत ही आने दी। सच कहूं तो इसी हिंदी के प्रति श्रद्धा के कारण मैंने सिर उठाकर जीना सीखा। खैर, इस सब के दोहराने का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि यह तो अपना-अपना नज़रिया है। परसों कुंजम्मा सेवानिवृत हो गईं। उनका फोन नंबर इंटनेट से तलाशा मगर तब तक रात के साढ़े दस हो गए थे। फोन तो मिला मगर बात न हो सकी। कल सुबह उनसे बात हुई। अच्छा लगा... बहुत अच्छा लगा। गीता जी बारह साल बड़ी थीं उनसे। आज होतीं तो सब कैसे तो बतिया रहे होते। समय असमय ही बीत जाता है। कुंजम्मा भी किसी क्षण मेरी प्रेरणा बनी थीं। वे सिंह थीं तो मैं मलिक बन गई।
यादों के इन झरोखों से क्या कुछ तो छलक गया है। यादों की बौछार से आखों का रूखापन कुछ कम हो गया। कल आई आई टी चेन्नै में इन यादों का साया मेरा रक्षा कवच बन गया और लोगों को लगा कि मैं बोल रही हूँ शायद कोई मेरठ वाली ...या फिर कोई पंजाबिन ... या फिर कोई अलीगढ़- आगरा - मथुरा वाली... देहातिन जाटनी... पर मेरे सिवाय ये कोई नहीं समझ पाया कि मैं स्वर्गीय गीता जी की प्रतिभा और मलिक बोल रही हूँ। है ना कुंजम्मा , क्या आप समझ पायीं इस रहस्य को ?

Jun 26, 2010

प्रवीण नोट्स : विलोम शब्द एवं वाक्यों में प्रयोग

प्रवीण पाठ्यक्रम से संबंधित ऐसे शब्द जिनके विलोम शब्द परीक्षा में पूछे जा सकते है,यहाँ दिए गए हैं साथ ही विलोम शब्दों का वाक्यों में प्रयोग भी बताया गया है.ये नोट्स भी हमारी सहयोगी प्राध्यापक श्रीमती वी रजनी ने तैयार किए हैं।
- संपादक


1 प्राचीन - नवीन / नया  - यह पाठ्यक्रम नवीन है।

2 विजय - पराजय - रावण  की  पराजय हुई।

3 युद्ध - शांति - आजकल विश्व में शांति है।

4 सुर्योदय -सूर्यास्त - मुझे सूर्यास्त देखना पसंद है।

5 तपन - ठंडक - आजकल ठंडक ज्यादा है।

प्रवीण नोट्स : पर्यायवाची शब्द एवं वाक्यों में प्रयोग

ये नोट्स  हमारी सहयोगी प्राध्यापक श्रीमती वी०रजनी ने तैयार किए हैं. 
-संपादक
1 परिवेश = वातावरण/ माहौल - यहाँ का  वातावरण साफ नहीं है।

2 रोमांचक = आह्लादकारी - यह फिल्म आह्लादकारी है।

3 पर्यटक = यात्री - भारत में कई विदेशी यात्री आते हैं।

4 नौकायन = नौकाविहार - हमने झील में नौकाविहार किया।

5 समीप = नजदीक - मेरा घर बहुत नजदीक है।

प्रवीण नोट्स : पदबंध एवं उनका वाक्योँ में प्रयोग

ये नोट्स हमारी सहयोगी प्राध्यापक श्रीमती वी०रजनी ने हिंदी के तमिल भाषी प्रशिक्षार्थियों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए है।
-संपादक


दंग रह जाना - विदेशी पर्यटक हमारी संस्कृति देखकर दंग रह जाते हैं।

खुशी से फूल उठना - कक्षा में प्रथम आने पर सीता खुशी से फूल उठी।

खुशी से फूला न समाना -कक्षा में प्रथम आने पर रमेश खुशी से फूला न समाया ।

आंखों में खटकना - राम की प्रगति उसके दोस्त की आंखों में खटकती है।

रुपए उड़ाना  - बेटी की शादी में राम ने रुपए उड़ाए ।

Jun 22, 2010

पुनश्चर्या पाठ्यक्रम से तरोताज़ा हिंदी प्राध्यापकों के अते-पते

1. रमेश चन्द्र मिश्र , हिंदी शिक्षण योजना, पारादीप पोर्ट ट्रस्ट, पारादीप, मोबाइल- 09938837379

2. रमेश मोहन झा , हिंदी शिक्षण योजना, निजाम पैलेस, कोलकाता, मोबाइल -09433204657
3 डॉ0 जे0 पी0 सिंह, हिंदी शिक्षण योजना , निजाम पैलेस, कोलकाता, मोबाइल-09231828466

