Aug 10, 2010

हिंदी यूनीकोड सक्रियता एवं माइक्रोसॉफ्ट इंडिक इनपुट टूल कैसे स्थापित करें

हिंदी यूनीकोड सक्रियता एवं माइक्रोसॉफ्ट इंडिक इनपुट टूल कैसे स्थापित करें? इस कठिनाई को दूर करने के लिए हम भाषा इंडिया डाट कॉम से सीधे लिंक दे रहे हैं। ये लिंक्स विन्डोज़ एक्स पी, विन्डोज़ विस्ता और विन्डोज़ 7 में कैसे हिंदी यूनीकोड में काम करने के लिए क्या किया जाए, इसकी पूरी जानकारी आप को उपलब्ध कराते हैं। आप पहले माइक्रोसॉफ्ट इंडिक लेंगवेज़ इनपुट टूल डाउनलोड कर लें और फिर नीचे दिए गए लिंक्स से अपने आपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकतानुसार कमांड्स दें-
Instructions for Windows XP
Instructions for Windows Vista
Instructions for Windows 7


bhashaindia.com के सौजन्य से।

माननीय संसदीय राजभाषा समिति की वेबसाइट

माननीय संसदीय राजभाषा समिति की वेबसाइट का लिंक नीचे दिया जा रहा है। इस वेबसाइट पर समिति, समिति की उपसमितियों तथा समिति के माननीय सदस्यों के बारे में विवरण उपलब्ध है। इसी के साथ समिति की निरीक्षण प्रश्नावली, राजभाषा संबंधी विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों, राष्ट्रपति जी के आदेशों, नियमों की भी जानकारी दी गई है।

मुख्य(माननीय संसदीय राजभाषा समिति की वेबसाइट) पृष्ठ


Aug 8, 2010

हिंदी वर्तनी जांचें

इससे पहले भी एक हिंदी वर्तनी जांचने के लिए हमने लिंक दिया था। यहाँ दिया गया एक नया लिंक 27 भाषाओं की वर्तनी जांचने वाला बताया जाता है। यह ऑनलाइन काम करता है। आप भी देखें कि इसमें कितना दम-ख़म है-
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आना फ्री, जाना फ्री, पकड़े गए तो खाना फ्री...

आज सुबह-सुबह दो मित्रों को जन्मदिन की बधाई देने के बाद दो दिन से बंद नेट को नेटगीयर से किसी तरह चालू किया तो जो एक मात्र मेल मिली उसका संदेश यही था कि आना फ्री, जाना फ्री, पकड़े गए तो खाना फ्री। जिस मित्र ने यह मेल भेजी थी उसका आज मौन व्रत है इसलिए उनसे आज बात कर पाना तो संभव नहीं है इसलिए सोचा कि इस मुद्दे पर मन की भड़ास ब्लॉग के जरिए निकाली जाए।

Aug 2, 2010

इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये

मुनव्वर राना की तीन गज़ले कविता कोश के सौजन्य से

एक
जब कभी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है

रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूं
रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है

दिल की गलियों से तेरी याद निकलती ही नहीं
सोहनी फिर इसी पंजाब में आ जाती है

रात भर जागते रहने का सिला है शायद
तेरी तस्वीर-सी महताब[1] में आ जाती है

एक कमरे में बसर करता है सारा कुनबा
सारी दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है

ज़िन्दगी तू भी भिखारिन की रिदा[2] ओढ़े हुए
कूचा - ए - रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है

दुख किसी का हो छलक उठती हैं मेरी आँखें
सारी मिट्टी मिरे तालाब में आ जाती है

शब्दार्थ:

↑ चांद
↑ चादर

दो
नुमाइश के लिए गुलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
लड़ाई की मगर तैयारियाँ दोनों तरफ़ से हैं

मुलाक़ातों पे हँसते, बोलते हैं, मुस्कराते हैं
तबीयत में मगर बेज़ारियाँ दोनों तरफ़ से हैं

खुले रखते हैं दरवाज़े दिलों के रात-दिन दोनों
मगर सरहद पे पहरेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं

उसे हालात ने रोका मुझे मेरे मसायल[1] ने
वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ दोनों तरफ़ से हैं

मेरा दुश्मन मुझे तकता है, मैं दुश्मन को तकता हूँ
कि हायल[2] राह में किलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं

मुझे घर भी बचाना है वतन को भी बचाना है
मिरे कांधे पे ज़िम्मेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं

