Nov 7, 2012

चकल्लस-2 : सच ही संकट का सबब है।


शायद आपको भी बचपन में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सुनाई गई होगी और तब आपने भी बिना आगा-पीछा सोचे सत्य के मार्ग पर चलने की हामी भर ली होगी। ये भी हो सकता है कि मन से न भी भरी हो, बस ऊपर से ही कह दिया हो कि हाँ-हाँ, बन जाऊंगा मैं भी, सत्यवादी हरिश्चंद!
मुझे भी बचपन में ऐसा ही कुछ सुनने-गुनने को मिला था। सही से तो याद नहीं उस वक्त मैंने क्या कहा होगा मगर मेरा हर उल्टी बात को भी आजमा कर देखने का पागलपन इसी निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि बचपन में ही मुझपर भी इस पागलपन का कुछ तो असर जरूर पड़ गया होगा और तभी से बात-बेबात सत्य को आजमा कर देखने का सनकीपन सवार हो गया होगा।
अब क्या हुआ था और क्या नहीं हुआ था, इस प्रश्न का समाधान ढूंढने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। चलिए, सीधे असल बात पर आते हैं कि झूठ जिसे संसदीय भाषा में असत्य कहने पर बल दिया जाता है, कितना संबल देता है और सत्य नामक रोग कितने काल्पनिक नमक के दरोगा बनाता है। राजा हरिश्चंद्र की ही बात लीजिए। उन्होंने जितने भी संकट झेले सब असत्य को अस्वीकार करने के कारण ही झेले। यदि वे सत्य के झंझट में न पड़ते तो कोई उनकी परीक्षा लेने के चक्कर में क्यूँ पड़ता?झूठ की तो कोई परीक्षा लेता है नहीं। झूठ तो झूठ है, सर्वव्यापी है,सदाबहार है।
न्यायालय में भी सत्य साबित करना होता है,झूठ को साबित करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कोई झूठ बोल रहा है,झूठे सबूत दे रहा है, इस सत्य को साबित करना होता है। अभी सुबह-सुबह सूरज निकाल रहा है। यह एक सत्य है मगर मुझे इस सत्य को साबित करना होगा। सबको दिखाई दे रहा है कि सूरज निकाल रहा है मगर इस सत्य को साबित किए बिना राजा हरिश्चंद्र नहीं बना जा सकता। अगर कोई झूठ कह रहा है कि इस समय सूरज नहीं निकल रहा है तो लोग हँसकर टाल जाएंगे मगर इसे साबित करने के लिए आग्रह नहीं करेंगे।
राजा हरिश्चंद की कहानी से यह शिक्षा भी मिलती है कि सत्य एक कठिन चीज़ है, जिसके लिए आग्रह करने पर संकट आ सकता है और जीवन भर के लिए आ सकता है। इस संकट को आप लगातार बढ़ाते जाएंगे क्योंकि आप झूठ को स्वीकार नहीं करेंगे और आपका अड़ियल रुख आपको स्वर्ग पहुंचाकर ही दम लेगा। यानी सत्य की मांग स्वर्ग में ज्यादा है और जमीन पर सत्य की सिर्फ परख की जाती है जिसके लिए अनेक संकट सृजित किए जाते हैं। यदि आप सत्य पर चलना चाह रहे हैं तो जीवन भर लड़ते रहने के लिए तैयार हो जाइए। लड़ना बंद करते ही या तो आप हार जाएंगे और झूठ की राह पर चल पड़ेंगे या फिर सत्यवादी हरिश्चंद्र सिद्ध होते ही आपको सीधे स्वर्ग जाना पड़ेगा। पृथ्वी के कंद-मूल भोग करने के लिए आपमें झूठ को पचा लेने लायक पाचन शक्ति चाहिए। अत: सत्य यह भी है कि सच ही संकट का सबब है।
सत्य सिर्फ पृथ्वी रूपी प्रयोगशाला में परखने की चीज़ है जिससे स्वर्गवासी होने में सहायता मिलती है और झूठ जीवन का मूल है जिससे पृथ्वी के नरक-अरक़ भोगने के लिए सहयोग, समर्थन और संबल मिलता है। यह मान्यता है कि एक झूठ से अगर किसी की जान बचती है तो वह झूठ नहीं है बल्कि तथाकथित व्यावहारिकता है। जब एक झूठ एक जान बचा सकता है तो अनेक झूठ अनेक जान बचा सकते हैं। वैसे यह तो पहले ही सिद्ध हो चुका है कि सत्य से जान नहीं बचती, पृथ्वी पर रहना  नसीब नहीं हो सकता पर स्वर्ग निश्चित रूप से मिलता है। कहावत है कि मरे बिन कभी किसी को स्वर्ग नहीं मिलता यानी सत्य मरने में सहायक है। सत्य से शरीर नहीं बचता क्योंकि शरीर भी सत्य नहीं है। सत्य से केवल आत्मा बचती है जो कि सदा से अजर-अमर मानी जाती रही है। अत: ठेठ सरकारी अंदाज़ में अनुरोध है कि माया-मोह तथा इस नश्वर शरीर से अगर तंग आ चुके हैं तो आत्मा तथा स्वर्ग की प्राप्ति के लिए सत्य का आश्रय लें।    
- अजय मलिक 
(... जारी )

Pankaj posted on your timeline (Facebook)
"I wanted to post it on your blog but could not done so pasted here : ये मृग मरीचिका है, सत्य को असत्य बनाने का गुण सीखना होगा अगर हिंदुस्तान मे सुख से जीना है क्योकि "जाकी उतार गई लोई, उसका क्या करेगा कोई", शर्म उसको आती है जिसको जीवन और आत्मा का महत्व समझ आता हो॰ बाकी बेशर्म को गाली दो, डंडा मारो, जूता मारो क्या फर्क पड़ता है, उसे न तो आने वाले पीढ़ी को कुछ देकर जाना है और न ही किसी दूसरे के दुख दर्द का अहसास है, आज के money driven समय मे वही सफल है जो दाम दंड भेद कोई भी अनीति अपनाकर अपना काम निकाल लेता है, मैंने साम का जिक्र यहाँ नहीं किया है क्योकि अपने हिंदुस्तान मे साम का अर्थ बदल गया है, आजकल साम का अर्थ है "प्यार से धमकाना" "कि सुधर जाओ नहीं तो हम सुधार देंगे" जोकि दंड का रूप है और अगर इतिहास पढे तो सच्चे, गुणी और सुशील इंसान हमेशा ही दुष्टो के सहज शिकार बनते रहे है, आज भी बन रहे है॰ और ईश्वर ने तो इंसान की सारी जरूरते प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कराई है परंतु इंसान ने अपनी अनावश्यक जरूरते इतनी बढ़ा ली कि किसी उपाय पूरी नहीं हो रही है, तो जो मानसिक तनाव है वो घर से लेकर कार्यालय तक बढ़ता ही जा रहा है और वो दूसरे सुखी को दुखी करके संतोष पाने की तलाश मे ज्यादा दुखी होता जा रहा है, और ये दुख व निराशा लोगों को भ्रष्ट बना रहा है, और ऐसे को समझाने की कोशिश कीचड़ मे पत्थर मारने जैसा है॰ जैसा की प्रदीप जी ने कहा है उम्मीद रखिए, पर खुद को इस भीड़ का हिस्सा बनने से बचाने की कोशिश भी॰ पंकज"
(07-11-2012, 11.50 pm)
 

Nov 5, 2012

चीन के पास क्या है, हमारे पास अँग्रेजी है !