4. इंदु पाण्डेय , हिंदी शिक्षण योजना, निजाम पैलेस, कोलकाता, मोबाइल- 09836692833

5. गार्गी गाडगिल, हिंदी शिक्षण योजना, केंद्रीय सदन, बेलापुर, नवी मुंबई, मो- 09969250917

6. ज्ञानचन्द्र प्रसाद, हिंदी शिक्षण योजना, पुणे, मोबाइल- 09420858649

7. सोमपाल सिंह , हिंदी शिक्षण योजना, नागपुर, मोबाइल- 09860726663

8. एम० हरि गणेश, हिंदी शिक्षण योजना, कोयम्बत्तूर , मोबाइल-09443420202

9. अनीता हरि गणेश , हिंदी शिक्षण योजना, कोयम्बत्तूर , मोबाइल-09443420202

10. कृष्णा देवी , हिंदी शिक्षण योजना, नई दिल्ली, मोबाइल- 09871608537

11. ई० राधाकृष्णन, हिंदी शिक्षण योजना, अरुवंकाडू, ऊटी , मो- 00000

12. वी0 चित्रा , हिंदी शिक्षण योजना, राजाजी भवन, बेसंट नगर, चेन्नै, मो- 09444743065

13. एस० सुब्बलक्ष्मी, -वही -, मोबाइल -09444158497

14. प्रतिभा मलिक, - वही -, मोबाइल -09444450985, e mail-
hindi4u@yahoo.in
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साल का सबसे लंबा दिन, दिल के साथ दिल्लगी के कारण अस्पताल में -1

सभी दोस्तों ने दिल से कहा कि दिल के के मामलों में दिल्लगी ठीक नहीं। बात तो सोलह आने सच्ची, खरी और आजमाई हुई थी मगर हमारा मानना था किएक दिल ही तो है जिसके साथ दिल्लगी की जा सकती है। अब अगर दिल के साथ दिल्लगी ठीक नहीं और, और किसी के साथ दिल्लगी संभव नहीं है तो फिर दिल्लगी किस काम की, इसका करें भी तो क्या ?

Jun 15, 2010

वैशाली का एक दिन : फोटो (c) अजय मलिक


पोर्टब्लेयर में वृक्षारोपण करते तत्कालीन निदेशक (कार्यान्वयन) श्री शर्मा

आई आई टी, मद्रास के लीला हिंदी पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षार्थियों के साथ प्राध्यापक


(c) सर्वाधिकार सुरक्षित है - संपादक

रोज़ द्वीप : अंडमान की कुछ तस्वीरें



फोटो (c) अजय मलिक



भूतनाथ का भूत

अगर मुझे सही से याद है तो देवकी नंदन खत्री जी के विश्व प्रसिद्द उपन्यास चन्द्रकान्ता संतति में भूतनाथ नाम का पात्र सम्पूर्ण उपन्यास में हर जगह नज़र आता है और अंत तक वह संसार के सबसे दुष्ट खलनायक की तरह पाठक की नफ़रत का पात्र बना रहता है। अंत में जब भेद खुलता है तो पता चलता है कि वह तो हर कदम पर सबकी मदद करने की कोशिश करता था मगर उसकी नियति ही कुछ ऐसी थी कि बेदाग़ चरित्र होते हुए भी परिस्थितियां उसी को हर कदम पर संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर देती थीं। अंत में वह पाठक की सहानुभूति तो पाता है मगर ऐसी सहानुभूति का क्या किया जाए जो किसी भले आदमी का जीना मुहाल करने के बाद मिले। यह कहानी सिर्फ काल्पनिक भूतनाथ की ही नहीं है आपको ऐसे अनेक लोग मिल जाएंगे जो नेकी कर और कुँए में डाल के चक्कर में खुद गटर में गिरकर बरबाद हो जाते हैं। वे जितना सच के करीब होते हैं उतने ही झूठ से सराबोर साबित कर दिए जाते हैं। जब तक उनकी सही पहचान लोगों की समझ में आती है तब तक न वे बचते हैं न ही गटर में और जगह बचती है। कुछ लोग जो किसी खुली किताब की तरह होते हैं उन्हें लोग बेहद संदेह की दृष्टि से देखते हैं। जो गुरु घंटाल होते हैं, वे विश्वसनीय माने जाते हैं, जब तक कि चिड़िया खेत पूरी तरह न चुग जाए तब तक उनकी तूती बोलती है और उसके बाद जब खेत खुद ही खाली हो गया तो वह किसी का करेगा भी तो क्या?
दुनिया चलती ही शायद इसी तरह है या फिर प्रकृति ही लोगों को किसी न किसी बहाने चलाती-घुमाती रहती है। कोई भूखा मरता है तो कोई अपच के कारण भूखा रहता है। कोई ज्यादा खाने से बीमार है तो कोई खाने के बहाने से परेशान है, कोई खाने वाले के खाने से अपना हाजमा बिगाड़े बैठा है तो कोई इसी से आहत है कि कोई उसके खाने पर नज़रे जमाए है। हर एक का अपना तर्क है और हर एक की अपनी नज़र में वह तर्क ही सबसे बड़ा सत्य है। सार्वभौमिक सत्य तो शायद यही है कि सत्य से भागते रहिए जब तक बन पड़े... जैसे बन पड़े... सत्य को देखने मत दीजिए और भूतनाथ भगवान शिव को भी कहा जाता है इसे लोगों को जानने -समझने से वंचित रखने के लिए जैसे भी बन पड़े भूतनाथ को सदैव भूत बनाए रखिए। भूत के भय से वर्तमान को भयानक... और भयानक यानी भयानकतर बनाकर अपनी पवित्रता का परचम फहराते रहिए।
-अजय