शब्दार्थ:

↑ समस्याओं
↑ बाधक

तीन
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये

आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं
आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिये

ऐरे गैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों
आपको औरत नहीं अखबार होना चाहिये

जिंदगी कब तलक दर दर फिरायेगी हमें
टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये

अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये

Jul 29, 2010

प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ ऑनलाइन परीक्षाओं की मॉडल परीक्षा

कुछ मित्रों को किसी तकनीकी कारण से केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान की लीला हिंदी प्रबोध, प्रवीण, प्राज्ञ ऑनलाइन परीक्षाओं की मॉक परीक्षा के लोगिन में कठिनाई आ रही है। उनकी सुविधा के लिए राजभाषा विभाग द्वारा अपनी वेबसाइट www.rajbhasha.gov.in सीधा लिंक दिया जाना उपयोगी  रहेगा.

हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के लिए कुछ और भी

समय हो तो यूनीकोड के मामले में इन्हें भी देख सकते हैं-

Indian Languages
Processor
Cafe Hindi Unicode Typing Tool 1
Download

हिंदी यूनीकोड के लिए ज़रा इन्हें भी आजमाइए

कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं। इनकी उपयोगिता के बारे में आप स्वयं इन्हें आजमाकर देखें। इनमें कुछ का दावा है कि विन्डोज़ 98 में भी वे हिंदी यूनीकोड सक्रिय करने में सक्षम हैं। हमारे किसी भी सिस्टम में फिलहाल विन्डोज़ 98 ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है, साथ ही यह मूल्याधारित है यानी निशुल्क नहीं है। इस परिस्थिति में हम यह आप पर छोड़ते हैं कि इनका परिक्षण आप करना चाहते हैं या नहीं।
गोपी का यूनिकोड कन्वर्टर लगभग इंडिक ट्रांसलिटिरेसन की तरह है। एक और विकल्प हो तो क्या बुरा है!


Gopi's Unicode Hindi Converter - Kamaraj 3.0

DevaNagari Unicode Software - Sugam

It facilitates easy entry of Unicode encoded Nagari in Windows 98.

DevaNagari (Hindi)Fonts

Sugam-98

Sugam-2K

DevaNagari Alphabet

Hindi Mail

Jul 26, 2010

बोलचाल की हिंदी क्रेज़ी लस्सी हिंदी lessons के सौजन्य से

कुछ प्रूफ की त्रुटियाँ हमारे ब्लॉग में अक्सर रह जाती हैं। कई बार इन्हें बार-बार सही करना पड़ता है। इन्हें यदि क्षम्य माना जा सके तो नीचे दिए गए CrazyLassi HINDI lessons के पाठों के लिंक्स बोलचाल की हिंदी सीखने में बहुत उपयोगी हो सकते हैं-
some very useful links for spoken hindi lerners are given bellow from CrazyLassi HINDI LESSONS-
ABSTRACT NOUNS
ADJECTIVES
Adverbs
AGE
ANIMALS
BAD WORDS
CLOTHES
COLORS
COLORS
DAYS OF THE WEEK
CrazyLassi HINDI LESSONS एवं www.learnhindifree.blogspot.com के सौजन्य से

एक साल बाद

आज 'हिंदी सबके लिए' को एक साल हो गया। पहली पोस्ट याकि चिट्ठा या लेख पिछले वर्ष आज ही के दिन यानी 26 जुलाई को ही हमने प्रकाशित किया था। इस एक साल में क्या खोया और क्या पाया, इसका हिसाब लगाना तो मुश्किल है। एक ओर माननीय संसदीय राजभाषा समिति की सराहना, पाठकों, मित्रों का स्नेह...
दूसरी ओर तरह-तरह की ढ़ेर सारी बातें, जिनमें ज्यादातर निराशा पैदा करने वाली थीं... बहुत सारी तरेरती आँखें जिनमें एक अजीब सा ईर्ष्या और नफ़रत का मिला-जुला भाव...नकारने की हज़ारों कोशिशों के बीच, बेहद हतोत्साहित करने वाली परिस्थितियों के बीच हम हिंदी के सहारे एक साल तक डटे रहने में तो कामयाब हो गए, आगे ईश्वर इच्छा और उन इंसानों की भी जो ईश्वर से बस थोड़ा सा ही स्वयं को कम मानते हैं और कभी-कभी ईश्वर से बड़े होने की गफलत में भी वे कुछ न कुछ तो अर्थ का अनर्थ अवश्य ही करते हैं।

