Nov 12, 2012

रखना दीप सँभालकर - डॉ कुंवर बेचैन

गुरुवर डॉ कुंवर बेचैन जी  की प्रेमगीत पुस्तक के एक गीत के ज़रिये सभी को दिवाली और दीपावली की ढेर सारी फुलझड़ियों के साथ हार्दिक शुभकामनाएँ। क्षमा याचना के साथ एक फुलझड़ी के रूप में उनके इसी गीत का  बिना  किसी काट-छाट के  अंग्रेज़ी में मशीनी अनुवाद भी दिया जा रहा है-


 चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
 रखना दीप संभालकर
 एक शिकन भी रह न जाये अँधियारे के गाल पर ।

       पहन घाघरा, चूड़ी, बिछिया
       छनका,  घुँघरू   पाँव   के
       ज्योतित कर सारे दीपों को 
       अपने     तन के गाँव के

 चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
 रखना दीप सँभालकर
 जैसे तुम बेंदी रखती हो अपने  गोरे  भाल  पर ।

        करके मांग सिंदूरी अपनी
        दृग में काजल   आँजकर
        अपने तन-मन की मूरत को
        और प्यार से  माँजकर

 चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
 रखना दीप संभालकर
 ज्यों मंहदी के फूल काढ़तीं, तुम मन के रूमाल पर ।

         हँसुली, हार और लटकारा
         बाजूबंद  हमेल   से
         कह देना नथुनी-कुंडल से
         सदा   रहें वे मेल से

 चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
 रखना दीप संभालकर
 ज्यों तुम विमल चाँदनी मलतीं, तन के लाल गुलाल पर।


-डा॰ कुँअर बेचैन 

     (-डा॰ कुँअर बेचैन की "प्रेमगीत" पुस्तक के पृष्ठ 41 से)पहन घाघरा)), चूड़ी, बिछिया
छनका, घुँघरू पाँव के
ज्योतित कर सारे दीपों को
अपने तन के गाँव के
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप सँभालकर
जैसे तुम बेंदी रखती हो अपने गोरे भाल पर ।

करके मांग सिंदूरी अपनी
दृग में काजल आँजकर
अपने तन-मन की मूरत को
और प्यार से माँजकर
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों मंहदी के फूल काढ़तीं, तुम मन के रूमाल पर ।

हँसुली, हार और लटकारा
बाजूबंद हमेल से
कह देना नथुनी-कुंडल से
सदा रहें वे मेल से
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों तुम विमल चाँदनी मलतीं, तन के लाल गुलाल पर।

-
डा॰ कुँअर बेचैन-

-
डा॰ कुँअर बेचैन के प्रेमगीत पुस्तक से, पृष्ठ 41पहन घाघरा, चूड़ी, बिछिया
छनका, घुँघरू पाँव के
ज्योतित कर सारे दीपों को
अपने तन के गाँव के
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप सँभालकर
जैसे तुम बेंदी रखती हो अपने गोरे भाल पर ।

करके मांग सिंदूरी अपनी
दृग में काजल आँजकर
अपने तन-मन की मूरत को
और प्यार से माँजकर
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों मंहदी के फूल काढ़तीं, तुम मन के रूमाल पर ।

हँसुली, हार और लटकारा
बाजूबंद हमेल से
कह देना नथुनी-कुंडल से
सदा रहें वे मेल से
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों तुम विमल चाँदनी मलतीं, तन के लाल गुलाल पर।

-
डा॰ कुँअर बेचैन-

-
डा॰ कुँअर बेचैन के प्रेमगीत पुस्तक से, पृष्ठ 41पहन घाघरा, चूड़ी, बिछिया
छनका, घुँघरू पाँव के
ज्योतित कर सारे दीपों को
अपने तन के गाँव के
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप सँभालकर
जैसे तुम बेंदी रखती हो अपने गोरे भाल पर ।

करके मांग सिंदूरी अपनी
दृग में काजल आँजकर
अपने तन-मन की मूरत को
और प्यार से माँजकर
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों मंहदी के फूल काढ़तीं, तुम मन के रूमाल पर ।