Jun 13, 2010

ये है गुरु यानी गुरुप्रसाद


फोटो: अजय मलिक

Jun 11, 2010

सी-डेक पुणे में ऑनलाइन परीक्षा का प्रशिक्षण ले रहे नोडल अधिकारी

फोटो (c) अजय मलिक

राजभाषा विभाग ने परीक्षाएं ऑनलाइन कर इतिहास रचा


राजभाषा विभाग ने हिंदी भाषा की लीला प्रबोध, प्रवीण एवं प्राज्ञ की परीक्षाएं ऑनलाइन करने का निर्णय लेते हुए 8 जून 2010 को देश के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, बंगलोर तथा चेन्नै में लीला हिंदी प्रबोध की ऑनलाइन परीक्षा सफलता पूर्वक आयोजित कर एक नया इतिहास रच दिया। उल्लेखनीय है कि इन परीक्षाओं के दौरान किसी भी तरह की नेटवर्क अथवा सर्वर आदि के फेल होने जैसी कोई घटना नहीं घटी। निर्बाध रूप से आयोजित इन परीक्षाओं का परीक्षाफल भी 9 जून 2010 को घोषित कर दिया गया। इन परीक्षाओं के लिए सॉफ्टवेयर आदि का विकास सी-डेक पुणे द्वारा किया गया।

Jun 8, 2010

सूर्यास्त एक ऐसा भी ... निर्माता-निर्देशक : अजय मलिक

(c) अजय मलिक

कवरत्ती द्वीप में सूर्यास्त के नज़ारे ...

कवरत्ती द्वीप :: निर्माता निर्देशक - अजय मलिक

(c) अजय मलिक

यह फ़िल्म जिस मित्र के माध्यम से फिल्माई गई थी वह अब इस दुनिया में नहीं है। उसी को श्रद्धांजलि है यह वीडियो ।

समुद्र जल से पेय जल बनाने की परियोजना - कवरत्ती

निर्माता-निर्देशक : अजय मलिक

(c) अजय मलिक

Jun 7, 2010

कवरत्ती का सूर्योदय : निर्माता निर्देशक - अजय मलिक

Jun 6, 2010

कोचिन राजभाषा सम्मेलन: एक फोटो फ़िल्म (c) अजय मलिक

May 25, 2010

हिंदी माध्यम के प्रतियोगियों के लिए 'विजय मित्र' से बढ़कर कौन !

मिथिलेश वामनकर जी का ब्लॉग विजय मित्र एक अव्यवसायिक वेबपत्र है जिसका उद्देश्य सिविल सेवा तथा राज्य लोकसेवा की परीक्षाओं मे हिन्दी साहित्य का विकल्प लेने वाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है।
श्री मिथिलेश वामनकर अपने ब्लॉग के बारे में लिखते हैं - "यह वेब पत्र सिविल सेवा परीक्षा मे हिन्दी साहित्य विषय लेने वाले परीक्षार्थियो की सहायता का एक प्रयास है। इस वेब पत्र का उद्देश्य किसी भी प्रकार का व्यवसायिक लाभ कमाना नही है। इसमे विभिन्न लेखो का संकलन किया गया है।"
इस ब्लॉग में हिन्दी साहित्य पर अत्यंत उपयोगी निबंध हैं जो न सिर्फ सिविल सेवा की परीक्षा के लिए उपयोगी हैं बल्कि हिन्दी साहित्य के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं। इतिहास, दर्शन, लोकप्रशासन, सामान्य ज्ञान, समसामयिकी आदि पर भी हिन्दी भाषा में बहुत कुछ है जिसकी तलाश अक्सर हिन्दी माध्यम के छात्रों को होती है। इस ब्लॉग से कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं-
यदि आपको विजय मित्र की मित्रता सहायक प्रतीत हो तो संपादक श्री मिथिलेश वामनकर जी को mitwa1980@gmail.com पर धन्यवाद एवं कृतज्ञता अवश्य ज्ञापित करें।