हमने आपके इस ब्लॉग में तीन विज़ेट लगाए हुए हैं यह जानने के लिए कि क्या कोई इसे देख-पढ़ भी रहा है या फिर हम भी सिर्फ अपने ख्याली पुलावों के सहारे जी रहे हैं। तीनो विज़ेट का औसत निकालने पर पता चला कि पिछले 365 दिनों में विश्व भर से प्रतिदिन औसतन 36 सर्वरों ने हिंदी सबके लिए से संपर्क साधा। इस अवधि में हमने विविध विषयों पर 334 पोस्ट प्रकाशित कीं। लगभग 75 टिप्पणियाँ भी मिलीं। लगभग 2350 लोगों नें प्रोफ़ाइलें देखीं। 31 मित्रों ने हिंदी सबके लिए का अनुसरण किया।

यह कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है मगर लंबे रास्ते पर आगे बढ़ने और बढ़ते जाने के लिए जितनी न्यूनतम ऊर्जा चाहिए वह तो इसमें अवश्य ही मौजूद है। आपके स्नेह, प्रोत्साहन और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करना तो पर्याप्त नहीं है मगर इसके सिवाय कुछ है भी तो नहीं। आशीर्वाद बनाए रखें और हमें साहस दें कि ब्लॉग के साथ हम वेबसाइट भी अच्छे से शुरू कर सकें।
-प्रतिभा मलिक
-अजय मलिक

Jul 24, 2010

इस हवा से क्या कहूँ?

(अजय मलिक की एक नई कविता )
ये हवा ...
मदहोशी से पुर ज़ोर बहती
इस हवा से क्या कहूँ?

भूली दिशा, दर्शन, वतन
परदेश में घर छोड़ आई
सीधी गली के मोड़ पर
सन-सना-सन सनसनाती
समंदर से मुँह मोड़ सूखी
इस हवा से क्या कहूँ?


लोभ से लब तक लबालब
झूठ का परचम उठाए
रात दिन दम ठोकती
और दनदनाती दसोंदिश
बौखलाहट से भरी, रीती
सिकुडती, काँपती थर-थर
थकी-हारी, अवश फुंकारती
इस हवा से क्या कहूँ?


मैं कौन!!

मैं समंदर, आ गले मिल ।
ले नशीले मेघ,

ले जाकर इन्हें,
भर दे धरा की गोद
और फिर झूम,

रूम-झुम नाचती मखमल भरी,
उन क्यारियों में ।
कोयलों की कूक से

भर जाएगा हर छोर।
गति मोड़कर हट छोड़
बन पुरवा सहला पलक के पोर
मैं समंदर, आ गले मिल...

अरे ए हवा .

Jul 21, 2010

हम धान की पौध से गेहूँ उगाएंगे...

(अशिष्ट जी फिर मुखातिब हैं एक तथाकथित नई कविता के साथ )

हम धान की पौध से गेहूँ उगाएंगे
गन्ने के रस से नई रूई बनाएंगे
गुड़ से बनेंगे कपड़े जलेबीदार
जई से बनेगी रबड़ी जायकेदार
चोर होंगे हमारे नए चौकीदार
सब काम हम नए ढंग से कराएंगे
अपने मुताबिक़ नई दुनिया बनाएंगे
भगवान से कहेंगे- रुको भागो नहीं
स्वर्ग में भी जल्द हम झाडू लगाएंगे