हँसुली, हार और लटकारा
बाजूबंद हमेल से
कह देना नथुनी-कुंडल से
सदा रहें वे मेल से
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों तुम विमल चाँदनी मलतीं, तन के लाल गुलाल पर।

-
डा॰ कुँअर बेचैन-

-
डा॰ कुँअर बेचैन के प्रेमगीत पुस्तक से, पृष्ठ 41
पहन घाघरा, चूड़ी, बिछिया
छनका, घुँघरू पाँव के
ज्योतित कर सारे दीपों को
अपने तन के गाँव के
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप सँभालकर
जैसे तुम बेंदी रखती हो अपने गोरे भाल पर ।

करके मांग सिंदूरी अपनी
दृग में काजल आँजकर
अपने तन-मन की मूरत को
और प्यार से माँजकर
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों मंहदी के फूल काढ़तीं, तुम मन के रूमाल पर ।

हँसुली, हार और लटकारा
बाजूबंद हमेल से
कह देना नथुनी-कुंडल से
सदा रहें वे मेल से
चढ़ो अटारी धीरे-धीरे
रखना दीप संभालकर
ज्यों तुम विमल चाँदनी मलतीं, तन के लाल गुलाल पर।

-
डा॰ कुँअर बेचैन-

-
डा॰ कुँअर बेचैन के प्रेमगीत पुस्तक से, पृष्ठ 41

Keep lamp sanbhalkar

 
Climb slowly attic
Keep the lamp platform
Not a wrinkle on the cheek also should be andhiyare

Wear my ghaghra wouldn't stop, Bangle, bichiya
Chanka, toe, ghungharu
To all you jyotit dipon
Village of your Tan

Climb slowly attic
Keep lamp sanbhalkar
Looks like you're on your whites bendi holds project

Your demand by sender
Drig anjakar in mascara
The mind of his Tan-murat
Manzarek and love

Climb slowly attic
Keep the lamp platform
Flowers of kadhtin, as manhadi you mind handkerchief.

Helens, necklace and lektor
Bajuband from hamel
Nathuni to say-coil from the
Are they ever mail

Climb slowly attic
Keep the lamp platform
As you Bimal Moonlight on red galilee maltin, Tan

-Da॰-kunar restless
-Da॰ premgit of the book, page 41 kunar restless

Nov 7, 2012

आइए, फिर एक बार नया कंप्यूटर असेंबल करें

- अजय मलिक (c)

चेन्नै में रिची स्ट्रीट ऐसी जगह है जो कंप्यूटर पार्ट्स के लिए प्रसिद्ध है। आइए चेन्नै के प्रसिद्ध कम्प्यूटर मार्केट रिची स्ट्रीट चलते हैं। यहाँ की प्रसिद्ध सड़क माउंट रोड यानी अण्णा सालै पर बाटा शोरूम के पास रिची स्ट्रीट है और यहाँ सैंकड़ों दुकानें कंप्यूटर पार्ट्स से भरी पड़ी हैं।
मैं पहले भी बता चुका हूँ कि यहाँ आपको किसी भी कीमत का डेस्कटॉप कंप्यूटर बस एक घंटे के अंदर आपकी आँखों के सामने असेंबल कर सौंप दिया जाता है।