May 17, 2010

अज्ञेय जी के जन्मशती वर्ष पर यू ट्यूब पर कुछ अद्भुत वीडियोज

मेरे लिए यह कुछ अधिक ही प्रीतिकर है । अज्ञेय जी के जन्म दिन 07 मार्च का अपना ही आकर्षण है। अक्सर मुझे स्मरण नहीं रहता और यह दिन चुपके से निकल जाता है। उनकी पुण्य तिथि 04 अप्रेल का दिन भी अजीब सी बैचैनी में गुजर जाता है।
सृजन गाथा पर आज यू ट्यूब के कुछ वीडियोज़ अज्ञेय जी के बारे में देखने को मिले। फिर यू ट्यूब पर खोजा तो अज्ञेय जी के काफी सारे वीडियोज़ मिल गए । मैं इन वीडियोज़ का लिंक देने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ । आप भी इन्हें अनदेखा नहीं कर पाएंगे। अज्ञेय जी के स्वर में असाध्य वीणा का पाठ आदि- इत्यादि ... ज़रा सुन देखकर कुछ बताइए तो सही ...
mehta1947

प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक

जगदीप सिंह दांगी का दावा है कि प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक द्वारा कंप्यूटर पर किसी भी प्रकार के देवनागरी ट्रू टाइप एवम् टाइप-१ अस्की/इस्की (8 बिट कोड फ़ॉन्ट॥) फ़ॉन्ट्स आधारित पाठ को यूनिकोड (16 बिट कोड फ़ॉन्ट) फ़ॉन्ट आधारित पाठ में शत-प्रतिशत शुद्धता के साथ तत्काल परिवर्तित किया जा सकता है।
यह फॉण्ट परिवर्तक निशुल्क नहीं है फिर भी परिक्षण के तौर पर दांगी द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर्स को आजमाने में बुराई ही क्या है? लिंक नीचे दिया जा रहा है -
http://www.srijangatha.com/takneek_6May2k10

May 16, 2010

पहाड़ और बहाव

-अजय मलिक की एक नई कविता

वह पहाड़ भी टूटा
गिरा और बह गया।
प्रवाह में पला
नया रूप
नए रंग-ढंग
और अंतत:
रेत हो गई काया।

रोके न रुका
बहाव, फिर भी।

May 14, 2010

सूरज तक फैले तार


फोटो : ऋचा (c)

त्रिवेंद्रम राजभाषा सम्मेलन 2005:: एक फोटो फ़िल्म -अजय मलिक

May 9, 2010

माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने सराहा है.....



माननीय उपाध्यक्ष के आशीर्वचनों के लिए हिंदी सबके लिए टीम हृदय से आभारी है।

May 2, 2010

दुःख सबको माँजता है ...

मुझे यह स्वीकारने में कोई संकोच नहीं कि अज्ञेय जी के हिंदी साहित्य से मैं सर्वाधिक प्रभावित रहा हूँ । चाहे उनके उपन्यास -'शेखर एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने-अपने अजनबी' हों या उनका 'अरे यायावर रहेगा याद...या फिर उनका काव्य हर छोटी-बड़ी कविता...सांप...चिड़िया...दूरवासी मीत मेरे... तुझ में सामर्थ्य रहे....पूछ लूँ मैं नाम तेरा...' उनकी कहानियां आदि-इत्यादि...उनकी जीवन शैली, चिंतन, व्यवहार...उनकी हर बात ने मुझे प्रभावित किया ...
इतना सब कुछ होते हुए भी मेरे व्यक्तित्व में उनके जैसा कुछ भी नहीं है। न मुझमें उनके जैसी परिपक्वता है, न जुझारूपन, न कवि मन , न चिंतन में वह गहराई, न लेखन... न कुछ और ...
शायद उनके उपन्यास में उद्धृत ये पंक्तियाँ '... दुःख सबको माँजता है..और जिनको माँजता है उन्हें यह सीख भी देता है कि औरों को मुक्त रखें...' इस बात का का जवाब हो सकती हैं कि क्यों उनसे हर तरह से प्रभावित होने के बावजूद भी कोई उनके विराट व्यक्तित्व का अनुकरण करने से मुक्त रहता है...!!