Jul 19, 2010

जो खोया जब उसकी भरपाई नहीं तो जो पाया उसकी तुलना क्या होगी

इस ख़ुशी को कैसे अभिव्यक्त करूँ !!
इस ख़ुशी की नींव जिन ग़मों पर रखी गई , उन्हें कैसे भुलाऊं... आज अगर वह होती तो थोड़ी बहुत गालियाँ सुनाकर हँसती...फिर दो-चार ताने देती और फिर हँसती, गर्व से गर्दन तानकर कहती- देख ले भैया, मैंने कर दिखाया यह भी। मैं उसकी गालियाँ सुनकर हँसता और उसे थोड़ा सा और चिढ़ाता ताकि वह कुछ और गालियाँ दे सके और फिर हँसे।
बचपन की यादें... उन यादों में उसकी गालियाँ बहुत भाती थीं। वक़्त अपना काम करता है और उससे बड़ा, उससे शक्तिशाली कोई नहीं। 20 फरवरी, 2003 का वह मनहूस दिन, एक दुर्घटना ने सब कुछ लील लिया। एक हँसता-मुस्कराता परिवार बैसाखियों पर आ गया। घर के मुखिया का एक समूचा पैर ही चला गया। उसके दोनों पैरों की हड्डियां जो टूटीं तो वह चारपाई पर आ गई। उसके स्वाभिमान का मैं सदैव कायल रहा। वह चारपाई से उठी भी मगर बार-बार चारपाई उस तक खिंच आती रही। परिस्थितियों ने ऐसा रंग बदला कि जहाँ इलाज संभव था वहीँ से वक़्त ने उसे वापस जाने पर मजबूर कर दिया और 29 नवम्बर को जन्मीं वह मेरी बहन पिछले वर्ष 11 नवम्बर को दुनियाँ से विदा हो गई। उसकी कराहटें आज भी कानों में गूँजती हैं।
घर के मुखिया की उदासी तक अपाहिज हो गई...और भी बहुत कुछ हुआ जिसे नहीं होना चाहिए था। गलतफहमियों का जंजाल बोलने से बढ़ता है तो चुप रहने से और भी ज्यादा उलझता है।
सुलझाता उसे वक्त ही है अन्यथा सारे प्रयास नाव को भंवर की ओर ही धकेलते हैं।
आज मैं उस मुखिया के चेहरे पर हजारों गुनी चमक देखने को आतुर हूँ। उन दोनों ने जिस धैर्य और संकल्प से शुरुआत की थी आज उसने बहुत सारी घूरती निगाहों को निश्तेज कर दिया है। बहन ने अपना जीवन न्योछावर करके, घर के मुखिया ने सब कुछ सहकर आज जो पाया है उसके लिए शब्द पूरे नहीं पड़ रहे हैं...

Jul 17, 2010

जल्दी ही हिंदी सबके लिए की एक अपनी वेब साइट भी होगी

हिंदी सबके लिए यानी hindiforyou जल्दी ही अपनी वेबसाईट पर भी होगा। आप सबके स्नेह और प्रोत्साहन से प्रेरित होकर हमने डोमेन पंजीकृत करा लिया है, जिसका पता होगा-

hindiforyou.in

बस थोड़ा सा इंतज़ार और...

ज़रा बताएं तो भारत कोश में क्या नहीं है !!

यह अद्भुत है। इसमें वेद हैं, पुराण हैं, उपनिषद् हैं, हिंदी काव्य है, गद्य है, कवि हैं , लेखक हैं , इतिहास है, पयटन है, व्याकरण है, हिंदी है, संस्कृत है ... अब आप ही बताइए कि "भारत कोश" में जो कि विकसित किए जाने की प्रक्रिया में है, हिंदी में ऐसा क्या है जो नहीं है?
भारत कोश से कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं-
(भारत कोश से साभार)

ग़ालिब की शाइरी के लिए

मिर्ज़ा ग़ालिब की की शाइरी के लिए यहाँ कुछ लिंक्स दिए जा रहे हैं। बस संकोच यही है कि इनमें रोमन लिपि का प्रयोग है।
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Jul 16, 2010

यूनीकोड क्या है?

यहाँ हम यूनीकोड से संबंधित वेबसाईट का लिंक दे रहे हैं जिससे आप यूनीकोड के बारे में बहुत कुछ जान-समझ सकते हैं-
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Jul 15, 2010

शर्मा जी उवाच: इनसे बहुत कुछ सीखा है....