अँग्रेजी के मामले में हमने चीन और पाकिस्तान दोनों को पछाड़ दिया है। अँग्रेजी में वैसे सदा से ही हम अगड़े थे और चीन पिछड़ा...।  चिंता मत कीजिए - बस कुछ ही दिनों, सालों की बात है हम आबादी के मामले में भी चीन को पिछड़ा बनाकर ही दम लेंगे। पैसा ही सब कुछ थोड़े ही होता है, इंसान बड़ी चीज़ है। इंसानियत के साथ-साथ अंग्रेज़ियत का रुतबा ...और क्या चाहिए? दो चार दिन भूखे रहने से कोई मर थोड़े ही जाएंगे? फिर देर-सबेर मरते तो सभी हैं, अँग्रेजी के साथ खाली पेट मरने में भी मज़ा है...




Oct 30, 2012

डेंगू का दुश्मन : पपीते के पत्ते का रस

तीन वर्ष पूर्व भी हमने डेंगू के लिए पपीते के पत्ते के रस से जुड़ी पोस्ट प्रकाशित की थी। इसी सिलसिले में टाइम्स ऑफ इंडिया  की एक खबर का लिंक नीचे दिया जा रहा है -

http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Home-cure-for-dengue-death-sting/articleshow/16359807.cms

Oct 29, 2012

आस्ट्रेलिया के विद्यालयों में भी पढ़ाई जाएगी हिंदी

आज के 'दा हिन्दू' अंग्रेज़ी दैनिक में छपी खबर के अनुसार अब आस्ट्रेलिया के स्कूलों में भी हिंदी पढ़ाई जाएगी। विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक को क्लिक करें- 

http://www.thehindu.com/news/national/hindi-to-be-taught-in-australian-schools/article4041318.ece

(दा हिन्दू के सौजन्य से)

Oct 26, 2012

भारत का 43वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव



 

भारत का 43वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2012 गोवा में 20 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। फिल्म प्रतिनिधियों तथा फिल्म समीक्षकों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण जारी है। पंजीकरण का लिंक नीचे दिया जा रहा है-

फिल्म समीक्षकों के लिए पंजीकरण press_reg.asx

अपने पंजीकरण की स्थिति का पता लगाने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-


(सौजन्य- फिल्म समारोह निदेशालय, भारत सरकार )

गहन लीला प्रवीण लिखित परीक्षा नमूना प्रश्न-पत्र 3


 

यू ट्यूब के हिंदी सिखाने वाले वीडियो

हिंदी सिखाने वाले वीडियोज़ की यू ट्यूब पर भरमार है। इनमें से कुछ बेहद उपयोगी हैं। कुछ लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं जिनसे हिंदी, हिंदी व्याकरण सीखी जा सकती है। मन हो तो जरा आप भी आजमा कर देखें- 



Oct 24, 2012

लेंगमीडिया भाषा शिक्षण के पाँच कॉलेज :: हिंदी एवं विश्व की अन्य अनेक भाषाएँ सीखने के लिए दृश्य-श्रव्य सामग्री

आज दशहरे और दुर्गा पूजा के पावन पर्व पर सभी को शुभकामनाएँ देते हुए हिंदी सीखने - समझने के लिए  कुछ अच्छे लिंक्स नीचे दिए जा रहे हैं। 

मेरा यह मानना है कि ये लिंक्स हिंदी सीखने के लिए, हिंदी के पाठ्यक्रम और परीक्षा/परीक्षण तैयार करने के लिए और यह समझने के लिए कि किस प्रकार रुचिकर एवं व्यवस्थित ढंग से हिंदी सिखाई जा सकती है, उपयोगी हो सकते हैं। यदि विदेशी विश्वविद्यालय और विद्यालय हिंदी के लिए ऐसे कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं तो हम और  हमारे अपने स्वदेशी विश्वविद्यालय, विद्यालय, भाषा और राजभाषा से जुड़े संस्थान एवं संस्थाएं ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं? मुझे लगता हैं कि हम, हमारे अपनों को किसी भी कीमत पर असफल करने में जितनी ऊर्जा और समय झोकते हैं, उसका यदि दस प्रतिशत भी एक दूसरे को आगे बढ़ाने में लगाएँ तो भाषा ही नहीं हर स्तर पर क्रान्ति हो सकती है। दुर्भाग्य यह है कि जो कर सकते हैं उन्हें करने नहीं दिया जाता, जो नहीं कर सकते हैं उन्हें करने और कराने की ज़िम्मेदारी सौंप कर ऐसा कुछ किया जाता है कि जो करना चाहते हैं उनकी इस कुछ करने की चाहत को ही समूल समाप्त कर दिया जाए। 

मैं सभी हिंदी भाषियों, हिंदी प्रेमियों, हिंदी के प्रति जरा सा भी रुझान रखने वालों और प्रत्येक भारतीय से आज दशहरे के अवसर पर विनती करना चाहता हूँ कि 'इस और उस' की लड़ाई से हिंदी के हक़ को क्षति न पहुंचाएँ और जैसे भी कर सकें, सब एक जुट होकरअपनी राजभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा का आधिकारिक दर्जा दिलवाने के लिए संकल्प करें। हम सब भारत के लोग सर्वप्रथम हिंदी के और साथ ही समस्त भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रयास करें। घर में, घर से दफ्तर तक, दफ्तर में, बैंक में, बैंक से बाजार तक, स्टेशन हो या अस्पताल सब जगह अधिक से अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग करें। 
-अजय मलिक  


http://langmedia.fivecolleges.edu/hindi/dictations/index.html

http://langmedia.fivecolleges.edu/hindi/index_audio_video.html

http://langmedia.fivecolleges.edu/hindi/grammar/index.html









Oct 22, 2012

वो हर एक पल का शायर है, हर पल में बसी जवानी है


... हर एक पल उसकी हस्ती है
हर एक पल उसकी कहानी है... 
कभी-कभी जब देखी थी तब रत्ती भर भी समझ नहीं थी। फिर भी नासमझ मन पर जो उस कवितामयी फिल्म की छवि छप गई वह कभी-कभी ही नहीं हमेशा छमछम करती रही। बीस साल पहले बहुत मन था यश चोपड़ा से मिलने का, ढेर सारी बातें करने का... उनसे पूछने का कि गुले गुलजार... लाले की जान ये वक्त का सिलसिला धूल के फूल की तरह आदमी और इंसान के बीच दीवार बनकर किस लम्हे कौन से इत्तेफाक से इतने फासले पैदा कर गया। दिल तो पागल है कहने वाला जोशीला त्रिशूल से  काला पत्थर  निकाल लाया और जो काले पत्थर से लगने वाले दाग थे वे भी चाँदनी  में अपनी परंपरा भूलकर धर्मपुत्र की मशाल के सामने वीर-जारा की मोहब्बतें में डर  गए और विजय यश चोपड़ा को मिली।

विजयी भव: :: दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएँ


सच-सच बताइए सर !!!