Apr 30, 2010

किसी भी भारतीय भाषा की लिपि तथा बारहखड़ी तथा संसार की अन्य अनेक लिपियों को सीखने के लिए लिंक

यह लिंक भी हम वरिष्ठ गुरुजनों की माँग पर दोहरा रहे हैं। सबसे पहले देवनागरी के लिए लिंक-

Devanāgarī

और अब omniglot.com की वेबसाईट का ही वह लिंक जिससे ब्राह्मी लिपि सहित संसार की अन्य लिपियों को सम्पूर्ण रूप से सीखा जा सकता है-

syllabic alphabets
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हिंदी तथा मराठी की बारहखड़ी के लिए bookofindia.com के सौजन्य से लिंक नीचे दिया जा रहा है -

Learn Indian Languages, Hindi and Marathi।

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वरिष्ठों की फरमाइश पर एक बार फिर से बेसिक हिंदी लिंक्स

गुरुजनों ने माँग की है कि एक बार ज़रा फिर से बेसिक हिंदी सीखने के लिंक्स को कुछ इस तरह दोहरा दिया जाए कि उन्हें चलती-फिरती सामग्री में ढूँढने में होने वाली परेशानी न उठानी पड़े । उनके आग्रह पर कुछ लिंक्स को यहाँ दोहराया जा रहा है-
लिंक-1

Click for Devanagari script tutor

उपर्युक्त देव नागरी लिपि शिक्षक देवनागरी वर्णमाला को सीखने-सिखाने का बेहतरीन साधन है। इसके माध्यम से हिंदी अक्षर लिखना , उनका सही एवं सहज उच्चारण , संयुक्त व्यंजन, मात्राएँ , सामान्य शब्द आदि सीखने के साथ-साथ अक्षर पहचान परीक्षण के माध्यम से कोई कितना सीख पाया -इसका स्वपरीक्षण भी किया जा सकता है। यह सॉफ्टवेर SOAS यानी School of Oriental and African Studies, University of London द्वारा तैयार किया गया है।

लिंक-2

Devanagari Alphabet

Pronunciation

उपर्युक्त लिंक Devanagari Alphabet के माध्यम से भी हिंदी अक्षर लिखना , उनका सही एवं सहज उच्चारण , संयुक्त व्यंजन, मात्राएँ , सामान्य शब्द आदि का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। Pronunciation के माध्यम से प्रथम २५ देवनागरी व्यंजनों का सही उच्चारण वैज्ञानिक आधार पर सीखा जा सकता है। The Australian National University द्वारा तैयार उपर्युक्त लिंक साइट से हिंदीतर भाषियों के लिए किस प्रकार का पाठ्यक्रम तैयार किया जाए और कैसे अर्जित कौशलों का परीक्षण किया जाए- यह भी सीखा तथा समझा जा सकता है। इस पर उपलब्ध हिंदी पठन अभ्यास का एक नमूना नीचे के लिंक को क्लिक कर देखा जा सकता है -यह सस्वर है-

Reading Practice

इसी साइट पर हिंदी में सब्जी, भिंडी और चटनी बनाने के अभ्यास से यह अहसास किया जा सकता है कि इंटरनेट के जरिए हिंदी भाषा को सीखने की ललक कैसे पैदा की जा सकती है-


Make your own Vegetable Dish, Bhindi & Chutney

इसी साइट से लिए गए दो और उपयोगी लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं -

Language Practice: Boy Jumping in Water (Image and sounds)
Test your knowledge of India's Northern Statesanek

अनेक मनोरंजक परीक्षण भी इस साइट पर हैं नमूने नीचे के लिंकों से देखे जा सकते हैं -

Choose the answer that best describes

Click on the locations in the room

शेष अगले अंक में ....