शर्मा जी और गुप्ता जी की दोस्ती जगजाहिर सी लगती थी। शर्मा जी गुप्ता जी से अनुभव एवं उम्र दोनों में बड़े थे किंतु गुप्ता जी से वर्तमान नौकरी में छ: माह बाद आए थे। जब शर्मा जी आए तब गुप्ता जी गोवा में ज्ञान बांटने का काम करते थे । गुप्ता जी से वहां जाकर शर्माजी ने ज्ञान का भंडार संभाल लिया और थोड़ा-थोड़ा कर वितरित करने लगे। कुछ दिन गुप्ता जी ज्ञान बांटने से मुक्ति पाकर मोक्ष प्राप्ति के चक्कर में गोवा में रूक गए। दोनों रोटियाँ बनाने का अभ्यास करते और गोवा के अंदाज़ में भोजन पूर्व सम्पूर्ण सामग्री के आचमनोपरांत भक्षण कर निश्चिंत निन्द्रालीन हो जाते। शर्माजी के अनुभव से गुप्ता जी भी अनुभवी होने का अनुभव करने लगे। गुप्ता जी गोवा में ज्ञान बांटते समय जो नहीं जानते थे उसके अभ्यस्त हो कर गोवा से चले गए।
शर्मा जी ने अपना अनुभव गुप्ता जी के मत्थे मढ़ दिया और धीरे-धीरे पान-बीडी-सिगरेट-तम्बाकू और शराब सबसे तौबा कर ली। शर्मा जी दृढ संकल्प वाले और लंगोट के पक्के आदमी थे। वे अपने अनुभव और व्यावहारिकता की बदौलत गोवा में छा गए। गुप्ता जी को जब शर्मा जी की वाहवाही सुनने को मिलती तो वे तिलमिलाकर रह जाते।
दिन गुजरते गए। गुप्ता जी व्यवसाय की नब्ज़ टटोलते-टटोलते एक दिन फ़ूड इंस्पेक्टर बन गए। एक दिन वे मुंबई के एक बड़े होटल में पहुंचे और मैनेजर से बताया कि पाकशाला का इंस्पेक्शन करने आए हैं। मैनेजर ने अपने असिस्टेंट से कहा - " साहब को पहले कॉफ़ी शॉप ले जाकर कुछ नाश्ता-पानी कराओ , उसके बाद जो भी साहब कहें वह करें। "
गुप्ता जी कॉफ़ी शॉप पहुंचे तो असिस्टेंट मैनेजर ने उन्हें मीनू कार्ड थमा दिया और बड़ी मिन्नत से पूछा कि साब को क्या पेश किया जाए। गुप्ता जी बहुत देर तक मीनू कार्ड को उलट-पलट कर देखते रहे। फिर एक जगह उनकी अंगुली थम गई । उन दिनों पांच सितारा होटलों में भी चाय- कॉफ़ी बमुश्किल दो-तीन रूपए की हुआ करती थी। मीनू कार्ड में सबसे महँगी चीज़ दस रूपए की थी जहाँ गुप्ता जी की अंगुली ठहरी थी। असिस्टेंट मैनेजर ने लाख समझाया कि साब यह तो बिलकुल पानी की तरह होता है, आप कुछ और ले लीजिए। मगर गुप्ता जी अड़ गए-" आप ये ही लाइए, हमें ये ही चलता है।" बेचारा असिस्टेंट मैनेज़र, एक बार फिर गुजारिश की मगर गुप्ता जी टस से मस नहीं हुए। मरता क्या न करता ! उसने वेटर को एक गिलास मिनरल वाटर लाने का आर्डर दे दिया। उन दिनों मिनरल वाटर की शरूआत का दौर था। पानी आ गया और गुप्ता जी ने जैसे ही पहली चुस्की ली माजरा समझ गए मगर अपनी मूर्खता जाहिर करने का समय नहीं था। फिर भी प्रभु इच्छा को कौन टाल सकता है, गुप्ता जी का चुस्की ले लेकर मिनरल वाटर पीने का अंदाज़ सब कुछ साफ़- साफ़ बतला रहा था। कॉफ़ी शॉप में बैठे सभी लोग मुस्करा रहे थे।
समय बीतता गया । दो दशक बाद गुप्ता जी की मुलाक़ात शर्मा जी से हैदराबाद में हुई। अब गुप्ता जी बहुत बड़े अफसर बन गए थे। होटल वाले उनके चारों ओर चक्कर लगाया करते। गुप्ता जी मिनरल वाटर का इस्तेमाल अलग ही तरीके से करते । उनके लिए नहाने के लिए मिनरल वाटर की बोतले टब में भरी जातीं। वे अब बड़े आकार के तोहफे नहीं कबूलते थे। उन्हें छोटे आकार की बेशकीमती वस्तुएं तोहफे में दी जातीं। वे खुश होते मगर ख़ुशी का इज़हार करने से बचते। उनके नहाने के लिए यदि मिनरल वाटर की ज़रा सी भी कमी होती तो उस होटल के बंद होने की नौबत आ जाती।
गुप्ता जी ने हैदराबाद प्रवास के दौरान शर्मा जी को अपने होटल के सूट में बुलवा भेजा। वहां कुछ बड़े लोगों के बीच शर्मा जी का हाल चाल पूछा गया। फिर जब खाने-पीने का दौर चला तो गुप्ता जी झूमते हुए शर्मा जी से बोले- "देखिए जी, ऐसा है शर्मा जी, हम आपको आज भी नहीं भूले। गोवा में तो आप हमारे जूनियर हुआ करते थे, याद है ना। "
शर्मा जी मुस्करा कर बोले-" गोवा में तो गुप्ता जी आपसे मैंने बहुत कुछ सीखा था।"
गुप्ता जी प्रसंशा सुनकर कुछ और झूमने लगे मगर बड़प्पन दिखाते हुए कुछ और प्रसंशा की आशा में बोले-" अरे नहीं, आप तो...मैं तो ...बस "
शर्मा जी ने कहा-" नहीं गुप्ता जी, मैंने जो कुछ भी आपसे सीखा था वह मैं बिलकुल भी नहीं भूला हूँ और कभी भूल सकता भी नहीं। याद है, आप ही ने तो मुझे काकटेल पीना सिखाया था, सिगरेट पीना...हेरा-फेरी करना सिखाया... मैं कभी झूठ नहीं बोलता था मगर वह भी मुझे आपसे ही सीखने को मिला। मैं सरकारी अफसरी को जनता की सच्ची सेवा समझता था मगर आपने मुझे सिखाया कि जनता सरकार के लिए होती है। आप सरकारी हैं इसलिए जनता का यह दायित्व बनता है कि वह आपकी सेवा करे।"
तब तक गुप्ता जी प्रसंशा सुनके की हालत में नहीं बचे थे। वे मद मग्न हो चुके थे। महफ़िल के नुमाइंदों ने गुप्ता जी को बिस्तर पर लिटाया और निश्चिंत होकर शर्मा जी को प्रणाम कर विदा हो गए।