(आज ही ई-मेल से मिली श्री अब्दुल हमीद खान की एक कविता पेश है )

निस्संदेह यह सच है सर,
आप लखपति,करोड़पति,
अरबपति और खरबपति हैं,
नेता हैं, अभिनेता हैं,
चेयरमैन हैं, एमडी हैं,
प्रोफ़ेसर हैं, ब्यूरोक्रैट हैं
और...और.....और
उद्योगपति भी हैं !

Oct 17, 2012

... आपत्ति किस बात की ?

एक कहानी : गोखरू 

यह कहानी दो बुज़ुर्गों की जबानी सुनने को मिली। दोनों का रोज का उठना-बैठना था। कभी एक इस घर आकर भूली-बिसरी यादों के गमछे से आज के प्रदूषित माहौल की धूल झाड़ जाता तो कभी दूसरा उस घर जाकर बिना शक्कर की चाय की चुसकियों की मिठास का कड़वापन झेल आता।
मैं उनकी दिनचर्या का अचानक ही कुछ मिनटों के लिए हिस्सा बन गया था।
इनके नाम हैं चमन सिंह और नवल सिंह। चमन सिंह पिछले दिनों अचानक बीमार पड़ गए। दिल की धड़कने अचानक बेकाबू हो गईं। उन्होंने पत्नी के मना करने पर भी बाइक निकाली और पत्नी के साथ गैस की दवा लेने निकल पड़े। डॉक्टर ने समझाया कि मामला गैस का नहीं, बल्कि दिल का है और काफी गंभीर है ... तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाइए।

Oct 16, 2012

भूलना मत, तुम दुखों का हर घड़ी आभार करना

गाजियाबाद जाऊँ और गुरुवर डॉ कुँवर बेचैन से मुलाक़ात किए बिना लौट आऊँ, ऐसा हो नहीं सकता। हो यह भी नहीं सकता कि खाली हाथ आऊँ...
उनका नया गीत संग्रह "लौट आए गीत के दिन" और उसी संग्रह का एक गीत पेश है- 



Oct 10, 2012

माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने फिर सराहा है...


माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने "हिंदी सबके लिए" को एक बार फिर से सराहा है। हम इस सराहना और उत्साहवर्धन के लिए तीसरी उपसमिति की माननीय संयोजक प्रो० अलका बलराम क्षत्रिय जी के अत्यंत आभारी हैं और भरोसा दिलाते हैं कि हिंदी सबके लिए ब्लॉग निरंतर राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए तन-मन-धन से प्रयासरत रहेगा और विषम से विषमतर परिस्थितियों में भी हार नहीं मानेगा।       

Oct 3, 2012

प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -3


प्रबोध ऑनलाइन परीक्षा की लिखित परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्न-पत्र -3

1. निम्नलिखित अनुच्छेद को सुंदर लिखावट में लिखिए / Write the following paragraph legibly -


जैसे-जैसे सैफ-करीना की शादी नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे उनके बारे में रोज एक बात सामने आ रही है। खबर आ रही है कि सैफ-करीना की शादी की पार्टी अब पटौदी पैलेस में होगी। पटौदी पैलेस जो कि मौजूदा दौर में एक होटल के रूप में संचालित होता है उसकी सारी बुंकिंग को 26 अक्टूबर तक रोक दिया गया है और पिछले एक हफ्ते से उसका सौन्दर्यीकरण जारी है।

Sep 22, 2012

गीत संगीत के साथ सीखिए- हिन्दी स्वर एवं व्यंजन

देवनागरी स्वर और व्यंजन गीत संगीत के साथ भी सीखे और सिखाए जा सकते हैं। इस कथन को आजमाना है तो नीचे दिए लिंक्स को क्लिक करने का साहस दिखाएँ-




(यू ट्यूब से साभार )

Sep 21, 2012

आइए, जरा हिन्दी के साथ जोहांसबर्ग चलें...

यह विचित्र सी ही बात है कि उत्तर-प्रदेश का निवासी होते हुए भी मैं सबसे ज्यादा अपरिचित उत्तर-प्रदेश और उत्तर भारत से ही हूँ। इसी बात से अनुमान लगाया जा सकता गाँव के इस ठेठ देहाती की अनभिज्ञता और फूहड़पन का। शायद यही वजह है कि मैं सही मायनों में "आरआई" भी नहीं हूँ, "एनआरआई" होना तो बड़ी दूर की बात है बशर्ते कि सिलीगुड़ी के पास नेपाल की सीमा से गुजरने या एक घंटे के लिए पानी की टंकी के पास से नेपाल में घूम आने को इसमें शामिल न किया जाए। मेरे कई परिचित आज एनआरआई हो गए हैं। वे हिंदी के साथ दक्षिण अफ्रीका में जोहांसबर्ग गए हैं और अढ़ाई दिन बाद लौट आएंगे। कुछ मित्र ऐसे भी हैं जिन्हें जोहांसबर्ग हिंदी को ले जाने का अवसर बस मिलते-मिलते रह गया। मैं एक घंटे वाला नेपाल रिटर्न इंडियन हिंदी के नाम पर चेन्नई में पड़ा हूँ। मैं हिंदी को ढोने योग्य भी नहीं बचा हूँ, अब शायद हिंदी ही मुझे ढो या धो रही है। बहुत सारे लोग हैं जिन्हें हिंदी ढो रही है। मैं भी ढुलाई वाले ट्रक या गाड़ी में लदा हूँ और ढोए जाने के अजीब से चक्र का हिस्सा बना हुआ हूँ। जो थोड़ी-बहुत हिंदी जानता था वह अङ्ग्रेज़ी की भेट चढ़वा दी गई और अँग्रेजी इस भारतीय को न तो अंग्रेज़ बना पाई और न ही हिंदी वाला रहने दिया। एक अजीब सा कुछ-कुछ दलिया जैसा बनकर रह गया हूँ। यदि खिचड़ी भी बन गया होता तो भी कुछ संतोष होता। 