चकल्लस-2 : सच ही संकट का सबब है।


शायद आपको भी बचपन में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सुनाई गई होगी और तब आपने भी बिना आगा-पीछा सोचे सत्य के मार्ग पर चलने की हामी भर ली होगी। ये भी हो सकता है कि मन से न भी भरी हो, बस ऊपर से ही कह दिया हो कि हाँ-हाँ, बन जाऊंगा मैं भी, सत्यवादी हरिश्चंद!
मुझे भी बचपन में ऐसा ही कुछ सुनने-गुनने को मिला था। सही से तो याद नहीं उस वक्त मैंने क्या कहा होगा मगर मेरा हर उल्टी बात को भी आजमा कर देखने का पागलपन इसी निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि बचपन में ही मुझपर भी इस पागलपन का कुछ तो असर जरूर पड़ गया होगा और तभी से बात-बेबात सत्य को आजमा कर देखने का सनकीपन सवार हो गया होगा।
अब क्या हुआ था और क्या नहीं हुआ था, इस प्रश्न का समाधान ढूंढने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। चलिए, सीधे असल बात पर आते हैं कि झूठ जिसे संसदीय भाषा में असत्य कहने पर बल दिया जाता है, कितना संबल देता है और सत्य नामक रोग कितने काल्पनिक नमक के दरोगा बनाता है। राजा हरिश्चंद्र की ही बात लीजिए। उन्होंने जितने भी संकट झेले सब असत्य को अस्वीकार करने के कारण ही झेले। यदि वे सत्य के झंझट में न पड़ते तो कोई उनकी परीक्षा लेने के चक्कर में क्यूँ पड़ता?झूठ की तो कोई परीक्षा लेता है नहीं। झूठ तो झूठ है, सर्वव्यापी है,सदाबहार है।
न्यायालय में भी सत्य साबित करना होता है,झूठ को साबित करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कोई झूठ बोल रहा है,झूठे सबूत दे रहा है, इस सत्य को साबित करना होता है। अभी सुबह-सुबह सूरज निकाल रहा है। यह एक सत्य है मगर मुझे इस सत्य को साबित करना होगा। सबको दिखाई दे रहा है कि सूरज निकाल रहा है मगर इस सत्य को साबित किए बिना राजा हरिश्चंद्र नहीं बना जा सकता। अगर कोई झूठ कह रहा है कि इस समय सूरज नहीं निकल रहा है तो लोग हँसकर टाल जाएंगे मगर इसे साबित करने के लिए आग्रह नहीं करेंगे।
राजा हरिश्चंद की कहानी से यह शिक्षा भी मिलती है कि सत्य एक कठिन चीज़ है, जिसके लिए आग्रह करने पर संकट आ सकता है और जीवन भर के लिए आ सकता है। इस संकट को आप लगातार बढ़ाते जाएंगे क्योंकि आप झूठ को स्वीकार नहीं करेंगे और आपका अड़ियल रुख आपको स्वर्ग पहुंचाकर ही दम लेगा। यानी सत्य की मांग स्वर्ग में ज्यादा है और जमीन पर सत्य की सिर्फ परख की जाती है जिसके लिए अनेक संकट सृजित किए जाते हैं। यदि आप सत्य पर चलना चाह रहे हैं तो जीवन भर लड़ते रहने के लिए तैयार हो जाइए। लड़ना बंद करते ही या तो आप हार जाएंगे और झूठ की राह पर चल पड़ेंगे या फिर सत्यवादी हरिश्चंद्र सिद्ध होते ही आपको सीधे स्वर्ग जाना पड़ेगा। पृथ्वी के कंद-मूल भोग करने के लिए आपमें झूठ को पचा लेने लायक पाचन शक्ति चाहिए। अत: सत्य यह भी है कि सच ही संकट का सबब है।
सत्य सिर्फ पृथ्वी रूपी प्रयोगशाला में परखने की चीज़ है जिससे स्वर्गवासी होने में सहायता मिलती है और झूठ जीवन का मूल है जिससे पृथ्वी के नरक-अरक़ भोगने के लिए सहयोग, समर्थन और संबल मिलता है। यह मान्यता है कि एक झूठ से अगर किसी की जान बचती है तो वह झूठ नहीं है बल्कि तथाकथित व्यावहारिकता है। जब एक झूठ एक जान बचा सकता है तो अनेक झूठ अनेक जान बचा सकते हैं। वैसे यह तो पहले ही सिद्ध हो चुका है कि सत्य से जान नहीं बचती, पृथ्वी पर रहना  नसीब नहीं हो सकता पर स्वर्ग निश्चित रूप से मिलता है। कहावत है कि मरे बिन कभी किसी को स्वर्ग नहीं मिलता यानी सत्य मरने में सहायक है। सत्य से शरीर नहीं बचता क्योंकि शरीर भी सत्य नहीं है। सत्य से केवल आत्मा बचती है जो कि सदा से अजर-अमर मानी जाती रही है। अत: ठेठ सरकारी अंदाज़ में अनुरोध है कि माया-मोह तथा इस नश्वर शरीर से अगर तंग आ चुके हैं तो आत्मा तथा स्वर्ग की प्राप्ति के लिए सत्य का आश्रय लें।    
- अजय मलिक 
(... जारी )