Jul 11, 2010

वे सही समझते है कि हम नासमझ कुछ नहीं समझते

उनकी गुर्राहट अक्सर उनकी मासूम मुस्कराहट में छुपी होती है। वे रोज बड़ी सहजता से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कभी किसी बात के लिए न नहीं कहा। आप उनसे यदि आसमान के तारे तोड़ लाने के लिए कहें तब भी उनका जवाब यही होगा- "हाँ, बिल्कुल।" उन्हें न इसके लिए नासा द्वारा तैयार किसी अन्तरिक्ष यान की आवश्यकता है, न ही किसी लांचिग पैड की। आप उनसे कहिए कि कल तो दुनिया का आखरी दिन होगा। वे बेखोफ़ कहेंगे-
"हाँ, बिल्कुल।"
किसी ने उनसे अनुरोध करते हुए कहा-
"जनाब, एक दिन के लिए किसी गेस्ट हाउस में ठहरने का इंतजाम करा देंगे ?"
उन्होंने तपाक से जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
एक हफ्ते बाद उनसे पूछा गया-
"जनाब, क्या गेस्ट हाउस का कुछ हुआ?"
उन्होंने जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
फिर एक हफ्ते बाद उनसे पूछा गया-
"जनाब, गेस्ट हाउस का ज़रा नाम बता देते तो अच्छा था!"
उन्होंने फिर जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
अच्छा बताइए तो क्या नाम बताया?
उन्होंने जो नहीं बताया था तब तक सोचकर बता दिया।
पूछने वाले ने जब अपने आगमन पर गेस्ट हाउस जाने का रास्ता पूछा तो वह भी उन्होंने निसंकोच बता दिया।
रात के ग्यारह बजे जब आने वाला निश्चिंतता के साथ बताए हुए पते पर पहुंचा तो वहां गेस्ट हाउस नाम का शराब का एक ठेका मिला।
उसके बाद जब उनसे फोन पर पूछा गया कि जनाब यह तो गेस्ट हाउस नहीं बल्कि इस नाम का शराब का ठेका है।
तो उन्होंने फिर उसी मासूमियत से जवाब दिया-
"हाँ, बिल्कुल।"
- और उसके बाद फोन स्विच ऑफ कर दिया।

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हिंदी में श्री गुरुग्रंथ साहिब: gurbanifiles.org के सौजन्य से

आज हम हिंदी में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सम्पूर्ण पाठ डाउन लोड करने के लिए लिंक दे रहे हैं -

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आपकी प्रतिक्रया की प्रतीक्षा रहेगी .