Sep 20, 2012

दो जुबान चाहिए

आज के दा हिंदू अखबार के चेन्नई संस्करण में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और जाने-माने विधिवेत्ता श्री मार्कन्डेय काटजू का एक आलेख प्रकाशित हुआ है जिसमें हर भारतीय के लिए अँग्रेजी और हिंदी  दो भाषाओं के सीखने की जरूरत बताई गई है । हिंदी दिवस से जुड़े उनके अनुभवों से  परिचित कराते आलेख का लिंक नीचे दिया जा रहा है-


(The Hindu से साभार )

Sep 19, 2012

सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ


हिंदी दिवस समारोह, 2012 के अवसर पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी का अभिभाषण




(www.rajbhasha.gov.in के सौजन्य से )

Sep 17, 2012

हिंदी में प्रार्थना पत्र, सिफारिशी पत्र तैयार करें

यहाँ एक ही वेबसाइट के तीन लिंक दिए जा रहे हैं जिनसे आप हिंदी (अँग्रेजी सहित यानी द्विभाषी) में कुछ सीधे-सादे आवेदन-पत्र, सिफारिशी पत्र तैयार करना सीख सकते हैं। इसी के साथ hi.bab.la  की इस वेबसाइट पर ऑनलाइन प्यारा सा/ से शब्दकोश भी उपलब्ध है/ हैं। एक-एक कर आजमाइएगा जरूर -




(http://hi.bab.la से साभार )


अमेरिका में हिन्दी शिक्षण की लहर : डॉ सुरेन्द्र गंभीर ( अभिव्यक्ति का लिंक )

साहित्यिक पत्रिका "अभिव्यक्ति" में एक वर्ष पूर्व प्रकाशित यह लेख अभी भी ताजगी से भरपूर है। लिंक नीचे दिया जा रहा है-

Sep 14, 2012

क्या मैं आपको कवि नज़र आता हूँ...

एक मित्र ने संदेश भेजा - 'कवि सम्मेलन में कविता पाठ करना है, शाम साढ़े पाँच बजे।' मैंने कई बार अपने गंजे सिर पर हाथ फेरा, इधर-उधर देखा, चश्में को उतारकर आँखों पर हथेलियों का दबाव डालकर इस बात का पता लगाने की कोशिश की कि आखिर किस कोण से मेरे जैसा त्रिकोण कवि लग सकता है? कुछ समझ में नहीं आया। फिर सोचा चलिए, मित्रवर की पारखी निगाहों से देखने से शायद कुछ नज़र आ जाए... इस जाँच-पड़ताल में एक लाल बत्ती पर स्कूटर रोककर खड़े-खड़े कुछ पंक्तियाँ लिखने की कोशिश की। बस फिर क्या

सभी भारतीयों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 

हिन्दी दिवस का सीधा प्रसारण देखें

आज हिंदी दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन से हिंदी दिवस का सीधा प्रसारण लाइव वेबकास्ट  के जरिए नीचे दिए लिंक से देखा जा सकता है-





(rajbhasha.gov.in के सौजन्य से )


Sep 13, 2012

विंडोज़ 8.0 अब चौदह नई भाषाओं में भी उपलब्ध

यहाँ हम भाषा इंडिया डॉट कॉम का एक लिंक दे रहे है जिसपर आपको अगले माह लाँच होने वाली विंडोज 8.0 के बारे जानकारी के साथ-साथ अन्य अनेक सोफ्टवेयर्स के  संबंध में भी विस्तृत जानकारी हिन्दी में मिलेगी। विंडोज 8 में समर्थित भाषाओं की संख्या 109 हो जाने की जानकारी दी गई है। विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक को क्लिक करें-



(bhashaindia.com के सौजन्य से )

Sep 12, 2012

हत्यारी अँग्रेजी के पैरोकारों को क्या कहूँ......

डेक्कन क्रोनोकिल के चेन्नई संस्करण की एक खबर 

अमेरिका में हिंदी बन रही है वैकल्पिक भाषा

हिंदी प्रेमियॊं के लिए दॊ अच्छी खबरें

वाशिंगटन। अमेरिका में बड़ी संख्या में रह रहे गैर अंग्रेजी भाषी प्रवासी समुदायों में संपर्क भाषा के रूप में हिंदी उर्दू की स्वीकार्यता से चकित अमेरिकी समाज भी इसे अपनाने को तैयार हो रहा है।
दुनिया भर से विभिन्न भाषा भाषी समुदायों के लाखों लोगों के अमेरिका में आ बसने के साथ ही इन वर्गो में सांस्कृतिक चुनौतियां सामने आ रही हैं जिनमें भाषा की समस्या प्रमुख है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय में एशियाई भाषा एवं साहित्य विभाग के प्रोफेसर डा. एमजे वारसी देश में हो रही इस दिलचस्प क्रांति का बयान करते हुए बताते है कि गैर अंग्रेजी भाषी पृष्ठभूमि के अफ्रीकी, एशियाई लैटिन अमेरिकी आदि देशों के लोगों के परिवारों के बच्चे स्कूलों में शिक्षा पाकर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने लगते हैं लेकिन मां बाप की अंग्रेजी समझ तो लेते हैं लेकिन बोलने में दिक्कत आती है। इसीलिए वे जवाब हिन्दी या उर्दू में देते हैं। डा. वारसी के अनुसार ऐसे माता-पिता हिंदी या उर्दू बहुत आसानी से सीख लेते हैं। बच्चों को भी इस भाषा में बात करने में अच्छा लगता है। उनके अनुसार 11 सितंबर के हमले के बाद अमेरिका में एक सकारात्मक परिवर्तन भी आया है। यहां के समाज में दूसरे समुदायों की संस्कृतियों एवं धर्म

Sep 5, 2012

हिन्दी ई-लर्निंग का लिंक 2 काम नहीं कर रहा है

आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के हिन्दी सीखने के बेहद लोकप्रिय एवं उपयोगी पाठों से जोड़ने वाला  हिन्दी ई-लर्निंग का हिंदी सीखने के लिए लिंक- 2 काम नहीं कर रहा है। खेद है। 