Pankaj posted on your timeline (Facebook)
"I wanted to post it on your blog but could not done so pasted here : ये मृग मरीचिका है, सत्य को असत्य बनाने का गुण सीखना होगा अगर हिंदुस्तान मे सुख से जीना है क्योकि "जाकी उतार गई लोई, उसका क्या करेगा कोई", शर्म उसको आती है जिसको जीवन और आत्मा का महत्व समझ आता हो॰ बाकी बेशर्म को गाली दो, डंडा मारो, जूता मारो क्या फर्क पड़ता है, उसे न तो आने वाले पीढ़ी को कुछ देकर जाना है और न ही किसी दूसरे के दुख दर्द का अहसास है, आज के money driven समय मे वही सफल है जो दाम दंड भेद कोई भी अनीति अपनाकर अपना काम निकाल लेता है, मैंने साम का जिक्र यहाँ नहीं किया है क्योकि अपने हिंदुस्तान मे साम का अर्थ बदल गया है, आजकल साम का अर्थ है "प्यार से धमकाना" "कि सुधर जाओ नहीं तो हम सुधार देंगे" जोकि दंड का रूप है और अगर इतिहास पढे तो सच्चे, गुणी और सुशील इंसान हमेशा ही दुष्टो के सहज शिकार बनते रहे है, आज भी बन रहे है॰ और ईश्वर ने तो इंसान की सारी जरूरते प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कराई है परंतु इंसान ने अपनी अनावश्यक जरूरते इतनी बढ़ा ली कि किसी उपाय पूरी नहीं हो रही है, तो जो मानसिक तनाव है वो घर से लेकर कार्यालय तक बढ़ता ही जा रहा है और वो दूसरे सुखी को दुखी करके संतोष पाने की तलाश मे ज्यादा दुखी होता जा रहा है, और ये दुख व निराशा लोगों को भ्रष्ट बना रहा है, और ऐसे को समझाने की कोशिश कीचड़ मे पत्थर मारने जैसा है॰ जैसा की प्रदीप जी ने कहा है उम्मीद रखिए, पर खुद को इस भीड़ का हिस्सा बनने से बचाने की कोशिश भी॰ पंकज"
(07-11-2012, 11.50 pm)
 

Nov 5, 2012

चीन के पास क्या है, हमारे पास अँग्रेजी है !

अँग्रेजी के मामले में हमने चीन और पाकिस्तान दोनों को पछाड़ दिया है। अँग्रेजी में वैसे सदा से ही हम अगड़े थे और चीन पिछड़ा...।  चिंता मत कीजिए - बस कुछ ही दिनों, सालों की बात है हम आबादी के मामले में भी चीन को पिछड़ा बनाकर ही दम लेंगे। पैसा ही सब कुछ थोड़े ही होता है, इंसान बड़ी चीज़ है। इंसानियत के साथ-साथ अंग्रेज़ियत का रुतबा ...और क्या चाहिए? दो चार दिन भूखे रहने से कोई मर थोड़े ही जाएंगे? फिर देर-सबेर मरते तो सभी हैं, अँग्रेजी के साथ खाली पेट मरने में भी मज़ा है...




Oct 30, 2012

डेंगू का दुश्मन : पपीते के पत्ते का रस

तीन वर्ष पूर्व भी हमने डेंगू के लिए पपीते के पत्ते के रस से जुड़ी पोस्ट प्रकाशित की थी। इसी सिलसिले में टाइम्स ऑफ इंडिया  की एक खबर का लिंक नीचे दिया जा रहा है -

http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Home-cure-for-dengue-death-sting/articleshow/16359807.cms

Oct 29, 2012

आस्ट्रेलिया के विद्यालयों में भी पढ़ाई जाएगी हिंदी

आज के 'दा हिन्दू' अंग्रेज़ी दैनिक में छपी खबर के अनुसार अब आस्ट्रेलिया के स्कूलों में भी हिंदी पढ़ाई जाएगी। विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक को क्लिक करें- 

http://www.thehindu.com/news/national/hindi-to-be-taught-in-australian-schools/article4041318.ece

(दा हिन्दू के सौजन्य से)

Oct 26, 2012

भारत का 43वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव



 