-अजय मलिक

अरे जनाब, ज़रा अपने नाम का मतलब भी तो जानिए

कहते हैं भला नाम में क्या रखा है? मगर नाम रखने वाले से पूछिए कि कितनी तो माथा-पच्ची की होगी किसी का नाम रखने से पहले। रखने वाले ने तो कुछ सोचकर ही रखा होगा किसी का कोई नाम । वक्त है तो जानिए अपने भारतीय याकि हिंदी नाम का मतलब। नीचे दिए लिंक से अपने नाम का पहला अक्षर क्लिक करे और दूंढ़े कि कहाँ हैं आप ... मेरा मतलब आपका नाम -

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z

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जरूरी नहीं कि सभी नाम इसमें मिल ही जाएं ...
(utopian vision के सौजन्य से )

Apr 27, 2010

फिर वह अकेला आदमी भी मारा गया

-अजय मलिक
(एक लघु कथा)
न जाने क्यों वह सारी दुनिया को साफ़-सुथरा देखना चाहता था। घर, दफ्तर, बाज़ार, गली, नुक्कड़, सड़क-जहां कहीं भी उसे कचरा नज़र आता वह उसे उठा लेता और नगरपालिका की कचरे की पेटी में डाल आता। प्रारंभ में लोग उसपर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे मगर

Apr 24, 2010

हिंदी वर्तनी एवं उच्चारण पर एक अच्छा लेख

पिछले दिनों कुछ प्रश्न किए गए थे, कुछ तीखी बहसबाजी भी की गई थी। सरल भाषा में तकनीकी गूगल समूह पर उपलब्ध यह लेख वर्तनी के मुद्दे पर पढ़ा जाना उपयोगी रहेगा -कृपया नीचे दिए लिंक को क्लिक करें-
हिन्दी वर्तनी विचार.pdf

हिंदी संपादक एवं वर्तनी की जाँच

अब ज़रा हिंदी संपादक एवं वर्तनी की जाँच करने वाले से मिलिए-


हिन्दी संपादक तथा वर्तनी जाँचकर्ता

ashish.net.in

हिंदी में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखने के लिए

क्या हिंदी में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखी जा सकती है? इसका जवाब हिन्दवी से जानिए-
हिन्दवी : Programming System for Indian Languages

उर्दू पोएट्री के लिए सागर

नीचे दिए गए लिंक्स को आप स्वयं ही आजमाइए। लिपि न जानने की परवाह न करें , सब कुछ रोमन लिपि में है-
(urdupoetry.com के सौजन्य से )

उच्च स्तरीय हिंदी भाषा-साहित्य के अध्ययन के लिए

यह लिंक आपको मेल्लोन फाउंडेशन की वेबसाईट से जोड़कर उच्चस्तरीय हिंदी भाषा-साहित्य के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराएगा । एक फॉण्ट "Xdvng" डाउनलोड करना आवश्यक है-

Advanced Level Material from the Mellon Foundation

(मिशिगन विश्वविद्यालय के सौजन्य से )

श्रीमदभगवद्गीता श्लोक दर श्लोक पढ़िए-सुनिए

श्रीमदभगवद्गीता का सस्वर अखंड पाठ सुनने के लिए लिंक नीचे दिया जा रहा है। आपको सिर्फ मूल श्लोक का विकल्प चुनकर आगे बढ़ जाना है। यदि हिंदी अथवा अँग्रेज़ी में अनुवाद चाहिए तो इसके लिए भी विकल्प है -
Continuous Play

(गीता सुपरसाईट के सौजन्य से )

संस्कृत-अँग्रेज़ी शब्दकोश

संस्कृत से अँग्रेज़ी शब्दार्थ जानने के लिए यह एक उपयोगी लिंक है। शब्दार्थ के लिए आपको रोमन में संस्कृत शब्द टाइप करना है -

Sanskrit-English Shabdakosh_03.htm

उर्दू- हिंदी परिवर्तक

यदि आप मेरी तरह उर्दू पढ़ने में असमर्थ हैं तो इसे अवश्य आजमाइए-
Urdu to Devanagari script

(technical-hindi@googlegroups.com के सौजन्य से )

देवनागरी से ब्रेल लिपि में बदलने के लिए लिंक

कभी ब्रेल लिखना-पढ़ना सीखा था. अब सब भूल चुका हूँ . आज सुबह से कुछ तलाश रहा था. जो तलाश रहा था वह तो नहीं मिला लेकिन देवनागरी लिपि से ब्रेल लिपि में बदलने के लिए एक लिंक हाथ लग गया. यह दृष्टि बाधितों की विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है-

Devanagari to Braille Converter

( technical-hindi@googlegroups.com के सौजन्य से )

Apr 22, 2010

कार्यालय पद्धति नियम पुस्तक : डाउनलोड लिंक

कुछ मित्रों ने कार्यालय पद्धति नियम पुस्तक को डाउनलोड करने की इच्छा व्यक्त की है। उनकी सुविधा के लिए नीचे डाउनलोड लिंक दिया जा रहा है -