शिक्षक दिवस पर हिन्दी सीखने के लिए एक और लिंक

आज शिक्षक दिवस है। इस अवसर पर एक और नया लिंक प्रस्तुत है हिन्दी सीखने के लिए -


Sep 4, 2012

स्वर्गीय अनिल बोरडिया को हिंदी सबके लिए की श्रद्धांजलि


कल रात टीवी पर एक छोटा सा समाचार था- शिक्षाविद एवं प्रशासनिक अधिकारी श्री अनिल बोरडिया नहीं रहे। श्रद्धांजलि स्वरूप यह पोस्ट मैं तभी डालना चाहता था किन्तु 103 बुखार में बैठना भी संभव नहीं हो पाया। कई लोग यह पूछ सकते हैं कि अनिल बोरडिया जी से मेरा या हिंदी सबके लिए का क्या संबंध हो सकता है? सच तो ये है कि स्वयं बोरडिया जी को भी 25 वर्ष पुरानी वह घटना याद न रही होगी। वर्ष 1987-88 में "हम पाँच" नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन परिसर में एक पेड़ के नीचे आमरण अनशन पर बैठ गए थे। हमारे पास न कोई पंडाल था, न ही कोई प्रायोजक। हमारे पास  वित्तीय साधन भी कोई नहीं था। हम थोड़े से सनकी किस्म के प्राणी हुआ करते थे। जाड़े की रात ऊपर से बारिश। हम कुकड़ रहे थे। 

हम पांचों में बोलने का काम श्यामरुद्र पाठक जी किया करते थे। श्याम जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे हिंदी, अँग्रेजी और संस्कृत में पूरे अधिकार के साथ धारा-प्रवाह लगातार बोलते रह सकते थे। वे अपनी बात बिल्कुल एक टेपरिकार्डर की तरह बिना एक शब्द इधर-उधर किए बोलते थे। मैं बिलकुल चुप पड़ा रहने वाला प्राणी था। डॉ मुनीश्वर गुप्त दूसरे प्रवक्ता थे। पुष्पेंद्र चौहान जी अलग ढंग से सोचते थे और विनोद कुमार गौतम जी मेरी तरह चुप रहते थे। आईआईटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा से अँग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कराने का मुद्दा था। श्यामरुद्र पाठक एमएस फिजिक्स की अंतिम वर्ष की परीक्षा के सभी प्रश्न-पत्र हिंदी में लिखकर अपना परीक्षाफल रुकवाने का आनंद ले चुके थे। विनोद कुमार गौतम को दो बार हिंदी में लिखने के कारण एएमआईई की परीक्षा में शून्य अंक पाने का गौरव हासिल हो चुका था और मैं एम एड का परीक्षाफल रुकवाने का श्रेय शिरोधार्य किए बैठा था। डॉ मुनीश्वर गुप्त को एमडी की डिग्री हिंदी में लिखने पर भी मिल चुकी थी और पुष्पेंद्र चौहान दिल्ली बार काउंसिल में अँग्रेजी का पर्चा बिना लिखे पंजीकरण पा चुके थे।

एक प्रेस फोटोग्राफर चाहते थे कि जिंदाबाद-मुर्दाबाद की मुद्रा में एक फोटो हो जाए मगर हम पांचों सनकी इसपर सहमत नहीं थे। हमें ये भी पता नहीं था कि वास्तव में हमारे ज्ञापन या अभ्यावेदन कोई पढ़ भी रहा या नहीं। सतर्कता विभाग का एक अधिकारी जेएनयू का छात्र बनकर हमारे खेमे में घुसपैठ करना चाहता था परंतु हम पाँच, छह बनने को तैयार नहीं थे। हमारे अनशन का दूसरा या तीसरा दिन था। शायद रविवार की सुबह दस या ग्यारह बजे का समय था। हम लोग एक पुरानी दरी पर स्वयं को समेटे बैठे थे। तभी हाथ में ब्रीफकेस थामे एक लंबे से भारी भरकम व्यक्तित्व ने आकर पूछा- बच्चो बात क्या है, आप लोग क्या चाहते हैं?

हमारी नीति यह थी कि जो भी बात करना चाहता है उसे हमारे साथ, हमारे पास बैठकर बात करनी होगी। श्याम जी ने उस विशाल व्यक्तित्व से आग्रह किया कि कृपया बैठ जाइए। वे बैठ गए। श्याम जी अपने अंदाज़ में शुरू हो गए। पाँच मिनट, दस मिनट फिर पंद्रह मिनट गुजर गए, श्याम जी विस्तार से सप्रमाण अपनी बात बताते रहे। तब पूछने वाले सज्जन ने प्रस्ताव रखते हुए कहा – क्यों न हम अंदर चलकर बात करें? तब हम लोगों ने पूछा - श्रीमान आपका परिचय... ? उन्होंने अपना नाम बताया - मैं अनिल बोरडिया हूँ, शिक्षा सचिव ...आप लोग मेरे ही खिलाफ तो अनशन कर रहे हैं।


हम पांचों एक दूसरे का चेहरा ताकने लगे। फिर उनके केबिन में हम लोग उनके साथ जा बैठे। उन्हें एनसीईआरटी और आईआईटी दिल्ली के सर्वेक्षण का ब्यौरा दिया तो वे सारी बात समझ गए। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि वे भारतीय भाषाओं के माध्यम से पढ़ने वालों को न्याय दिलाकर रहेंगे। आईआईटी के निदेशक मण्डल को इसमें परेशानी थी। बैठक पर बैठक होती रहीं। बोरडिया साहब ने कहा - "जितना समय लगाना है लगा लीजिए पर भारतीय भाषाओं को आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में जगह देनी ही होगी।" मैं आज तक नहीं जान पाया कि हमारे अनशन स्थल पर बैठक के बाद गद्दे कहाँ से आएँ, पंडाल कहाँ से लगा? 

शास्त्री भवन प्रांगण में दफा 144 लगी रहती थी मगर हम लोगों का न कोई विरोध हुआ, न कोई गिरफ़्तारी हुई। पांचवे दिन हम लोग बहुत चल-फिरने लायक नहीं रह गए थे, पेट की अतड़िया ऐंठने लगी थीं। एक बार फिर बैठक शुरू हुई। अनिल बोर्डिया जी ने कहा - " इन पांचों के सामने ही सारी बात होनी चाहिए।" हम लोग कुर्सियों पर बैठने में असहज महसूस कर रहे थे। फिर पैरों को पेट से चिपका कर बैठ गए। शाम को जब जब मांगें मान लिए जाने का पत्र टाइप हुआ तो वह अँग्रेजी में था। अनिल बोर्दिया जी ने कहा- कम से कम ये पत्र तो हिंदी में होना चाहिए था! उनके एक मातहत ने खींसे निपोरते हुआ कहा- सर, हिंदी में टाइप करने वाला आज नहीं आया है। बहुत सारी बातें हैं जिनका जिक्र कुछ लोगों को अच्छा नहीं भी लग सकता है, मगर अगर आईआईटी जेईई में भारतीय भाषाएँ माध्यम बनीं तो उसका बहुत कुछ श्रेय अनिल बोरडिया जी को भी जाता है।