भारत का 43वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2012 गोवा में 20 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। फिल्म प्रतिनिधियों तथा फिल्म समीक्षकों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण जारी है। पंजीकरण का लिंक नीचे दिया जा रहा है-

फिल्म समीक्षकों के लिए पंजीकरण press_reg.asx

अपने पंजीकरण की स्थिति का पता लगाने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-


(सौजन्य- फिल्म समारोह निदेशालय, भारत सरकार )

गहन लीला प्रवीण लिखित परीक्षा नमूना प्रश्न-पत्र 3


 

यू ट्यूब के हिंदी सिखाने वाले वीडियो

हिंदी सिखाने वाले वीडियोज़ की यू ट्यूब पर भरमार है। इनमें से कुछ बेहद उपयोगी हैं। कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं जिनसे हिंदी, हिंदी व्याकरण सीखी जा सकती है। मन हो तो जरा आप भी आजमा कर देखें- 



Oct 24, 2012

लेंगमीडिया भाषा शिक्षण के पाँच कॉलेज :: हिंदी एवं विश्व की अन्य अनेक भाषाएँ सीखने के लिए दृश्य-श्रव्य सामग्री

आज दशहरे और दुर्गा पूजा के पावन पर्व पर सभी को शुभकामनाएँ देते हुए हिंदी सीखने - समझने के लिए  कुछ अच्छे लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं। 

मेरा यह मानना है कि ये लिंक्स हिंदी सीखने के लिए, हिंदी के पाठ्यक्रम और परीक्षा/परीक्षण तैयार करने के लिए और यह समझने के लिए कि किस प्रकार रुचिकर एवं व्यवस्थित ढंग से हिंदी सिखाई जा सकती है, उपयोगी हो सकते हैं। यदि विदेशी विश्वविद्यालय और विद्यालय हिंदी के लिए ऐसे कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं तो हम और  हमारे अपने स्वदेशी विश्वविद्यालय, विद्यालय, भाषा और राजभाषा से जुड़े संस्थान एवं संस्थाएं ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं? मुझे लगता हैं कि हम, हमारे अपनों को किसी भी कीमत पर असफल करने में जितनी ऊर्जा और समय झोकते हैं, उसका यदि दस प्रतिशत भी एक दूसरे को आगे बढ़ाने में लगाएँ तो भाषा ही नहीं हर स्तर पर क्रान्ति हो सकती है। दुर्भाग्य यह है कि जो कर सकते हैं उन्हें करने नहीं दिया जाता, जो नहीं कर सकते हैं उन्हें करने और कराने की ज़िम्मेदारी सौंप कर ऐसा कुछ किया जाता है कि जो करना चाहते हैं उनकी इस कुछ करने की चाहत को ही समूल समाप्त कर दिया जाए। 

मैं सभी हिंदी भाषियों, हिंदी प्रेमियों, हिंदी के प्रति जरा सा भी रुझान रखने वालों और प्रत्येक भारतीय से आज दशहरे के अवसर पर विनती करना चाहता हूँ कि 'इस और उस' की लड़ाई से हिंदी के हक़ को क्षति न पहुंचाएँ और जैसे भी कर सकें, सब एक जुट होकरअपनी राजभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा का आधिकारिक दर्जा दिलवाने के लिए संकल्प करें। हम सब भारत के लोग सर्वप्रथम हिंदी के और साथ ही समस्त भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रयास करें। घर में, घर से दफ्तर तक, दफ्तर में, बैंक में, बैंक से बाजार तक, स्टेशन हो या अस्पताल सब जगह अधिक से अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग करें। 
-अजय मलिक  