CENTRAL SECRETARIAT

www.darpg.nic.in के सौजन्य से

प्राज्ञ पाठमाला/कार्यालयीन पद्धति के लिए अँग्रेज़ी संदर्भ-1

कई हिंदी प्राध्यापक मित्रों ने नए प्राज्ञ पाठ्यक्रम के बारे में अपनी जिज्ञासा के साथ-साथ कुछ दुविधाओं का भी जिक्र किया है। उनकी दुविधा को दूर कर पाना तो संभव नहीं है मगर उनकी सुविधा के लिए भारत सरकार की विभिन्न वेबसाइटस के सौजन्य से एक प्रामाणिक पुस्तक केंद्रीय सचिवालय कार्यालय पद्धति नियम पुस्तक (अँग्रेज़ी) के पत्राचार के विभिन्न प्रारूपों तथा पद्धतियों से संबधित अध्याय के अंश यहाँ दिए जा रहे हैं -

Apr 19, 2010

18 साल बाद फोन पर फिर मिले

आज सुबह डॉ0 मुनीश्वर जी से उनका फोन नंबर मिला और तत्काल मैंने उसका सदुपयोग कर डाला। देर तक फोन की घंटी बजती रही और फिर बंद हो गई। आशा के विपरीत लगभग दो घंटे बाद उनका फोन आया । मैंने पूछा - " हालचाल कैसे हैं ?" उन्होंने कहा- "ठीक हूँ। आप कौन बोल रहे हैं ?"

इलीयट्स बीच, बेसंट नगर, चेन्नै :: (c) अजय मलिक

Apr 18, 2010

हरट (रहट) में बैलों को हाँकते जो सुने गए थे नगमे

मुंबई में स्वर्गीय नौशाद अली साहब से वो पहली मुलाक़ात और फिर मुलाकातों का सिलसिला ... आज यूं ही अचानक वो ढ़ेर सारी ऑडियो कैसेट्स सामने आ गईं जिनमें कभी रिकार्ड किए गए इंटरव्यूज़ आज भी कैद हैं । सोचा क्यूँ न इन सबको सी डी में बदल दूँ और एम पी 3 में बदलकर ब्लॉग में अपलोड कर दूँ मगर टेप रिकार्डर नहीं मिला।

Apr 17, 2010

किशोर जी फिर कहिन

कंप्यूटर टाइपिंग का तात्पर्य है कि हम कंप्यूटर पर टाइप मात्र करते हैं जबकि वर्ड प्रोसेसिंग का अर्थ है हमारे द्वारा टाइप मैटेरियल्स को एक आकर्षक दस्तावेज के रूप में तैयार करना।
यांत्रिक टाइपराइटर में

Apr 15, 2010

सभी को विषु की हार्दिक शुभकामनाएं






മലോകര്‍ക്കെല്ലര്‍ക്കും വിഷു ദിനാശംസകള്‍
: : പ്രതിഭ മലിക് : :

Apr 14, 2010

कुछ बताएं तो जानें - 5

कंप्यूटर टाइपिंग तथा वर्ड प्रोसेसिंग में क्या अंतर है ?
यांत्रिक टाइपराइटर से टंकण तथा इलेक्ट्रानिक उपकरण से टंकण में सैद्धांतिक रूप में क्या अंतर है ?
हस्तलिपि तथा मूल प्रति में क्या अंतर है ? क्या हस्तलिपि का हाथ से लिखा होना आवश्यक है?
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के अतिरिक्त अन्य कौन-कौन से अच्छे ऑफिस सूट्स उपलब्ध हैं? इनमें से कौन-कौन से निशुल्क डाउनलोड किए जा सकते हैं?
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Apr 10, 2010

अँग्रेज़ी-हिंदी-अँग्रेज़ी निशुल्क अनुवाद उपकरण

आप को गूगल ट्रांसलेट की जानकारी बहुत पहले दी जा चुकी है। अब ज़रा नीचे दिए निशुल्क अनुवाद उपकरणों के लिंक्स को भी आजमाइए और जरूर बताइए कि सबसे अच्छा कौन है -
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आपको अवश्य ही कुछ नया लगेगा और अब आपकी अनुवाद की समस्या कुछ कम कठिन हो जाएगी। अँग्रेज़ी से अँग्रेज़ी अनुवाद भी नीचे दिए लिंक से परखिए-
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और हाँ अँग्रेज़ी से उर्दू में भी तर्जुमे का मज़ा लीजिए नीचे वाले लिंक से -
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किशोर जी कहिन

"खंडहर - टूटी हुई ईमारत, खंडेर क्या है पता नहीशहर - शहर तो शहर जहाँ आबादी रहती है लेकिन शेर तो एक जानवर है। महल एक आलीशान महल होता है जबकि मेल मिलन होता है। पहल की जाती है लेकिन चाकू पेल दी जाती है। कमीज

Apr 8, 2010

थक गए हैं तो मनपसंद गीत से ताजगी पाइए

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o A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z 0-9

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IN.com के सौजन्य से

कुछ बताएं तो जानें -4

कुछ शब्द हैं जिनके सही उच्चारण आपको बताने हैं -

खंडहर , शहर , महल, पहल , पहन , बहरा , सहज , गहरा , पहरा , लहर, रहना , चहल , जहर ....