23 साल से अधिक बीत गए राजभाषा विभाग में चाकरी करते हुए मगर यहाँ स्वर्गीय अनिल बोरडिया जी जैसा हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के प्रति समर्पित व्यक्ति गाहे-बगाहे ही मुझे मिला होगा। यहाँ भांति-भांति के व्यक्तित्व मुझे मिले मगर अधिकांश को हिंदी से अधिक हिंदी की नौकरी से लगाव के लिए जुगाड़ लगाते हुए पाया। उन दिनों दैनिक हिंदुस्तान में लालमणि मिश्रा जी हमारे आंदोलन की कवरेज कराया करते थे। सेवा निवृत होने पर अनिल बोरडिया जी मिश्रा जी को अपनी किताब देने आए थे। अनिल जी के हिंदी के सरकारी महीने में परलोकवासी हो जाने से हिंदी के एक सच्चे समर्थक को खो देने का एहसास हो रहा है। मैं उस आमरण अनशन के बाद कभी भी उनसे मिलने का सौभाग्य नहीं पा सका मगर दिल से सोचने वाला यह अनाड़ी उन्हें कभी नहीं भुला पाया। बस उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ समाप्त करता हूँ। 

- अजय मलिक (c)

Sep 3, 2012

हिन्दी गद्यकोश

जी हाँ, कविताकोश के बाद हिन्दी गद्यकोश भी उपलब्ध है। यह जानकारी मुझे राहुल जी की फेस बुक पर उपलब्ध पोस्ट से मिली है। गद्यकोश में सभी प्रतिष्ठित हिन्दी रचनाकारों की गद्य कृतियाँ आकारादि क्रम में उपलब्ध हैं। लिंक नीचे दिया जा रहा है-



(गद्यकोश एवं राहुल जी की पोस्ट के सौजन्य से )

Aug 31, 2012

हिन्दी दिवस पर माननीय गृह मंत्री जी का संदेश

                                                        
(सौजन्य:  राजभाषा विभाग) 

Aug 29, 2012

चकल्लस

23 अगस्त 2012, डबल्यूडबल्यूएफ़ कुश्ती की एक नई कड़ी का निर्माण हुआ। एक वाशबेसिन की कहानी इतनी लंबी हो गई कि एकता कपूर के धारावाहिक छोटे पड़ जाएँ... अभी भी कहानी जारी है। वाश बेसिन जिंदा है याकि उसने नया जन्म ले लिया है किन्तु उसकी कमीज़-पेंट की सिलाई अभी बाकी है। पेंट से याद आया एक आलसी बल्कि महा आलसी कहाना ज्यादा सही रहेगा, पेंट के एक पैर की उधड़ी सिलाई सिलाने नहीं गया और इस तरह दो माह गुजर गए। वह रोज एक ही जोड़ी को धोने और सुखाने में आलसीपन नहीं दिखाता मगर दर्जी के पास जाने के लिए पाँच मिनट उसके पास नहीं हैं।

बिना ब्रेक की साइकिल चलाने में उसे कोई कठिनाई नहीं मगर ब्रेक डलवाने में नानी याद आती है। यकीन मानिए पंचर लगाने का सामान, साइकिल-स्कूटर की मरम्मत का सामान, ग्रीस, मोबिल ऑइल, हथौड़ा, प्लायर, बहुत सारे रिंच, जूते गाँठने के नुकीले औज़ार वगैरा सब लाकर घर में रख चुका हूँ और आज एक सिलाई मशीन भी खरीद लाया। एक आरी, बसूला, रंदा, एक बर्मा यानी ड्रिलिंग मशीन और लानी है। इसके बाद इन सब को चलाना है इसके लिए कुछ प्लाइवुड, कुछ सनमाइका लानी है। कुल मिलाकर अगर पानी पीना है तो हर कदम पर कुंआ खोदना है । जीने के लिए पानी कितना जरूरी है इसपर नया कुछ कहने की जरूरत नहीं है। शहरों में छूआ छूत जैसा कुछ नहीं है मगर मेरे जैसे किस्मत से दिलद्दर को बिना कुंआ खोदे पानी कभी नहीं मिला। 

महानगरों के अपने कायदे-कानून हैं और काफी हद तक बेतुके हैं। तिसपर भी बढ़ईगीरी, लुहारगीरी, जूता गठाई, सिलाई-कढ़ाई-बुनाई, प्लम्बिंग, मिस्त्रीगीरी वगैरा के बाद जो कुछ बचा रह जाता है वह है महानगरीय अवश प्राणी। यह अवश प्राणी जब सुबह उठता है तो खिड़की खोलकर ताज़ी हवा ढूंढने के चक्कर में दो-चार तेजतर्रार मच्छरों का शिकार बनता है। फिर शहरी बाबू होने के अहसास की अकड़ में जकड़कर कमर दर्द से कराहता है और  दफ़्तर की दौड़ में घुटनों की टीस से सुकून पाने के उपाय ढूँढता हुआ लौटता है।

कार है जो बेकार खड़ी है। तीन साल में छः हज़ार किमी का सफर वह भी तब जब मद्रास से त्रिवेन्द्रम वगैरा का एक चक्कर लगाने में तीन हज़ार किमी किसी तरह खींच दी थी। सालाना पेट्रोल से अधिक बीमा और ढुलाई-पुछाई वाली तथाकथित सर्विस का खर्चा। बढ़ाइए पेट्रोल के दाम मुझे कोई ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। जब तक स्कूटर चलता है चला लेते हैं बाद में आईआई टी से एक पुरानी साइकिल भन्ने में देकर खरीद लूँगा।

कार की मोबिल ऑइल बदलने की सेवा के नाम पर बिना किसी कारण छः हज़ार का बिल बना दिया भाई लोगों ने। किसी ने सही ही कहा है जाकी कार उसी को साजे... हम ठहरे ठेठ देहाती...  गाँव के गंवार, मोटी रोटी और प्याज की गंठी से बढ़कर स्वादिष्ट कोई व्यंजन नहीं लगता और साइकिल से बढ़कर कोई सवारी नहीं लगती। आने दीजिए बाढ़-तूफान-आँधी हमारी साइकिल में सायलेंसर  ही नहीं है जिसमें पानी भरने का डर हो। सड़क हो या न हो, सूखा हो या गारा अपनी साइकिल को कोई क्या रोकेगा! पुलिस का हवलदार न  रोक सकता है न चालान काट सकता है। न बैटरी की चिंता न इंडिकेटर के टूटने का डर... क्लच, ब्रेक सब बाहर, कोई हेर-फेर नहीं, कोई लौचा नहीं। बचपन में साइकिल चलाना सीखने के चक्कर में तुड़वाए हाथ-पाँव आज काम आ रहे है। हमने रस्सी बनानी/ बटनी सीखी थी, मछीके बनाने और लगाने सीखे थे। हमारी बनाई रस्सी के बल इतने तगड़े कि जलने पर तो क्या खाक में मिलने पर भी बलवान ही रहते हैं।  ये अलग बात है कि गंजे सिर पर पिछले पच्चीस बरस से जब भी हाथ फेरता हूँ तो खुद को पचपन का पाता हूँ।     (जारी ... )  