http://langmedia.fivecolleges.edu/hindi/dictations/index.html

http://langmedia.fivecolleges.edu/hindi/index_audio_video.html

http://langmedia.fivecolleges.edu/hindi/grammar/index.html









Oct 22, 2012

वो हर एक पल का शायर है, हर पल में बसी जवानी है


... हर एक पल उसकी हस्ती है
हर एक पल उसकी कहानी है... 
कभी-कभी जब देखी थी तब रत्ती भर भी समझ नहीं थी। फिर भी नासमझ मन पर जो उस कवितामयी फिल्म की छवि छप गई वह कभी-कभी ही नहीं हमेशा छमछम करती रही। बीस साल पहले बहुत मन था यश चोपड़ा से मिलने का, ढेर सारी बातें करने का... उनसे पूछने का कि गुले गुलजार... लाले की जान ये वक्त का सिलसिला धूल के फूल की तरह आदमी और इंसान के बीच दीवार बनकर किस लम्हे कौन से इत्तेफाक से इतने फासले पैदा कर गया। दिल तो पागल है कहने वाला जोशीला त्रिशूल से  काला पत्थर  निकाल लाया और जो काले पत्थर से लगने वाले दाग थे वे भी चाँदनी  में अपनी परंपरा भूलकर धर्मपुत्र की मशाल के सामने वीर-जारा की मोहब्बतें में डर  गए और विजय यश चोपड़ा को मिली।

विजयी भव: :: दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएँ


सच-सच बताइए सर !!!


(आज ही ई-मेल से मिली श्री अब्दुल हमीद खान की एक कविता पेश है )

निस्संदेह यह सच है सर,
आप लखपति,करोड़पति,
अरबपति और खरबपति हैं,
नेता हैं, अभिनेता हैं,
चेयरमैन हैं, एमडी हैं,
प्रोफ़ेसर हैं, ब्यूरोक्रैट हैं
और...और.....और
उद्योगपति भी हैं !

Oct 17, 2012

... आपत्ति किस बात की ?

एक कहानी : गोखरू 

यह कहानी दो बुज़ुर्गों की जबानी सुनने को मिली। दोनों का रोज का उठना-बैठना था। कभी एक इस घर आकर भूली-बिसरी यादों के गमछे से आज के प्रदूषित माहौल की धूल झाड़ जाता तो कभी दूसरा उस घर जाकर बिना शक्कर की चाय की चुसकियों की मिठास का कड़वापन झेल आता।
मैं उनकी दिनचर्या का अचानक ही कुछ मिनटों के लिए हिस्सा बन गया था।
इनके नाम हैं चमन सिंह और नवल सिंह। चमन सिंह पिछले दिनों अचानक बीमार पड़ गए। दिल की धड़कने अचानक बेकाबू हो गईं। उन्होंने पत्नी के मना करने पर भी बाइक निकाली और पत्नी के साथ गैस की दवा लेने निकल पड़े। डॉक्टर ने समझाया कि मामला गैस का नहीं, बल्कि दिल का है और काफी गंभीर है ... तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाइए।

Oct 16, 2012

भूलना मत, तुम दुखों का हर घड़ी आभार करना

गाजियाबाद जाऊँ और गुरुवर डॉ कुँवर बेचैन से मुलाक़ात किए बिना लौट आऊँ, ऐसा हो नहीं सकता। हो यह भी नहीं सकता कि खाली हाथ आऊँ...
उनका नया गीत संग्रह "लौट आए गीत के दिन" और उसी संग्रह का एक गीत पेश है- 



Oct 10, 2012

माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने फिर सराहा है...


माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने "हिंदी सबके लिए" को एक बार फिर से सराहा है। हम इस सराहना और उत्साहवर्धन के लिए तीसरी उपसमिति की माननीय संयोजक प्रो० अलका बलराम क्षत्रिय जी के अत्यंत आभारी हैं और भरोसा दिलाते हैं कि हिंदी सबके लिए ब्लॉग निरंतर राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए तन-मन-धन से प्रयासरत रहेगा और विषम से विषमतर परिस्थितियों में भी हार नहीं मानेगा।       

Oct 3, 2012

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -3


प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -3

1. निम्नलिखित अनुच्छेद को सुंदर लिखावट में लिखिए / Write the following paragraph legibly -


जैसे-जैसे सैफ-करीना की शादी नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे उनके बारे में रोज एक बात सामने आ रही है। खबर आ रही है कि सैफ-करीना की शादी की पार्टी अब पटौदी पैलेस में होगी। पटौदी पैलेस जो कि मौजूदा दौर में एक होटल के रूप में संचालित होता है उसकी सारी बुंकिंग को 26 अक्टूबर तक रोक दिया गया है और पिछले एक हफ्ते से उसका सौन्दर्यीकरण जारी है।