क्या इन शब्दों का उच्चारण क्रमश: निम्न प्रकार हो सकता है -

खंडेर, शेर , मेल , पेल , पेन , बेरा , सेज , गेरा , पेरा, लेर , रेना , चेल , जेर ....

यदि 'हाँ' तो क्यों ? यदि 'नहीं' तो क्यों ?

??अजय मलिक ??
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Apr 7, 2010

मुझे बहुत कुछ कहना है...

कुतर्क से आप किसी भी सार्थक बहस का सत्यानाश कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिक अर्थ में कुतर्क एक रक्षा युक्ति से अधिक कुछ नहीं है। इसका अभिप्राय: यह नहीं कि रक्षायुक्ति बुरी चीज़ है। समायोजन के लिए कई बार पलायन और रक्षायुक्तियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम सब इंसान हैं और हम सब की कुछ न कुछ मजबूरियां हैं जो बेवफ़ाई के लिए बाध्य कर देती हैं। ये मजबूरियां चाहे कितनी ही कृत्रिम , काल्पनिक क्यों न हों हमारे स्व (self) को, जिसे आप अहंकार, स्वाभिमान, आत्मबोध आदि कोई भी नाम दे दें, बनाए रखने के लिए यानी इंसान को टूटने से बचाने के लिए बड़ी सहायता करती हैं। बेवफ़ाई भी तो एक तरह से जीने का बहाना ही तो है। परन्तु यदि आपकी बेवफ़ाई किसी और के जीने के रास्ते बंद कर रही है तो उसे आपकी मज़बूरी की बज़ाय आपका शगल कहना अधिक उपयुक्त रहेगा । " अंगूर खट्टे हैं " अपने आप में रक्षा युक्ति का बेहतरीन उदाहरण है और मेरे हिसाब से इसे एक लाजवाब कुतर्क कहना अपराध नहीं है।

Apr 6, 2010

कुछ बताएं तो जानें -3

निम्नलिखित में से कौन-कौन हिंदी के सुप्रसिद्ध लेखक, कवि अथवा साहित्यकार हैं -
(क) माखनलाल चतुर्वेदी
(ख) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ग) शमशेर अहमद खान
(घ) डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ड.) मस्तराम कपूर
(च) शाहरुख खान
उपर्युक्त में से किन्हीं चार साहित्यकारों की दो-दो ऐसी रचनाओं की जानकारी दें जो किसी प्रतिष्ठित हिंदी पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हुई हों .

कुछ बताएं तो जानें -2

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३४३ (२) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है -

(2) खंड (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था :
परन्तु राष्ट्रपति उक्त अवधि के दौरान, आदेश द्वारा, संघ के शासकीय प्रयोजनों में से किसी के लिए अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिंदी भाषा का और भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप के अतिरिक्त देवनागरी रूप का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा।


अथवा

(2) खंड (1) में किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि तक संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था :
परन्तु संविधान लागू होने से 15 वर्ष तक यानी 26 जनवरी, 1965 तक हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेज़ी का प्रयोग भी होता रहेगा ।

कुछ बताएं तो जानें -1 ?

निम्न लिखित प्रश्नों का सही ज़वाब देने वालों के नाम तथा संक्षिप्त परिचय ब्लॉग में प्रकाशित किया जाएगा ।
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1. उत्तम पुरुष तथा प्रथम पुरुष में क्या अंतर है ?

2. क्या यह संभव है कि किसी मसौदे में उत्तम पुरुष का प्रयोग सर्वथा वर्जित हो किंतु प्रथम पुरुष का प्रयोग अप्रत्यक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से किया जाए ?

3. केंद्रीय हिंदी सलाहकार समिति के अध्यक्ष कौन हैं ?

4. भारतीय संविधान में धाराएं हैं याकि अनुच्छेद ?

5. क्या यह संभव है कि कोई मसौदा अन्य पुरुष में तैयार किया जाए तथा 'आपसे अनुरोध है' जैसे वाक्यांशों का प्रयोग किया जाए ?
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अजय मलिक
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