ओणम की शुभकामनाएँ


Aug 18, 2012

बीस बरस पहले सबरंग में छपी कुछ कविताएँ


Aug 15, 2012

वंदे मातरम्



Aug 10, 2012

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ


यह चित्र फेसबुक पर राहुल जी ने साझा किया है। माँ की याद आ गई। 

Aug 3, 2012

सलूने मुबारक और रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ


कल से मन में एक अजीब सा वितृष्णा का भाव है। फेसबुक पर एक पोस्ट दलित साहित्य के जानकार श्री कर्दम जी ने शेयर की थी। मेरे लिए साहित्य सिर्फ साहित्य है वह चाहे किसी भी नाम से किसी भी रूप में आए। जो लिख रहा है वह कुछ कहना चाह रहा है। उसके मन में अच्छा-बुरा, सफ़ेद या स्याह कुछ है जिसे वह अभिव्यक्ति देना चाह रहा है। साहित्य के रूप में सजग पाठक ने जिसे स्वीकार लिया, उसे पढ़ने  की जिज्ञासा सभी को हो सकती है। “खरीदी कोड़ियों के मोल” का पहला भाग कवरत्ती में पढ़ा था और दूसरा पढ़ने के लिए मुंबई के एक पुस्तकालय में 70 रुपए खर्च कर सदस्यता ली थी। फिल्म रसास्वादन पाठ्यक्रम के दौरान 5 सप्ताह यही सिखाया गया था कि निर्णेता होने का दंभ मत पालना, फिल्म निर्माण में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसी आधार पर लिखना भी सभी के लिए संभव नहीं है। जो लिखता है... लिख सकता है, वह बहुत परिश्रम और प्रयासों के बाद लिखता है।

Jul 27, 2012

श्रुतलेखन पर कुछ छींटे और कुछ बौछारें

श्रुतलेखन पर श्री रवि रतलामी जी की राय बदली है। राजभाषा विभाग द्वारा सीडैक से तैयार कराए गए कम से कम दो सॉफ्टवेयर्स ऐसे हैं जो उपयोगी और प्रशंसनीय हैं। पहला लीला हिंदी प्रबोध (पुराना पाठ्यक्रम) और दूसरा श्रुतलेखन। रवि जी ने कुछ दिन पूर्व कुछ छींटे मारे थे श्रुतलेखन पर मगर अब निर्मल बौछारों से उन्हें धो-पौंछ दिया है। जब रवि जैसे अनुभवी कंप्यूटर विशेषज्ञ को प्रथम प्रयास में परेशानी हो सकती है तो सामान्य प्रयोगकर्ता का क्या हाल होगा इसे आसानी से समझा जा सकता है। मुझे श्रुतलेखन ने जनवरी 2007 से अब तक बहुत बार थकाया है और बहुत बार अद्वितीय परिणाम दिए हैं। मैं रवि जी के आलेख का लिंक नीचे दे रहा हूँ जिसे श्री विजय प्रभाकर नागरकर जी ने भेजा है। रवि जी के छींटे और बौछारें श्रुतलेखन के प्रयोक्ताओं को बहुत मदद करेंगी, इसी आशा के साथ नीचे लिंक दिया जा रहा है, जरूर पढ़ें-
   http://raviratlami.blogspot.in/2012/07/blog-post_27.html
कृपया ध्यान दें- 
श्रुतलेखन इंस्टालेशन से पूर्व एंटी वायरस सोफ्टवेयर निष्क्रिय कर दें। चिंता न करें, इंस्टालेशन के बाद जब कम्प्युटर रिस्टार्ट होगा तो एंटी वायरस स्वत: पुन: सक्रिय हो जाएगा। यदि वायरस आक्रमण का डर है तो इंस्टालेशन के समय इंटरनेट भी बंद रख सकते हैं।

Jul 26, 2012

हिन्दी सबके लिए का 3 वर्ष का सफर

जितना चाहते थे उसका दस प्रतिशत भी इन तीन वर्षों में नहीं दिया जा सका। बहुत सारा काम पुन: संपादन के लिए शेष है। कुछ ऐसे बहाने हैं जिनका सहारा लेकर कम लिखने या कम पोस्ट करने का तर्क दिया जा सकता है। ... लेकिन जिंदगी में यदि झंझट नहीं होंगे तो फिर इसे जिंदगी ही कौन कहेगा! हमें गर्दन और पीठ की परवाह न करते हुए, पीठ पर पड़ने वाले कोडों की संख्या में हुई वृद्धि के अनुपात में और अधिक घंटे काम करना चाहिए था जो नहीं किया जा सका।

ज्यादा समय कोडों की चिंता और पीठ के दर्द को सहलाने में नष्ट हुआ जिसकी भरपाई मुश्किल है। 

मगर असफलताओं के बीच जीने भर के लिए आक्सीजन की कमी तो नहीं है। एक रूखे से ब्लॉग को पिछले 3 वर्षों के दौरान औसतन 70 पाठकों ने प्रतिदिन देखा... हमारे लिए इतना भी चलते जाने के लिए कम तो नहीं है। इस स्नेह के लिए विनम्र आभार।   

आपका मनचाहा कुंजीपटल ... संपादित

आपका मनचाहा कुंजीपटल ... आलेख कुछ नई जानकारियों को जोड़ते हुए पुन: संपादित कर दिया गया है। माइक्रोसॉफ्ट इंडिक लैड्ग्वेज इनपुट टूल अब भाषा इंडिया डॉट कॉम के मुख पृष्ठ पर स्थानांतरित हो गया है जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है-
http://www.bhashaindia.com/_layouts/ilit/Hindi.aspx


हिन्दी आसान ट्यूटर की जानकारी तथा डाउनलोड लिंक तो पहले ही दिया जा चुका है। अब भाषा इंडिया डॉट कॉम पर भी 12 भारतीय भाषाओं केलिए Indic Inscript Tutor सॉफ्टवेयर दिए गए हैं। हिन्दी का लिंक नीचे दिया जा रहा है-


    
(सौजन्य भाषा इंडिया डॉट कॉम)

Jul 25, 2012

दो अखबारों की एक ख़बर

 'हिन्दी सबके लिए' का कल से चौथा वर्ष शुरू हो रहा है। इस पूर्व संध्या पर चेन्नई के दो स्थानीय समाचार पत्रों में छपी एक ख़बर के लिंक नीचे दिए जा रहे हैं। ये लिंक्स मैंने 18 जगह भेजे और प्रत्योत्तर में माननीय अग्रवाल साहब एक संदेश मिला। एक परम मित्र ने फोन पर लंबी बात की। उनसे लगभग रोज ही बात होती है और अगले दिन तक विदा लेने से पूर्व डबल्यूडबल्यूएफ़ और हिन्दी में समानता पर चर्चा होती है। ये लिंक यहाँ इसलिए दिए जा रहे हैं क्योंकि कुछ लोग अभी भी नहीं मानते कि हिन्दी सबके लिए है। मित्रो, अपनी माँ और मौसी को अपना मानें या न मानें, सच्चाई तो बदली नहीं जा सकती...   
http://www.deccanchronicle.com/channels/cities/chennai/why-should-lic-staff-sign-hindi-asks-mk-392

http://www.thehindu.com/news/states/tamil-nadu/article3663329.ece

Jul 20, 2012

धक्-धक्, धक्-धक् ओ मेरे दिल! - अज्ञेय


(अज्ञेय जी की यह कविता मुझे अत्यधिक पसंद है। कल नेट पर यह कविता मुझे मिल गई। जहाँ से मिली वहाँ भी श्रद्धेय अज्ञेय जी के एक परम भक्त के प्रयासों से ही डाली गई होगी। मुझे अब तक अपने जीवन में अज्ञेय जी के प्रति मुझसे अधिक श्रद्धावान दो ही महानुभाव मिले - एक मुंबई में और एक कोचिन में। इसका यह मतलब नहीं कि अज्ञेय जी के प्रति श्रद्धा रखने वालों की कमी है, बस उनके प्रति समर्पित लोग मौन ज्यादा रहते हैं और अपने मन के किसी भी कोने में कोई झरोखा तक नहीं छोड़ते किसी के झाँकने के लिए।  अज्ञेय जी की इस कविता से मैं स्वर्गीय राजेश खन्ना यानी काका को श्रद्धांजलि दे रहा हूँ.........  -अजय मलिक) 

(1)

धक्-धक्, धक्-धक् ओ मेरे दिल!
तुझ में सामर्थ्य रहे जब तक तू ऐसे सदा तड़पता चल!

जब ईसा को दे कर सूली जनता न समाती थी फूली,
हँसती थी अपने भाई की तिकटी पर देख देह झूली,
ताने दे-दे कर कहते थे सैनिक उस को बेबस पा कर :
''
ले अब पुकार उस ईश्वर को-बेटे को मुक्त करे आ कर!''

जब तख्ते पर कर-बद्ध टँगे, नरवर के कपड़े खून-रँगे,
पाँसे के दाँव लगा कर वे सब आपस में थे बाँट रहे,
तब जिस ने करुणा से भर कर उस जगत्पिता से आग्रह कर
माँगा था, ''मुझे यही वर दे : इन के अपराध क्षमा कर दे!''

वह अन्त समय विश्वास-भरी जग से घिर कर संन्यास-भरी
अपनी पीड़ा की तड़पन में भी पर-पीड़ा से त्रास-भरी
ईसा की सब सहने वाली चिर-जागरुक रहने वाली
यातना तुझे आदर्श बने कटु सुन मीठा कहने वाली!

तुझ में सामर्थ्य रहे जब तक तू ऐसे सदा तड़पता चल-
धक्-धक्, धक्-धक् ओ मेरे दिल!

(2)

धक्-धक् धक्-धक् ओ मेरे दिल!
तुझ में सामर्थ्य रहे जब तक तू ऐसे सदा तड़पता चल!

बोधी तरु की छाया नीचे जिज्ञासु बने-आँखें मीचे-
थे नेत्र खुल गये गौतम के जब प्रज्ञा के तारे चमके;
सिद्धार्थ हुआ, जब बुद्ध बना, जगती ने यह सन्देश सुना-
''
तू संघबद्ध हो जा मानव! अब शरण धर्म की आ, मानव!''

जिस आत्मदान से तड़प रही गोपा ने थी वह बात कही-
जिस साहस से निज द्वार खड़े उस ने प्रियतम की भीख सही-
''तू अन्धकार में मेरा था, आलोक देख कर चला गया;
वह साधन तेरे गौरव का गौरव द्वारा ही छला गया-

पर मैं अबला हूँ  इसीलिए, कहती हूँ, प्रणत प्रणाम किये,
मैं तो उस मोह-निशा में भी ओ मेरे राजा! तेरी थी;
अब तुझ से पा कर ज्ञान नया यह एकनिष्ठ मन जान गया
मैं महाश्रमण की चेरी हूँ-ओ मेरे भिक्षुक! तेरी हूँ!''

वह मर्माहत, वह चिर-कातर, पर आत्मदान को चिर-तत्पर,
युग-युग से सदा पुकार रहा औदार्य-भरा नारी का उर!
तुझ में सामर्थ्य रहे जब तक तू ऐसे सदा तड़पता चल-
धक्-धक्, धक्-धक् ओ मेरे दिल!

(3)

धक्-धक्, धक्-धक् ओ मेरे दिल!
तुझ में सामर्थ्य रहे जब तक तू ऐसे सदा तड़पता चल!

बीते युग में जब किसी दिवस प्रेयसि के आग्रह से बेबस,
उस आदिम आदम ने पागल, चख लिया ज्ञान का वर्जित फल,
अपमानित विधि हुंकार उठी, हो वज्रहस्त फुफकार उठी,
अनिवार्य शाप के अंकुश से धरती में एक पुकार उठी :

''
तू मुक्त न होगा जीने से, भव का कड़वा रस पीने से-
तू अपना नरक बनावेगा अपने ही खून-पसीने से!''
तब तुझ में जो दु:सह स्पन्दन कर उठा एक व्याकुल क्रन्दन :
''
हम नन्दन से निर्वासित हैं, ईश्वर-आश्रय से वंचित हैं;

पर मैं तो हूँ पर तुम तो हो-हम साथी हैं, फिर हो सो हो!
गौरव विधि का होगा क्योंकर मेरी-तेरी पूजा खो कर?''
उस स्पन्दन ही से मान-भरे, ओ उर मेरे अरमान-भरे,
ओ मानस मेरे मतवाले-ओ पौरुष के अभिमान-भरे!

तुझ में सामर्थ्य रहे जब तक तू ऐसे सदा तड़पता चल,
धक्-धक्, धक्-धक् ओ मेरे दिल!

- सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन 'अज्ञेय' 

Jul 12, 2012

राष्ट्रभाषा : मनन, मंथन, मंतव्य

यहाँ विकिबुक्स के एक लेख, जिसे अनेक लेखों का संकलन कहा जा सकता है, लिंक दिया जा रहा है-


http://hi.wikibooks.org/wiki/AF


समय हो तो जरूर पढ़ें, समय न हो तो अवश्य पढ़ें

(सौजन्य विकिबुक्स)

लीला गहन प्राज्ञ पाठ्यक्रम ऑनलाइन परीक्षा की लिखित भाग की परीक्षा के लिए नमूना प्रश्न पत्र